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नमामि गंगे मिशन चरण–II के अंतर्गत सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं की महत्वपूर्ण प्रगति

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नमामि गंगे मिशन चरण–II के तहत वित्त वर्ष 2025–26 की तीसरी तिमाही (Q3) में 5 सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं का संचालन शुरू किया गया, जो विभिन्न राज्यों में प्रदूषण निवारण एवं नदी पुनर्जीवन के प्रयासों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान अब तक कुल 9 परियोजनाएं परिचालित की जा चुकी हैं, जिससे प्रमुख शहरी केंद्रों में सीवेज शोधन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। दूसरी तिमाही (Q2) तक उत्तराखंड के उधम सिंह नगर, उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद, पश्चिम बंगाल के महेशतला एवं जंगीपुर में परियोजनाएं परिचालित की जा चुकी थीं।

इन 5 नई परियोजनाओं के चालू होने के साथ, नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक कुल 3,976 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) सीवेज शोधन क्षमता का संचालन किया जा चुका है, जबकि परिचालित सीवेज शोधन संयंत्रों (STP) की कुल संख्या 173 हो गई है। ये उपलब्धियां नदियों में बिना उपचारित सीवेज के प्रवाह को रोकने तथा शहरी स्वच्छता अवसंरचना को सुदृढ़ करने के मिशन के मूल उद्देश्य को और मजबूत करती हैं।

उत्तर प्रदेश के शुक्लागंज में प्रदूषण निवारण प्रयासों को एक बड़ी मजबूती मिली है, जहां ₹65 करोड़ की लागत से विकसित 5 एमएलडी क्षमता का सीवेज शोधन संयंत्र परिचालित किया गया है। यह परियोजना हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के अंतर्गत सीक्वेंशियल बैच रिएक्टर (SBR) तकनीक पर आधारित है। इस परियोजना से लगभग 3 लाख की आबादी को लाभ मिलेगा, सीवेज का प्रभावी इंटरसेप्शन एवं डायवर्जन सुनिश्चित होगा तथा गंगा नदी में सीवेज के प्रवाह को रोका जा सकेगा।

आगरा (उत्तर प्रदेश), जो यमुना बेसिन का एक प्रमुख शहर है, में प्रदूषण निवारण कार्य, आगरा परियोजना के अंतर्गत Q3 के दौरान 31 एमएलडी और 35 एमएलडी क्षमता के दो सीवेज शोधन संयंत्रों का संचालन शुरू किया गया है। ₹842 करोड़ की कुल लागत से स्वीकृत इस परियोजना में 13 एसटीपी के माध्यम से कुल 177.6 एमएलडी क्षमता विकसित की जानी है। HAM मॉडल के तहत SBR तकनीक पर आधारित यह परियोजना लगभग 25 लाख निवासियों को लाभान्वित करेगी, जिससे यमुना नदी में बिना उपचारित सीवेज के प्रवाह में उल्लेखनीय कमी आएगी और शहर की स्वच्छता व्यवस्था में सुधार होगा।

पवित्र नगरी वाराणसी में अस्सी–बीएचयू क्षेत्र में 55 एमएलडी क्षमता का सीवेज शोधन संयंत्र परिचालित किया गया है। ₹308 करोड़ की लागत से स्वीकृत यह परियोजना DBOT मॉडल के अंतर्गत SBR तकनीक पर आधारित है और लगभग 18 लाख की आबादी को सेवाएं प्रदान करेगी। इस संयंत्र के चालू होने से गंगा नदी को सीवेज प्रदूषण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जाएगी तथा शहर में दीर्घकालिक अपशिष्ट जल प्रबंधन को मजबूती मिलेगी।

पश्चिम बंगाल के नॉर्थ बैरकपुर में Q3 के दौरान 30 एमएलडी क्षमता का एक सीवेज शोधन संयंत्र परिचालित किया गया है। ₹154 करोड़ की लागत से स्वीकृत इस परियोजना के अंतर्गत कुल 38 एमएलडी क्षमता के दो एसटीपी प्रस्तावित हैं। HAM मॉडल के तहत और एनजीटी मानकों के अनुरूप विकसित यह परियोजना लगभग 2.2 लाख लोगों को लाभ पहुंचाएगी तथा गंगा नदी में बिना उपचारित सीवेज के प्रवाह को रोकने में सहायक होगी।

इसके अतिरिक्त, बिहार के पटना स्थित कंकड़बाग एसटीपी, जिसे पहले 15 एमएलडी क्षमता के साथ आंशिक रूप से परिचालित किया गया था, वित्त वर्ष 2025–26 की तीसरी तिमाही में इसकी क्षमता बढ़ाकर 30 एमएलडी कर दी गई है। इससे शहर में सीवेज शोधन अवसंरचना और अधिक सुदृढ़ हुई है तथा गंगा के किनारे प्रदूषण निवारण प्रयासों को बल मिला है।

ये सभी उपलब्धियां स्वच्छ नदियों और बेहतर शहरी स्वच्छता के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाती हैं, साथ ही सतत एवं समग्र नदी पुनर्जीवन के मिशन के मूल उद्देश्य को और सशक्त बनाती हैं।


राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) की कार्यकारी समिति की 68वीं बैठक आयोजित

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राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) की कार्यकारी समिति (Executive Committee) की 68वीं बैठक का आयोजन गंगा और उसकी सहायक नदियों के अविरल (निर्बाध) एवं निर्मल प्रवाह को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया गया। बैठक की अध्यक्षता NMCG के महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल ने की। बैठक में नदी की पारिस्थितिकी बहाली, जैव विविधता संरक्षण, प्रकृति-आधारित समाधानों (Nature Based Solutions) के माध्यम से नवाचार, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा आधारभूत संरचना परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दिया गया।

बैठक में मंत्रालय एवं संबंधित एजेंसियों के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिनमें जल संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव एवं वित्तीय सलाहकार गौरव मसालदान, NMCG के उप महानिदेशक नलिन श्रीवास्तव, कार्यकारी निदेशक (परियोजना) बृजेंद्र स्वरूप, कार्यकारी निदेशक (तकनीकी) अनुप कुमार श्रीवास्तव, कार्यकारी निदेशक (प्रशासन) एस.पी. वशिष्ठ तथा कार्यकारी निदेशक (वित्त) भास्कर दासगुप्ता शामिल थे। राज्य सरकारों की ओर से परियोजना निदेशकों में पश्चिम बंगाल की  नंदिनी घोष, उत्तर प्रदेश के जोगेंद्र कुमार, बिहार अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (BUDCO) के प्रबंध निदेशक अनिमेष कुमार तथा NMCG के निदेशक राहुल द्विवेदी उपस्थित रहे।

गंगा बेसिन में संकटग्रस्त पक्षी प्रजातियों के संरक्षण को मंजूरी

गंगा बेसिन में संकटग्रस्त पक्षी प्रजातियों के संरक्षण के लिए एक नई परियोजना को स्वीकृति दी गई है। इस परियोजना का उद्देश्य रेत-टीलों (sandbar) पर घोंसला बनाने वाले पक्षियों, विशेषकर इंडियन स्किमर, के प्रजनन स्थलों की रक्षा करना है। नमामि गंगे मिशन–II के अनुरूप यह परियोजना दीर्घकालिक निगरानी, समुदाय की भागीदारी तथा साक्ष्य-आधारित संरक्षण पर केंद्रित है। चंबल और निचली गंगा में घोंसलों की निगरानी जारी रहेगी तथा बिजनौर, नरौरा और प्रयागराज में इसे प्रारंभ किया जाएगा। प्रशिक्षित स्थानीय समुदाय संवेदनशील रेत-टीलों की सुरक्षा, मानवीय हस्तक्षेप को कम करने और जागरूकता एवं क्षमता निर्माण गतिविधियों में सहयोग करेंगे।

यह परियोजना नदी-आधारित जीव-जंतुओं की जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक अनूठी पहल है, जो डॉल्फिन, मछलियों, कछुओं और मगरमच्छों से संबंधित NMCG के प्रयासों को पूरक बनाते हुए नदी जीव-जंतुओं पर समग्र ध्यान केंद्रित करेगी।

परियोजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन हेतु प्रशासनिक एवं व्यय स्वीकृतियां

बैठक के दौरान गंगा बेसिन राज्यों में विभिन्न परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन एवं सुचारू संचालन के लिए संशोधित प्रशासनिक और व्यय स्वीकृतियां प्रदान की गईं। इन स्वीकृतियों से व्यावहारिक क्रियान्वयन संबंधी चुनौतियों का समाधान होगा, संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा मिलेगा तथा परियोजनाओं की गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित होगी।

इन स्वीकृतियों से जिन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सुविधा मिलेगी, उनमें उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर जिले में 10 KLD फीकल स्लज एवं सेप्टेज ट्रीटमेंट प्लांट, कानपुर में मौजूदा सीवरेज अवसंरचना का पुनर्वास एवं मुख्य सब-स्टेशन का नवीनीकरण, वाराणसी में गंगा सतह की स्वच्छता हेतु ट्रैश स्किमर परियोजना, बिहार के दानापुर, फुलवारी शरीफ और फतुहा में इंटरसेप्शन एवं डायवर्जन तथा एसटीपी परियोजनाएं, झारखंड के फुसरो में इंटरसेप्शन एवं डायवर्जन तथा एसटीपी परियोजना, तथा पश्चिम बंगाल में गार्डन रीच और कूरापुकुर स्थित दो प्रमुख गंगा प्रदूषण नियंत्रण परियोजनाओं में छोटे संशोधन शामिल हैं।

प्रकृति-आधारित समाधानों को बढ़ावा

कार्यकारी समिति ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक नवोन्मेषी दृष्टिकोण अपनाते हुए दिल्ली में यमुना में गिरने वाले शास्त्री पार्क नाला, गौशाला नाला तथा कैलाश नगर/रमेश नगर नालों के इन-सीटू उपचार और पुनर्जीवन हेतु प्रकृति-आधारित समाधान (Nature Based Solutions) परियोजना को मंजूरी दी। यह पर्यावरण-अनुकूल और प्रभावी पहल है, जिसके अंतर्गत चट्टानी फिल्टर, पत्थर की चिनाई और जलीय पौधों के माध्यम से कच्चे सीवेज का प्राकृतिक उपचार कर उसे यमुना में प्रवेश से पहले ही शुद्ध किया जाएगा।

सांस्कृतिक विरासत संरक्षण हेतु गोमती नदी उद्गम स्थल का पुनर्विकास

समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में गोमती नदी के उद्गम स्थल की प्राकृतिक पवित्रता और सांस्कृतिक पहचान को पुनर्स्थापित करने के लिए एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इस योजना में आधुनिक अवसंरचना विकास, कैचमेंट क्षेत्र उपचार, जल स्रोतों का पुनर्जीवन तथा माधोटांडा नगर से निकलने वाले सीवेज का प्रकृति-आधारित उपचार शामिल है। साथ ही घाटों और आरती मंचों का विकास, झीलों का पुनर्जीवन और कछुओं के आवासों का संरक्षण भी किया जाएगा। श्मशान, पंचवटीका और योग मंडप जैसी सुविधाएं स्थल के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को और बढ़ाएंगी।

इन सभी स्वीकृतियों के माध्यम से कार्यकारी समिति ने नदी-आधारित जैव विविधता संरक्षण को सुदृढ़ करने, प्रकृति-आधारित समाधानों को मुख्यधारा में लाने, नदियों से सांस्कृतिक जुड़ाव को मजबूत करने तथा गंगा के पुनर्जीवन के लिए महत्वपूर्ण परियोजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन की दिशा में NMCG के संकल्प को और सशक्त किया है।

स्वच्छ गंगा मिशन को गति: राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की 67वीं कार्यकारी समिति में बड़े शोध व प्रदूषण नियंत्रक प्रोजेक्ट्स को मंजूरी

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राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) की 67वीं कार्यकारी समिति (EC) की बैठक का आयोजन महानिदेशक राजीव कुमार मितल की अध्यक्षता में किया गया। बैठक में गंगा नदी के पुनर्जीवन, प्रदूषण नियंत्रण, वैज्ञानिक शोध, यमुना नदी के संरक्षण और दिल्ली के स्कूलों में जन-जागरूकता को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।

बैठक में डब्ल्यूआर मंत्रालय, एनएमसीजी और विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

वैज्ञानिक शोध आधारित नदी संरक्षण पर जोर

EC ने कई बड़े शोध परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिनका उद्देश्य गंगा बेसिन में वैज्ञानिक समझ को मजबूत कर डेटा-आधारित योजना को बढ़ावा देना है। मंजूर परियोजनाओं में शामिल हैं—

  • हिमालयी गंगा हेडस्ट्रीम ग्लेशियरों की मॉनिटरिंग

  • गंगा का डिजिटल ट्विन विकसित करना

  • 1,100 किमी में SONAR आधारित नदी तल सर्वे (बिजनौर से बलिया तक)

  • पुरातन पेलियो-चैनल्स के जरिए ग्राउंडवॉटर रिचार्ज

  • ऐतिहासिक मानचित्रों का डिजिटाइजेशन और जियोस्पेशल डेटाबेस

ये परियोजनाएँ AI, रिमोट सेंसिंग और हाइड्रोलॉजिकल मॉडलिंग को river basin प्रबंधन में जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

पश्चिम बंगाल में बड़ा शहरी प्रदूषण नियंत्रण प्रोजेक्ट मंजूर

सिलीगुड़ी में महाआनंदा नदी के प्रदूषण नियंत्रण के लिए ₹361.86 करोड़ की परियोजना को मंजूरी:

  • 25 इंटरसेप्शन एवं डायवर्ज़न संरचनाएँ

  • 4 लिफ्टिंग स्टेशन

  • 27 MLD और 22 MLD क्षमता के दो STP

  • HAM आधारित PPP मॉडल पर क्रियान्वयन

इससे शहरी स्वच्छता में व्यापक सुधार होगा और नदी में प्रदूषण भार कम होगा।


यमुना के लिए कोरोनेशन पिलर STP से सुरक्षित निस्तारण

EC ने दिल्ली के कोरोनेशन पिलर STP से उपचारित अपशिष्ट जल को सुरक्षित रूप से यमुना नदी तक ले जाने की परियोजना को मंजूरी दी। परियोजना में शामिल होंगे—

  • जहांगिरपुरी ड्रेन से अवैध सीवेज टैपिंग

  • नए पंपिंग स्टेशन

  • राइजिंग मेन और RCC चैनल

  • ट्रस ब्रिज

  • ट्रिटेड वाटर की सुरक्षित डिलीवरी

यह यमुना एक्शन प्लान को मजबूत करेगा।

 "यूथ फॉर गंगा–यमुना" पहल को मंजूरी

₹39.37 लाख की इस परियोजना के तहत—

  • दिल्ली–NCR के 200+ स्कूलों में 2.5 लाख से अधिक बच्चों को जागरूक किया जाएगा

  • "रिवर यूथ क्लब" बनाए जाएंगे

  • जल संरक्षण पर व्यवहारिक परिवर्तन को बढ़ावा दिया जाएगा



निष्कर्ष

इन सभी अनुमोदनों के साथ, EC ने—

  • नदी संरक्षण को वैज्ञानिक शोध आधारित दिशा

  • प्रदूषण नियंत्रण को मजबूत आधार

  • जल प्रबंधन प्रणाली में सुधार

  • युवा जागरूकता को नया आयाम

प्रदान किया है।
यह गंगा और यमुना दोनों की पुनर्जीवन पहलों को गति देने वाला महत्वपूर्ण कदम है।

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