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लेफ्टिनेंट जनरल वीएमबी कृष्णन ने पूर्वी कमान के जीओसी-इन-सी का संभाला पदभार

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लेफ्टिनेंट जनरल वीएमबी कृष्णन ने पूर्वी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पदभार संभाल लिया है। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल आरसी तिवारी का स्थान लिया, जो 31 मार्च 2026 को सेवानिवृत्त हुए।

11 जून 1988 को भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त करने वाले लेफ्टिनेंट जनरल कृष्णन लगभग चार दशकों के समृद्ध और विविध सैन्य अनुभव के साथ इस महत्वपूर्ण कमान की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके करियर में देश के सबसे चुनौतीपूर्ण परिचालन क्षेत्रों में विभिन्न कमान, स्टाफ और प्रशिक्षण संबंधी नियुक्तियां शामिल रही हैं।

वे प्रमुख सैन्य संस्थानों के पूर्व छात्र हैं और उन्होंने सियाचिन जैसे अत्यंत दुर्गम उच्च हिमालयी क्षेत्र में एक इन्फैंट्री बटालियन और इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली है। इसके अलावा, उन्होंने एक इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में भी कार्य किया और बाद में प्रतिष्ठित ब्रह्मास्त्र कोर की कमान संभाली।

रणनीतिक और संस्थागत स्तर पर उन्होंने रक्षा मंत्रालय (सेना) के एकीकृत मुख्यालय में महानिदेशक सूचना प्रौद्योगिकी के रूप में कार्य किया तथा लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में रक्षा सलाहकार के रूप में भी सेवाएं दीं। वर्तमान पदभार संभालने से पहले वे सेना मुख्यालय में क्वार्टर मास्टर जनरल के रूप में कार्यरत थे, जहां उन्होंने आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन और बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण सुधार करते हुए परिचालन क्षमता और युद्धक तैयारियों को सुदृढ़ किया।

लेफ्टिनेंट जनरल कृष्णन ‘डोगरा रेजिमेंट’ और ‘डोगरा स्काउट्स’ के कर्नल के प्रतिष्ठित पद भी संभाल रहे हैं। काउंटर इंसर्जेंसी एंड जंगल वारफेयर स्कूल के कमांडेंट के रूप में उनके कार्यकाल ने विशेष प्रशिक्षण और सैन्य सिद्धांतों के विकास में उच्च मानक स्थापित किए।

पदभार ग्रहण करते हुए उन्होंने शहीद वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की और पूर्वी कमान के सभी रैंकों से उच्चतम स्तर की परिचालन तत्परता बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने संयुक्तता को मजबूत करने, तकनीकी एकीकरण को गति देने और सभी हितधारकों के साथ समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया, ताकि पूर्वी क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।

एयर मार्शल नागेश कपूर ने भारतीय वायु सेना के उप प्रमुख का पदभार संभाला

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एयर मार्शल नागेश कपूर SYSM PVSM AVSM VM ने 01 जनवरी 2026 को भारतीय वायु सेना के उप प्रमुख (Vice Chief of the Air Staff) के रूप में कार्यभार ग्रहण किया।

एयर मार्शल नागेश कपूर ने दिसंबर 1985 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) से स्नातक किया और 06 दिसंबर 1986 को भारतीय वायु सेना की फ्लाइंग ब्रांच के फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त किया। वे एक अनुभवी फाइटर पायलट, योग्य फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर तथा फाइटर कॉम्बैट लीडर हैं। अपने विशिष्ट उड़ान करियर के दौरान उन्होंने मिग-21 के सभी संस्करणों और मिग-29 विमान को उड़ाया है तथा विभिन्न लड़ाकू और प्रशिक्षण विमानों पर 3400 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव प्राप्त किया है।

वे डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं। अपने 39 वर्षों से अधिक के गौरवशाली सेवा काल में उन्होंने कमांड, ऑपरेशनल, प्रशिक्षण एवं स्टाफ से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। उनकी ऑपरेशनल नियुक्तियों में मध्य क्षेत्र में एक फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर, पश्चिमी क्षेत्र में एक फ्लाइंग बेस के स्टेशन कमांडर तथा एक प्रमुख एयर बेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग के रूप में कार्य करना शामिल है।

उनकी प्रशिक्षण संबंधी नियुक्तियों में एयर फोर्स अकादमी में चीफ इंस्ट्रक्टर (फ्लाइंग) तथा प्रतिष्ठित डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन में डायरेक्टिंग स्टाफ के रूप में सेवाएं देना शामिल है। एयर फोर्स अकादमी में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने भारतीय वायु सेना में PC-7 Mk II विमान के शामिल किए जाने और उसके संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

एयर मार्शल नागेश कपूर ने पाकिस्तान में रक्षा अताशे के रूप में एक कूटनीतिक दायित्व भी निभाया है। उनकी प्रमुख स्टाफ नियुक्तियों में एयर मुख्यालय में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ ऑपरेशंस (स्ट्रेटजी), दक्षिण पश्चिमी वायु कमान में एयर डिफेंस कमांडर, मुख्यालय मध्य वायु कमान में सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर तथा एयर मुख्यालय में एयर ऑफिसर-इन-चार्ज पर्सनल शामिल हैं।

उप प्रमुख का कार्यभार संभालने से पूर्व, एयर मार्शल नागेश कपूर ने एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, ट्रेनिंग कमांड तथा इसके बाद एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, साउथ वेस्टर्न एयर कमांड के रूप में कार्य किया।

देश के प्रति उनकी उत्कृष्ट और विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें 2008 में वायु सेना पदक, 2022 में अति विशिष्ट सेवा पदक, तथा 2025 में परम विशिष्ट सेवा पदक और सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक से सम्मानित किया गया है।

एयर मार्शल नागेश कपूर ने यह पद एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी SYSM PVSM AVSM VM से ग्रहण किया, जिन्होंने राष्ट्र की सेवा में 40 वर्षों की गौरवशाली और विशिष्ट सेवा के बाद सेवानिवृत्ति प्राप्त की।

एयर मार्शल सीथेपल्ली श्रीनिवास ने ट्रेनिंग कमांड के AOC-in-C का कार्यभार संभाला

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एयर मार्शल सीथेपल्ली श्रीनिवास ने 01 जनवरी 2026 को एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (AOC-in-C), ट्रेनिंग कमांड, भारतीय वायु सेना के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। अपने नए पद का कार्यभार संभालने के बाद, एयर मार्शल ने ट्रेनिंग कमांड वॉर मेमोरियल पर पुष्पचक्र अर्पित कर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

एयर मार्शल श्रीनिवास राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के पूर्व छात्र हैं और उन्हें 13 जून 1987 को भारतीय वायु सेना के फाइटर स्ट्रीम में कमीशन प्राप्त हुआ। वे ‘कैटेगरी ए’ योग्य फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर हैं और उनके पास 4200 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव है। उन्होंने मिग-21, इस्क्रा, किरण, पीसी-7 एमके-II, एचपीटी-32 और माइक्रोलाइट सहित विभिन्न विमानों पर उड़ान भरी है। वे चेतक/चीता हेलीकॉप्टर पर सेकंड पायलट के रूप में भी योग्य हैं तथा पेचोरा मिसाइल सिस्टम पर श्रेणीकृत ऑपरेशंस ऑफिसर हैं।

अपने करियर में उन्होंने अनेक महत्वपूर्ण कमांड नियुक्तियाँ संभाली हैं। वे एयर फोर्स अकादमी के कमांडेंट, पश्चिमी सीमा पर एक अग्रिम पंक्ति के फाइटर बेस तथा एक प्रमुख फ्लाइंग ट्रेनिंग बेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग (AOC) रह चुके हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने एडवांस्ड हेडक्वार्टर वेस्टर्न एयर कमांड (जयपुर) में AOC, फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर्स स्कूल के कमांडिंग ऑफिसर, इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस सेफ्टी के कमांडेंट तथा बेसिक फ्लाइंग ट्रेनिंग स्कूल के CO के रूप में भी कार्य किया है।

उनकी स्टाफ नियुक्तियों में असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (पर्सनल ऑफिसर्स), एयर फोर्स अकादमी में चीफ इंस्ट्रक्टर (फ्लाइंग), मुख्यालय सेंट्रल एयर कमांड में ऑपरेशंस स्टाफ, तथा कॉलेज ऑफ एयर वारफेयर में डायरेक्टिंग स्टाफ शामिल हैं। वर्तमान नियुक्ति से पूर्व वे मुख्यालय साउथ वेस्टर्न एयर कमांड (HQ SWAC) में सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर के रूप में कार्यरत थे।

एयर मार्शल श्रीनिवास नेशनल डिफेंस कॉलेज, कॉलेज ऑफ डिफेंस मैनेजमेंट और डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज के स्नातक हैं। उनकी शैक्षणिक योग्यताओं में डिफेंस एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ में एम.फिल., मास्टर ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज़ तथा डिफेंस एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज़ में एम.एससी. शामिल हैं।

उनकी उत्कृष्ट और विशिष्ट सेवाओं के लिए उन्हें 2017 में विशिष्ट सेवा पदक (VSM) तथा 2024 में अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) से, माननीय राष्ट्रपति द्वारा, सम्मानित किया गया।


भारतीय रक्षा लेखा सेवा (2024 बैच) के परिवीक्षाधीन अधिकारियों ने राष्ट्रपति से भेंट की

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भारतीय रक्षा लेखा सेवा (आईडीएएस) के 2024 बैच के परिवीक्षाधीन अधिकारियों ने आज (24 दिसंबर 2025) राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार भेंट की।

अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय रक्षा लेखा सेवा के अधिकारी भारतीय सशस्त्र बलों और संबद्ध संगठनों के वित्तीय संसाधनों के प्रबंधन में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बजट निर्माण और लेखांकन से लेकर लेखा परीक्षा, भुगतान, वित्तीय परामर्श और रक्षा व्यय में पारदर्शिता सुनिश्चित करने तक, उनकी भूमिका सीधे तौर पर परिचालन तैयारियों और रक्षा अवसंरचना के विकास को प्रभावित करती है। उन्होंने अधिकारियों को सलाह दी कि रक्षा सेवाओं के प्रमुख लेखा एवं वित्तीय प्राधिकरण के रूप में उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे सशस्त्र बलों के समक्ष आने वाली विशिष्ट चुनौतियों, कठिनाइयों और परिचालन वास्तविकताओं को भली-भांति समझें।

राष्ट्रपति ने कहा कि हम तीव्र परिवर्तन के दौर में रह रहे हैं। बदलता भू-राजनीतिक परिदृश्य और उभरती सुरक्षा चुनौतियां त्वरित, स्मार्ट और अधिक सटीक निर्णयों की मांग करती हैं। साथ ही, व्यावसायिक प्रक्रियाएं भी अधिक जटिल और प्रौद्योगिकी आधारित होती जा रही हैं। इस संदर्भ में रक्षा लेखा विभाग को निरंतर स्वयं को अनुकूलित, नवोन्मेषी और आधुनिक बनाते रहना चाहिए। उन्होंने सरकार के महत्वाकांक्षी ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ को सक्रिय रूप से समर्थन देने की आवश्यकता पर भी बल दिया, जिसमें स्वदेशी उत्पादन को प्रोत्साहन देना, स्थानीय आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करना और घरेलू उद्योग को बढ़ावा देना शामिल है। राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय रक्षा लेखा सेवा के अधिकारी आत्मनिर्भर और सुदृढ़ रक्षा इकोसिस्टम के निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

राष्ट्रपति ने आईडीएएस अधिकारियों से आजीवन सीखते रहने, जिज्ञासु बने रहने और आत्मविश्वास के साथ परिवर्तन को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने उन्हें यह भी याद दिलाया कि सेवा का वास्तविक मापदंड पद या पहचान में नहीं, बल्कि संस्थानों के प्रभावी संचालन और नागरिकों के कल्याण के लिए उनके निरंतर और समर्पित योगदान में निहित है।

वायु सेना अकादमी डुंडीगल में संयुक्त स्नातक परेड सम्पन्न, 244 फ्लाइट कैडेट्स हुए कमीशन

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संयुक्त स्नातक परेड (सीजीपी) का आयोजन 13 दिसंबर 2025 को वायु सेना अकादमी (एएफए), डुंडीगल, हैदराबाद में भव्य रूप से किया गया। यह परेड भारतीय वायु सेना (आईएएफ) की फ्लाइंग एवं ग्राउंड ड्यूटी शाखाओं के 216वें कोर्स के फ्लाइट कैडेट्स के पूर्व-कमीशन प्रशिक्षण की सफल परिणति का प्रतीक बनी। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने परेड के रिव्यूइंग ऑफिसर (आरओ) के रूप में परेड की सलामी ली और उत्तीर्ण फ्लाइट कैडेट्स को राष्ट्रपति कमीशन प्रदान किया। इस अवसर पर कुल 244 फ्लाइट कैडेट्स, जिनमें 215 पुरुष और 29 महिला कैडेट्स शामिल थीं, स्नातक हुए।

सीडीएस का स्वागत एयर मार्शल तेजिंदर सिंह, एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, ट्रेनिंग कमांड तथा एयर मार्शल पी. के. वोहरा, कमांडेंट, एएफए द्वारा किया गया। परेड द्वारा उन्हें जनरल सलामी दी गई, जिसके पश्चात एक प्रभावशाली मार्च-पास्ट हुआ।

इस अवसर पर भारतीय नौसेना के छह अधिकारी, भारतीय तटरक्षक बल के आठ अधिकारी तथा वियतनाम समाजवादी गणराज्य के दो प्रशिक्षुओं को उड़ान प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर ‘विंग्स’ प्रदान किए गए। नेविगेशन प्रशिक्षण पूर्ण करने पर पाँच अधिकारियों को ‘ब्रेवेट्स’ दिए गए। इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए नव-नियुक्त अधिकारियों के गर्वित परिजन भी उपस्थित रहे।

परेड का मुख्य आकर्षण ‘कमीशनिंग सेरेमनी’ रहा, जिसमें उत्तीर्ण कैडेट्स को रिव्यूइंग ऑफिसर द्वारा फ्लाइंग ऑफिसर के रूप में कमीशन प्रदान किया गया। इस दौरान अधिकारियों को शपथ दिलाई गई, जिसमें उन्होंने देश की संप्रभुता और सम्मान की रक्षा का संकल्प लिया। परेड के दौरान पिलाटस पीसी-7, हॉक, किरण और चेतक विमानों द्वारा एक समन्वित और सुसंगठित फ्लाई-पास्ट किया गया। आकाश गंगा टीम तथा एयर वॉरियर ड्रिल टीम (एडब्ल्यूडीटी) के रोमांचक प्रदर्शन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

विभिन्न प्रशिक्षण विधाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए रिव्यूइंग ऑफिसर द्वारा पुरस्कार प्रदान किए गए। फ्लाइंग ऑफिसर तनिष्क अग्रवाल (फ्लाइंग ब्रांच) को पायलट कोर्स में समग्र मेरिट में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर प्रतिष्ठित ‘प्रेसिडेंट्स प्लाक’ और ‘नवानगर स्वॉर्ड ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया गया। फ्लाइंग ऑफिसर सक्षम डोबरियाल को नेविगेशन स्ट्रीम में प्रथम स्थान के लिए ‘प्रेसिडेंट्स प्लाक’ प्रदान किया गया, जबकि फ्लाइंग ऑफिसर नितेश कुमार को ग्राउंड ड्यूटी शाखाओं में समग्र मेरिट में प्रथम स्थान के लिए ‘प्रेसिडेंट्स प्लाक’ से सम्मानित किया गया।

परेड को संबोधित करते हुए रिव्यूइंग ऑफिसर ने नव-नियुक्त अधिकारियों की सुसज्जित वेशभूषा, सटीक ड्रिल मूवमेंट्स और परेड के उच्चतम मानकों के पालन की सराहना की। उन्होंने अधिकारियों को सेना के पेशे को अपनाने और मातृभूमि की सेवा करने पर बधाई दी। साथ ही, उन्होंने अधिकारियों को अहंकार और अज्ञान से दूर रहने तथा सिद्धांतों के प्रति अडिग बने रहने की सलाह दी।

सीडीएस ने युद्ध में विजय के लिए असममित क्षमताओं (Asymmetry) के सृजन और संरक्षण पर बल दिया, जिसे उभरते डोमेन्स में विकसित करना अपेक्षाकृत आसान है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी आज निर्णायक कारक बन चुकी है, इसलिए एआई-आधारित डेटा फ्यूजन, मैन–अनमैन्ड टीमिंग, स्वायत्त एवं मानवरहित प्रणालियाँ तथा कॉग्निटिव डोमेन ऑपरेशंस को अपनाना अनिवार्य है।

उन्होंने आगे कहा कि ऑपरेशन ‘सिंदूर’ भारतीय वायु सेना की अतुलनीय पेशेवर दक्षता का प्रमाण है और यह एक सतत प्रक्रिया है, जिसे ‘JAI’—जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और नवाचार द्वारा मार्गदर्शित किया जाना चाहिए। यही तत्व भारत की भविष्य की युद्धक क्षमता को आकार देंगे। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने अधिकारियों से निडर होकर सेवा करने और निर्भीक नेतृत्व करने का आह्वान किया।

परेड का समापन उस भावुक क्षण के साथ हुआ जब नव-नियुक्त अधिकारी दो कॉलमों में स्लो मार्च करते हुए आगे बढ़े। इसी दौरान वायु सेना प्रमुख (सीएएस) एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने स्वयं उड़ान भरते हुए तीन विमानों की किरण फॉर्मेशन का नेतृत्व किया, जबकि उनके कनिष्ठों द्वारा उन्हें प्रथम सलामी दी गई।

सीजीपी के ग्रैंड फिनाले में सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम और सूर्यकिरण एरोबेटिक टीम (एसकेएटी) के समन्वित हवाई करतबों ने समारोह को अत्यंत भव्य और यादगार बना दिया।


आईएमए देहरादून में 157वीं पासिंग आउट परेड सम्पन्न, 525 युवा अधिकारी भारतीय सेना में हुए कमीशन

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देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में आज ऐतिहासिक ड्रिल स्क्वायर पर 157वीं पासिंग आउट परेड का भव्य आयोजन गर्व, परंपरा और सैन्य वैभव के साथ सम्पन्न हुआ। यह गौरवपूर्ण अवसर भारतीय सेना में अधिकारी कैडेट्स के कमीशनिंग का साक्षी बना और अकादमी के शाश्वत आदर्श वाक्य “वीरता और विवेक” को साकार करता हुआ कठोर प्रशिक्षण, अनुशासन और अदम्य जज़्बे की सशक्त मिसाल बना।

थल सेनाध्यक्ष (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने परेड की सलामी ली और प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर नव-नियुक्त अधिकारियों को बधाई दी। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि सैन्य पेशा केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि एक पवित्र आह्वान है, जिसमें निस्वार्थ सेवा, अटूट समर्पण और आवश्यकता पड़ने पर राष्ट्र के लिए सर्वोच्च बलिदान की अपेक्षा होती है। उन्होंने भारतीय सैन्य अकादमी की गौरवशाली परंपरा की सराहना की, जिसने समय-समय पर दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता और निर्भीक अधिकारी राष्ट्र को प्रदान किए हैं, जिन्होंने साहस और सम्मान की सर्वोच्च परंपराओं को बनाए रखा है।

थल सेनाध्यक्ष ने आधुनिक सुरक्षा परिदृश्य की गतिशील और बहुआयामी प्रकृति पर प्रकाश डाला, जो अब सैन्य, तकनीकी और सामाजिक क्षेत्रों तक विस्तृत है। ऑपरेशन ‘सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि आज के युद्ध में कूटनीति और निर्णायक सैन्य कार्रवाई के बीच निर्बाध समन्वय अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना निरंतर आधुनिकीकरण और नवाचार के माध्यम से स्वयं को सुदृढ़ कर रही है और नव-नियुक्त अधिकारी इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। अनिश्चित परिस्थितियों में नेतृत्व पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियाँ स्पष्ट उत्तर नहीं देंगी और अधिकारियों की अनुकूलन क्षमता, विवेक और सत्यनिष्ठा की परीक्षा लेंगी।

जनरल द्विवेदी ने युवा अधिकारियों से उदाहरण बनकर नेतृत्व करने, नैतिक मूल्यों को बनाए रखने और अपने जवानों के लिए मार्गदर्शक व आदर्श बनने का आह्वान किया। उन्होंने 14 मित्र देशों के 34 विदेशी अधिकारी कैडेट्स को भी प्रशिक्षण पूर्ण करने पर बधाई दी और कहा कि अकादमी में बनी मित्रताएँ देशों के बीच रक्षा संबंधों को सुदृढ़ करने वाले स्थायी बंधन का प्रतीक हैं। प्रशिक्षकों और स्टाफ की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने उनके समर्पण और उत्कृष्टता की प्रशंसा की। साथ ही, गर्वित अभिभावकों को उनके त्याग और विश्वास के लिए धन्यवाद देते हुए राष्ट्र की ओर से आभार व्यक्त किया।

चाणक्य के शाश्वत ज्ञान का स्मरण कराते हुए थल सेनाध्यक्ष ने कहा कि भौतिक संपत्ति और जीवन क्षणभंगुर हैं, लेकिन धर्म—कर्तव्य और नैतिकता—शाश्वत है। उन्होंने प्रत्येक अधिकारी से राष्ट्र सेवा में सम्मान, निष्ठा और साहस बनाए रखने का आह्वान किया। अपने संबोधन के समापन में उन्होंने युवा अधिकारियों से सदैव उद्देश्यपूर्ण, सजग और समय से आगे रहने का आग्रह किया, ताकि वे भारत की संप्रभुता और भविष्य की सुरक्षा के सच्चे रक्षक बन सकें।

इस अवसर पर 157वें रेगुलर कोर्स, 46वें टेक्निकल एंट्री स्कीम कोर्स, 140वें टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स, 55वें स्पेशल कमीशंड ऑफिसर्स कोर्स और टेरिटोरियल आर्मी ऑनलाइन एंट्रेंस एग्ज़ाम 2023 कोर्स के कुल 525 अधिकारी कैडेट्स, साथ ही 14 मित्र देशों के 34 अधिकारी कैडेट्स को कमीशन प्रदान किया गया। यह कमीशनिंग न केवल भारत के रक्षा नेतृत्व को सशक्त करती है, बल्कि मित्र राष्ट्रों के साथ स्थायी सैन्य साझेदारियों की निरंतरता का भी प्रतीक है।

समारोह में गर्वित अभिभावक, परिवारजन, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। परेड का समापन पारंपरिक ‘अंतिम पग’ के साथ हुआ, जब नव-नियुक्त अधिकारी राष्ट्र की संप्रभुता, सम्मान और आदर्शों की रक्षा के संकल्प के साथ आगे बढ़े।

रिव्यूइंग ऑफिसर द्वारा प्रदान किए गए पुरस्कार:

  • स्वॉर्ड ऑफ ऑनर – अकादमी कैडेट एडजुटेंट निश्कल द्विवेदी

  • स्वर्ण पदक (ऑर्डर ऑफ मेरिट में प्रथम) – अकादमी कैडेट एडजुटेंट निश्कल द्विवेदी

  • रजत पदक (ऑर्डर ऑफ मेरिट में द्वितीय) – बटालियन अंडर ऑफिसर बादल यादव

  • कांस्य पदक (ऑर्डर ऑफ मेरिट में तृतीय) – सीनियर अंडर ऑफिसर कमलजीत सिंह

  • रजत पदक (ऑर्डर ऑफ मेरिट में प्रथम – टेक्निकल ग्रेजुएट कोर्स) – ऑफिसर कैडेट जाधव सुजीत संपत

  • रजत पदक (ऑर्डर ऑफ मेरिट में प्रथम – टेक्निकल एंट्री स्कीम-46) – विंग कैडेट कैप्टन अभिनव मेहरोत्रा

  • रजत पदक (स्पेशल कमीशंड ऑफिसर) – ऑफिसर कैडेट सुनील कुमार छेत्री

  • पदक (ऑर्डर ऑफ मेरिट में प्रथम – विदेशी कैडेट) – जूनियर अंडर ऑफिसर मोहम्मद सफ़ीन अशरफ़ (बांग्लादेश)

  • थल सेनाध्यक्ष बैनर – इंफाल कंपनी (ऑटम टर्म 2025 में 12 कंपनियों में सर्वश्रेष्ठ)

157वां कोर्स जब नेतृत्व और सेवा की अपनी यात्रा आरंभ करता है, तब भारतीय सैन्य अकादमी एक बार फिर यह प्रमाणित करती है कि वह साहस, पेशेवर दक्षता और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण से युक्त अधिकारियों को गढ़ने वाली एक अग्रणी संस्था है।

एयर मार्शल तेजबीर सिंह ने संभाला एयर मुख्यालय में महानिदेशक (निरीक्षण एवं सुरक्षा) का पद

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एयर मार्शल तेजबीर सिंह ने 01 दिसंबर 2025 को एयर मुख्यालय में महानिदेशक (Inspection & Safety) [DG (I&S)] का कार्यभार संभाला।

37 वर्षों के शानदार करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कमांड और स्टाफ नियुक्तियों पर कार्य किया है, जिनमें बांग्लादेश में भारत के एयर अटैची, नेशनल डिफेंस कॉलेज (नई दिल्ली) में सीनियर डायरेक्टिंग स्टाफ (एयर) और एयर मुख्यालय में सहायक वायु सेना संचालन प्रमुख (T&H) शामिल हैं। वे यूनाइटेड किंगडम के रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेन्स स्टडीज के पूर्व छात्र हैं।

एयर मार्शल तेजबीर सिंह के पास व्यापक संचालन अनुभव है और वे 7000 से अधिक उड़ान घंटे पूरे कर चुके हैं। उन्होंने भारतीय वायुसेना में C-130J ‘सुपर हरक्यूलिस’ विमान के इंडक्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और संयुक्त अभियानों के लिए पहली ‘स्पेशल ऑप्स’ स्क्वाड्रन स्थापित की। वे दो प्रमुख फ्लाइंग बेस, एक प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र और उत्तरी सेक्टर को समर्थन देने वाले एक फ्रंटलाइन एयरबेस का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर चुके हैं। अपने पिछले कार्यकाल में, HQ ट्रेनिंग कमांड में सीनियर एयर स्टाफ ऑफिसर के रूप में उन्होंने प्रशिक्षण को संचालनात्मक आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने के लिए रणनीतिक परिवर्तन का नेतृत्व किया।

उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें वायु सेना पदक (2010) और अति विशिष्ट सेवा पदक (2018) से सम्मानित किया गया है।

वे एयर मार्शल मकरंद भास्कर राणाडे के उत्तराधिकारी बने हैं, जो 30 नवंबर 2025 को 39 वर्षों की विशिष्ट सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए।

आईएनएस कदंबा, कारवार में भारतीय नौसेना का नया भर्ती केंद्र स्थापित

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भारतीय नौसेना ने कर्नाटक नौसेना क्षेत्र के फ़्लैग ऑफिसर कमांडिंग के अधीन आईएनएस कदंबा, कारवार में एक नया भर्ती केंद्र स्थापित किया है। इस नए भर्ती केंद्र की स्थापना के साथ, आईएनएस कदंबा भारतीय नौसेना के लिए देशभर में दसवां भर्ती केंद्र बन गया है।

01/2026 अग्निवीर बैच के लिए पहले चरण की भर्ती 10 से 15 नवंबर 2025 तक आयोजित की जा रही है। इस अवसर पर नौसेना मुख्यालय (नई दिल्ली) और पश्चिमी नौसेना कमान (मुंबई) के कार्मिक शाखा के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

भर्ती अभियान के सुचारू और सफल संचालन के लिए सूक्ष्म योजना, समग्र प्रशासनिक प्रबंध, जिसमें लॉजिस्टिक और चिकित्सा सहायता शामिल है, सुनिश्चित की गई है। स्थानीय प्रशासन के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित किया गया है ताकि यह कार्यक्रम निर्विघ्न और सफल रूप से संपन्न हो सके।

यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, क्योंकि इससे पश्चिमी तट पर नौसेना की भर्ती संरचना और सुदृढ़ हुई है। यह न केवल स्थानीय जनता के साथ नौसेना के संबंधों को मजबूत करता है, बल्कि कर्नाटक, दक्षिण महाराष्ट्र और गोवा के युवाओं को भारतीय नौसेना में शामिल होकर गर्व और सम्मान के साथ राष्ट्र की सेवा करने का एक उत्कृष्ट अवसर भी प्रदान करता है।

उप-एडमिरल बी. शिवकुमार, एवीएसएम, वीएसएम ने नौसेना सामग्री प्रमुख (Chief of Materiel) का कार्यभार संभाला

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नई दिल्ली-उप-एडमिरल बी. शिवकुमार, एवीएसएम, वीएसएम ने 1 नवम्बर 2025 को भारतीय नौसेना के 40वें नौसेना सामग्री प्रमुख (Chief of Materiel) के रूप में कार्यभार संभाला।

वे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) के 70वें कोर्स के पूर्व छात्र हैं और उन्होंने 1 जुलाई 1987 को भारतीय नौसेना में एक इलेक्ट्रिकल अधिकारी (Electrical Officer) के रूप में कमीशन प्राप्त किया था।

अधिनायक अधिकारी ने आईआईटी चेन्नई से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर डिग्री, उस्मानिया विश्वविद्यालय से उच्च रक्षा प्रबंधन में स्नातकोत्तर उपाधि, मद्रास विश्वविद्यालय से एम.फिल प्राप्त की है और वे राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज (NDC) के भी पूर्व छात्र हैं।

38 वर्षों से अधिक की अपनी विशिष्ट और गौरवशाली सेवा अवधि में, उन्होंने नौसेना मुख्यालय, एचक्यू एटीवीपी, नौसेना डॉकयार्ड्स और कमांड मुख्यालयों में कई प्रमुख पदों पर कार्य किया है। उन्होंने आईएनएस रंजीत, किर्पाण और अक्षय जैसे अग्रिम पंक्ति के युद्धपोतों पर सेवा दी है और भारतीय नौसेना के प्रमुख विद्युत प्रशिक्षण केंद्र, आईएनएस वालसुरा (INS Valsura) के कमांडिंग ऑफिसर रहे हैं।

एडमिरल को एक दुर्लभ गौरवपूर्ण उपलब्धि प्राप्त है — उन्होंने नौसेना मुख्यालय में हथियार उपकरण (Weapons Equipment) और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग दोनों प्रमुख निदेशालयों का नेतृत्व किया है तथा पूर्वी और पश्चिमी तटों के नौसेना डॉकयार्ड्स में भी सेवा दी है। उन्हें प्रौद्योगिकी, परियोजनाओं और तकनीकी प्रशासन के विविध क्षेत्रों में गहन अनुभव प्राप्त है।

एक ध्वज अधिकारी (Flag Officer) के रूप में उन्होंने प्रोजेक्ट सीबर्ड के अतिरिक्त महानिदेशक (तकनीकी), पश्चिमी नौसेना कमान मुख्यालय (HQWNC) में चीफ स्टाफ ऑफिसर (टेक्निकल) और नौसेना डॉकयार्ड, मुंबई के एडमिरल सुपरिंटेंडेंट के रूप में कार्य किया है।

नौसेना मुख्यालय में सहायक सामग्री प्रमुख (सूचना प्रौद्योगिकी और सिस्टम्स) के रूप में अपने कार्यकाल के पश्चात्, उन्हें उप-एडमिरल के पद पर पदोन्नत किया गया और उन्होंने क्रमशः प्रोग्राम निदेशक, एचक्यू एटीवीपी, कंट्रोलर ऑफ वॉरशिप प्रोडक्शन एंड एक्विज़िशन (CWPA) और महानिदेशक, नौसेना परियोजनाएँ (विशाखापत्तनम) के रूप में कार्य किया।

उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें विशिष्ट सेवा पदक (Vishisht Seva Medal) और अति विशिष्ट सेवा पदक (Ati Vishisht Seva Medal) से सम्मानित किया गया है।

उप-एडमिरल बी. शिवकुमार ने उप-एडमिरल किरण देशमुख, एवीएसएम, वीएसएम से पदभार ग्रहण किया, जिन्होंने 39 वर्षों की गौरवशाली सेवा पूर्ण करने के उपरांत यह दायित्व सौंपा।

उप-एडमिरल किरण देशमुख एक प्रख्यात नेता और भारतीय नौसेना के अत्यंत कुशल अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने अपनी व्यावसायिक उत्कृष्टता और नेतृत्व कौशल के माध्यम से भारतीय नौसेना को तकनीकी रूप से भविष्य के लिए सक्षम बनाने में अहम भूमिका निभाई।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नौसेना संसाधनों की उच्चतम तत्परता और दीर्घकालिक तैनाती उनके दूरदर्शी नेतृत्व, योजना और प्रबंधन क्षमता का प्रमाण है।


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