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सरगुजा एकलव्य मामले पर मुख्यमंत्री हुए सख्त: जिला कलेक्टर से की फोन पर सीधी बात

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दिए जांच के निर्देश, कहा - बच्चियों को अपनी समस्या बताने के लिए पैदल निकलना पड़े, यह स्वीकार्य नहीं

जिम्मेदारी तय कर लापरवाह अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश

विद्यालय की बिजली, पढ़ाई, मेस सहित सभी व्यवस्थाएं तत्काल दुरुस्त करने के दिए निर्देश

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सरगुजा जिले के शिवपुर एकलव्य आवासीय विद्यालय की छात्राओं के अपनी समस्याओं को लेकर पैदल कलेक्टोरेट के लिए निकलने की घटना को गंभीरता से लिया है। घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ने सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत से दूरभाष पर चर्चा कर पूरे मामले की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने विद्यालय में लंबे समय से समस्याएं बने रहने और छात्राओं को अपनी बात रखने के लिए इस तरह पैदल निकलने की स्थिति उत्पन्न होने पर कड़ी नाराजगी जताई।

मुख्यमंत्री साय ने कलेक्टर से कहा कि बच्चियों को अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए विद्यालय से पैदल निकलना पड़े, यह स्थिति किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है। यदि विद्यालय में लंबे समय से बिजली सहित अन्य समस्याएं बनी हुई थीं, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा समय रहते उनका समाधान क्यों नहीं किया गया। 

मुख्यमंत्री ने कलेक्टर को पूरे प्रकरण की जांच कर जिम्मेदारी तय करने और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदिवासी अंचलों के आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा तथा मूलभूत सुविधाओं को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने छात्राओं द्वारा सामने लाई गई बिजली, शिक्षकों की कमी, नियमित पढ़ाई, मेस तथा साफ-सफाई से जुड़ी समस्याओं का तत्काल निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कलेक्टर से कहा कि केवल वर्तमान समस्याओं का समाधान पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे छात्राओं की समस्याएं विद्यालय एवं छात्रावास स्तर पर ही समय पर सुनी और दूर की जा सकें।

मुख्यमंत्री ने आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों की व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा और अधिकारियों द्वारा सतत निरीक्षण सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि छात्रावासों में रहने वाले बच्चों को किसी परेशानी के समाधान के लिए प्रशासन तक स्वयं पहुंचने की ऐसी स्थिति दोबारा उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। बच्चों की समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी लेना तथा समय पर उनका समाधान करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के आदिवासी अंचलों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार लगातार संसाधन उपलब्ध करा रही है। इन संसाधनों और योजनाओं का लाभ बच्चों तक सही ढंग से पहुंचे, यह सुनिश्चित करना मैदानी अधिकारियों की जिम्मेदारी है। शासन की मंशा स्पष्ट है कि प्रत्येक बच्चे को पढ़ाई के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और सकारात्मक वातावरण मिले।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे बच्चे हम पर विश्वास करके आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी छोटी से छोटी समस्या को भी संवेदनशीलता के साथ सुनना और उसका समयबद्ध समाधान करना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने जिला प्रशासन को छात्राओं से संवाद बनाए रखने और विद्यालय की व्यवस्थाओं में किए जा रहे सुधारों की सतत निगरानी करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट का किया शुभारंभ, छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को नई मजबूती

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रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पचपेड़ी नाका स्थित रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल परिसर में अत्याधुनिक रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने नई कैंसर इकाई में उपलब्ध उपचार सुविधाओं एवं अत्याधुनिक मशीनरी का अवलोकन किया तथा अस्पताल प्रबंधन एवं चिकित्सकों को इस महत्वपूर्ण पहल के लिए शुभकामनाएं दीं। इस दौरान साय ने डॉ. संदीप दवे के भाई प्रदीप दवे को पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल पिछले 36 वर्षों से छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि डॉ. संदीप दवे के भाई स्वर्गीय प्रदीप दवे का कैंसर से निधन हुआ था। इस व्यक्तिगत पीड़ा ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खिलाफ व्यापक स्तर पर काम करने का संकल्प मजबूत किया। आज उसी संकल्प का परिणाम रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट के रूप में सामने आया है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान आने वाले समय में हजारों-लाखों लोगों को बेहतर कैंसर उपचार उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ा है। कैंसर मरीजों को अब एक ही परिसर में जांच, उपचार और आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। उन्होंने डॉ. संदीप दवे और उनकी पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि निजी क्षेत्र की ऐसी पहल से प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार को और गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्षों में छत्तीसगढ़ ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है। पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के कार्यकाल में स्वास्थ्य संस्थानों के विस्तार को गति मिली और वर्तमान सरकार भी पिछले ढाई वर्षों से प्रदेश के कोने-कोने तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेशवासियों को उपचार के लिए प्रदेश से बाहर न जाना पड़े और उन्हें आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं अपने ही प्रदेश में उपलब्ध हों।

कैंसर की रोकथाम में स्क्रीनिंग और शुरुआती जांच जरूरी : डॉ. रमन सिंह

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट के शुभारंभ को छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि इस संस्थान के पीछे सेवा और संवेदना की भावना जुड़ी हुई है। डॉ. दवे के भाई की कैंसर से मृत्यु ने उन्हें गहरा आघात दिया और संभवतः इसी पीड़ा ने कैंसर के उपचार के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने की प्रेरणा दी। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि कैंसर केवल मरीज की नहीं, बल्कि पूरे परिवार की सामूहिक पीड़ा होती है। उन्होंने कैंसर की समय पर पहचान के लिए नियमित स्क्रीनिंग को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शुरुआती चरण में कैंसर की पहचान होने पर उपचार की संभावनाएं काफी बेहतर हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में पहले से उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं के साथ अब कैंसर उपचार की सुविधा जुड़ने से मरीजों को एक ही छत के नीचे व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

15 मेडिकल कॉलेज और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से स्वास्थ्य सेवाओं का बढ़ा दायरा : स्वास्थ्य मंत्री

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि रामकृष्ण केयर कैंसर इंस्टीट्यूट के शुभारंभ से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में एक महत्वपूर्ण नई कड़ी जुड़ी है। इसका लाभ छत्तीसगढ़ सहित देश के अन्य हिस्सों के मरीजों को भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के समय छत्तीसगढ़ में केवल एक मेडिकल कॉलेज था। तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के प्रयासों से मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 10 हुई और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में पिछले ढाई वर्षों में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के बाद प्रदेश में अब 15 मेडिकल कॉलेज हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि इसी अवधि में प्रदेश में सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाओं का भी विस्तार हुआ है।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में दो नए सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों पर काम हो रहा है। बस्तर में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की सुविधा शुरू होने से गंभीर मरीजों को उपचार के लिए एयरलिफ्ट कर रायपुर लाने की आवश्यकता में कमी आई है और जगदलपुर में हृदय जैसी जटिल सर्जरी भी संभव हो रही है। बिलासपुर में भी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का शुभारंभ हो चुका है।

इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक मोतीलाल साहू, चिकित्सक, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोग एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक भी उपस्थित थे।

राष्ट्रमंडल खेलों की रजत पदक विजेता ज्ञानेश्वरी यादव का मुख्यमंत्री निवास में भव्य स्वागत

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की 30 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि और आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति की घोषणा

ज्ञानेश्वरी की उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ का गौरव, बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा : मुख्यमंत्री

रायपुर- ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 में महिलाओं की 53 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में रजत पदक जीतकर देश और छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाने वाली राजनांदगांव की बेटी ज्ञानेश्वरी यादव का आज मुख्यमंत्री निवास में आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ज्ञानेश्वरी को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देते हुए उन्हें 30 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि तथा आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सम्मान  प्रदेश की प्रतिभा, परिश्रम और संकल्प का सम्मान है।


मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ज्ञानेश्वरी यादव ने अपने पहले ही राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतकर यह सिद्ध कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, कठोर परिश्रम और अनुशासन के बल पर कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि महिलाओं की 53 किलोग्राम भारोत्तोलन स्पर्धा में कुल 199 किलोग्राम वजन उठाकर ज्ञानेश्वरी ने न केवल देश के लिए पदक जीता, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है। यह उपलब्धि प्रदेश के खेल इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज होगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ज्ञानेश्वरी ने सीमित संसाधनों और अनेक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। कठिन परिस्थितियों में भी निरंतर अभ्यास, अनुशासन और समर्पण के बल पर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर सफलता हासिल की है। उनकी सफलता प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदार हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं रहती।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार को अपनी इस बेटी पर गर्व है। इसी भावना के साथ राज्य सरकार ने उन्हें आउट ऑफ टर्न डीएसपी पद पर पदोन्नति देने का निर्णय लिया है, ताकि उनकी उपलब्धि का सम्मान हो और प्रदेश के अन्य खिलाड़ी भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रेरित हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लासगो रवाना होने से पहले उन्हें ज्ञानेश्वरी से मिलने का अवसर मिला था। उस समय उन्होंने उनके उज्ज्वल प्रदर्शन के लिए शुभकामनाएं दी थीं। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतने के बाद उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से भी उन्हें बधाई दी थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज मुख्यमंत्री निवास में उनका स्वागत करते हुए कहा कि यह पूरे प्रदेश के लिए गर्व और उत्सव का क्षण है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए आधुनिक खेल अधोसंरचना, विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, बेहतर कोचिंग, आवश्यक संसाधन और हरसंभव प्रोत्साहन उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां प्रदेश का प्रत्येक प्रतिभाशाली खिलाड़ी अपनी क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ सके और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सके।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के अधिक से अधिक खिलाड़ी ओलंपिक, राष्ट्रमंडल खेल, एशियाई खेल और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में तिरंगा लहराएं तथा देश और प्रदेश का नाम विश्वभर में रोशन करें। ज्ञानेश्वरी यादव जैसी खिलाड़ियों की उपलब्धियां इस दिशा में नई पीढ़ी का आत्मविश्वास बढ़ाने का कार्य करेंगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ज्ञानेश्वरी भविष्य में भी अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से भारत और छत्तीसगढ़ का नाम विश्व मंच पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिभाओं को पहचानना, उन्हें अवसर देना और उनकी उपलब्धियों का सम्मान करना सरकार की खेल नीति का महत्वपूर्ण आधार है। यही प्रयास आने वाले समय में छत्तीसगढ़ को खेलों के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करेगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धरसींवा विधानसभा को दी निःशुल्क एम्बुलेंस की सौगात

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डीएमएफ से 19.65 लाख रुपये की लागत से उपलब्ध कराई गई आधुनिक एम्बुलेंस, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई मजबूती

हर जीवन अनमोल, समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास से धरसींवा विधानसभा क्षेत्र की जनता को निःशुल्क एम्बुलेंस की सौगात दी। मुख्यमंत्री ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया तथा विधायक अनुज शर्मा और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की उपस्थिति में एम्बुलेंस के चालक को चाबी सौंपी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक समय पर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। इसी सोच के अनुरूप प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में लोगों को त्वरित चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो सके।


मुख्यमंत्री साय ने धरसींवा विधानसभा क्षेत्र के नागरिकों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि किसी भी मरीज के लिए उपचार के शुरुआती क्षण अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। समय पर अस्पताल पहुंचने से अनेक गंभीर परिस्थितियों में जीवन बचाया जा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह नई एम्बुलेंस गर्भवती महिलाओं, गंभीर रूप से बीमार मरीजों, बुजुर्गों तथा सड़क दुर्घटनाओं या अन्य आकस्मिक घटनाओं में घायल लोगों को शीघ्र स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि यह सुविधा न केवल चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाएगी, बल्कि क्षेत्रवासियों में स्वास्थ्य सुरक्षा का विश्वास भी मजबूत करेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। अस्पतालों के उन्नयन, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति, दवाइयों की सुगम उपलब्धता और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण पहल की जा रही हैं। उनका कहना था कि स्वस्थ नागरिक ही समृद्ध समाज और विकसित राज्य की आधारशिला होते हैं, इसलिए जनस्वास्थ्य से जुड़े प्रत्येक प्रयास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

इस अवसर पर धरसींवा विधानसभा के विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि क्षेत्रवासियों की लंबे समय से एक आधुनिक एम्बुलेंस की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जिला खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) के माध्यम से लगभग 19 लाख 65 हजार रुपये की लागत से यह अत्याधुनिक एम्बुलेंस उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि इस सुविधा के शुरू होने से धरसींवा क्षेत्र के लोगों को आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं पहले की तुलना में अधिक तेज़ और प्रभावी ढंग से मिल सकेंगी।

उन्होंने बताया कि यह एम्बुलेंस सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, धरसींवा को सौंपी गई है, जहां से इसका संचालन किया जाएगा। यह सेवा चौबीसों घंटे क्षेत्रवासियों को उपलब्ध रहेगी। उन्होंने कहा कि गंभीर मरीजों को रेफरल अस्पतालों तक सुरक्षित एवं समयबद्ध पहुंचाने में भी यह एम्बुलेंस अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगी।


उल्लेखनीय है कि धरसींवा विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। डीएमएफ के माध्यम से उपलब्ध कराई गई यह निःशुल्क एम्बुलेंस क्षेत्र के हजारों नागरिकों को आपातकालीन चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

वर्तमान चुनौतियों और आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार नए आपराधिक कानूनों ने न्याय व्यवस्था में लाया ऐतिहासिक परिवर्तन : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस राज्य स्तरीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री साय ने कहा— आम नागरिक को त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध न्याय दिलाना नए कानूनों का मूल उद्देश्य

समन्वित प्रयासों से नए कानूनों और डिजिटल न्याय प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ बनेगा देश का अग्रणी राज्य - मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा

ई-साक्ष्य, ई-समन, न्याय श्रुति, सीसीटीएनएस और आईसीजेएस जैसी डिजिटल व्यवस्थाओं से न्याय प्रणाली हो रही अधिक प्रभावी और जवाबदेह

नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य में सतत प्रशिक्षण, मॉनिटरिंग और तकनीकी क्षमता विकास पर विशेष जोर

रायपुर- वर्तमान समय की आवश्यकताओं और बदलती चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए नए आपराधिक कानून भारत की न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन के वाहक बने हैं। इन कानूनों का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि आम नागरिक को त्वरित, पारदर्शी, सुलभ और समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्रणालियों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को न्याय प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाकर न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, विश्वसनीय और जवाबदेह बनाया गया है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर में आयोजित "स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस" राज्य स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगभग डेढ़ सौ वर्ष पुराने औपनिवेशिक कानूनों के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू किए गए हैं। इन कानूनों की मूल भावना नागरिक-केंद्रित न्याय व्यवस्था की स्थापना है, जिसमें पीड़ित को शीघ्र न्याय मिले और अपराधी कानून के शिकंजे से बच न सके।

उन्होंने कहा कि पुराने कानून ऐसे समय में बने थे, जब डिजिटल तकनीक, सीसीटीवी, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और आधुनिक फॉरेंसिक विज्ञान का अस्तित्व नहीं था। आज अपराधों की प्रकृति बदल चुकी है और तकनीक न्याय व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा बन गई है। नए कानूनों ने डिजिटल साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तथा वैज्ञानिक फॉरेंसिक जांच को विधिक मान्यता देकर अपराध अनुसंधान और अभियोजन को नई मजबूती प्रदान की है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की शाखा प्रारंभ होने से अपराध अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया को नई दिशा मिलेगी। ई-साक्ष्य जैसी व्यवस्था इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के सुरक्षित संरक्षण और उनकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के उपयोग से न्याय प्रक्रिया पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और प्रभावी हुई है। पहले समन की तामील में कई दिन लग जाते थे, जबकि अब ई-समन के माध्यम से सूचना तत्काल संबंधित व्यक्ति तक पहुंच रही है और उसकी डिजिटल ट्रैकिंग भी संभव हो गई है। न्याय श्रुति जैसी व्यवस्था न्यायालयीन कार्यवाही के सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के साथ-साथ ऑनलाइन एवं हाइब्रिड सुनवाई को भी अधिक सक्षम बना रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) के माध्यम से देशभर के पुलिस थाने डिजिटल रूप से एक-दूसरे से जुड़े हैं। इससे अपराधियों का रिकॉर्ड तत्काल उपलब्ध हो जाता है और पुलिस को त्वरित कार्रवाई में सुविधा मिलती है। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ के सभी थाने ऑनलाइन मोड में कार्यरत हैं तथा राज्य में अब तक 1 लाख 97 हजार 547 एफआईआर ऑनलाइन दर्ज की जा चुकी हैं। नागरिकों को डिजिटल हस्ताक्षरित एफआईआर की प्रति भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन, जेल और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच सुरक्षित डिजिटल समन्वय स्थापित कर रहा है। इससे सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान संभव हुआ है और न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली अनावश्यक देरी में उल्लेखनीय कमी आई है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि तकनीक निरंतर विकसित हो रही है। इसलिए न्याय व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को समय-समय पर प्रशिक्षण प्राप्त करना आवश्यक है। राज्य सरकार नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सतत प्रशिक्षण, क्षमता विकास और नियमित मॉनिटरिंग के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा कि तीनों नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य की आपराधिक न्याय प्रणाली अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक, त्वरित और तकनीक आधारित बनेगी। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय न्याय संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम देश की न्याय व्यवस्था में व्यापक बदलाव लेकर आए हैं। इन कानूनों की सफलता केवल उनके लागू होने में नहीं, बल्कि सभी संबंधित संस्थाओं द्वारा उनके प्रभावी क्रियान्वयन में निहित है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आज की चर्चा केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपराधिक अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया में व्यापक परिवर्तन का प्रतीक है। ई-साक्ष्य, ई-चालान, न्याय श्रुति तथा डिजिटल फॉरेंसिक्स जैसी व्यवस्थाएं नए कानूनों की मूल भावना को साकार करने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। विशेष रूप से ई-साक्ष्य को उन्होंने साक्ष्य प्रबंधन की समग्र एवं एकीकृत प्रणाली बताते हुए कहा कि इससे साक्ष्यों की विश्वसनीयता और प्रामाणिकता सुनिश्चित होगी।

उन्होंने कहा कि न्याय की प्रक्रिया अपराध स्थल से प्रारंभ होती है। यदि प्रारंभिक जांच वैज्ञानिक, निष्पक्ष और पारदर्शी होगी, तो पूरी न्यायिक प्रक्रिया अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनेगी। तकनीक न्यायिक विवेक का स्थान नहीं ले सकती, लेकिन उसे अधिक प्रभावी अवश्य बना सकती है।

मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि जून माह के दौरान जिला न्यायालयों में लगभग 9,910 मामलों तथा उच्च न्यायालय में 58 मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई। उन्होंने सभी हितधारकों से न्याय श्रुति प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 ने इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल अभिलेखों को व्यापक कानूनी मान्यता प्रदान की है, जबकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 ने अपराध पंजीयन, अनुसंधान, तलाशी, जब्ती, वीडियो रिकॉर्डिंग तथा इलेक्ट्रॉनिक संचार जैसी प्रक्रियाओं में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा दिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी संबंधित संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ नए आपराधिक कानूनों एवं डिजिटल न्याय प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन में देश का अग्रणी राज्य बनेगा।

उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि यह कार्यशाला न्याय व्यवस्था के इतिहास में मील का पत्थर सिद्ध होगी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की समीक्षा के बाद इसके त्वरित क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए, जिसके परिणामस्वरूप न्याय एवं कानून व्यवस्था के डिजिटलीकरण की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है।
उन्होंने कहा कि नए आपराधिक कानूनों की मूल भावना यह सुनिश्चित करना है कि निचली अदालत से लेकर उच्चतम न्यायालय तक न्यायिक प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबित न रहे और प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध न्याय मिल सके। उन्होंने "वन डेटा, वन एंट्री" की अवधारणा पर कार्य करने, एफआईआर की मैनुअल प्रक्रिया समाप्त करने तथा ई-फॉरेंसिक, ई-साक्ष्य, न्याय श्रुति, सीसीटीएनएस, नेफिस, सीआरपीआई एप्लिकेशन और डीएनए सैंपलिंग जैसी आधुनिक प्रणालियों के व्यापक उपयोग पर बल दिया।

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार न्याय व्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए आवश्यक सभी संसाधन उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी न्याय सुनिश्चित किया जा सके।

कार्यक्रम में विधि एवं विधायी कार्य मंत्री गजेंद्र यादव, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एन.के. चन्द्रवंशी, उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायमूर्तिगण, प्रमुख सचिव गृह निहारिका बारिक सिंह, प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी कार्य विभाग सुषमा सावंत, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, विभिन्न जिलों के न्यायाधीश, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, सीसीटीएनएस के नोडल अधिकारी, अभियोजन अधिकारी, एफएसएल के अधिकारी, मेडिकल कॉलेजों के चिकित्सक, विधि विशेषज्ञ तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सत्य साई ग्राम के सेवा मॉडल को बताया जनकल्याण का प्रेरक उदाहरण

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शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर हुई सार्थक चर्चा, छत्तीसगढ़ में सेवाओं के विस्तार पर दिया जोर

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज कर्नाटक के सत्य साई ग्राम, मुद्देनहल्ली का दौरा कर शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण एवं मानवीय मूल्यों पर आधारित समग्र सेवा मॉडल का अवलोकन किया। उन्होंने वन वर्ल्ड वन फैमिली मिशन के संस्थापक सद्गुरु मधुसूदन साई से भेंट कर छत्तीसगढ़ में जनकल्याणकारी सेवाओं के विस्तार, विशेष रूप से निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण और मूल्य आधारित शिक्षा के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का आधार केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि स्वस्थ, शिक्षित और संस्कारित समाज है। राज्य सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण को सुशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखते हुए अंतिम व्यक्ति तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि समाजसेवी संस्थाओं के अनुभव, नवाचार और सेवा भावना से जनकल्याण के प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल, रायपुर द्वारा पूर्णतः निःशुल्क बाल हृदय शल्य चिकित्सा (पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी) के माध्यम से हजारों बच्चों को नया जीवन देने के कार्य की मुख्यमंत्री ने विशेष सराहना की। उन्होंने इसे मानवता और सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए अस्पताल के विस्तार, मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल की स्थापना तथा भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा की।

मुख्यमंत्री साय मूल्य आधारित शिक्षा पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सम्मेलन में विश्व के लगभग 25 देशों से आए 100 से अधिक शिक्षकों एवं शिक्षाविदों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, सेवा, करुणा, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व का भी आधार होनी चाहिए। मूल्य आधारित शिक्षा ही संवेदनशील नागरिकों और सशक्त राष्ट्र का निर्माण करती है।

मुख्यमंत्री ने सत्य साई अन्नपूर्णा ट्रस्ट द्वारा संचालित साईश्योर न्यूट्रास्यूटिकल्स इकाई का भी अवलोकन किया। साईश्योर मल्टी-न्यूट्रिएंट हेल्थ मिक्स के माध्यम से देश के 25 राज्यों एवं 4 केंद्रशासित प्रदेशों में लगभग एक करोड़ बच्चों तक पोषण सहायता पहुंचाई जा रही है। मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़ के विद्यालयों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में ऐसे नवाचारों के माध्यम से बच्चों के पोषण स्तर को और बेहतर बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की। छत्तीसगढ़ के लगभग 300 युवाओं को यहां नर्सिंग शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ-साथ सेवा भाव से प्रेरित दक्ष स्वास्थ्य मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।

मुख्यमंत्री साय ने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ सरकार और वन वर्ल्ड वन फैमिली मिशन के बीच सहयोग से स्वास्थ्य, शिक्षा और पोषण के क्षेत्रों में नई संभावनाएं विकसित होंगी तथा समाज के गरीब, वंचित और जरूरतमंद वर्गों तक गुणवत्तापूर्ण सेवाओं का दायरा और अधिक व्यापक होगा। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे सभी प्रयासों का स्वागत करती है, जो सेवा, संवेदना और सुशासन के माध्यम से जनजीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य करते हैं।

मुख्यमंत्री के नेतृत्व में खनन क्षेत्र में हासिल हुई एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि

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सीएमडीसी एवं जेएनएआरडीडीसी के बीच हुआ ऐतिहासिक एमओयू 

क्रिटिकल मिनरल्स के अनुसंधान एवं वैज्ञानिक विकास को मिलेगी नई दिशा

रायपुर- प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के "क्रिटिकल मिनरल मिशन" एवं "आत्मनिर्भर भारत" के विजन को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने एक और महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में राज्य सरकार खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक, सतत एवं मूल्यवर्धित उपयोग की दिशा में लगातार प्रभावी पहल कर रही है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीएमडीसी) और जवाहरलाल नेहरू एल्युमिनियम अनुसंधान, विकास एवं डिजाइन केंद्र (जेएनएआरडीडीसी), नागपुर के मध्य आज एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व, सीएमडीसी के अध्यक्ष सौरभ सिंह, खनिज साधन विभाग के सचिव पी. दयानंद,  तथा प्रबंध संचालक रजत बंसल के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। 

एमओयू के माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान, खनन, खनिज संसाधनों के मूल्य संवर्धन तथा क्रिटिकल मिनरल्स के विकास को नई दिशा मिलेगी। साथ ही राज्य में उपलब्ध खनिज संपदा का योजनाबद्ध, समयबद्ध एवं आधुनिक तकनीकों के माध्यम से बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा, जिससे छत्तीसगढ़ के समग्र विकास को गति मिलेगी।

एमओयू एक्सचेंज कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि पंकज कुलश्रेष्ठ ने अपने संबोधन में अनुसंधान आधारित खनिज विकास, नवाचार और संस्थागत सहयोग के महत्व पर बल देते हुए कहा कि यह साझेदारी राज्य एवं देश के खनिज क्षेत्र के लिए दूरगामी परिणाम देने वाली पहल साबित होगी। भारतीय खान ब्यूरो के कंट्रोलर ऑफ माइंस डॉ. बी.एल. गुर्जर ने सीएमडीसी एवं खनिज साधन विभाग के बीच बेहतर समन्वय की सराहना करते हुए कहा कि दोनों संस्थाओं का तालमेल राज्य के खनिज क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान कर रहा है। 

कार्यक्रम में सीएमडीसी के महाप्रबंधक यू.के. कुरैशी ने निगम की 25 वर्षों की विकास यात्रा, प्रमुख उपलब्धियों, संचालित खनिज परियोजनाओं, भविष्य की कार्ययोजनाओं तथा सेवा प्रदाता के रूप में निगम की सफल पहलों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने छत्तीसगढ़ में उपलब्ध खनिज संसाधनों की अपार संभावनाओं तथा उनके वैज्ञानिक एवं समावेशी दोहन के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी। वहीं रीजनल कंट्रोलर ऑफ माइंस प्रेम प्रकाश ने सीएमडीसी की टिन एवं कोरंडम परियोजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिले हैं तथा खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता एवं वैधानिक प्रक्रियाओं को मजबूती मिली है।

जेएनएआरडीडीसी के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. उपेंद्र सिंह ने बताया कि संस्थान रेड मड से गैलियम एवं वैनेडियम तथा बॉक्साइट के उप-उत्पादों से स्कैंडियम की पुनर्प्राप्ति (रिकवरी) पर महत्वपूर्ण अनुसंधान कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे शोध भारत को क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

एमओयू का औपचारिक आदान-प्रदान भारतीय खान ब्यूरो के कंट्रोलर जनरल एवं जेएनएआरडीडीसी के निदेशक पंकज कुलश्रेष्ठ तथा सीएमडीसी के मुख्य महाप्रबंधक संजय कनकने ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में किया।

कार्यक्रम के अंत में सभी वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि सीएमडीसी एवं जेएनएआरडीडीसी के बीच यह सहयोग खनिज अनुसंधान, तकनीकी नवाचार, संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग तथा सतत खनन को नई दिशा देगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में खनिज क्षेत्र में हासिल यह एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। राज्य सरकार खनिज संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन, मूल्य संवर्धन और आधुनिक तकनीकों के उपयोग के माध्यम से प्रदेश की प्राकृतिक संपदा को विकास का आधार बना रही है। यह पहल न केवल प्रधानमंत्री के क्रिटिकल मिनरल मिशन और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूत करेगी, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध खनिज संपदा का सुनियोजित उपयोग कर राज्य के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और आर्थिक प्रगति को भी नई गति प्रदान करेगी।

कार्यक्रम में सीएमडीसी के मुख्य महाप्रबंधक संजय कनकने ने स्वागत उद्बोधन दिया उन्होंने एमओयू को खनिज क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि यह साझेदारी भविष्य में राज्य के खनिज विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।

माननीय मुख्यमंत्री महोदय की गरिमामयी उपस्थिति में मनाया जाएगा “दीदी के गोठ” का वार्षिकोत्सव

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“दीदी के गोठ” की एक वर्ष की सफल यात्रा पूर्ण — वार्षिकोत्सव समारोह 09 जुलाई 2026 को

रायपुर- पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के तत्वावधान में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन – बिहान अंतर्गत संचालित “दीदी के गोठ” कार्यक्रम ने अपनी एक वर्ष की सफल, प्रेरणादायक एवं जनभागीदारी से परिपूर्ण यात्रा पूर्ण कर ली है। इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में “दीदी के गोठ वार्षिकोत्सव–2026” सह संकुल स्तरीय संगठन सम्मेलन का भव्य आयोजन 09 जुलाई 2026 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम, रायपुर में किया जा रहा है।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं की प्रेरक कहानियों, उनके संघर्ष, नेतृत्व क्षमता एवं आजीविका में प्राप्त उपलब्धियों को मंच प्रदान करते हुए उन्हें सम्मानित करना है। “दीदी के गोठ” ने बीते एक वर्ष में महिला स्व-सहायता समूहों को सशक्त करने, वित्तीय साक्षरता बढ़ाने तथा सामाजिक एवं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस गरिमामय अवसर पर छत्तीसगढ़ के माननीय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय उपमुख्यमंत्री एव पंचायत व ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा द्वारा की जाएगी।

कार्यक्रम में विभिन्न जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी, स्व-सहायता समूह की महिलाएँ एवं समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि सम्मिलित होकर इस सफल यात्रा के साक्षी बनेंगे।

विदित हो कि “दीदी के गोठ” के प्रथम एपिसोड का प्रसारण अगस्त 2025 में हुआ था, जो “लखपति दीदी” विषय पर केंद्रित था। इसके उपरांत प्रत्येक माह के द्वितीय गुरुवार को प्रदेश के विभिन्न जिलों की समूह की महिलाओं द्वारा ड्रोन दीदी, एफपीसी, जेंडर, सरस मेला, वित्तीय जागरूकता, साइबर सुरक्षा, सरस मेला तथा “छत्तीसकला” ब्रांड जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सफलता की प्रेरक कहानियाँ प्रस्तुत की गईं। “दीदी के गोठ” की एकवर्षीय सफल यात्रा का विशेष प्रसारण 09 जुलाई 2026 को किया जाएगा।

“दीदी के गोठ” ने ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य किया है। यह मंच न केवल संवाद का माध्यम बना है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास, नेतृत्व एवं आत्मनिर्भरता का प्रतीक भी बनकर उभरा है।

कार्यक्रम में वर्षभर की उपलब्धियों का प्रस्तुतिकरण, “दीदी के गोठ” में प्रतिभागिता करने वाली महिलाओं का सम्मान तथा भविष्य की कार्ययोजना पर भी चर्चा की जाएगी।

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन- बिहान द्वारा सभी नागरिकों ,संबंधित हितधारकों, स्व सहायता समूहों, इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया से आग्रह किया गया है कि इस महत्वपूर्ण अवसर पर अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कर कार्यक्रम को सफल बनाएं।

चिंतन शिविर 3.0 से सुशासन के अगले चरण की रूपरेखा तैयार होगी : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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डिजिटल गवर्नेंस, उभरती तकनीकों, कृषि समृद्धि और नेतृत्व विकास पर मंथन

पिछले चिंतन शिविरों के परिणामस्वरूप ई-ऑफिस, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतु जैसे नवाचार हुए साकार

रायपुर- चिंतन शिविर 3.0 का उद्देश्य शासन-प्रशासन को अधिक प्रभावी, आधुनिक, पारदर्शी और जनहितैषी बनाते हुए विकसित छत्तीसगढ़ के लिए दूरदर्शी नीति-निर्माण की मजबूत आधारशिला तैयार करना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर में सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा आईआईएम रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय मंत्रिमंडल चिंतन शिविर में मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद के सदस्य तथा देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने शासन के विभिन्न आयामों पर व्यापक मंथन करते हुए यह बात कही।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि चिंतन शिविर केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि शासन की कार्यसंस्कृति में निरंतर सुधार और नवाचार का माध्यम बन चुका है। पिछले दो संस्करणों से प्राप्त सुझावों को सरकार ने प्रभावी ढंग से धरातल पर उतारा है, जिसके सकारात्मक परिणाम आज प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि शासन में तकनीक, पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर आगे बढ़ना ही इस शिविर का मूल उद्देश्य है।

मुख्यमंत्रीसाय ने कहा कि चिंतन शिविर 3.0 के प्रथम दिवस में नेतृत्व विकास, सुशासन, उभरती प्रौद्योगिकियों तथा कृषि समृद्धि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए गए। प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने नेतृत्व, भावनात्मक संतुलन, सेवा-भाव और जनप्रतिनिधियों के नैतिक दायित्वों पर अपने विचार रखे। उन्होंने मूल्य-आधारित नेतृत्व और संवेदनशील प्रशासन को प्रभावी सुशासन की सबसे बड़ी आवश्यकता बताया।

शिविर में नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने "इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़" विषय पर संबोधित करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी, ड्रोन, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन तथा डेटा-आधारित प्रशासन के माध्यम से शासन व्यवस्था को अधिक दक्ष, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने तकनीक आधारित सेवा वितरण, नवाचार, रोजगार सृजन तथा डिजिटल समावेशन के लिए छत्तीसगढ़ के समक्ष उपलब्ध अवसरों की भी चर्चा की।

कृषि विषयक सत्र "कृषि से समृद्धि" में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद तथा कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन, बाजार संपर्क और तकनीक आधारित कृषि सुधारों पर अपने अनुभव साझा किए। विशेषज्ञों ने देश के विभिन्न राज्यों के सफल मॉडलों की जानकारी देते हुए किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत किए। इस दौरान मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने समूह आधारित विचार-मंथन में भी भाग लिया।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पिछले चिंतन शिविरों से प्राप्त सुझावों के आधार पर मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू की गई, जिससे फाइलों के निपटारे की प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और समयबद्ध बनी है। इसी प्रकार मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 तथा सेवा सेतु जैसे महत्वपूर्ण नवाचार भी इसी चिंतन प्रक्रिया का परिणाम हैं। आज सेवा सेतु के माध्यम से 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं नागरिकों को ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे आमजन को सरल, त्वरित और पारदर्शी सेवाएं मिल रही हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विश्वास व्यक्त किया कि चिंतन शिविर 3.0 से प्राप्त सुझाव सुशासन, तकनीक आधारित प्रशासन, कृषि सुधार, विभागीय समन्वय और जनसेवा के नए मानक स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के संकल्प के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए सरकार नवाचार, ज्ञान, तकनीक और प्रभावी नीति-निर्माण को निरंतर प्रोत्साहित करती रहेगी तथा चिंतन शिविर से निकले विचारों को शीघ्र ही ठोस नीतिगत और प्रशासनिक पहलों के रूप में लागू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश लगातार कार्रवाई से अवैध खनन गतिविधियों पर लग रहा है प्रभावी अंकुश

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बलौदाबाजार में 6 क्रशर सीलबंद, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में अवैध रेत उत्खनन में प्रयुक्त चैन माउंटेन जब्त

ड्रोन सर्वे के माध्यम से की गई जांच, खनिज विभाग की केंद्रीय उड़नदस्ता टीम ने की बड़ी कार्रवाई

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध लगातार कार्रवाई हो रही है। शासन की मंशा खनिज संसाधनों के संरक्षण, उनके नियमानुसार उपयोग तथा अवैध गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश सुनिश्चित करने की है। 

इसी कड़ी में खनिज साधन के विभाग के सचिव और संचालक के निर्देशानुसार केंद्रीय खनि उड़नदस्ता की संयुक्त टीम ने प्राप्त शिकायतों के आधार पर 21 एवं 22 जून 2026 को विभिन्न जिलों में औचक निरीक्षण एवं जांच अभियान चलाकर कार्रवाई की। इस दौरान जिला बलौदाबाजार के ग्राम खपरीडीह में गौण खनिज निम्न श्रेणी चूनापत्थर से संबंधित स्वीकृत अस्थायी भंडारण अनुज्ञप्ति स्थलों एवं खदानों का निरीक्षण किया गया। जांच में विभिन्न प्रकार की अनियमितताएं पाए जाने पर 06 क्रशर इकाइयों को सीलबंद किया गया तथा संबंधित संचालकों को जवाब प्रस्तुत करने हेतु नोटिस जारी किए गए।

इसी प्रकार जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के ग्राम दहिदा में महानदी क्षेत्र का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान एक चैन माउंटेन मशीन द्वारा अवैध रूप से रेत उत्खनन किया जाना पाया गया। खनिज अधिनियम के प्रावधानों के तहत उक्त मशीन को जब्त कर आगामी आदेश तक सीलबंद किया गया। मशीन को मशीन ऑपरेटर की सुपुर्दगी में दिया गया है तथा मशीन स्वामी को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

उक्त सभी स्थलों की जांच एवं सत्यापन ड्रोन सर्वेक्षण तकनीक के माध्यम से भी किया गया, जिससे खनन गतिविधियों का सटीक आकलन सुनिश्चित किया जा सके।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रदेश में अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण की गतिविधियों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा खनिज संपदा के नियमानुसार उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।

खनिज सचिव पी. दयानंद ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि आधुनिक तकनीक, ड्रोन सर्वेक्षण एवं सतत निगरानी के माध्यम से अवैध खनन गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए तथा शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। इस कार्रवाई में केंद्रीय उड़नदस्ता की संयुक्त जांच टीम एवं संबंधित जिलों की जिला स्तरीय टीम के अधिकारी उपस्थित रहे।

प्रदेशवासियों को 24×7 शिकायत सुविधा: मुख्यमंत्री साय ने सीएम हेल्पलाइन प्रणाली का किया शुभारंभ अवलोकन

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नवा रायपुर स्थित सीएम हेल्पलाइन कॉल सेंटर का किया अवलोकन, नागरिकों की शिकायतों के त्वरित निराकरण हेतु सशक्त व्यवस्था विकसित

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नवा रायपुर के सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट (सीबीडी) स्थित सीएम हेल्पलाइन कॉल सेंटर का अवलोकन किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश में नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान तथा सुशासन को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विकसित की गई “सीएम हेल्पलाइन एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली” की कार्यप्रणाली की जानकारी ली। मुख्यमंत्री साय के दूरदर्शी एवं संवेदनशील नेतृत्व में शुरू की गई यह व्यवस्था नागरिकों की आवाज को सीधे शासन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनेगी।

सीएम हेल्पलाइन एवं शिकायत प्रबंधन प्रणाली के अंतर्गत प्रदेश का कोई भी नागरिक टोल फ्री नंबर 1076 पर 24 घंटे, सातों दिन अपनी शिकायत दर्ज करा सकेगा। शिकायत दर्ज होते ही शिकायतकर्ता को एक विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान की जाएगी, जो ट्रैकर के रूप में कार्य करेगी। इसके माध्यम से नागरिक अपनी शिकायत की वर्तमान स्थिति, संबंधित विभाग, जिम्मेदार अधिकारी, की गई कार्रवाई तथा समाधान में लगने वाले संभावित समय की जानकारी आसानी से प्राप्त कर सकेंगे।

यह प्रणाली वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप और व्हाट्सएप सहित आधुनिक मल्टी-चैनल माध्यमों से संचालित होगी, जिससे शिकायत दर्ज करने और उसके समाधान की प्रक्रिया अधिक सरल, तेज और सुलभ बनेगी। नागरिक अपनी सुविधा के अनुसार विभिन्न माध्यमों से शिकायत दर्ज कर सकेंगे। इससे प्रदेश के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक प्रत्येक व्यक्ति की आवाज प्रभावी रूप से शासन तक पहुंचेगी और समस्याओं के निराकरण में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि नागरिक-प्रथम की भावना को केंद्र में रखकर विकसित की गई यह अभिनव पहल शासन और जनता के बीच संवाद को और अधिक मजबूत बनाएगी। इससे लोगों को शिकायतों के समाधान के लिए सीधी पहुंच की सुविधा मिलेगी, पारदर्शिता बढ़ेगी तथा शासन-प्रशासन की सेवाएं अधिक प्रभावी, उत्तरदायी और जनोन्मुख बन सकेंगी।

बरगद की छांव में सजी मुख्यमंत्री की चौपाल : सक्ती जिले के ग्राम ठठारी में ग्रामीणों से किया सीधा संवाद

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रायपुर- सुशासन तिहार के अंतर्गत सक्ती जिले के ग्राम ठठारी के प्रवास पर पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने चतुर्भुज तालाब पार स्थित विशाल बरगद के पेड़ की छांव में जनचौपाल लगाकर ग्रामीणों से आत्मीय संवाद किया। खुले वातावरण में आयोजित इस चौपाल में मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं, सुझाव प्राप्त किए तथा शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी स्थिति का प्रत्यक्ष फीडबैक लिया।

जनचौपाल को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य केवल योजनाओं की समीक्षा करना नहीं, बल्कि यह जानना भी है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है या नहीं। उन्होंने ग्रामीणों से महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, बिजली, पानी तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में शीघ्र ही अत्याधुनिक सीएम हेल्पलाइन शुरू की जाएगी, जिसके माध्यम से नागरिक टोल फ्री नंबर, ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए अपनी शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। शिकायतों के समयबद्ध निराकरण की व्यवस्था होगी तथा लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हाल ही में महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त के रूप में प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं के खातों में राशि अंतरित की गई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सम्मान के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना की जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की सब्सिडी का लाभ लेकर उपभोक्ता बिजली खर्च में उल्लेखनीय कमी ला सकते हैं। उन्होंने कहा कि रामलला दर्शन योजना और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से श्रद्धालुओं को तीर्थ यात्रा का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और आधारभूत संरचना के क्षेत्र में तेजी से विकास कार्य किए जा रहे हैं तथा बस्तर में जनता के सहयोग से शांति और विकास का नया वातावरण स्थापित हुआ है।

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के समक्ष गांव की आवश्यकताओं, विकास कार्यों तथा विभिन्न योजनाओं से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों और सुझावों को गंभीरता से सुनते हुए क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने चतुर्भुज विष्णु मंदिर के निकट श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आरती घाट निर्माण की घोषणा की। ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए ठठारी में बैंक शाखा खोलने की घोषणा भी की। मुख्यमंत्री ने ठठारी को नगर पंचायत बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजने हेतु कलेक्टर को निर्देशित करते हुए कहा कि आने वाले समय में ठठारी को नगर पंचायत का दर्जा दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त क्षेत्र में सड़क निर्माण कार्य भी स्वीकृत करने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन का वास्तविक अर्थ शासन और जनता के बीच विश्वास, संवाद और सहभागिता को मजबूत करना है। जब जनप्रतिनिधि और अधिकारी सीधे लोगों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनते हैं, तभी योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना सुनिश्चित होता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रामीणों की समस्याओं का त्वरित, संवेदनशील और प्रभावी निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर ग्रामीणों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। बरगद की छांव में सजी यह चौपाल ग्रामीणों के लिए एक यादगार अवसर बन गई, जहां उन्हें अपनी बात सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का अवसर मिला।

जनचौपाल में सांसद कमलेश जांगड़े, संयोगिता युद्धवीर सिंह जूदेव सहित विभिन्न जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

आम की छांव में मुख्यमंत्री की चौपाल: खाट पर बैठे, ग्रामीणों की सुनी बात, मौके पर दिए समाधान

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निमधा में नर्सिंग कॉलेज, मिनी स्टेडियम और मंगल भवन की घोषणा

लापरवाह अधिकारियों को सख्त चेतावनी : महिलाओं को दिया ‘करोड़पति दीदी’ बनने का मंत्र

स्व-सहायता समूहों की सफलता को मिली नई पहचान, मुख्यमंत्री ने किया ‘आजीविका गाथा’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन

रायपुर- सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आज मरवाही विकासखंड के ग्राम निमधा में एक अनूठा और आत्मीय जनसंवाद देखने को मिला। मुख्यमंत्री विष्णुदेव  साय गांव के बीच आम के पेड़ की छांव में खाट पर बैठकर ग्रामीणों से रूबरू हुए, उनकी समस्याएं सुनीं और शासन की योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का प्रत्यक्ष फीडबैक लिया। उन्होंने ग्रामीणों से बिजली, पानी, राशन, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास जैसी मूलभूत सुविधाओं के संबंध में विस्तार से चर्चा की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा 1 मई से 10 जून तक पूरे प्रदेश में सुशासन तिहार का आयोजन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से शासन स्वयं गांवों तक पहुंचकर जनता की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिन समस्याओं का तत्काल निराकरण संभव है, उनका मौके पर ही समाधान किया जा रहा है, जबकि अन्य मामलों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।

जनचौपाल के दौरान ग्रामीणों और मरवाही विधायक प्रणव कुमार मरपच्ची ने जिले में नर्सिंग कॉलेज, ग्राम निमधा में मिनी स्टेडियम तथा सर्वसमाज के लिए विशाल मंगल भवन की मांग रखी। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों की भावनाओं का सम्मान करते हुए तीनों मांगों को तत्काल स्वीकृति प्रदान करते हुए उनकी घोषणा की।

ग्रामीणों द्वारा बिजली आपूर्ति संबंधी समस्याएं उठाए जाने पर मुख्यमंत्री ने मौके पर ही अधिकारियों से जानकारी ली और स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए आवश्यक कदम शीघ्र उठाए जाएंगे।

जनसंवाद के दौरान राजस्व विभाग से जुड़ी शिकायत सामने आने पर मुख्यमंत्री ने संबंधित राजस्व निरीक्षकों को कड़ी चेतावनी देते हुए स्पष्ट कहा कि जनता की समस्याओं का समय पर निराकरण करें, अन्यथा कठोर कार्रवाई के लिए तैयार रहें। मुख्यमंत्री के इस स्पष्ट संदेश से सुशासन और जवाबदेही के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता एक बार फिर सामने आई।

मुख्यमंत्री ने स्व-सहायता समूहों की महिलाओं और लखपति दीदियों से संवाद करते हुए उन्हें आर्थिक प्रगति की नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अब लक्ष्य केवल लखपति बनना नहीं, बल्कि करोड़पति दीदी बनना होना चाहिए। महिलाओं ने उन्हें बताया कि महतारी वंदन योजना से प्राप्त होने वाली राशि उनके परिवार, बच्चों की शिक्षा और घरेलू जरूरतों में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में महतारी वंदन योजना की 28वीं किस्त के रूप में प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं के खातों में राशि अंतरित की गई है, जिसका लाभ ग्राम निमधा सहित पूरे जिले की महिलाओं को मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार द्वारा 18 लाख प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी गई है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय सुविधाओं का व्यापक विस्तार हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा की कि प्रदेश में शीघ्र ही सीएम हेल्पलाइन प्रारंभ की जाएगी, जिसके माध्यम से नागरिक टोल फ्री नंबर, ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। शिकायतों के त्वरित और समयबद्ध निराकरण के लिए विशेष व्यवस्था विकसित की जा रही है।

जनचौपाल के दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों ने मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। महिलाओं ने विष्णु भोग चावल, ब्लैक राइस, शहद, पापड़ और लड्डू जैसे स्थानीय उत्पादों की आकर्षक टोकरी मुख्यमंत्री को भेंट की। मुख्यमंत्री ने महिलाओं की उद्यमशीलता और आत्मनिर्भरता की सराहना करते हुए कहा कि स्व-सहायता समूह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का सबसे प्रभावी माध्यम बन रहे हैं।

ग्रामीण परिवेश में आयोजित इस चौपाल में मुख्यमंत्री ने सरई के दोना-पत्तल में परोसे गए स्थानीय व्यंजनों - जामुन, कोईलार भाजी, बेल का शरबत, आम की चटनी और आमपना का स्वाद भी लिया।इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने जिले की स्व-सहायता समूहों की महिलाओं की प्रेरणादायक सफलता कहानियों पर आधारित ‘आजीविका गाथा’ कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक ग्रामीण महिलाओं के संघर्ष, आत्मविश्वास, परिश्रम और सफलता का जीवंत दस्तावेज है, जो हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भरता और उद्यमिता की दिशा में प्रेरित करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका यह दौरा केवल योजनाओं की समीक्षा नहीं, बल्कि लोगों के बीच बैठकर उनकी वास्तविक जरूरतों और अपेक्षाओं को समझने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि सुशासन का वास्तविक उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाना है और राज्य सरकार इसी संकल्प के साथ निरंतर कार्य कर रही है।

इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष समीरा पैकरा, उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह, नगर पालिका परिषद गौरेला के अध्यक्ष मुकेश दुबे, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल, आईजी रामगोपाल गर्ग, कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन, जिला पंचायत सीईओ मुकेश रावटे सहित जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित थे।

कोंडागांव के विकास का नया स्वर्णिम अध्याय: मुख्यमंत्री ने दी 152 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात

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बस्तर के सुदूर अंचलों तक पहुंचेगी विकास की रोशनी, 43 निर्माण एवं अधोसंरचना कार्यों का लोकार्पण-भूमिपूजन

40–45 डिग्री की गर्मी में उमड़ रहा जनसैलाब, मुख्यमंत्री ने कहा – जनता का यह विश्वास हमारी सबसे बड़ी ताकत

बड़े कनेरा को मिली विकास कार्यों की बड़ी सौगात, कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं

सुशासन तिहार के समाधान शिविर में योजनाओं की जमीनी हकीकत से हुए रूबरू

रायपुर- सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज कोंडागांव जिले के ग्राम बड़े कनेरा में आयोजित समाधान शिविर में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया, हितग्राहियों से संवाद किया तथा शासन की योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन भी किया।


सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 44-45 डिग्री की भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में दूर-दूर से पहुंचे ग्रामीणों का उत्साह इस बात का प्रमाण है कि जनता का सरकार पर विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने उपस्थित नागरिकों का अभिनंदन करते हुए कहा कि यह जनसहभागिता सुशासन की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

सुशासन तिहार का उद्देश्य जनता के बीच जाकर सुनना और समाधान करना

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तिहार का उद्देश्य केवल योजनाओं की समीक्षा करना नहीं, बल्कि जनता के बीच पहुंचकर यह जानना है कि योजनाओं का लाभ वास्तव में लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं। रायपुर में बैठकर जमीनी हकीकत का आकलन नहीं किया जा सकता, इसलिए सरकार गांव-गांव जाकर लोगों से सीधे संवाद कर रही है।

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि 1 मई से प्रारंभ हुआ सुशासन तिहार 10 जून तक चलेगा और इस दौरान प्राप्त आवेदनों का त्वरित निराकरण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बड़े कनेरा का यह शिविर प्रदेश का 19वां जिला स्तरीय समाधान शिविर है, जहां लोगों का उत्साह और सहभागिता उल्लेखनीय रही।

कोंडागांव को मिली 152 करोड़ की ऐतिहासिक सौगात सड़क, सिंचाई और अधोसंरचना परियोजनाओं से बदलेगी जनजातीय अंचल की तस्वीर

छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल बस्तर संभाग में बुनियादी सुविधाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने के संकल्प के साथ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कोंडागांव जिले के विकास का एक नया स्वर्णिम अध्याय लिख दिया है। सुशासन तिहार के अंतर्गत आयोजित समाधान शिविर में मुख्यमंत्री ने जिले को 152 करोड़ 18 लाख 84 हजार रुपये की लागत वाले 43 महत्वपूर्ण निर्माण एवं विकास कार्यों की सौगात दी।

इन कार्यों में जनता को त्वरित लाभ पहुंचाने वाले 96 करोड़ 30 लाख 63 हजार रुपये की लागत के 14 विकास कार्यों का लोकार्पण तथा भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए 55 करोड़ 88 लाख 21 हजार रुपये की लागत के 29 नए विकास कार्यों का भूमिपूजन शामिल है।

बड़े कनेरा को मिली विकास कार्यों की बड़ी सौगात

समाधान शिविर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने क्षेत्र के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। इन घोषणाओं से सड़क, पर्यटन, सामाजिक अधोसंरचना और धार्मिक स्थलों के विकास को नई गति मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने नारंगी नदी स्थित स्टॉप डेम सह पुलिया के जीर्णोद्धार के लिए 2 करोड़ रुपये की स्वीकृति की घोषणा की। इसके साथ ही केशकाल–बांसकोट–माकड़ी–एरला मार्ग के 53 किलोमीटर लंबे मार्ग के मजबूतीकरण कार्य को मंजूरी दी गई।

उन्होंने बड़े कनेरा से बड़ेबेंद्री, बाईकापदर और चिपावंड तक पुल-पुलियों सहित 12 किलोमीटर सड़क निर्माण तथा बड़े कनेरा से नवागुड़ा तक पुल-पुलियों सहित 5 किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य की घोषणा की।

स्थानीय व्यापार और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बड़े कनेरा में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स भवन का निर्माण कराया जाएगा। वहीं कोसारटेडा में पर्यटन विकास कार्य किए जाएंगे, जिससे क्षेत्र की पर्यटन संभावनाओं को नई पहचान मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने विश्रामपुरी में गोंडवाना भवन तथा केशकाल में सर्व आदिवासी समाज भवन निर्माण की घोषणा भी की। इसके अलावा बड़े कनेरा स्थित प्राचीन शिव मंदिर के जीर्णोद्धार की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण सरकार की प्राथमिकता है।

बड़े कनेरा बना जागरूकता और नवाचार का मॉडल

मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़े कनेरा एक जागरूक गांव के रूप में उभरकर सामने आया है। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही चमन लाल और पीएम सूर्य घर योजना के लाभार्थी आनंद कुमार पवार से मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां के लोग योजनाओं का लाभ लेकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया कि जिस घर में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान बना है, उसी घर में पीएम सूर्य घर योजना के तहत सोलर पैनल भी स्थापित किया गया है। इससे बिजली बिल शून्य हो गया है और परिवार ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मोदी की गारंटी के अधिकांश वादे हुए पूरे

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में  हमने "मोदी की गारंटी" के नाम से जो वादे किए थे, उनमें से अधिकांश को मात्र ढाई वर्षों के भीतर पूरा कर दिया गया है।

उन्होंने बताया कि पिछली सरकार के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना से वंचित रहे 18 लाख गरीब परिवारों के लिए सरकार ने सत्ता संभालते ही आवास स्वीकृत किए। आज छत्तीसगढ़ में प्रतिदिन लगभग 1600 प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण हो रहा है और इस मामले में राज्य देश में अग्रणी स्थान पर है।

किसानों, माताओं और बहनों के लिए कई बड़ी पहल

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों से 21 क्विंटल प्रति एकड़ धान खरीदा जा रहा है तथा 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान किया जा रहा है। साथ ही दो वर्षों का लंबित बोनस भी किसानों को प्रदान किया गया है। उन्होंने बताया कि महतारी वंदन योजना के तहत प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। आने वाले समय में 10 लाख लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी।

तेंदूपत्ता संग्राहकों और वनवासियों को मिला बड़ा लाभ


मुख्यमंत्री ने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण की दर को 4000 रुपये से बढ़ाकर 5500 रुपये प्रति मानक बोरा किया गया है। तेंदूपत्ता संग्राहकों के बच्चों को छात्रवृत्ति एवं प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है। वन आधारित आजीविका को मजबूत करने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

अटल डिजिटल सुविधा केंद्र से गांव में मिल रही 400 से अधिक सेवाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीणों को अपनी आवश्यक सेवाओं के लिए शहरों या कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। अटल डिजिटल सुविधा केंद्रों के माध्यम से 400 से अधिक सेवाएं गांव स्तर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।

इन केंद्रों में बैंकिंग सेवाएं, प्रमाण पत्र, भुगतान सेवाएं तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं से जुड़ी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं। आने वाले समय में मोबाइल एप के माध्यम से भी लोग घर बैठे आवेदन और प्रमाण पत्र प्राप्त कर सकेंगे।

जून से शुरू होगी मुख्यमंत्री हेल्पलाइन

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जून माह से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शुरू की जाएगी। इसके माध्यम से नागरिक घर बैठे अपनी समस्याएं दर्ज करा सकेंगे। प्रत्येक शिकायत के निराकरण के लिए समय-सीमा निर्धारित होगी और तय अवधि में समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।

बिजली बिल समाधान योजना से मिल रही राहत

मुख्यमंत्री ने नागरिकों से मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना का लाभ लेने की अपील करते हुए कहा कि कोरोना काल के दौरान बढ़े बिजली बिलों से राहत देने के लिए सरकार ने विशेष योजना शुरू की है। इसके तहत बकाया राशि में छूट और आसान किस्तों की सुविधा प्रदान की जा रही है। प्रदेश में लगभग 757 करोड़ रुपये की राहत दी जा रही है।

हर घर सोलर की दिशा में बढ़ रहा छत्तीसगढ़मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस प्रकार हर घर जल, हर घर बिजली, हर घर शौचालय और हर घर बैंक खाता अभियान सफल हुए हैं, उसी प्रकार अब हर घर सोलर लगाने का लक्ष्य लेकर सरकार आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत केंद्र और राज्य सरकार मिलकर लाखों परिवारों को सब्सिडी प्रदान कर रही हैं, जिससे लोग ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि विकास और सुशासन का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और इसी उद्देश्य से सुशासन तिहार के माध्यम से शासन स्वयं जनता के द्वार तक पहुंच रहा है।

इस अवसर पर बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं कोंडागांव विधायक लता उसेंडी, केशकाल विधायक नीलकंठ टेकाम, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव  सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के विशेष सचिव रजत बंसल, कलेक्टर नूपुर राशि पन्ना सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित थे।

कलिबेश्वर महादेव मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

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मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और संस्कृति-परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का सशक्त माध्यम: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

कलिबा में सामुदायिक भवन और हनुमान टेकरी में सूर्य नमस्कार प्रतिकृति निर्माण की घोषणा

कलिबेश्वर महादेव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में उमड़ा श्रद्धा और आस्था का सैलाब

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज अपने जशपुर प्रवास के दौरान विकासखंड कुनकुरी के ग्राम कलिबा में नवनिर्मित कलिबेश्वर महादेव मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी कौशल्या साय भी उपस्थित थीं। 

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यज्ञमंडप में हरिनाम संकीर्तन करते हुए परिक्रमा की तथा यज्ञशाला में विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की। उन्होंने मंदिर निर्माण को क्षेत्र की आस्था, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकजुटता से जुड़ा महत्वपूर्ण कार्य बताते हुए सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति सेवा, सद्भाव, सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश देती है। मंदिर केवल आस्था का केंद्र नहीं होते, बल्कि समाज को जोड़ने तथा संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का सशक्त माध्यम भी हैं।  ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का कार्य करते हैं।

मुख्यमंत्री साय ने ग्रामवासियों को नवनिर्मित मंदिर के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए ग्राम कलिबा में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 25 लाख रुपये की घोषणा की। साथ ही हनुमान टेकरी में सामुदायिक भवन तथा सूर्य नमस्कार की मुद्राओं की प्रतिकृति निर्माण की घोषणा भी की।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने अपने 28 माह के कार्यकाल की प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अधिकांश गारंटियों को तेजी से लागू किया है। उन्होंने बताया कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना के अंतर्गत अब तक 27वीं किस्त के रूप में महिलाओं के खातों में 17 हजार 500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अंतरित की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ भगवान श्री राम का ननिहाल है और राज्य सरकार रामलला दर्शन योजना के तहत अब तक 42 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को भगवान श्री राम के दर्शन करा चुकी है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के माध्यम से देशभर के 19 प्रमुख तीर्थ स्थलों की यात्रा भी कराई जा रही है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए प्रदेशभर में सुशासन तिहार का आयोजन किया जा रहा है। साथ ही राजस्व प्रकरणों के निराकरण हेतु विशेष राजस्व शिविर भी लगाए गए हैं। उन्होंने लोगों से इन शिविरों का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जल्द ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शुरू की जाएगी, जिसके लिए एक टोल फ्री नंबर जारी किया जाएगा। इस माध्यम से नागरिक अपनी समस्याएं दर्ज करा सकेंगे तथा निर्धारित समय-सीमा में उनके समाधान की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। समय पर समाधान नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई भी की जाएगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बिजली बिल भुगतान समाधान योजना के अंतर्गत प्रदेशभर में शिविर लगाकर लोगों की समस्याओं का निराकरण किया जाएगा तथा 757 करोड़ रुपये के बिजली बिल माफ किए जा रहे हैं। उन्होंने लोगों से योजना का लाभ लेने के लिए पंजीयन कराने की अपील की।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हाल ही में प्रदेश की नवगठित 515 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स) का वर्चुअल शुभारंभ किया गया है। इसके साथ ही प्रदेश में सहकारी समितियों की संख्या बढ़कर 2 हजार 573 हो गई है। अब पैक्स समितियां बहुउद्देश्यीय सोसायटी के रूप में कार्य करेंगी, जिससे किसानों को खाद, बीज और अल्पकालीन ऋण जैसी सुविधाएं गांव के नजदीक ही उपलब्ध हो सकेंगी तथा धान खरीदी प्रक्रिया भी अधिक सरल और सुविधाजनक बनेगी।

इस अवसर पर पद्मश्री जागेश्वर यादव, छत्तीसगढ़ माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष शंभूनाथ चक्रवर्ती, जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, मंदिर समिति अध्यक्ष उपेंद्र यादव, जनपद अध्यक्ष सुशीला साय, पूर्व संसदीय सचिव भरत साय, जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

जलेश्वर महादेव धाम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया जलाभिषेक: प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की

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किसानों, श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के हित में मुख्यमंत्री साय की महत्वपूर्ण घोषणाएं: जलेश्वर महादेव धाम के विकास के साथ क्षेत्रीय अधोसंरचना को मिलेगा विस्तार

क्षीरपानी मध्यम परियोजना के नहर विस्तार से सिंचाई क्षमता बढ़ेगी, किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज कबीरधाम जिले के पंडरिया विकासखंड अंतर्गत डोंगरिया गांव पहुंचे, जहां उन्होंने प्रसिद्ध जलेश्वर महादेव धाम में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर जलाभिषेक किया। मुख्यमंत्री साय ने भगवान भोलेनाथ से प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा, विधायक पंडरिया भावना बोहरा, विधायक तखतपुर धर्मजीत सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि, समाज के पदाधिकारी और श्रद्धालुगण उपस्थित थे। 

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराएं हमारी पहचान हैं। ऐसे पवित्र धाम केवल आस्था के केंद्र नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने वाले प्रेरणा स्थल भी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए भी निरंतर कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर क्षेत्र के विकास और जनसुविधाओं के विस्तार हेतु कई महत्वपूर्ण घोषणाएं भी कीं। उन्होंने क्षीरपानी जलाशय मध्यम परियोजना अंतर्गत 50 करोड़ की लागत से नहर विस्तारीकरण कार्य कराने की घोषणा की।  इस परियोजना से लगभग 1100 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा का विस्तार होगा और किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री साय ने जलेश्वर महादेव धाम के विकास एवं सौंदर्यीकरण के लिए 50 लाख रुपये स्वीकृत करने की घोषणा भी की। साथ ही उन्होंने खरहट्टा से डोंगरिया तक लगभग 2.5 किलोमीटर सड़क के उन्नयन कार्य की घोषणा करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में आवागमन अधिक सुगम और सुविधाजनक होगा।

उल्लेखनीय है कि कबीरधाम जिले के डोंगरिया गांव स्थित जलेश्वर महादेव धाम स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच अत्यंत पूजनीय स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां स्थित शिवलिंग प्राकृतिक रूप से प्रकट हुआ है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा यह शिवधाम विशेष रूप से सावन माह, सावन सोमवार और महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। पहाड़ी और नदी-घाट के रमणीय वातावरण में स्थित यह धाम शिवभक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए विशेष पहचान रखता है।

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