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RBI ने बैंकिंग सिस्टम से ₹6.12 लाख करोड़ की अतिरिक्त नकदी खींची

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बैंकिंग व्यवस्था में बढ़ी अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करने के लिए रिजर्व बैंक की बड़ी कार्रवाई

मुंबई- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में मौजूद असामान्य रूप से अधिक अतिरिक्त नकदी को नियंत्रित करने के लिए बड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय बैंक ने विभिन्न लिक्विडिटी-एब्जॉर्प्शन ऑपरेशंस के जरिए करीब ₹6.12 लाख करोड़ की तरलता वापस खींची है।

बैंकिंग प्रणाली में नकदी की उपलब्धता सामान्य से काफी अधिक हो जाने के बाद RBI ने यह कदम उठाया। अतिरिक्त तरलता को नियंत्रित करना मौद्रिक व्यवस्था में संतुलन बनाए रखने और बाजार में नकदी के प्रवाह को व्यवस्थित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बैंकिंग सिस्टम में क्यों बढ़ी थी नकदी?

बैंकों के पास जरूरत से ज्यादा नकदी उपलब्ध होने पर उसे अतिरिक्त तरलता माना जाता है। ऐसी स्थिति में RBI बाजार से अतिरिक्त धनराशि को वापस खींचने के लिए अलग-अलग मौद्रिक साधनों का इस्तेमाल करता है। इसका उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में नकदी की उपलब्धता को संतुलित रखना होता है।

RBI की इस कार्रवाई से बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त फंड को अस्थायी रूप से केंद्रीय बैंक के पास वापस लाया गया है। इससे बाजार में नकदी की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

RBI की कार्रवाई का क्या असर होगा?

विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी मात्रा में अतिरिक्त तरलता को अवशोषित करना बैंकिंग सिस्टम में नकदी के स्तर को सामान्य करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे अल्पावधि में मनी मार्केट की स्थितियों और बैंकों की फंडिंग लागत पर असर पड़ सकता है।

RBI लगातार बैंकिंग सिस्टम में तरलता की स्थिति पर नजर रखता है और जरूरत के अनुसार नकदी डालने या वापस लेने के उपाय करता है। मौजूदा कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य बाजार में पर्याप्त लेकिन संतुलित तरलता बनाए रखना है।

मौद्रिक नीति के लिहाज से अहम कदम

₹6.12 लाख करोड़ की तरलता को अवशोषित किया जाना RBI की ओर से उठाए गए बड़े कदमों में शामिल है। इससे संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक बैंकिंग प्रणाली में मौजूद अतिरिक्त नकदी को लेकर सक्रिय रूप से प्रबंधन कर रहा है।

RBI का यह कदम वित्तीय बाजार में स्थिरता बनाए रखने और मौद्रिक नीति के प्रभावी संचालन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की बड़ी निकासी, सितंबर के पहले सप्ताह में निकाले ₹7,443 करोड़

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नई दिल्ली- भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली एक बार फिर बढ़ गई है। सितंबर के पहले सप्ताह में फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) ने भारतीय इक्विटी बाजार से करीब ₹7,443 करोड़ की निकासी की है। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में शुद्ध बिकवाल रहे।

यह निकासी ऐसे समय हुई है जब इससे पहले जुलाई और अगस्त में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में लगातार निवेश किया था। अगस्त में FPIs ने ₹29,600 करोड़ से अधिक और जुलाई में करीब ₹20,200 करोड़ का निवेश किया था।

क्यों कर रहे हैं विदेशी निवेशक बिकवाली?

जानकारों के मुताबिक, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में इजाफा और मजबूत अमेरिकी डॉलर ने विदेशी निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है। इन वैश्विक परिस्थितियों के चलते उभरते बाजारों में निवेश को लेकर सतर्कता बढ़ी है।

विदेशी निवेशकों की हालिया बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार में अगस्त के दौरान विदेशी निवेश का मजबूत रुझान देखने को मिला था। हालांकि, सितंबर की शुरुआत में एक बार फिर बिकवाली लौटने से बाजार के निवेशकों की चिंता बढ़ी है।

2026 में अब तक बड़ी निकासी

सितंबर की ताजा निकासी के बाद 2026 में भारतीय इक्विटी से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की कुल निकासी करीब ₹2.32 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। यह आंकड़ा पूरे 2025 में हुई करीब ₹1.66 लाख करोड़ की निकासी से भी अधिक है।

बाजार विशेषज्ञों की नजर अब आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों के रुख और वैश्विक बाजारों की चाल पर रहेगी।

भारत की GDP ग्रोथ 7.8% पर पहुंची, आंकड़ों की विश्वसनीयता पर उठे सवाल; सरकार ने दी सफाई

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नई दिल्ली- भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून 2026 में 7.8 प्रतिशत की मजबूत GDP ग्रोथ दर्ज की है। यह आंकड़ा बाजार के अनुमान और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुमान से बेहतर रहा। हालांकि, मजबूत आर्थिक वृद्धि के आंकड़े जारी होने के बाद अब इसकी गणना और विश्वसनीयता को लेकर आर्थिक जगत में बहस छिड़ गई है।

अनुमान से बेहतर रही आर्थिक वृद्धि

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-जून तिमाही में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही। यह RBI के करीब 7 प्रतिशत के अनुमान और अर्थशास्त्रियों के 7.1 प्रतिशत के औसत अनुमान से अधिक है। इससे वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत मिला है।

इस वृद्धि में मैन्युफैक्चरिंग, निवेश और सेवा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वित्तीय, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सेवाओं में भी मजबूत विस्तार दर्ज किया गया। घरेलू मांग और सरकारी खर्च ने भी आर्थिक गतिविधियों को समर्थन दिया।

GDP के आंकड़ों पर क्यों उठे सवाल?

GDP के 7.8 प्रतिशत आंकड़े सामने आने के बाद पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग समेत कुछ अर्थशास्त्रियों ने इसकी गणना पर सवाल उठाए। उनका तर्क है कि नई GDP सीरीज में पिछले साल के आंकड़ों में बड़े संशोधन किए गए हैं, जिससे मौजूदा वृद्धि दर की तुलना को लेकर सवाल पैदा होते हैं। पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने भी पूछा कि यदि अर्थव्यवस्था इतनी तेज गति से बढ़ रही है, तो इसका असर रोजगार, घरेलू निवेश और विदेशी निवेश जैसे संकेतकों में अधिक स्पष्ट रूप से क्यों नहीं दिखाई दे रहा।

एक अन्य प्रमुख मुद्दा GDP Deflator को लेकर है। आलोचकों का कहना है कि अप्रैल-जून तिमाही में कीमतों के समायोजन के लिए इस्तेमाल किया गया डिफ्लेटर अपेक्षाकृत कम रहा, जिससे वास्तविक GDP वृद्धि अधिक दिखाई दे सकती है। हालांकि, इस मुद्दे पर अर्थशास्त्रियों की राय एक जैसी नहीं है।

सरकार ने आंकड़ों का किया बचाव

आंकड़ों पर उठे सवालों के बाद केंद्र सरकार और सांख्यिकी मंत्रालय ने GDP गणना की नई पद्धति का बचाव किया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि GDP की नई सीरीज में आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया गया है। साथ ही डेटा स्रोतों और कीमतों के समायोजन की प्रक्रिया में भी बदलाव किए गए हैं।

सरकार का कहना है कि नए आंकड़े अधिक विस्तृत और आधुनिक डेटा पर आधारित हैं तथा संशोधन का उद्देश्य आर्थिक गतिविधियों की वास्तविक तस्वीर को बेहतर तरीके से सामने लाना है। सरकार ने यह भी कहा कि अलग-अलग GDP सीरीज के आंकड़ों की सीधे तुलना करना सही तरीका नहीं है।

मजबूत ग्रोथ के बीच चुनौती भी बरकरार

जहां GDP के आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत दे रहे हैं, वहीं महंगे कच्चे तेल, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, रुपये पर दबाव और कमजोर वैश्विक मांग जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे में आने वाली तिमाहियों में विकास की गति कैसी रहती है, इस पर बाजार और अर्थशास्त्रियों की नजर रहेगी।

फिलहाल 7.8 प्रतिशत GDP ग्रोथ भारत की आर्थिक क्षमता का सकारात्मक संकेत है, लेकिन आंकड़ों की गणना को लेकर शुरू हुई बहस ने पारदर्शिता और डेटा की विश्वसनीयता को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले महीनों में नए आंकड़े और संशोधन इस बहस को और स्पष्ट कर सकते हैं।

भारत की GDP ग्रोथ 7.8% पहुंची, PM मोदी ने बताया ‘मजबूत आंकड़े और मजबूत आत्मविश्वास’

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नई दिल्ली- भारत की अर्थव्यवस्था ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की मजबूत GDP वृद्धि दर्ज की है। उम्मीद से बेहतर आए इन आर्थिक आंकड़ों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को बधाई देते हुए इसे भारतीय अर्थव्यवस्था के बढ़ते आत्मविश्वास का संकेत बताया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को जारी अपने वीडियो संदेश में कहा कि 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि देश के 140 करोड़ लोगों की मेहनत और सामूहिक संकल्प का परिणाम है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर युद्ध, आर्थिक अनिश्चितता और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद भारत तेज गति से आगे बढ़ रहा है।

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा— “7.8% Growth. Strong numbers. Even stronger confidence.” यानी 7.8 प्रतिशत की वृद्धि, मजबूत आंकड़े और उससे भी मजबूत आत्मविश्वास।

उम्मीद से बेहतर रही GDP ग्रोथ

अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही, जो अर्थशास्त्रियों के अनुमान से बेहतर है। इस दौरान निवेश और निजी क्षेत्र की गतिविधियों में भी मजबूती देखने को मिली।

वैश्विक चुनौतियों के बीच मजबूत प्रदर्शन

भारत की यह आर्थिक वृद्धि ऐसे समय में सामने आई है, जब दुनिया के कई हिस्सों में भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है। इसके बावजूद घरेलू मांग, निवेश और सेवा क्षेत्र ने भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

PM मोदी का ‘स्वदेशी’ पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने GDP के मजबूत आंकड़ों के साथ देशवासियों से ‘स्वदेशी’, ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘मेड इन इंडिया’ को बढ़ावा देने की अपील भी की। उन्होंने लोगों से देश के भीतर पर्यटन और विवाह जैसे आयोजनों को प्राथमिकता देने तथा अनावश्यक सोने की खरीद से बचने का आग्रह किया।

विपक्ष की आलोचना के बीच सरकार का पलटवार

GDP के आंकड़े जारी होने के बाद प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधा और आर्थिक मोर्चे पर निराशा फैलाने का आरोप लगाया। वहीं, विपक्ष की ओर से आर्थिक आंकड़ों और सरकार के दावों को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

फिलहाल 7.8 प्रतिशत की GDP वृद्धि ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को लेकर सरकार का भरोसा बढ़ाया है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक आगे भी विकास की रफ्तार बनाए रखने के लिए रोजगार, निजी निवेश, महंगाई और वैश्विक ऊर्जा कीमतों जैसी चुनौतियों पर नजर रखना जरूरी होगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल से नवा रायपुर में खुलेगा प्रतिष्ठित NMIMS, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ लगाएगा नई छलांग

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सेक्टर-18 में 40 एकड़ में आकार लेगा राष्ट्रीय स्तर का शिक्षण संस्थान, मुख्यमंत्री की उपस्थिति में लीज अनुबंध और भूमि रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी

छत्तीसगढ़ के युवाओं को अपने ही प्रदेश में प्रबंधन, कौशल विकास और आधुनिक रोजगारोन्मुखी शिक्षा के मिलेंगे राष्ट्रीय स्तर के अवसर

दो से तीन वर्षों में शुरू होगा पहला बैच, पूर्ण विकसित होने पर लगभग 10 हजार विद्यार्थी होंगे लाभान्वित

नवा रायपुर को एजुकेशन और नॉलेज हब के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ को उच्च शिक्षा, कौशल और ज्ञान के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने की दिशा में आज एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई। देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में शामिल नरसी मोंजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (NMIMS) अब नवा रायपुर अटल नगर में अपना कैंपस स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में आज संस्थान की स्थापना के लिए लीज अनुबंध की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही भूमि की रजिस्ट्री भी पूर्ण कर ली गई। इसके साथ ही नवा रायपुर में NMIMS की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर कहा कि छत्तीसगढ़ के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक उच्च शिक्षा के लिए बड़े महानगरों की ओर न जाना पड़े तथा उन्हें अपने ही प्रदेश में देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के समान अवसर मिलें, इस दिशा में राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। NMIMS की स्थापना इसी संकल्प की महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराकर प्रदेश की युवा शक्ति को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना सरकार की प्राथमिकता है।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी, प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, आवास एवं पर्यावरण सचिव अंकित आनंद तथा नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी चंदन कुमार उपस्थित थे।

40 एकड़ में विकसित होगा अत्याधुनिक कैंपस

नवा रायपुर अटल नगर के सेक्टर-18 में लगभग 40 एकड़ भूमि पर NMIMS का आधुनिक कैंपस विकसित किया जाएगा। संस्थान का संचालन करने वाले विले पार्ले केलवणी मंडल (SVKM) को यह भूमि 90 वर्षों की लीज पर प्रदान की गई है। राज्य मंत्रिपरिषद द्वारा 21 जनवरी 2026 को संस्थान के लिए भूमि आवंटन के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की गई थी। इसके बाद आवश्यक प्रक्रियाओं को तेजी से आगे बढ़ाते हुए आज लीज अनुबंध और भूमि रजिस्ट्री की महत्वपूर्ण प्रक्रिया पूरी कर ली गई।

संस्थान की स्थापना की संपूर्ण प्रक्रिया आगामी सात वर्षों में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि प्रदेश के विद्यार्थियों को इसका लाभ इससे पहले ही मिलने लगेगा। दो से तीन वर्षों के भीतर पहला शैक्षणिक बैच प्रारंभ करने का लक्ष्य रखा गया है। संस्थान के पूर्ण रूप से विकसित होने पर यहां लगभग 10 हजार विद्यार्थी अध्ययन कर सकेंगे।

युवाओं के लिए खुलेंगे गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के नए द्वार

NMIMS जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की स्थापना से छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नई संभावनाओं का विस्तार होगा। प्रदेश के युवाओं को प्रबंधन, कौशल विकास तथा आधुनिक एवं रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों में राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा अपने ही राज्य में प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध होंगे।

इससे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए देश के बड़े महानगरों की ओर जाने की आवश्यकता कम होगी। साथ ही देश के विभिन्न हिस्सों से भी विद्यार्थी अध्ययन के लिए छत्तीसगढ़ आएंगे। इससे नवा रायपुर में विविधतापूर्ण और समृद्ध शैक्षणिक वातावरण विकसित होगा।

शिक्षा के साथ रोजगार, कौशल और उद्यमिता को भी मिलेगी गति

NMIMS की स्थापना का प्रभाव केवल उच्च शिक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। संस्थान के माध्यम से प्रदेश में कौशल विकास, रोजगार, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में भी नए अवसर विकसित होंगे। विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत के बीच बेहतर समन्वय से उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप दक्ष मानव संसाधन तैयार करने में मदद मिलेगी।

राष्ट्रीय स्तर के संस्थान की मौजूदगी से अकादमिक और औद्योगिक क्षेत्र के बीच सहयोग की संभावनाओं को भी विस्तार मिलेगा। विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव, नवाचार और उद्यमिता से जुड़ने के बेहतर अवसर मिलेंगे। इससे प्रदेश में विकसित हो रहे नए औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों के लिए कुशल युवाओं की उपलब्धता भी बढ़ेगी।

नवा रायपुर की राष्ट्रीय स्तर के एजुकेशन हब के रूप में मजबूत होगी पहचान

राज्य सरकार नवा रायपुर अटल नगर को आधुनिक अधोसंरचना और बेहतर कनेक्टिविटी से युक्त शहर के साथ ही एजुकेशन और नॉलेज हब के रूप में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। NMIMS जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का यहां स्थापित होना इस परिकल्पना को नई गति देगा।

देश के विभिन्न राज्यों से विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के आने से नवा रायपुर के शैक्षणिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक परिवेश का विस्तार होगा। इसके साथ ही शिक्षा से जुड़ी सहायक गतिविधियों, सेवाओं और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी। इससे नवा रायपुर की पहचान देश के उभरते हुए प्रमुख शिक्षा केंद्रों में और मजबूत होगी।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की युवा-केंद्रित विकास नीति में शिक्षा, कौशल, नवाचार और रोजगार को एक-दूसरे से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। NMIMS की स्थापना इसी सोच को धरातल पर उतारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लीज अनुबंध और भूमि रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी होने के साथ छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा परिदृश्य में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह संस्थान न केवल प्रदेश के हजारों युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करेगा, बल्कि नवा रायपुर को राष्ट्रीय स्तर के शिक्षा, कौशल और ज्ञान केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

भारत-चिली CEPA वार्ता में तेजी, इस साल समझौता पूरा करने की भारत की प्रतिबद्धता

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सैंटियागो- भारत और चिली के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement-CEPA) को लेकर वार्ता आगे बढ़ाने के प्रयास तेज हो गए हैं। भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने 26 अगस्त 2026 को चिली की राजधानी सैंटियागो में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंधों की उप-मंत्री पाउला एस्तेवेज वीनस्टीन से मुलाकात की। बैठक में भारत-चिली CEPA वार्ता को आगे बढ़ाने और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देने पर चर्चा हुई।

संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते पर जोर

बैठक के दौरान भारत ने आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए खुलेपन, निरंतर संवाद और संतुलित दृष्टिकोण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। भारत का जोर ऐसे समझौते पर है, जिससे दोनों देशों के व्यवसायों के साथ-साथ आम लोगों के लिए भी वास्तविक और ठोस अवसर पैदा हो सकें।

दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और चिली के बीच पहले से मजबूत होते संबंधों को CEPA के जरिए और व्यापक बनाया जाए। दोनों पक्ष चाहते हैं कि समझौते में तय किए जाने वाले साझा लक्ष्य केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि उनका सीधा लाभ दोनों देशों के कारोबार और उद्योगों को मिले।

ग्लोबल साउथ के साझा दृष्टिकोण को बताया महत्वपूर्ण

भारत और चिली दोनों Global South का हिस्सा हैं। दोनों देशों के बीच साझा रणनीतिक दृष्टिकोण और वैश्विक मुद्दों पर कई समान विचार आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि दोनों देश अपनी समान प्राथमिकताओं का लाभ उठाते हुए व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई तक ले जा सकते हैं। CEPA को इसी व्यापक आर्थिक साझेदारी का महत्वपूर्ण माध्यम माना जा रहा है।

हेल्थकेयर से लेकर ऊर्जा और कृषि तक कई क्षेत्रों में संभावनाएं

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भारत और चिली के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित किया।

उन्होंने विशेष रूप से इन क्षेत्रों का उल्लेख किया—

  • हेल्थकेयर और चिकित्सा क्षेत्र

  • फार्मास्यूटिकल्स

  • ऊर्जा

  • खनिज एवं महत्वपूर्ण खनिज संसाधन

  • कृषि

  • मशीनरी

  • इंजीनियरिंग और औद्योगिक क्षेत्र

भारत का मानना है कि इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से दोनों देशों के उद्योगों को नए बाजार मिल सकते हैं और द्विपक्षीय व्यापार में भी उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

CEPA से व्यापार और निवेश को मिलेगी नई गति

भारत और चिली के बीच व्यापारिक संबंध लगातार बढ़ रहे हैं। प्रस्तावित CEPA के सफल निष्कर्ष से दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।

समझौते से कंपनियों को बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने के साथ-साथ व्यापारिक प्रक्रियाओं को अधिक सुगम बनाने में मदद मिल सकती है। इससे दोनों देशों के व्यवसायों के लिए नए अवसर पैदा होंगे और आर्थिक साझेदारी को दीर्घकालिक आधार मिलेगा।

तकनीक, प्रतिभा और सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ाने की उम्मीद

CEPA केवल वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। इसके जरिए तकनीक, प्रतिभा और मजबूत एवं भरोसेमंद सप्लाई चेन के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की उम्मीद है।

बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में लचीली और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाएं महत्वपूर्ण हो गई हैं। ऐसे में भारत और चिली के बीच सहयोग दोनों देशों की कंपनियों को नए अवसर देने के साथ-साथ वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद कर सकता है।

इसी साल CEPA पूरा करने का भारत का लक्ष्य

भारत ने स्पष्ट किया है कि वह भारत-चिली CEPA वार्ता को इसी वर्ष पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

भारत का लक्ष्य ऐसा समझौता तैयार करना है, जो दोनों देशों के लिए संतुलित, पारस्परिक रूप से लाभकारी और व्यावसायिक रूप से सार्थक हो। भारत चाहता है कि समझौते के परिणाम दोनों देशों के कारोबारियों और उद्योगों के लिए समान और वास्तविक अवसर पैदा करें।

भारत-चिली संबंधों के लिए अहम कदम

भारत-चिली CEPA को दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे व्यापार और निवेश के साथ-साथ तकनीक, ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि और खनिज जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को नई गति मिल सकती है।

भारत का कहना है कि CEPA दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग की मजबूत नींव तैयार करेगा और साझा समृद्धि की दिशा में नए अवसर पैदा करेगा।

टाटा समूह में नेतृत्व परिवर्तन से कॉरपोरेट जगत में हलचल, उत्तराधिकार और गवर्नेंस पर बढ़ी चर्चा

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मुंबई- देश के प्रमुख कारोबारी समूहों में शामिल टाटा समूह एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने घोषणा की है कि उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होने के बाद वे पुनर्नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे। उनके इस फैसले के बाद टाटा समूह में उत्तराधिकारी के चयन, कॉरपोरेट गवर्नेंस और समूह की भविष्य की रणनीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

करीब एक दशक बाद बदलेगा टाटा संस का नेतृत्व

एन. चंद्रशेखरन ने फरवरी 2017 में टाटा संस के चेयरमैन का पद संभाला था। अब लगभग एक दशक बाद उनके कार्यकाल के बाद समूह को नया नेतृत्व चुनना होगा। चंद्रशेखरन ने अपने उत्तराधिकारी की पहचान जल्द शुरू करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया है, ताकि नेतृत्व परिवर्तन व्यवस्थित तरीके से हो सके।

उत्तराधिकारी चुनने के लिए समिति गठित

चंद्रशेखरन के फैसले के बाद टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस के अगले चेयरमैन के चयन के लिए एक समिति गठित की है। टाटा ट्रस्ट्स की टाटा संस में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी और प्रभाव को देखते हुए इस चयन प्रक्रिया को बेहद अहम माना जा रहा है।

टाटा संस की नेतृत्व व्यवस्था में यह बदलाव ऐसे समय हो रहा है जब समूह एयर इंडिया, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल कारोबार सहित कई बड़े एवं पूंजी-गहन क्षेत्रों में निवेश कर रहा है। ऐसे में नए चेयरमैन के सामने समूह की मौजूदा रणनीति को आगे बढ़ाने और कारोबारों के बीच बेहतर संतुलन बनाए रखने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

टाटा संस बोर्ड की बैठक और AGM भी चर्चा में

18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की वार्षिक आम बैठक (AGM) को भी नेतृत्व परिवर्तन के घटनाक्रम के बीच स्थगित कर दिया गया। रिपोर्टों के अनुसार बैठक में आवश्यक कोरम पूरा नहीं हो सका, जिसके कारण इसे आगे के लिए टालना पड़ा। यह टाटा संस के इतिहास में एक असामान्य घटनाक्रम माना जा रहा है।

इसी बीच बोर्ड के भीतर चंद्रशेखरन के पुनर्नियुक्ति संबंधी फैसले को लेकर भी अलग-अलग मत सामने आने की खबरें हैं। कुछ निदेशक उनके फैसले पर पुनर्विचार की संभावना पर चर्चा कर रहे हैं, हालांकि अंतिम स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

कॉरपोरेट गवर्नेंस पर क्यों बढ़ी चर्चा?

टाटा समूह की स्वामित्व एवं प्रबंधन संरचना अन्य पारिवारिक कारोबारी समूहों से अलग है। टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है और ट्रस्ट्स की भूमिका समूह के प्रमुख निर्णयों में प्रभावशाली रहती है। ऐसे में चेयरमैन के उत्तराधिकार का सवाल केवल व्यक्ति के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि ट्रस्ट्स, बोर्ड और पेशेवर प्रबंधन के बीच संतुलन से भी जुड़ा है।

विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा भी तेज हुई है कि भारत की बड़ी कंपनियों को नेतृत्व परिवर्तन के लिए पहले से स्पष्ट और पारदर्शी उत्तराधिकार योजना तैयार करनी चाहिए। अचानक होने वाला नेतृत्व परिवर्तन कारोबार की निरंतरता, निवेशकों के भरोसे और रणनीतिक फैसलों पर असर डाल सकता है।

निवेशकों और उद्योग जगत की नजर नए चेयरमैन पर

टाटा समूह का नया नेतृत्व ऐसे समय चुना जाएगा जब समूह के सामने कई बड़ी व्यावसायिक चुनौतियां और अवसर मौजूद हैं। एयर इंडिया के विस्तार और वित्तीय प्रदर्शन से लेकर सेमीकंडक्टर एवं इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निवेश और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज जैसे प्रमुख कारोबारों के सामने बदलते तकनीकी परिदृश्य तक, नए चेयरमैन को कई महत्वपूर्ण मोर्चों पर फैसले लेने होंगे।

टाटा समूह में यह नेतृत्व परिवर्तन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसका असर केवल एक कंपनी पर नहीं, बल्कि समूह की कई प्रमुख कंपनियों और भारत के कॉरपोरेट क्षेत्र में उसके प्रभाव पर पड़ सकता है। आने वाले महीनों में नए चेयरमैन के चयन और समूह की रणनीतिक दिशा पर उद्योग जगत और निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

चीन की अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर लगा ब्रेक, जुलाई के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

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औद्योगिक उत्पादन और खुदरा बिक्री दोनों उम्मीद से कमजोर; घरेलू मांग में सुस्ती से बढ़ा दबाव

बीजिंग- दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन के लिए जुलाई के आर्थिक आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले रहे हैं। जुलाई 2026 में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि घटकर 4.5 प्रतिशत रह गई, जो जून में 5.3 प्रतिशत थी। यह बाजार के 4.8 प्रतिशत के अनुमान से भी कम रही। वहीं, खुदरा बिक्री में महज 0.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि अर्थशास्त्रियों ने 1.5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया था।

घरेलू मांग बनी सबसे बड़ी चुनौती

आंकड़ों से संकेत मिलता है कि चीन की अर्थव्यवस्था को घरेलू मांग की कमजोरी का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ता खर्च की रफ्तार धीमी हुई है और संपत्ति क्षेत्र में जारी संकट ने लोगों के भरोसे और खर्च करने की क्षमता पर दबाव डाला है। जुलाई में ऑटो बिक्री लगातार दसवें महीने घटी, हालांकि गिरावट की रफ्तार कुछ कम हुई।

निवेश में भी गिरावट

अर्थव्यवस्था के लिए निवेश के मोर्चे पर भी तस्वीर उत्साहजनक नहीं रही। 2026 के पहले सात महीनों में फिक्स्ड-एसेट निवेश में 6.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि जनवरी-जून की अवधि में यह गिरावट 5.7 प्रतिशत थी। इससे चीन में निवेश गतिविधियों की कमजोरी और स्पष्ट होती है।

मौसम और वैश्विक परिस्थितियों का भी असर

जुलाई में चीन के कई हिस्सों में खराब मौसम और तीन तूफानों ने औद्योगिक गतिविधियों को प्रभावित किया। पूर्वी और दक्षिणी चीन के विनिर्माण केंद्रों में इसका असर देखने को मिला। इसके अलावा अमेरिकी टैरिफ, मध्य-पूर्व में संघर्ष और वैश्विक व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताएं भी चीन की अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई हैं।

निर्यात ने संभाला मोर्चा, लेकिन घरेलू अर्थव्यवस्था कमजोर

चीन के लिए राहत की बात यह है कि वैश्विक AI इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग से उसके निर्यात को मजबूती मिल रही है। इससे औद्योगिक क्षेत्र को कुछ सहारा मिला है। लेकिन मजबूत निर्यात के बावजूद घरेलू खपत और निवेश की सुस्ती आर्थिक रिकवरी के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

सरकार पर बढ़ा आर्थिक प्रोत्साहन का दबाव

कमजोर आंकड़ों के बाद चीन की सरकार पर अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए नए कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है। अधिकारियों ने राजकोषीय खर्च तेज करने और घरेलू मांग को मजबूत करने के लिए समय पर नीतिगत कदम उठाने का संकेत दिया है, हालांकि अभी तक किसी बड़े नए प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा नहीं हुई है।

जुलाई के आंकड़े बताते हैं कि चीन की आर्थिक रिकवरी अभी भी पूरी तरह मजबूत आधार पर नहीं पहुंची है। घरेलू उपभोग, रियल एस्टेट और निवेश में सुधार आने वाले महीनों में चीन की विकास गति के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक होंगे।

पेट्रोल के निर्यात पर एक्सपोर्ट ड्यूटी खत्म, डीजल और ATF पर भी शुल्क में कटौती

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नई दिल्ली- केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में बड़ा बदलाव किया है। 15 अगस्त 2026 से पेट्रोल के निर्यात पर ड्यूटी को पूरी तरह खत्म कर शून्य कर दिया गया है। वहीं डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात शुल्क में भी कटौती की गई है।

सरकार के नए फैसले के मुताबिक, पेट्रोल पर निर्यात ड्यूटी ₹3.5 प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दी गई है। डीजल पर कुल लेवी ₹25.5 से घटाकर ₹24 प्रति लीटर, जबकि ATF पर निर्यात शुल्क ₹22 से घटाकर ₹19.5 प्रति लीटर किया गया है।

घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर सीधा असर नहीं

यह बदलाव मुख्य रूप से निर्यात किए जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों पर लागू है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू खपत के लिए जारी पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा एक्साइज ड्यूटी दरों में इस फैसले से कोई बदलाव नहीं हुआ है।

हर पखवाड़े होती है शुल्क की समीक्षा

सरकार अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों को देखते हुए इन निर्यात शुल्कों की हर पखवाड़े समीक्षा करती है। मौजूदा बदलाव 15 अगस्त से प्रभावी हुआ है और इससे पहले 3 अगस्त को पेट्रोल, डीजल और ATF पर शुल्क बढ़ाया गया था।

सरकार के इस कदम से पेट्रोल निर्यात करने वाली कंपनियों पर कर का बोझ कम होगा, जबकि डीजल और ATF के निर्यात पर भी पहले की तुलना में राहत मिलेगी।

Air India में बड़ा नेतृत्व परिवर्तन, Tewolde Gebremariam बने नए CEO और MD

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नई दिल्ली- Air India ने अपने बदलाव और पुनर्गठन के अगले चरण के लिए Tewolde Gebremariam को नया Chief Executive Officer (CEO) और Managing Director (MD) नियुक्त किया है। वह मौजूदा CEO Campbell Wilson का स्थान लेंगे। Air India के बोर्ड ने 5 अगस्त को उनकी नियुक्ति की घोषणा की थी।

कौन हैं Tewolde Gebremariam?

Tewolde Gebremariam विमानन क्षेत्र के अनुभवी अधिकारियों में से एक हैं। उन्होंने करीब 36 वर्षों तक Ethiopian Airlines में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम किया और 2011 से 2022 तक इसके Group CEO रहे। उनके नेतृत्व में Ethiopian Airlines ने तेजी से विस्तार किया और अफ्रीका की प्रमुख एयरलाइनों में अपनी पहचान मजबूत की।

उनके कार्यकाल में Ethiopian Airlines का राजस्व चार गुना से अधिक बढ़ा और एयरलाइन के बेड़े का आकार भी लगभग तीन गुना हुआ। उन्होंने COVID-19 महामारी और 2019 के Boeing 737 MAX हादसे जैसे गंभीर संकटों के दौरान भी एयरलाइन का नेतृत्व किया।

अब Air India के सामने बड़ी चुनौती

Tewolde ऐसे समय Air India की कमान संभाल रहे हैं, जब एयरलाइन बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। Tata Group के स्वामित्व में आने के बाद Air India ने ब्रांड री-ब्रांडिंग, बेड़े के आधुनिकीकरण और Vistara के विलय जैसे कई बड़े कदम उठाए हैं। Campbell Wilson ने इस शुरुआती बदलाव की प्रक्रिया का नेतृत्व किया।

हालांकि, एयरलाइन के सामने वित्तीय नुकसान, परिचालन संबंधी चुनौतियां, सुरक्षा एवं नियामकीय अनुपालन और विमान बेड़े के आधुनिकीकरण जैसी बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं। वित्त वर्ष 2025-26 में Air India को 2 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ।

सुरक्षा और भरोसा सबसे बड़ी प्राथमिकता

2025 में अहमदाबाद में Air India के Boeing 787 हादसे के बाद एयरलाइन की सुरक्षा व्यवस्था और संचालन पर नियामकीय निगरानी बढ़ी है। ऐसे में नए CEO के सामने सुरक्षा मानकों, अनुपालन और संचालन व्यवस्था को मजबूत करना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी।

Tata Group को Tewolde से बड़ी उम्मीदें

Tata Sons के चेयरमैन N. Chandrasekaran ने संकेत दिया है कि Air India के पूर्ण बदलाव में लंबा समय लग सकता है। ऐसे में Tewolde के सामने एयरलाइन को अधिक कुशल, सुरक्षित, प्रतिस्पर्धी और वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की चुनौती होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि Ethiopian Airlines को सफलतापूर्वक बदलने का Tewolde का अनुभव Air India के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि वह Air India के सामने मौजूद वित्तीय, परिचालन और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से कैसे निपटते हैं।

Air India के लिए यह सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि उसके अगले बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है।


जापानी येन 40 साल के सबसे निचले स्तर पर

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जापान की मुद्रा येन अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 40 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है। येन को संभालने के लिए जापान और अमेरिका ने मिलकर दुर्लभ मुद्रा बाजार हस्तक्षेप (Currency Intervention) किया है।

अब निवेशकों की नजर बैंक ऑफ जापान (BOJ) पर है। बाजार में चर्चा है कि अगर येन पर दबाव जारी रहा, तो बैंक ऑफ जापान सितंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है।

येन की कमजोरी से जापान के लिए आयात महंगा हो सकता है, खासकर तेल और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है। वहीं, ब्याज दर बढ़ने की संभावना से वैश्विक वित्तीय बाजार भी सतर्क हैं।

भारतीय कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा

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वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत की कई प्रमुख कंपनियों ने वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल–जून तिमाही में उम्मीद से बेहतर वित्तीय प्रदर्शन किया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज़, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इंडिगो, महिंद्रा एंड महिंद्रा और मारुति सुज़ुकी जैसी अग्रणी कंपनियों के मजबूत तिमाही नतीजों ने भारतीय कॉरपोरेट क्षेत्र की मजबूती को दर्शाया है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों की बेहतर आय और मजबूत कारोबारी प्रदर्शन ने निवेशकों का विश्वास बढ़ाया है। इसके परिणामस्वरूप शेयर बाजार में सकारात्मक माहौल बना हुआ है और आने वाले समय में निवेश गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना जताई जा रही है।

भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर बातचीत में बड़ी प्रगति, जल्द हो सकता है समझौता

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भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) को अंतिम रूप देने के लिए दोनों देशों के अधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण वार्ताएं जारी हैं। हालिया बातचीत में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है, जिससे निकट भविष्य में समझौते के संपन्न होने की संभावना मजबूत हुई है।

इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और सुदृढ़ बनाना, बाजार तक पहुंच को आसान बनाना तथा विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में आने वाली बाधाओं को कम करना है। भारत और अमेरिका लंबे समय से शुल्क, कृषि उत्पादों, विनिर्माण वस्तुओं तथा डिजिटल व्यापार जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह अंतरिम व्यापार समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो इससे द्विपक्षीय व्यापार को नई गति मिलेगी, निवेश के अवसर बढ़ेंगे और दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ होगा। साथ ही भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में अधिक अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

दोनों पक्षों ने बातचीत में हुई प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए शेष मुद्दों के समाधान के लिए वार्ता जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई है। यह समझौता भारत-अमेरिका आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड की 10वीं बैठक आयोजित, व्यापारियों के हितों पर हुई व्यापक चर्चा

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नई दिल्ली- राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड (NTWB) की 10वीं बैठक आज नई दिल्ली में हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन और ऑफलाइन) में आयोजित की गई। बैठक में देशभर के सदस्य डिजिटल माध्यम और प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुए। यह आयोजन डिजिटल इंडिया पहल के तहत तकनीक आधारित सुशासन और जनभागीदारी का एक सफल उदाहरण माना गया।

बैठक में व्यापारियों के कल्याण और व्यापार सुगमता से जुड़ी विभिन्न योजनाओं और पहलों की समीक्षा की गई। सदस्यों को हाल ही में शुरू की गई राजस्थान व्यापार प्रोत्साहन नीति की जानकारी दी गई, जिसमें व्यापार ऋण सहायता, बीमा सहायता और डिजिटल कॉमर्स को बढ़ावा देने जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं।

DigiDukaan पहल पर विशेष चर्चा

बैठक के दौरान "डिजीडुकान (DigiDukaan)" पहल पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। यह योजना छोटे व्यापारियों और किराना दुकानदारों को डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू की गई है।

बोर्ड को बताया गया कि 19 जून 2026 को जयपुर में राजस्थान के मुख्यमंत्री  भजनलाल शर्मा द्वारा DigiDukaan का शुभारंभ किया गया, जिसे व्यापारियों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। अब इसे मुंबई, बेंगलुरु सहित अन्य प्रमुख शहरों और बाद में पूरे देश में लागू करने की योजना है।

व्यापारियों की प्रमुख समस्याओं पर मंथन

बैठक में व्यापारियों, खुदरा विक्रेताओं, निर्माताओं, निर्यातकों और सेवा प्रदाताओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें शामिल हैं:

  • GST सरलीकरण और तर्कसंगतता

  • व्यापारिक अनुपालन प्रक्रियाओं को आसान बनाना

  • पुराने व्यापारिक बकायों के लिए वन-टाइम सेटलमेंट

  • निर्यात को बढ़ावा देना

  • लॉजिस्टिक्स और बंदरगाह अवसंरचना

  • डिजिटल कॉमर्स और ONDC से जुड़ाव

  • सस्ती ऋण सुविधा

  • व्यापारियों के लिए पेंशन और सामाजिक सुरक्षा

  • महिला उद्यमियों को प्रोत्साहन

MSME और निर्यात बढ़ाने पर जोर

बैठक में विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) और व्यापारियों की निर्यात गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। निर्यात के अवसरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने और संस्थागत सहायता को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।

प्रधानमंत्री मोदी को दी बधाई

बैठक की शुरुआत में बोर्ड ने एक प्रस्ताव पारित कर प्रधानमंत्री को भारत के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी।

प्रस्ताव में प्रधानमंत्री के सुशासन, आर्थिक सुधारों, राष्ट्रीय सुरक्षा, समावेशी विकास और "विकसित भारत" के विजन में योगदान की सराहना की गई।

व्यापारियों के लिए बेहतर माहौल बनाने का संकल्प

बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष सुनील जे. सिंघी ने की।

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में GST सुधार, डिजिटल गवर्नेंस, जनधन-आधार-मोबाइल (JAM) ट्रिनिटी, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और Ease of Doing Business जैसी पहलों ने भारत की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत किया है और व्यापारियों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।

बैठक के अंत में बोर्ड ने व्यापारियों के कल्याण, डिजिटल सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा और केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।


वैश्विक बाजारों की नजर केंद्रीय बैंकों और महंगाई के आंकड़ों पर

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दुनियाभर के वित्तीय बाजार इस समय प्रमुख केंद्रीय बैंकों के अधिकारियों के भाषणों और आने वाले महंगाई (इन्फ्लेशन) के आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं। निवेशकों को उम्मीद है कि इन संकेतों से भविष्य में ब्याज दरों को लेकर महत्वपूर्ण फैसलों का अंदाजा मिलेगा।

निवेशकों का ध्यान विशेष रूप से Federal Reserve, European Central Bank और Bank of England जैसे प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर है। हाल के आर्थिक आंकड़ों ने मिश्रित संकेत दिए हैं, जिसके कारण बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महंगाई के आंकड़े यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखेंगे या फिर उनमें कटौती की दिशा में कदम बढ़ाएंगे। यदि महंगाई अपेक्षा से अधिक रहती है, तो ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो सकती है। वहीं, महंगाई में कमी आने पर राहत मिलने की उम्मीद बढ़ सकती है।

इस अनिश्चितता के बीच वैश्विक शेयर बाजार, बॉन्ड बाजार और मुद्रा बाजारों में सतर्क कारोबार देखने को मिल रहा है। निवेशक हर नए आर्थिक संकेत और केंद्रीय बैंक अधिकारियों की टिप्पणियों पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

विश्लेषकों का कहना है कि वर्ष की दूसरी छमाही में महंगाई और ब्याज दरों से जुड़े फैसले ही वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों की दिशा तय करेंगे।

भारत-फिलीपींस संयुक्त कार्य समूह (JWGTI) की 14वीं बैठक मनीला में आयोजित

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फिलीपींस- भारत और फिलीपींस के बीच व्यापार एवं निवेश सहयोग को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से भारत-फिलीपींस संयुक्त कार्य समूह (JWGTI) की 14वीं बैठक 5 जून 2026 को मनीला में आयोजित की गई।

बैठक की सह-अध्यक्षता भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव अमित वर्मा तथा फिलीपींस के व्यापार एवं उद्योग विभाग (इंटरनेशनल ट्रेड ग्रुप) के अवर सचिव एलन बी. गेप्ती ने की। दोनों देशों के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में भाग लिया।

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने भारत और फिलीपींस के बीच द्विपक्षीय व्यापार में हुई उल्लेखनीय वृद्धि का स्वागत किया। वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच व्यापार 3.9 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो मजबूत आर्थिक संबंधों को दर्शाता है।

चर्चा में द्विपक्षीय व्यापार और निवेश के रुझानों, प्राथमिकता वाले उत्पादों एवं सेवाओं की पहचान तथा विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श किया गया। दोनों देशों ने फिल्म, ऊर्जा, निर्माण एवं बुनियादी ढांचा, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT), आईटी-बीपीएम, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा औषधि क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

व्यापार को सुगम बनाने के लिए कारोबारी माहौल में सुधार भी बैठक का प्रमुख विषय रहा। इस दौरान सीमा शुल्क सहयोग, कृषि क्षेत्र में सहयोग, विशेष उत्पादों के लिए बाजार पहुंच तथा राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापारिक लेन-देन जैसे मुद्दों पर विचार किया गया।

बैठक में आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते (AITIGA) की समीक्षा को शीघ्र पूरा करने और उसके बाद भारत-फिलीपींस प्राथमिकता व्यापार समझौते (PTA) पर आगे बढ़ने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

बैठक ने दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने की रणनीतिक आवश्यकता को रेखांकित किया तथा एक गतिशील और पारस्परिक रूप से लाभकारी साझेदारी के प्रति दोनों देशों की प्रतिबद्धता को दोहराया।

इसके अलावा, 4 जून 2026 को 14वीं JWGTI बैठक के अवसर पर फिलीपींस में कार्यरत भारतीय व्यवसायों के प्रतिनिधियों के साथ एक विशेष संवाद कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में व्यापार, निवेश, बाजार अवसरों और भारत-फिलीपींस वाणिज्यिक संबंधों को और गहरा करने के उपायों पर चर्चा की गई।

JWGTI की अगली बैठक नई दिल्ली, भारत में आयोजित की जाएगी। यह मंच दोनों देशों को वैश्विक, क्षेत्रीय और द्विपक्षीय मुद्दों पर विचार-विमर्श करने तथा वस्तुओं एवं सेवाओं के व्यापार और निवेश संबंधों को और सुदृढ़ बनाने का अवसर प्रदान करता है।


भारत की अर्थव्यवस्था ने फिर दिखाई मजबूती, चौथी तिमाही में 7.8% की शानदार वृद्धि

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नई दिल्ली- भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में 7.8 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की है। यह वृद्धि बाजार की अपेक्षाओं से अधिक रही, जिससे भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने में सफल रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, विनिर्माण, सेवा और निवेश क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन के कारण आर्थिक विकास को गति मिली। सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों, बुनियादी ढांचे में निवेश और बढ़ती घरेलू मांग ने भी अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की है।

इस उपलब्धि के साथ भारत ने वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी अपनी आर्थिक क्षमता का प्रदर्शन किया है। आर्थिक वृद्धि के ताजा आंकड़े देश में निवेश और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।

मुख्य बिंदु:

  • जनवरी-मार्च तिमाही में GDP वृद्धि दर 7.8% रही।

  • वृद्धि दर बाजार के अनुमान से अधिक रही।

  • भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल।

  • विनिर्माण, सेवा और निवेश क्षेत्रों का रहा महत्वपूर्ण योगदान।


बड़ी खबर: भारत–अमेरिका व्यापार वार्ता शुरू होने वाली, आर्थिक सहयोग पर होगा बड़ा मंथन

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भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देने के लिए एक महत्वपूर्ण वार्ता शुरू होने जा रही है। दोनों देशों के वरिष्ठ वार्ताकार आने वाले दिनों में कई दौर की बैठकों में हिस्सा लेंगे, जिनका मुख्य उद्देश्य व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाना है।

सूत्रों के अनुसार, इस बहु-दिवसीय वार्ता में बाजार पहुंच, शुल्क व्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला, डिजिटल व्यापार, उन्नत प्रौद्योगिकी और निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी। दोनों देश लंबे समय से आर्थिक साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बातचीत सकारात्मक रहती है, तो इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक अवसर बढ़ सकते हैं, निवेश को प्रोत्साहन मिल सकता है और कई क्षेत्रों में नई साझेदारियों का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

भारत और अमेरिका दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं, और पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं। ऐसे में यह वार्ता वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

व्यापार जगत की निगाहें इस बैठक पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इसके नतीजे दोनों देशों के उद्योग, निर्यातकों और निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

फिलहाल सभी की नज़र इस बात पर है कि क्या दोनों देश व्यापारिक मुद्दों पर नई सहमति बनाकर आर्थिक सहयोग के नए अध्याय की शुरुआत कर पाएंगे।

फिलहाल के लिए इतना ही, आगे की हर बड़ी अपडेट के लिए जुड़े रहिए।

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