Media24Media.com: #DBT

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #DBT. Show all posts
Showing posts with label #DBT. Show all posts

मातृशक्ति के खातों में पहुँची महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त

No comments Document Thumbnail

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 67.20 लाख माताओं और बहनों के खातों में डीबीटी के माध्यम से अंतरित किए 630.55 करोड़ रुपये

महिला सशक्तिकरण की दिशा में सरकार का मजबूत संकल्प, योजना के तहत अब तक 19,444.33 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का वितरण

महतारी वंदन योजना मातृशक्ति के सम्मान, आत्मनिर्भरता और परिवारों की समृद्धि का अभियान - मुख्यमंत्री साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास कार्यालय से महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त जारी करते हुए प्रदेश की 67 लाख 20 हजार 125 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से 630 करोड़ 55 लाख 54 हजार 300 रुपये की राशि अंतरित की। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े, प्रमुख सचिव शहला निगार तथा संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव उपस्थित थीं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना राज्य सरकार की उन प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाकर उन्हें सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि जब माताएं और बहनें आर्थिक रूप से सशक्त होती हैं, तब परिवार मजबूत होता है, बच्चों का भविष्य सुरक्षित होता है और समाज विकास की नई दिशा में आगे बढ़ता है। इसलिए मातृशक्ति का सशक्तिकरण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह योजना केवल प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और सामाजिक भागीदारी को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन चुकी है। प्रदेश के लाखों परिवारों में यह राशि शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और आजीविका जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में उपयोग हो रही है, जिससे महिलाओं की आर्थिक भूमिका और अधिक सशक्त हुई है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अनेक महिलाएं महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि का सदुपयोग करते हुए अपने बच्चों की शिक्षा पर खर्च कर रही हैं। कई माताएं अपनी बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में नियमित निवेश कर रही हैं। वहीं बड़ी संख्या में महिलाओं ने सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पार्लर, डेयरी, किराना दुकान, सब्जी विक्रय, पशुपालन, अगरबत्ती निर्माण तथा अन्य छोटे स्वरोजगार शुरू कर अपनी आय बढ़ाई है। इससे वे न केवल परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति कर रही हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल भी प्रस्तुत कर रही हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन का अर्थ केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक समय पर और पारदर्शी तरीके से पहुंचे। महतारी वंदन योजना इसी सोच का परिणाम है, जिसमें हर महीने बिना एक हजार रुपए की राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचाई जा रही है। डीबीटी व्यवस्था ने पारदर्शिता बढ़ाई है और महिलाओं में शासन के प्रति विश्वास भी मजबूत किया है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, स्वरोजगार, कौशल विकास तथा वित्तीय समावेशन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में लगातार कार्य कर रही है। महतारी वंदन योजना इन सभी प्रयासों का महत्वपूर्ण आधार बनकर महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक सम्मान प्रदान कर रही है।

1 मार्च 2024 से पूरे प्रदेश में लागू है योजना : 30 किस्तों में 19,444.33 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान

महतारी वंदन योजना का शुभारंभ 1 मार्च 2024 को किया गया था। आज जारी की गई 30वीं किस्त के बाद योजना के अंतर्गत वितरित कुल राशि बढ़कर 19 हजार 444 करोड़ 33 लाख रुपये से अधिक हो गई है।महतारी वंदन योजना का प्रभाव अब प्रदेश के लाखों परिवारों में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। नियमित आर्थिक सहायता मिलने से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है, घरेलू निर्णयों में उनकी भागीदारी मजबूत हुई है तथा बच्चों की शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ा है। अनेक परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और महिलाओं ने स्वयं सहायता समूहों तथा छोटे-छोटे व्यवसायों के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करना प्रारंभ किया है। महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण ही समावेशी विकास की सबसे मजबूत आधारशिला है। महतारी वंदन योजना इसी सोच को साकार करते हुए मातृशक्ति के सम्मान, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती प्रदान कर रही है तथा विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

SYNCHN 2026: लैब से मरीज तक स्वास्थ्य नवाचार पहुंचाने पर जोर, THSTI ने आयोजित किया तीसरा इंडस्ट्री बिजनेस मीट

No comments Document Thumbnail

जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT), भारत सरकार के अंतर्गत बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च एंड इनोवेशन काउंसिल (BRIC) के संस्थान ट्रांसलेशनल हेल्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (THSTI) ने आज फरीदाबाद स्थित एनसीआर बायोटेक साइंस क्लस्टर में अपना तीसरा वार्षिक इंडस्ट्री बिजनेस मीट SYNCHN 2026 (Synergistic Collaboration in Healthcare Innovation) सफलतापूर्वक आयोजित किया।

इस सम्मेलन में वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, जैव प्रौद्योगिकी वैज्ञानिकों, स्टार्टअप्स, निवेशकों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रयोगशाला में विकसित शोध को व्यावसायिक स्तर पर मरीजों तक पहुंचाने और स्वास्थ्य क्षेत्र में उद्योग–शोध संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत बनाना था।

मुख्य अतिथि डॉ. किरण मजूमदार-शॉ, कार्यकारी अध्यक्ष, बायोकॉन, ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि 21वीं सदी जीवविज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की होगी। उन्होंने कहा कि भारत में उत्कृष्ट वैज्ञानिक संस्थान हैं, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती वैज्ञानिक खोजों को बाजार और मरीजों तक पहुंचाना है। THSTI और SYNCHN जैसे मंच इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

THSTI के कार्यकारी निदेशक प्रो. गणेशन कार्तिकेयन ने बताया कि 2024 में SYNCHN के पहले संस्करण में 13 लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर हुए थे, जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 19 रणनीतिक समझौतों तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि संस्थान का लक्ष्य केवल शोध करना नहीं, बल्कि उसे सफल उत्पाद और उपचार में बदलना है।

उन्होंने THSTI के अत्याधुनिक मेडिकल रिसर्च सेंटर (MRC) और APEX (Accelerated Productisation and Epidemic Preparedness) पहल की भी जानकारी दी। MRC में प्रारंभिक चरण के क्लिनिकल ट्रायल, CAR-T सेल रिसर्च यूनिट और भारत की पहली Controlled Human Infection Studies (CHIS) सुविधा उपलब्ध है।

कार्यक्रम में ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी ने बताया कि CDSCO जैविक दवाओं (Biologics) के लिए नई नियामक व्यवस्था तैयार कर रहा है, जिसमें उद्योग विशेषज्ञों की भी भागीदारी होगी। वहीं नीति आयोग के सदस्य प्रो. एम. श्रीनिवास ने शोध को सस्ती और प्रभावी स्वास्थ्य सेवाओं में बदलने के लिए उद्योग और अनुसंधान संस्थानों के बीच मजबूत सहयोग पर जोर दिया।

BIRAC के डॉ. मनीष दीवान ने Research Development and Innovation (RDI) Fund को स्टार्टअप्स और उद्योगों के लिए वित्तीय सहायता का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। वहीं IVCA के अमित पांडेय ने कहा कि भारत की बायोइकोनॉमी लगभग 18% वार्षिक वृद्धि के साथ तेजी से आगे बढ़ रही है।

सम्मेलन के दौरान कई महत्वपूर्ण पैनल चर्चाएं भी आयोजित की गईं, जिनमें वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग, प्रारंभिक क्लिनिकल ट्रायल को तेज करने, जैव-प्रौद्योगिकी स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने और शोध से व्यवसाय तक की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने पर विस्तार से चर्चा हुई।

कार्यक्रम के अंत में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने THSTI के वैज्ञानिकों के साथ खुली चर्चा की और संस्थान की अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाओं का दौरा भी किया।



डॉ. जितेंद्र सिंह ने विज्ञान मंत्रालयों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की, वैज्ञानिक संस्थानों के बीच समन्वय पर दिया जोर

No comments Document Thumbnail

मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत सरकार के विज्ञान मंत्रालयों एवं विभागों के सचिवों तथा वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। उन्होंने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को तेजी से पूरा करने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों के बीच निर्बाध समन्वय पर बल दिया।

10 से 19 सितंबर 2026 तक आयोजित होने वाले राष्ट्रव्यापी तटीय स्वच्छता अभियान 'स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर' की तैयारियों की समीक्षा करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अधिकतम राष्ट्रीय प्रभाव सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक संस्थानों को तकनीकी नवाचार, जनभागीदारी और अंतर-विभागीय सहयोग के साथ मिलकर कार्य करना होगा।

नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर- विज्ञान केंद्र में आयोजित इस बैठक में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सचिव प्रो. उमेश वी. वाघमारे, जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) के सचिव डॉ. राजेश एस. गोखले, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस) की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी सहित संबंधित वैज्ञानिक विभागों एवं संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

पिछली समन्वय बैठक में लिए गए निर्णयों पर की गई कार्रवाई की समीक्षा करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक विभागों को अलग-अलग संस्थानों के रूप में नहीं, बल्कि एकीकृत वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में कार्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंत्रालयों के बीच नियमित संवाद, ज्ञान का आदान-प्रदान, संयुक्त पहल और समन्वित कार्यान्वयन से नवाचार को गति मिलेगी, सुशासन मजबूत होगा तथा वैज्ञानिक उपलब्धियों का लाभ सीधे नागरिकों तक पहुंचेगा।

बैठक का प्रमुख विषय 10 से 19 सितंबर 2026 तक देशभर के समुद्री तटों पर आयोजित होने वाला 'स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर' अभियान रहा। मंत्री ने इस राष्ट्रव्यापी पहल की जनजागरूकता रणनीति एवं तैयारियों की समीक्षा की। इस अभियान का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को जनजागरूकता एवं सामुदायिक भागीदारी के साथ जोड़ना है। इस अभियान में वैज्ञानिक संस्थान, सरकारी एजेंसियां, स्वयंसेवी संगठन, शैक्षणिक संस्थान तथा स्थानीय समुदाय व्यापक स्तर पर भागीदारी करेंगे।

बैठक में विभिन्न विज्ञान मंत्रालयों की संचार रणनीति की भी समीक्षा की गई, ताकि पिछले 12 वर्षों, विशेषकर वर्तमान सरकार के पिछले दो वर्षों की वैज्ञानिक उपलब्धियों को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाया जा सके। विभागों ने वीडियो, वृत्तचित्र, विषयगत अभियान, इन्फोग्राफिक्स, सफलता की कहानियों तथा जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से डिजिटल पहुंच को मजबूत करने की योजनाएं प्रस्तुत कीं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ), राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, राष्ट्रीय अंतर्विषयक साइबर-भौतिक प्रणाली मिशन, अनुसंधान विकास एवं नवाचार योजना सहित विभिन्न प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार की रणनीति प्रस्तुत की। जनभागीदारी बनाए रखने और वैज्ञानिक उपलब्धियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए चरणबद्ध प्रसार योजना तैयार की गई है।

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) ने जानकारी दी कि सीएसआईआर अपने स्थापना दिवस के अवसर पर पिछले 12 वर्षों की प्रमुख उपलब्धियों पर आधारित एक व्यापक प्रकाशन जारी करने की तैयारी कर रहा है। डिजिटल माध्यमों पर सफलता की कहानियों का नियमित प्रसार तथा "इनोवेशन इन एक्शन" व्याख्यान श्रृंखला के माध्यम से वैज्ञानिक संस्थानों के बीच संवाद को और सुदृढ़ किया जाएगा।

जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) ने बताया कि उसने सार्वजनिक स्वास्थ्य, जैव-अर्थव्यवस्था, जीनोमिक्स, कृषि जैव प्रौद्योगिकी, अनुसंधान अवसंरचना, जैव प्रौद्योगिकी स्टार्टअप तथा सतत विकास में अपने योगदान को प्रदर्शित करने वाली विषयगत प्रकाशनों की श्रृंखला शुरू की है। विभाग #DBTQuest जनसहभागिता अभियान के माध्यम से ज्ञान-आधारित गतिविधियों द्वारा वैज्ञानिक जागरूकता बढ़ा रहा है तथा समन्वित सोशल मीडिया पहलों के जरिए जनसंपर्क का विस्तार कर रहा है।

बैठक में विज्ञान विभागों के बीच अंतर-मंत्रालयी सहयोग को मजबूत करने के प्रयासों की भी समीक्षा की गई। सीएसआईआर, इसरो, डीएसटी, डीबीटी, बार्क तथा अन्य वैज्ञानिक संस्थानों के संयुक्त कार्यक्रमों, प्रौद्योगिकी विकास साझेदारियों, जैव-चिकित्सा अनुसंधान, नवाचार मंचों तथा उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए समन्वित कार्यक्रमों की प्रगति पर चर्चा हुई। विभागों ने वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं एवं शैक्षणिक संस्थानों के बीच नियमित संवाद तंत्र को मजबूत करने के प्रयासों की जानकारी भी दी।

बैठक में अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एएनआरएफ) के अंतर्गत हुई प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसमें SARAL_AI मंच के व्यापक उपयोग, विभिन्न संस्थानों के शोधकर्ताओं की अधिक भागीदारी तथा अनुसंधान परियोजनाओं से संबंधित जानकारी को डिजिटल माध्यमों से आम जनता तक पहुंचाने के उपायों पर चर्चा हुई।

इसके अतिरिक्त ESTIC-2026, इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (IISF)-2026, राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस-2026 तथा अन्य प्रमुख राष्ट्रीय वैज्ञानिक आयोजनों की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। विभागों ने इन कार्यक्रमों में शोधकर्ताओं, उद्योगों, स्टार्टअप, विद्यार्थियों तथा आम नागरिकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए संस्थागत तैयारियों एवं जनसंपर्क योजनाओं की जानकारी दी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का वैज्ञानिक पारिस्थितिकी तंत्र अब ऐसे नए चरण में प्रवेश कर चुका है, जहां अनुसंधान उत्कृष्टता, तकनीकी नवाचार, संस्थागत समन्वय और जनसहभागिता को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक विभागों के बीच बढ़ता सहयोग विज्ञान को अधिक सुलभ, अधिक प्रभावी तथा देश की विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

बैठक के दौरान मंत्री ने प्रशासनिक कार्य निष्पादन, संस्थागत समन्वय तथा विज्ञान प्रशासकों की क्षमता निर्माण से जुड़े विषयों की भी समीक्षा की और विभागों से श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों को साझा करते हुए वैज्ञानिक तंत्र में सहयोगात्मक सुशासन को और मजबूत करने का आह्वान किया।

एसईसीएल की प्रमुख सीएसआर योजना 'एसईसीएल के सुश्रुत' को भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया

No comments Document Thumbnail

कोयला मंत्रालय के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ स्थित कोल इंडिया की सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी की प्रमुख कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) योजना 'एसईसीएल के सुश्रुत' भारत के किसी भी कोल पीएसयू की पहली सीएसआर योजना बन गई है, जिसे भारत के राजपत्र (Gazette of India) में अधिसूचित किया गया है।

कोयला मंत्रालय ने आधार (लक्षित वितरण वित्तीय एवं अन्य सब्सिडी, लाभ एवं सेवाएं) अधिनियम, 2016 तथा आधार प्रमाणीकरण (सुशासन, सामाजिक कल्याण, नवाचार एवं ज्ञान) नियम, 2020 के तहत इस योजना के लाभार्थियों के लिए आधार प्रमाणीकरण की अनुमति प्रदान करते हुए राजपत्र अधिसूचना जारी की है।

इस अधिसूचना के माध्यम से लाभार्थियों को स्वैच्छिक आधार प्रमाणीकरण के जरिए पारदर्शी, प्रभावी और लक्षित तरीके से लाभ उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही, जो लाभार्थी आधार का उपयोग नहीं करना चाहते, उनके लिए सरकार द्वारा अनुमोदित वैकल्पिक पहचान दस्तावेजों की भी व्यवस्था की गई है।

वर्ष 2023 में शुरू की गई 'एसईसीएल के सुश्रुत' योजना, एसईसीएल की प्रमुख सीएसआर पहल है। इसके तहत कंपनी के परिचालन क्षेत्रों के मेधावी विद्यार्थियों को नीट (NEET) की निःशुल्क आवासीय कोचिंग उपलब्ध कराई जाती है, ताकि वे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अपना करियर बना सकें।

इस योजना ने लगातार उत्कृष्ट परिणाम दिए हैं।

पहला बैच (2023–24):

  • 40 में से 39 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की।

  • 11 विद्यार्थियों को एमबीबीएस (MBBS) में प्रवेश मिला।

  • 2-2 विद्यार्थियों को बीडीएस (BDS), बीएएमएस (BAMS) तथा बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (BPTH) में प्रवेश प्राप्त हुआ।

  • 2 विद्यार्थियों ने छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में वेटरनरी पाठ्यक्रमों में प्रवेश प्राप्त किया।

दूसरा बैच (2024–25):

  • 40 में से 31 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा उत्तीर्ण की।

  • विद्यार्थियों को एमबीबीएस, बीडीएस, बीएएमएस तथा बैचलर ऑफ फिशरीज साइंस (B.F.Sc.) जैसे पाठ्यक्रमों में सरकारी संस्थानों में प्रवेश मिला।

यह राजपत्र अधिसूचना 'एसईसीएल के सुश्रुत' योजना के विकास में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे योजना की संस्थागत व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी तथा लाभार्थियों के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और सुविधाजनक पहुंच सुनिश्चित होगी।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 'एसईसीएल के सुश्रुत' भारत सरकार के डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) पोर्टल पर सूचीबद्ध होने वाली किसी भी कोल पीएसयू की पहली और एकमात्र सीएसआर योजना भी बन चुकी है। यह इसकी मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था तथा तकनीक आधारित पारदर्शी सेवा वितरण के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

'एसईसीएल के सुश्रुत' के माध्यम से एसईसीएल खनन क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर अवसर प्रदान करते हुए देश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भविष्य के योग्य चिकित्सकों और स्वास्थ्य पेशेवरों को तैयार करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

छत्तीसगढ़ के किसानों को बड़ी सौगात: पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किस्त जारी

No comments Document Thumbnail

छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए आज बड़ी खुशखबरी सामने आई है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना की 23वीं किस्त जारी कर दी गई है, जिससे राज्य के लाखों किसानों के चेहरों पर राहत और खुशी देखने को मिल रही है।

24.52 लाख किसानों को 490.54 करोड़ रुपये का लाभ

इस किस्त के तहत छत्तीसगढ़ के करीब 24.52 लाख किसानों को सीधे उनके बैंक खातों में कुल 490.54 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर की जा रही है। यह पूरी प्रक्रिया DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से की जा रही है, जिससे राशि बिना किसी रुकावट के सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रही है।

किसानों की आर्थिक मदद के लिए अहम कदम

PM-KISAN योजना के तहत पात्र किसानों को हर वर्ष ₹6,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो तीन समान किस्तों में सीधे बैंक खातों में भेजी जाती है। यह राशि किसानों को खेती-किसानी की जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहायता प्रदान करती है।

सरकार की प्रमुख योजना

यह योजना केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक है, जिसका उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक मजबूती देना है। इस पहल से देशभर में करोड़ों किसान लाभान्वित हो रहे हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है।

मुख्य बातें

  • 23वीं किस्त आज जारी

  • छत्तीसगढ़ के 24.52 लाख किसान लाभान्वित

  • कुल ₹490.54 करोड़ की राशि ट्रांसफर

  • राशि सीधे बैंक खातों में DBT के माध्यम से


VB–G RAM G अधिनियम 2025 के क्रियान्वयन हेतु देशभर में 100 से अधिक क्षेत्रीय अधिकारियों की तैनाती

No comments Document Thumbnail

विकसित भारत–गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB–G RAM G] अधिनियम, 2025 के सुचारु क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने अधिनियम के 1 जुलाई 2026 से लागू होने से पहले देशभर में 100 से अधिक क्षेत्रीय अधिकारियों (Area Officers) की तैनाती का निर्णय लिया है।

ये क्षेत्रीय अधिकारी अधिनियम के क्रियान्वयन के प्रारंभिक चरण में सुविधादाता (Facilitator) और संसाधन व्यक्ति (Resource Person) के रूप में कार्य करेंगे। वे राज्य सरकारों और जिला प्रशासन के साथ मिलकर कार्यान्वयन में सहयोग, स्थानीय क्षमताओं को सुदृढ़ करने, ज्ञान एवं अनुभव साझा करने, संचालन संबंधी चुनौतियों के समाधान तथा श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को अपनाने में सहायता प्रदान करेंगे।

इस भूमिका के लिए अधिकारियों को तैयार करने हेतु ग्रामीण विकास विभाग ने एक विशेष अभिमुखीकरण (Orientation) कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें अधिनियम की प्रमुख विशेषताओं, कार्यान्वयन ढाँचे, संस्थागत व्यवस्थाओं, प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रशासनिक प्रणालियों तथा राज्यों एवं जिलों को उपलब्ध सहायता तंत्रों की जानकारी दी गई। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसल ने की, जबकि संयुक्त सचिव रोहिणी आर. भाजीभाकरे ने कार्यक्रम का संचालन किया।

अपने दौरों के दौरान क्षेत्रीय अधिकारी राज्य सरकारों, जिला प्रशासन और जमीनी स्तर के कर्मचारियों से संवाद करेंगे ताकि कार्यान्वयन संबंधी आवश्यकताओं को समझा जा सके, अनुभवों एवं श्रेष्ठ प्रथाओं का आदान-प्रदान हो सके, क्षमता निर्माण गतिविधियों को समर्थन मिल सके और संचालन संबंधी समस्याओं का समाधान किया जा सके। उनका यह सहयोग विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय को मजबूत करेगा और नए ढाँचे में प्रभावी संक्रमण सुनिश्चित करेगा।

यह पहल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को संस्थागत सहयोग प्रदान करते हुए VB–G RAM G अधिनियम के सुचारु और प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

VB–G RAM G अधिनियम, 2025 की प्रमुख विशेषताएँ

यह अधिनियम ग्रामीण रोजगार को सतत और समावेशी ग्रामीण विकास का आधार बनाने का प्रयास करता है। इसके अंतर्गत:

  • गारंटीकृत मजदूरी आधारित रोजगार को आजीविका संवर्धन से जोड़ा जाएगा।

  • जलवायु अनुकूलन एवं लचीलापन (Climate Resilience) को बढ़ावा दिया जाएगा।

  • ग्रामीण आधारभूत संरचना का निर्माण किया जाएगा।

  • प्रौद्योगिकी-सक्षम प्रशासनिक व्यवस्था विकसित की जाएगी।

  • विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं (VGPPs), GIS-आधारित योजना निर्माण तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के अभिसरण (Convergence) के माध्यम से विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाया जाएगा।

मंत्रालय द्वारा की गई प्रमुख तैयारियाँ

मंत्रालय ने देशव्यापी तैयारी सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए ₹95,692 करोड़ की अंतरिम स्वीकृति।

  • सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को DBT-SPARSH प्लेटफ़ॉर्म से जोड़ना।

  • सक्रिय श्रमिकों में लगभग 93% ई-केवाईसी (e-KYC) पूर्ण करना।

  • फेस ऑथेंटिकेशन आधारित उपस्थिति प्रणाली का देशभर में कार्यान्वयन।

  • समर्पित डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म का विकास।

  • बड़े पैमाने पर क्षमता निर्माण (Capacity Building) कार्यक्रमों का संचालन।

वर्तमान प्रगति

  • 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अधिनियम के कार्यान्वयन हेतु अपने बजट में प्रावधान कर दिए हैं।

  • 6 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने VB–G RAM G ढाँचे के अंतर्गत अपनी राज्य योजनाओं को अधिसूचित कर दिया है।

  • शेष राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी योजनाओं को अंतिम रूप देने की उन्नत अवस्था में हैं।

इस प्रकार, क्षेत्रीय अधिकारियों की तैनाती और व्यापक तैयारी के माध्यम से सरकार VB–G RAM G अधिनियम, 2025 को सफलतापूर्वक लागू करने और ग्रामीण भारत के समग्र विकास को गति देने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

स्वच्छता पखवाड़ा 2026: देशभर में स्वच्छता और जनजागरूकता की नई मिसाल, DBT के अभियान को मिली बड़ी सफलता

No comments Document Thumbnail

नई दिल्ली- स्वच्छ भारत मिशन को नई गति देते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) ने 1 मई से 15 मई 2026 तक देशव्यापी स्वच्छता पखवाड़ा 2026 का सफल आयोजन किया। इस दौरान नई दिल्ली स्थित विभागीय मुख्यालय के साथ-साथ सभी स्वायत्त संस्थानों और सार्वजनिक उपक्रमों में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए व्यापक अभियान चलाया गया।

पखवाड़े की शुरुआत 1 मई को नई दिल्ली के सीजीओ कॉम्प्लेक्स में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह से हुई, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्वच्छ, स्वस्थ और जिम्मेदार भारत के निर्माण का संकल्प लिया। इस अवसर पर स्वच्छता को केवल एक अभियान नहीं बल्कि जन आंदोलन बनाने का संदेश दिया गया।

स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण पर विशेष फोकस

पंद्रह दिनों तक चले इस अभियान में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अनेक कार्यक्रम आयोजित किए गए। स्वास्थ्य जांच शिविर, पर्यावरण जागरूकता व्याख्यान, हस्ताक्षर अभियान, वृक्षारोपण कार्यक्रम, सिंगल-यूज प्लास्टिक के खिलाफ जागरूकता अभियान, तनाव प्रबंधन कार्यशालाएं और विभिन्न सेमिनारों के माध्यम से लोगों को स्वच्छ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।

इसके अलावा "वेस्ट टू वेल्थ" प्रतियोगिता ने लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया, जिसमें बेकार वस्तुओं को उपयोगी उत्पादों में बदलने की कला को बढ़ावा दिया गया। जूट बैग वितरण और लकड़ी के पैकिंग मटेरियल से आकर्षक गमले तैयार करने जैसी गतिविधियों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

स्कूलों और समुदायों तक पहुंचा अभियान

स्वच्छता पखवाड़ा केवल संस्थानों तक सीमित नहीं रहा। आसपास के सरकारी स्कूलों में शौचालयों और कक्षाओं के नवीनीकरण का कार्य किया गया। विद्यार्थियों के बीच निबंध, कविता और स्लोगन लेखन प्रतियोगिताएं आयोजित कर स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाई गई।

साथ ही प्रयोगशाला अपशिष्ट प्रबंधन (Laboratory Waste Management) पर विशेष व्याख्यान आयोजित कर वैज्ञानिक संस्थानों में सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल कार्यप्रणालियों को बढ़ावा दिया गया।

जनभागीदारी और श्रमदान को मिला बढ़ावा

अभियान के दौरान जल संरक्षण, स्वच्छता और श्रमदान को बढ़ावा देने वाली कई गतिविधियां आयोजित की गईं। बड़ी संख्या में कर्मचारियों, वैज्ञानिकों, छात्रों और स्थानीय लोगों ने भाग लेकर स्वच्छ भारत मिशन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई।

सर्वश्रेष्ठ संस्थानों को मिला सम्मान

पखवाड़े के दौरान किए गए कार्यों की समीक्षा वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लगातार की गई। विभिन्न गतिविधियों और नवाचारों के आधार पर तीन संस्थानों को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए चुना गया।

स्वच्छता पखवाड़ा 2026 के विजेता संस्थान:

🥇 BRIC - National Institute of Animal Biotechnology (NIAB)

🥈 BRIC - National Agri-Food Biotechnology Institute (NABI)

🥉 BRIC - Institute of Bioresources and Sustainable Development (IBSD)

इन संस्थानों को 2 जून 2026 को आयोजित एक विशेष समारोह में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव द्वारा सम्मानित किया गया।

देश को दिया स्वच्छता और जिम्मेदारी का संदेश

DBT के इस अभियान ने यह साबित किया कि स्वच्छता केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की भागीदारी से सफल होने वाला राष्ट्रीय आंदोलन है। स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने में यह पखवाड़ा एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ है।

मुख्य बिंदु:

✅ 1 से 15 मई तक चला स्वच्छता पखवाड़ा 2026
✅ देशभर के DBT संस्थानों में व्यापक आयोजन
✅ वृक्षारोपण, स्वास्थ्य शिविर और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
✅ स्कूलों में स्वच्छता और शिक्षा सुधार की पहल
✅ वेस्ट टू वेल्थ और प्लास्टिक मुक्त भारत पर विशेष जोर
✅ NIAB, NABI और IBSD बने सर्वश्रेष्ठ संस्थान

79 हजार से अधिक श्रमिकों को 27.15 करोड़ की सीधी सहायता: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जशपुर में श्रमिक सम्मेलन में किया डीबीटी अंतरण

No comments Document Thumbnail

मेहनतकश श्रमिकों का सशक्तिकरण ही विकसित छत्तीसगढ़ की नींव है — मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जशपुर में आयोजित जिला स्तरीय श्रमिक सम्मेलन में 79,340 निर्माण श्रमिकों एवं उनके परिजनों को 27.15 करोड़ रुपए की राशि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रदेश के श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बावजूद छत्तीसगढ़ में पेट्रोल, डीज़ल और एलपीजी गैस की उपलब्धता को लेकर किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ईंधन आवश्यकताओं के लिए आयात पर निर्भर है, लेकिन केंद्र सरकार की प्रभावी विदेश नीति और विभिन्न देशों के साथ मजबूत संबंधों के कारण आपूर्ति पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें और अफवाहें फैलाई जा रही हैं, जिससे लोगों में अनावश्यक भय और भ्रम का वातावरण बन रहा है।उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें और पेट्रोल, डीज़ल या गैस का अनावश्यक भंडारण न करें। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जैसे पहले ईंधन की उपलब्धता बनी रही है, वैसे ही आगे भी निर्बाध रूप से मिलती रहेगी।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने श्रमिकों के कल्याण के लिए राज्य और केंद्र सरकार द्वारा संचालित 12 विभिन्न योजनाओं का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पंजीकृत श्रमिकों को बच्चे के जन्म पर 20,000 रुपए की सहायता राशि दी जाती है। इसके अलावा मकान निर्माण के लिए 1.5 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। श्रमिकों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ई-रिक्शा खरीदने में भी सहायता दी जा रही है, जिसे पहले 1 लाख रुपए से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपए कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने महत्वपूर्ण पहल की है। यदि किसी श्रमिक का बच्चा 10वीं या 12वीं बोर्ड परीक्षा में टॉप-10 में स्थान प्राप्त करता है, तो उसे 2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

इसके साथ ही मेधावी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए पहले 100 बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर 200 सीट कर दिया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने बताया कि भूमिहीन कृषि मजदूरों के लिए “दीनदयाल भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना” संचालित की जा रही है, जिसके तहत ऐसे मजदूरों को सालाना 10,000 रुपए की सहायता राशि प्रदान की जाती है।

उन्होंने जानकारी दी कि हाल ही में लाखों भूमिहीन मजदूरों के खातों में लगभग 495 करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की गई है।

मुख्यमंत्री साय ने प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि जनधन खातों के माध्यम से अब योजनाओं का लाभ सीधे हितग्राहियों तक पहुंच रहा है।

उन्होंने कहा कि पहले भेजी गई राशि का बड़ा हिस्सा बीच में ही खत्म हो जाता था, लेकिन अब पूरी राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रही है, जिससे पारदर्शिता और विश्वास दोनों मजबूत हुए हैं।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रोविडेंट फंड (PF) प्रणाली को यूनिवर्सल बनाया गया है, जिससे श्रमिक देश के किसी भी हिस्से में काम करने पर अपना पीएफ लाभ जारी रख सकते हैं।

इसके अलावा न्यूनतम पेंशन राशि को बढ़ाकर 1000 रुपए किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि ईएसआईसी अस्पतालों के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों को बेहतर और निःशुल्क इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन के अंत में श्रमिकों को प्रदेश के विकास की रीढ़ बताते हुए कहा कि उनके परिश्रम और योगदान से ही राज्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने सभी श्रमिकों का सम्मान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रदेशभर में आयोजित हो रहे श्रमिक सम्मेलन—श्रम मंत्री

श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर पूरे प्रदेश में श्रमिक सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है, ताकि श्रमिकों तक योजनाओं की जानकारी पहुंचे और उन्हें अधिकतम लाभ मिल सके।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों को प्रसूति सहायता के रूप में 20,000 रुपए, मकान निर्माण के लिए आर्थिक सहायता, छात्रवृत्ति सहित कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके साथ ही 10वीं और 12वीं में टॉप-10 में आने वाले श्रमिकों के बच्चों को 2 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि पिछले सवा दो वर्षों में 800 करोड़ रुपए से अधिक की राशि श्रमिकों के खातों में डीबीटी के माध्यम से सीधे ट्रांसफर की गई है।

इसके अलावा “अटल शिक्षा योजना” के तहत श्रमिकों के बच्चों को निजी स्कूलों में पढ़ाई की सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि श्रमिकों को योजनाओं का पूरा लाभ मिले और उनके जीवन स्तर में सुधार हो।

छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह ने भी राज्य सरकार द्वारा श्रमिकों के हित में संचालित योजनाओं की जानकारी देते हुए श्रमिकों से इनका अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील की।

इस अवसर पर श्रम कल्याण मंडल के अध्यक्ष योगेश दत्त मिश्रा, माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष शंभूनाथ चक्रवर्ती, नगर पालिका जशपुर के अध्यक्ष अरविंद भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष यशप्रताप सिंह जुदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जुदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष जशपुर गंगाराम भगत सहित अन्य जनप्रतिनिधि, श्रमिक बंधु एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।

किसानों के खाते में आने वाली है बड़ी रकम: इस दिन ट्रांसफर होंगे 2000-2000 रुपये

No comments Document Thumbnail

 नई दिल्ली। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का इंतजार कर रहे देश के करोड़ों किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने योजना की 22वीं किस्त जारी करने की तारीख तय कर दी है। सरकार के अनुसार 13 मार्च 2026 को 9.32 करोड़ से अधिक पात्र किसानों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए 2000 रुपये भेजे जाएंगे।


इस बार किसानों के खातों में कुल 18,640 करोड़ रुपये से अधिक की राशि ट्रांसफर की जाएगी। यह रकम सीधे किसानों के बैंक खातों में जाएगी, जिससे उन्हें खेती से जुड़े खर्चों में मदद मिल सकेगी। जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम के गुवाहाटी से इस योजना की 22वीं किस्त जारी करेंगे।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत हर साल पात्र किसान परिवारों को 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह राशि तीन बराबर किस्तों में 2,000-2,000 रुपये के रूप में किसानों के बैंक खातों में भेजी जाती है। अब तक योजना की 21 किस्तें जारी की जा चुकी हैं और अब 22वीं किस्त किसानों को मिलने जा रही है।

केंद्र सरकार ने इस योजना की शुरुआत वर्ष 2019 में की थी। इसका उद्देश्य छोटे और मध्यम वर्ग के किसानों को आर्थिक सहायता देना है, ताकि वे बीज, खाद और अन्य कृषि सामग्री जैसे खेती से जुड़े जरूरी खर्चों को आसानी से पूरा कर सकें।

सरकार का मानना है कि इस योजना के जरिए किसानों को सीधे आर्थिक मदद मिल रही है, जिससे उनकी आय बढ़ाने और खेती को मजबूत बनाने में सहायता मिल रही है।

केंद्रीय बजट 2026–27 में उर्वरक क्षेत्र को प्राथमिकता: किसानों के लिए किफायती उर्वरक और सतत कृषि पर जोर

No comments Document Thumbnail

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026–27 में सरकार की यह प्रतिबद्धता दोहराई गई है कि किसानों को सही समय पर किफायती उर्वरक उपलब्ध कराना, घरेलू उत्पादन को प्रोत्साहित करना और संतुलित पोषक तत्वों का उपयोग सुनिश्चित करना प्राथमिकता होगी।

बजट आवंटन और उद्देश्य

वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए उर्वरक विभाग को कुल ₹1.71 लाख करोड़ का नेट बजट आवंटन दिया गया है। यह सरकार की नीति को दर्शाता है कि वैश्विक उर्वरक कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति में व्यवधानों से किसानों को बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

यूरिया सब्सिडी

यूरिया सब्सिडी के तहत घरेलू उत्पादन और आयात दोनों के लिए प्रावधान किया गया है, ताकि घरेलू उपलब्धता और मांग के बीच संतुलन बनाया जा सके। साथ ही, किसानों के लिए कीमतों को नियंत्रित रखने और उत्पादकों को उचित लाभ सुनिश्चित करने के लिए सब्सिडी प्रणाली जारी रहेगी।

पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (NBS)

फॉस्फेट और पोटाश (P&K) उर्वरकों के लिए पोषक तत्व आधारित सब्सिडी (Nutrient Based Subsidy) योजना जारी रहेगी। इसका उद्देश्य संतुलित NPK उपयोग, मृदा स्वास्थ्य में सुधार और कृषि उत्पादन बढ़ाना है।

डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT)

उर्वरक सब्सिडी के वितरण में DBT प्रणाली को प्रमुख रूप से जारी रखा जाएगा, जिससे पारदर्शिता, दक्षता और वास्तविक समय में उर्वरक बिक्री की निगरानी सुनिश्चित हो सके। इसके अलावा फर्टिलाइजर सब्सिडी मैनेजमेंट सिस्टम के लिए स्थापना और आईसीटी संबंधित खर्चों का प्रावधान भी किया गया है।

जैविक उर्वरकों का प्रोत्साहन

सरकार ने जैविक उर्वरकों के प्रचार-प्रसार, मार्केट डेवलपमेंट असिस्टेंस और अनुसंधान एवं विकास के लिए भी बजट आवंटन किया है, जिससे सतत और पर्यावरण-हितैषी कृषि को बढ़ावा मिले।

कुल मिलाकर, बजट 2026–27 किसानों के हितों की सुरक्षा, उर्वरक की किफायती उपलब्धता, घरेलू उत्पादन क्षमता का सशक्तिकरण और संतुलित तथा सतत पोषक तत्व उपयोग सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।


नेशनल वन हेल्थ मिशन असेम्बली 2025 का दो दिवसीय आयोजन सफलतापूर्वक समाप्त

No comments Document Thumbnail

नेशनल वन हेल्थ मिशन असेम्बली 2025 का दो दिवसीय आयोजन आज भारत मंडपम में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। दूसरे दिन में विशेष तकनीकी विचार-विमर्श हुए, जिन्होंने मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य के समेकित और लचीले वन हेल्थ इकोसिस्टम के निर्माण के लिए राष्ट्रीय प्रयासों को और मजबूत किया। इस असेंबली में प्रमुख मंत्रालयों, वैज्ञानिक संस्थाओं, विकास सहयोगियों और कार्यान्वयन एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में समन्वित कार्रवाई का महत्व उजागर हुआ।

पहले दिन की मजबूत शुरुआत के बाद, जिसमें सरकार के वरिष्ठ नेतृत्व ने संयुक्त निगरानी और ‘होल-ऑफ-गवर्नमेंट’ सहयोग की प्रतिबद्धता दोहराई, आज के सत्रों ने वैज्ञानिक, संचालनात्मक और कार्यक्रमगत चर्चाओं के माध्यम से उस गति को बनाए रखा। इन संवादों ने साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाया और विभिन्न क्षेत्रों में वन हेल्थ एकीकरण, तत्परता और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमताओं के लिए आधार तैयार किया।

दिन की कार्यवाही का नेतृत्व वरिष्ठ राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों ने किया। डॉ. वी. के. पॉल, सदस्य (स्वास्थ्य), नीति आयोग ने सहयोग, प्रणालीगत तत्परता और मजबूत राष्ट्रीय क्षमताओं के लिए सतत प्रयासों का आह्वान किया। उनके साथ डॉ. राजीव बहल, सचिव, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग और महानिदेशक, ICMR तथा डॉ. राजेश एस. गोखले, सचिव, जैव प्रौद्योगिकी विभाग भी उपस्थित थे, जिन्होंने नवाचार, अनुवादक विज्ञान और एकीकृत निगरानी के महत्व पर जोर दिया। FAO के स्कॉट न्यूमैन और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की संयुक्त सचिव वंदना जैन ने भी बहु-क्षेत्रीय जुड़ाव और वैश्विक सहयोग के महत्व को रेखांकित किया। DRDO, ICAR, THSTI, CEPI, FIND, AYUSH और International Vaccine Institute जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों ने भी विविध वैज्ञानिक और कार्यान्वयन दृष्टिकोण साझा किए।

डॉ. वी. के. पॉल ने असेंबली में कहा, “भारत की वन हेल्थ प्रगति एक मजबूत होल-ऑफ-गवर्नमेंट दृष्टिकोण पर निर्भर करती है, जो स्वस्थ और लचीले भविष्य की दिशा में काम करता है। सामुदायिक भागीदारी इस प्रयास की आधारशिला है। मीडिया का महत्वपूर्ण योगदान है, जो जनता की समझ को आकार देता है और गलत सूचना को दूर करता है, जबकि हमारी कानून व्यवस्था प्रणाली आपात स्थितियों में महत्वपूर्ण बल-गुणक के रूप में कार्य करती है। इन साझेदारियों को मजबूत करना यह सुनिश्चित करेगा कि समय पर, भरोसेमंद और समन्वित कार्रवाई हो।”

उन्होंने सामुदायिक सहभागिता को रोग का शीघ्र पता लगाने, निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया का आधार बताया और कहा कि ग्रामीण स्तर पर वन हेल्थ तैयारियों का विस्तार होना चाहिए, जहां फ्रंटलाइन कर्मचारी, स्थानीय सरकारें और समुदाय पहली सुरक्षा पंक्ति बनाते हैं। उन्होंने COVID-19 महामारी के दौरान सामुदायिक सक्रियता को भारत की प्रमुख ताकत के रूप में उद्धृत किया और कहा कि यह असेंबली विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाकर क्षेत्रों में एकीकृत कार्रवाई को आगे बढ़ाने में सफल रही।

डॉ. राजीव बहल ने कहा, “हमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी और विकास को एकसाथ काम करने की आवश्यकता है। लक्ष्य केवल भविष्य की महामारी के लिए निदान, उपचार और टीकों का निर्माण नहीं है, बल्कि इसे तेजी से करना है। राष्ट्रीय वन हेल्थ मिशन प्लेटफॉर्म विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक साथ लाकर वर्तमान और भविष्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों के लिए एक अधिक चुस्त, तैयार और उत्तरदायी इकोसिस्टम बनाने में मदद कर रहा है।”

डॉ. राजेश एस. गोखले ने कहा, “COVID-19 ने हमारे तकनीकी भविष्य की नाजुकता और वैश्विक परस्पर निर्भरता को उजागर किया। अब स्पष्ट है कि जैविक, कृत्रिम और प्राकृतिक बुद्धिमत्ता का त्रिकोण सभी भविष्य की तकनीकों को पुनर्परिभाषित करेगा। इनका संगम एक ऐसा नवाचार और गति उत्पन्न करेगा जिसकी कल्पना आज करना कठिन है। इस क्षमता का लाभ उठाना भारत के वन हेल्थ और जैव विज्ञान क्षमताओं को मजबूत करने में केंद्रीय होगा।”

चिकित्सा प्रतिक्रियाओं पर चर्चा के दौरान, प्रमुख राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञों ने भविष्य के खतरे के प्रति तेजी से प्रतिक्रिया देने वाले टीकों, निदान और उपचार के विकास की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने चुस्त अनुसंधान प्लेटफार्मों के निर्माण, आपातकालीन उपयोग के लिए नियामक प्रणालियों को मजबूत करने और वैज्ञानिक एजेंसियों, उद्योग और वैश्विक साझेदारों के बीच सहयोग बढ़ाने पर बल दिया। राज्य सरकारों ने निगरानी प्रणाली, अंतर-विभागीय समन्वय और क्षेत्र स्तर पर संचालन की तैयारियों के कार्यान्वयन अनुभव साझा किए।

क्षमता निर्माण और सामुदायिक भागीदारी पर विचार-विमर्श में यह भी रेखांकित किया गया कि एक मजबूत वन हेल्थ सिस्टम कुशल मानव संसाधन, भरोसेमंद संस्थान और सशक्त समुदायों पर निर्भर करता है। वन्यजीव स्वास्थ्य, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रशिक्षण, सामुदायिक आधारित अनुसंधान और स्वास्थ्य प्रणाली विकास के विशेषज्ञों ने बहु-स्तरीय प्रशिक्षण संरचनाओं, पेशेवर शिक्षा में वन हेल्थ का समावेश और सतत सामुदायिक साझेदारी की आवश्यकता पर जोर दिया। राज्य सरकारों ने स्थानीय सामुदायिक भागीदारी रणनीतियों और अनुकूलित समाधानों का महत्व भी साझा किया।

दिन का आयोजन भारत की बढ़ती वन हेल्थ क्षमताओं को प्रदर्शित करने वाली प्रदर्शनी के साथ समाप्त हुआ। संस्थानों ने निगरानी, जैव सुरक्षा, डिजिटल प्लेटफार्म, प्रयोगशाला नेटवर्क और सहयोगात्मक अनुसंधान प्रयासों में नवाचारों को दिखाया। नेशनल वन हेल्थ हैकथॉन के लिए एक सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया, जिसमें तकनीक-आधारित और सामुदायिक-केंद्रित समाधान प्रस्तुत किए गए।

विचार-विमर्श का समापन इस साझा समझ के साथ हुआ कि वन हेल्थ भारत के विकासशील भविष्य की दृष्टि को साकार करने के लिए आवश्यक है। वैज्ञानिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने, विभिन्न क्षेत्रों के सहयोग को सक्षम करने और प्रणाली के सभी स्तरों पर तैयारियों को मजबूत करने के माध्यम से, भारत एक सुरक्षित और लचीले भविष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है।


प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किए तीन क्रांतिकारी स्वदेशी नवाचार — QSIP, क्वांटम चिप और CAR-T सेल थेरेपी

No comments Document Thumbnail

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को भेंट की तीन अभूतपूर्व नवाचार उपलब्धियां — QSIP: भारत की अपनी क्वांटम सुरक्षा चिप, 25-क्यूबिट QPU: भारत की पहली क्वांटम कंप्यूटिंग चिप और CAR-T सेल थेरेपी: भारत की पहली स्वदेशी कैंसर सेल थेरेपी

चल रहे Emerging Science, Technology & Innovation Conclave (ESTIC 2025) के दौरान माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को तीन ऐतिहासिक नवाचार उपलब्धियां समर्पित कीं —

  1. QSIP (Quantum Security in Package) : भारत की अपनी क्वांटम सुरक्षा चिप।
  2. 25-क्यूबिट QPU (Quantum Processing Unit) : भारत की पहली क्वांटम कंप्यूटिंग चिप, जो भविष्य की कंप्यूटेशन शक्ति का प्रतीक है।
  3. CAR-T सेल थेरेपी : भारत की पहली स्वदेशी कैंसर सेल थेरेपी, जिसे भारतीय वैज्ञानिकों ने विकसित किया है।

इनमें से NexCAR19, जो विश्व की पहली humanised CAR-T therapy है, भारत में ImmunoACT द्वारा विकसित की गई है — यह वास्तव में “Made in India, for the World” नवाचार का उदाहरण है। इस परियोजना को Department of Biotechnology (DBT) और BIRAC द्वारा समर्थन प्राप्त हुआ है।

CAR-T सेल थेरेपी (Chimeric Antigen Receptor T-cell therapy) कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति बनकर उभरी है। विश्वभर में किए गए क्लिनिकल ट्रायल्स ने दर्शाया है कि यह थेरेपी Acute Lymphocytic Leukemia जैसे गंभीर कैंसर रोगियों में अत्यंत प्रभावी साबित हुई है।

NexCAR19, भारत की पहली living drug, ने जीन थेरेपी को न केवल किफायती बल्कि सुलभ भी बनाया है, जबकि वैज्ञानिक गुणवत्ता और रोगी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया गया है।

ImmunoACT, जो IIT बॉम्बे की एक स्पिन-ऑफ स्टार्टअप है, को BIRAC के BioNest Initiative के तहत वित्तीय सहायता, मार्गदर्शन और संसाधन प्रदान किए गए, जब यह Society for Innovation and Entrepreneurship (SINE), IIT बॉम्बे के Technology Business Incubator में इनक्यूबेट की जा रही थी।

वर्ष 2021 में, भारत की पहली CAR-T थेरेपी के Lentivirus manufacturing और clinical trial के लिए DBT और BIRAC ने National Biopharma Mission के तहत आंशिक सहायता प्रदान की। यह परीक्षण ACTREC Centre, टाटा मेमोरियल अस्पताल में TMC-IIT Bombay Team द्वारा किया गया, जिसमें ImmunoACT निर्माण भागीदार के रूप में कार्यरत है।

हाल ही में, DBT ने BioE3 Policy के तहत Biomanufacturing initiative के माध्यम से ImmunoACT को 200-लीटर GMP lentiviral vector and plasmid प्लेटफॉर्म स्थापित करने हेतु वित्त पोषण प्रदान किया है। इस प्लेटफॉर्म से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और थेरेपी की लागत कम होगी। अनुमान है कि यह GMP ग्रेड gene delivery vector प्रति वर्ष कम से कम 1000 रोगियों की मदद कर सकेगा।

DBT प्रारंभिक एवं उन्नत translational research को भी बढ़ावा दे रहा है ताकि देश में CAR-T आधारित थेरेप्यूटिक्स विकसित कर विभिन्न प्रकार के कैंसर जैसे Multiple Myeloma (MM), Acute Lymphocytic Leukemia, B-cell Acute Lymphoblastic Leukemia, glioblastoma आदि का उपचार किया जा सके।

यह पहल भारत को कैंसर उपचार में आत्मनिर्भर और वैश्विक अग्रणी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

DBT में विशेष अभियान 5.0 के तहत स्वच्छता और रिकॉर्ड प्रबंधन की समीक्षा

No comments Document Thumbnail

विशेष अभियान 5.0 के कार्यान्वयन चरण की समीक्षा: DBT में स्वच्छता और रिकॉर्ड प्रबंधन पर जोर

प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DAR&PG) के निर्देशों के अनुरूप, एकता विष्णोई, संयुक्त सचिव, जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) ने 3 अक्टूबर 2025 को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विशेष अभियान 5.0 के कार्यान्वयन चरण की प्रगति की समीक्षा हेतु निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद DBT के अंतर्गत आने वाले AI और PSU के नोडल अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई, ताकि तैयारियों के चरण में निर्धारित गतिविधियों के अनुसार लक्षित उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए समग्र योजना बनाई जा सके।

अभियान की प्रगति (2 अक्टूबर – 31 अक्टूबर 2025)

कार्यान्वयन चरण में तैयारियों के चरण के दौरान तय किए गए लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं। अभियान की प्रगति नोडल अधिकारी द्वारा नियमित रूप से मॉनिटर की जा रही है। अभियान की बिंदुवार स्थिति इस प्रकार है:

1. रिकॉर्ड प्रबंधन:

  • कुल 22,176 भौतिक फ़ाइलें समीक्षा के लिए लंबित थीं, जिनमें से 13,000 फ़ाइलों की समीक्षा की जा चुकी है।

  • 9,111 फ़ाइलें हटाने के लिए चिन्हित की गईं और 447 भौतिक फ़ाइलें हटाई गईं।

  • कुल 16,892 ई-फ़ाइलों की समीक्षा की गई और 5,737 ई-फ़ाइलें बंद की गईं।

2. संसाधन और स्थान प्रबंधन:

  • विभाग और इसके AI एवं PSU ने ई-कचरा / स्क्रैप आइटमों की निपटान से ₹4,17,250/- की आय अर्जित की।

  • कुल 46,390 वर्ग फीट स्थान मुक्त किया गया।

3. स्वच्छता और शिकायत निवारण:

  • विशेष अभियान के तहत 83 स्वच्छता स्थल चिन्हित किए गए।

  • जनवरी 2025 से अब तक प्राप्त/फॉरवर्ड की गई कुल 222 शिकायतों में से 201 शिकायतों का निपटान किया गया।

  • शिकायतों के त्वरित निपटान के लिए JS(Admin) DBT द्वारा मासिक समीक्षा बैठकें भी आयोजित की जा रही हैं।

4. मूल्यांकन तंत्र:

  • प्रत्येक AI और PSU के प्रदर्शन का वस्तुनिष्ठ मूल्यांकन करने के लिए स्कोरिंग तंत्र स्थापित किया गया है।

  • इसमें स्वच्छता प्रोटोकॉल का पालन, कार्यान्वयन के दौरान नवाचार, और अन्य मानदंडों के लिए अंक दिए जाते हैं।

सारांश:

जैव प्रौद्योगिकी विभाग विशेष अभियान 5.0 में सक्रिय रूप से भाग ले रहा है, जिससे स्वच्छता (Swachhata) को बढ़ावा मिले और दीर्घकालिक व्यवहारिक परिवर्तन सुनिश्चित हो। इसका लक्ष्य एक स्वच्छ और स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण करना है।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.