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रजोनिवृत्ति देखभाल में एकीकृत स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा: सफदरजंग अस्पताल और सीएआरआई के बीच एमओयू हस्ताक्षर

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महिलाओं के लिए एकीकृत स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (VMMC) और सफदरजंग अस्पताल ने आज केन्द्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (CARI), जो केन्द्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (CCRAS), आयुष मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है, के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस सहयोग का उद्देश्य रजोनिवृत्ति (Menopause) देखभाल में सुधार के लिए वैज्ञानिक और प्रमाण-आधारित आयुर्वेद अनुसंधान को बढ़ावा देना है।

रजोनिवृत्ति से गुजर रहीं महिलाओं में सामान्यतः गर्माहट के दौरे (Hot Flushes), अनिद्रा, थकान, योनि शुष्कता, मूड में उतार-चढ़ाव, चिंता और स्मरण शक्ति संबंधी समस्याएँ देखी जाती हैं। सुरक्षित और सहयोगी उपचार विकल्पों में बढ़ती रुचि के चलते कई महिलाएँ समग्र (Holistic) चिकित्सा पद्धतियों, विशेषकर आयुर्वेद, की ओर रुख कर रही हैं। यह MoU पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक चिकित्सा को एकीकृत करने वाले प्रमाणित प्रोटोकॉल विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

समारोह के दौरान VMMC एवं सफदरजंग अस्पताल के निदेशक डॉ. संदीप बंसल ने कहा कि आयुर्वेद आधारित उपचार, जब एलोपैथिक तरीकों के साथ सावधानीपूर्वक उपयोग किए जाते हैं, तो रजोनिवृत्ति से गुजर रही महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकते हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि धातु युक्त आयुर्वेदिक दवाइयों का सेवन केवल विशेषज्ञ की निगरानी में ही किया जाना चाहिए, ताकि उनकी सुरक्षा और प्रभाव सुनिश्चित हो सके।

CARI के प्रभारी डॉ. हेमंता पाणिग्रही ने बताया कि CCRAS आयुर्वेद के वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए दशकों से कार्यरत है। उन्होंने बताया कि सफदरजंग अस्पताल में आयुर्वेद इकाई वर्ष 1996 से सक्रिय है और मरीजों की देखभाल तथा सहयोगात्मक अनुसंधान में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। उन्होंने कहा, “प्रमाण-आधारित आयुर्वेद को वैश्विक स्वीकृति मिल रही है, और यह साझेदारी एकीकृत अनुसंधान पद्धतियों को और मजबूत करेगी तथा जनसामान्य की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाएगी।”

यह सहयोग रजोनिवृत्ति देखभाल को बेहतर बनाने हेतु वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित, सुरक्षित और प्रभावी आयुर्वेदिक हस्तक्षेप विकसित करने पर केंद्रित है, ताकि आधुनिक चिकित्सा को पूरक समर्थन मिल सके। इस पहल से मरीजों के परिणामों में सुधार, अनुसंधान क्षमता में वृद्धि और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित होने की उम्मीद है।

कार्यक्रम के दौरान प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर डॉ. शिवशंकर राजपूत और प्रो. उपमा सक्सेना ने परियोजना के विवरण प्रस्तुत किए। इस अवसर पर डॉ. चारु बाम्बा (मेडिकल सुपरिटेंडेंट), डॉ. श्वेता माता और डॉ. असीमा जैन भी उपस्थित रहीं।

यह MoU VMMC–सफदरजंग अस्पताल और आयुष मंत्रालय की ओर से सहयोगात्मक, मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं को आगे बढ़ाने और महिलाओं के स्वास्थ्य के क्षेत्र में एकीकृत अनुसंधान के नए मानक स्थापित करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।


विश्व मधुमेह दिवस 2025: केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान, बेंगलुरु करेगा “मधुमेह विमर्श” का आयोजन

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केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (CARI), बेंगलुरु, जो भारत सरकार के आयुष मंत्रालय द्वारा मधुमेह (Diabetes Mellitus) के क्षेत्र में उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) के रूप में मान्यता प्राप्त है, 14 नवंबर 2025 को विश्व मधुमेह दिवस के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम “मधुमेह विमर्श” आयोजित करेगा। इस कार्यक्रम में मधुमेह पर चल रहे अनुसंधान, नैदानिक कार्यों और जनजागरूकता पहलों को प्रस्तुत किया जाएगा, जिन्हें उत्कृष्टता केंद्र द्वारा संचालित किया जा रहा है।

संस्थान का प्रमुख उद्देश्य आयुर्वेद, योग और जीवनशैली सुधारों के माध्यम से मधुमेह की रोकथाम और प्रबंधन के लिए एक समग्र (integrative) दृष्टिकोण विकसित और लागू करना है। अब तक लगभग 6,000 रोगियों ने संस्थान की सेवाओं का लाभ उठाया है, जिनमें से 25 प्रतिशत से अधिक आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) से हैं।

क्लिनिकल सेवाओं के अलावा, संस्थान ने डिजिटल स्वास्थ्य पहलों के माध्यम से अपनी पहुंच का विस्तार किया है, जिससे 6 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिला है। इसमें ई-मेडिकल रिकॉर्ड, टेली-परामर्श, एसएमएस अलर्ट, और वेबसाइट (www.cari.gov.in) व सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराई जाती है।

संस्थान ने मशीन लर्निंग आधारित मधुमेह जोखिम मूल्यांकन प्रणाली भी विकसित की है, जिसे कॉपीराइट सुरक्षा प्राप्त हुई है। इस प्रणाली का वेब एप्लिकेशन के माध्यम से सत्यापन किया जा रहा है और इसे एक मोबाइल एप के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि व्यक्ति अपने स्वास्थ्य की निगरानी स्वयं कर सकें।

कार्यक्रम से पहले, डॉ. सुलोचना भट, प्रभारी, सीएआरआई बेंगलुरु ने कहा,

“हमारा ध्यान पारंपरिक ज्ञान और वैज्ञानिक अनुसंधान के संयोजन पर रहा है ताकि मधुमेह का समग्र और साक्ष्य-आधारित समाधान प्रदान किया जा सके। केंद्र की पहलें दिखाती हैं कि एकीकृत स्वास्थ्य दृष्टिकोण से न केवल रोकथाम संभव है बल्कि जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।”

संस्थान सीएसआईआर-सीएफटीआरआई (मैसूर) और आईआईएससी (बेंगलुरु) के साथ चयनित खाद्य उत्पादों और आयुर्वेदिक औषधियों पर सहयोगात्मक अध्ययन कर रहा है। मधुमेह की रोकथाम और प्रबंधन के लिए एकीकृत रूपरेखा तैयार की गई है और यह प्रकाशनाधीन है, जबकि प्रकृति (Prakriti) और डायबेटिक पेरिफेरल न्यूरोपैथी पर अध्ययन भी प्रकाशन की प्रक्रिया में है।

कार्यक्रम में प्रो. (डॉ.) जी. जी. गंगाधरन, पूर्व निदेशक, रामैया इंडिक स्पेशियलिटी आयुर्वेद रिस्टोरेशन अस्पताल, “मधुमेह का समग्र प्रबंधन” विषय पर व्याख्यान देंगे।

आयुष मंत्रालय जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों जैसे मधुमेह के प्रबंधन हेतु सतत, समावेशी और साक्ष्य-आधारित रणनीतियों के विकास के लिए अनुसंधान और नैदानिक पहलों को बढ़ावा देता रहेगा।

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