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भारत-ब्रुनेई रक्षा सहयोग की नई शुरुआत: संयुक्त कार्य समूह की पहली बैठक नई दिल्ली में सम्पन्न

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भारत-ब्रुनेई संयुक्त कार्यकारी समूह (JWG) की पहली बैठक 09 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित हुई। यह बैठक दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई। बैठक में जिन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई, उनमें सैन्य-से-सैन्य आदान-प्रदान एवं संयुक्त प्रशिक्षण का विस्तार, समुद्री सुरक्षा सहयोग—विशेषकर समुद्री मार्गों की सुरक्षा तथा मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR)—क्षमता निर्माण, रक्षा उद्योग सहयोग एवं तकनीकी साझेदारी के अवसर शामिल थे।

बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव अमिताभ प्रसाद और ब्रुनेई के रक्षा मंत्रालय की उप स्थायी सचिव पो कुई चून ने की। बैठक से पूर्व, सह-अध्यक्षों ने रक्षा सहयोग पर JWG की स्थापना हेतु संदर्भ की शर्तों (Terms of Reference – ToR) पर हस्ताक्षर किए।

ToR पर हस्ताक्षर दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग के एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। JWG एक रचनात्मक मंच के रूप में कार्य करेगा, जिसके माध्यम से वर्तमान रक्षा संबंधी गतिविधियों की समीक्षा की जाएगी और भविष्य के सहयोग के नए क्षेत्रों का पता लगाया जाएगा।

दोनों पक्षों ने रक्षा साझेदारी में बढ़ते गति को स्वागत योग्य बताया और JWG तंत्र के अंतर्गत एक संरचित रोडमैप लागू करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

अपने दो दिवसीय दौरे के दौरान, ब्रुनेई की उप स्थायी सचिव पो कुई चून ने नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह से भी मुलाकात की। उन्होंने DPSU भवन का भी दौरा किया, जो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा हाल ही में उद्घाटित अत्याधुनिक परिसर है। यह भवन सभी 16 रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों के लिए एक केंद्रीय केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जहां सहयोग, नवाचार और भारत की रक्षा विनिर्माण क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा।

तीन दशकों बाद साइप्रस संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने लोकसभा अध्यक्ष से की भेंट, भारत–साइप्रस लोकतांत्रिक सहयोग को मजबूती

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भारत और साइप्रस के बीच दशकों पुरानी मित्रता को उजागर करते हुए, साइप्रस के संसद सदन की अध्यक्ष, माननीय एनिटा डेमेट्रीउ के नेतृत्व में संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने आज संसद भवन में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला से भेंट की। इस बैठक ने दोनों देशों की लोकतांत्रिक सहयोग और संसदीय कूटनीति को विस्तारित करने की प्रतिबद्धता को दोहराया।

बिड़ला ने भारत और साइप्रस के बीच गहरे और स्थायी संबंधों को रेखांकित किया, जो साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, आपसी विश्वास और अंतरराष्ट्रीय मंचों में करीबी सहयोग पर आधारित हैं। उन्होंने याद दिलाया कि साइप्रस ने इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान, ग्रैंड क्रॉस ऑफ़ द ऑर्डर ऑफ़ मकारियस III प्रदान किया, जो भारत–साइप्रस संबंधों की निकटता और सद्भावना का प्रतीक है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत और साइप्रस में जीवंत और विकसित संसदीय लोकतंत्र की साझा विरासत है, जो और सहयोग के लिए मजबूत आधार प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि तीन दशकों बाद साइप्रस संसदीय प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा साझेदारी को नई ऊर्जा देगा और प्रशासन, प्रौद्योगिकी-संचालित संसदीय कार्यप्रणाली और संस्थागत सुदृढ़ीकरण में सहयोग के नए मार्ग खोलेगा।

प्रतिनिधिमंडल ने वैश्विक स्तर पर भारत के मार्गदर्शन और समर्थन की सराहना की और आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता पर भारत के सिद्धांतपूर्ण दृष्टिकोण को पूरी तरह से समर्थन दिया। दोनों पक्षों ने संसदीय प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण, अनुसंधान विनिमय और जन-जन संपर्क में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की।

बैठक के दौरान, बिड़ला ने प्रतिनिधिमंडल को भारतीय संसद की कार्यप्रणाली, संसदीय समितियों की भूमिका और कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल संसद प्लेटफ़ॉर्म सहित आधुनिक तकनीकों के एकीकरण के प्रयासों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि इन नवाचारों ने संसदीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, दक्षता और बहुभाषी पहुंच को काफी बढ़ाया है।

26 नवंबर को संविधान दिवस के उत्सव का उल्लेख करते हुए, बिड़ला ने कहा कि भारत का संविधान सामाजिक न्याय, आर्थिक सशक्तिकरण और समावेशी राष्ट्रीय विकास को सुदृढ़ करने का एक प्रभावशाली उपकरण रहा है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक मूल्य आज भी भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं का मार्गदर्शन करते हैं, जिससे प्रभावी शासन और नागरिकों के अधिकारों और आकांक्षाओं की रक्षा होती है।

प्रतिनिधिमंडल ने भारत के नए संसद भवन में स्थापत्य उत्कृष्टता, तकनीकी परिष्कार और समृद्ध सभ्यता धरोहर की गहरी सराहना की।

तीन दशकों बाद साइप्रस संसदीय प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा भारत–साइप्रस संबंधों में एक मील का पत्थर है। दोनों पक्षों के बीच रचनात्मक और भविष्योन्मुखी संवाद ने सतत सहयोग के लिए आधार तैयार किया और ऐतिहासिक मित्रता और आपसी विश्वास पर आधारित द्विपक्षीय संबंधों को और ऊँचाइयों तक पहुँचाने का मार्ग प्रशस्त किया।


भारत–कनाडा आर्थिक सहयोग में नई ऊर्जा: पीयूष गोयल ने क्रिटिकल मिनरल्स, क्लीन एनर्जी और एआई में अपार संभावनाएँ बताईं

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केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज नई दिल्ली में इंडो-कनाडियन बिजनेस चैंबर को संबोधित करते हुए कहा कि भारत और कनाडा के बीच क्रिटिकल मिनरल्स, मिनरल प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी, क्लीन एनर्जी, न्यूक्लियर एनर्जी और सप्लाई-चेन विविधीकरण में सहयोग की व्यापक संभावनाएँ मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग, मशीन लर्निंग और नेक्स्ट-जनरेशन डेटा सेंटर्स जैसे उभरते क्षेत्रों में भारत की क्षमता दुनिया में तेजी से बढ़ रही है और भारत हर वर्ष सबसे बड़ा STEM टैलेंट पूल तैयार कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत और कनाडा प्राकृतिक सहयोगी हैं, जिनकी पूरक क्षमताएँ—व्यापार, निवेश और नई तकनीकों में व्यापक अवसर पैदा करती हैं।

भारत–कनाडा के मजबूत संबंध और CEPA पर प्रगति

पीयूष गोयल ने G20 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई सकारात्मक बैठक का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने उच्च महत्त्वाकांक्षी CEPA (Comprehensive Economic Partnership Agreement) पर बातचीत शुरू करने और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने पर सहमति व्यक्त की है।

उन्होंने कहा कि CEPA दोनों देशों के बीच विश्वास, निवेश सुरक्षा और सम्मानजनक संवाद को मजबूत करेगा।

क्लीन एनर्जी और एआई–ड्रिवन इन्फ्रास्ट्रक्चर में भारत अग्रणी

पीयूष गोयल ने बताया कि भारत की 500 GW की राष्ट्रीय पावर ग्रिड—जिसमें 250 GW नवीकरणीय ऊर्जा शामिल है—एआई आधारित प्रणालियों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करती है।

भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 GW क्लीन एनर्जी क्षमता हासिल करना है, जिससे भारत दुनिया के सबसे भरोसेमंद और किफायती स्वच्छ ऊर्जा प्रदाताओं में शामिल होगा।

भारत की अर्थव्यवस्था: मजबूती, स्थिरता और वैश्विक विश्वास

उन्होंने बताया कि भारत “Fragile Five” की सूची से आगे बढ़कर आज दुनिया की शीर्ष पाँच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है और अगले 2–2.5 वर्षों में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।

भारत के पास—

  • कम मुद्रास्फीति,

  • मजबूत बैंकिंग प्रणाली,

  • ऊँचे विदेशी मुद्रा भंडार,

  • तेज़ी से विकसित होता इंफ्रास्ट्रक्चर,

  • और सशक्त कैपिटल मार्केट है।

उन्होंने यह भी बताया कि बीते 11 वर्षों में भारतीय शेयर बाजार 4.5 गुना तक बढ़ा है, जो निवेशकों के विश्वास का प्रमाण है।

भारत–कनाडा साझेदारी को मज़बूत करने के लिए पाँच–बिंदु प्रस्ताव

पीयूष गोयल ने दोनों देशों के बीच संबंध को गति देने के लिए पाँच प्रमुख सुझाव दिए—

  1. संवाद को परिणामों में बदलना
    — स्पष्ट रोडमैप, लक्ष्य और मापनीय प्रगति।

  2. सीईओ फोरम को सक्रिय करना
    — उद्योगों के बीच सीधे सहयोग को बढ़ावा देना।

  3. कनाडा को भारत के आगामी AI Summit में भाग लेने के लिए आमंत्रण।

  4. संयुक्त नवाचार को बढ़ावा
    — भारत की मजबूत IPR व्यवस्था, विशाल डेटा सेट और किफायती अनुसंधान माहौल का लाभ उठाना।

  5. प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी
    — क्रिटिकल मिनरल्स, क्लीन एनर्जी, एयरोस्पेस, रक्षा और मेक इन इंडिया के तहत निर्माण।

उन्होंने कहा कि कनाडाई नवाचार और भारतीय क्षमताएँ मिलकर दुनिया के लिए नई संभावनाएँ पैदा कर सकती हैं।

भारत–कनाडा सहयोग: 2047 के विकसित भारत की यात्रा में साथ

अंत में,पीयूष गोयल ने कनाडाई कंपनियों को भारत की विकसित राष्ट्र 2047 की यात्रा में सहयोगी बनने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि भारत स्थिर, पारदर्शी और अवसरों से भरपूर वातावरण प्रदान करता है और आने वाले वर्षों में भारत–कनाडा साझेदारी और अधिक मजबूत होगी।


संयुक्त सैन्य अभ्यास “मित्र शक्ति–2025” का ग्यारहवां संस्करण बेलगावी, कर्नाटक में प्रारंभ

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संयुक्त सैन्य अभ्यास “मित्र शक्ति–2025” का ग्यारहवां संस्करण आज कर्नाटक के बेलगावी स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में प्रारंभ हुआ। यह अभ्यास 10 से 23 नवम्बर 2025 तक आयोजित किया जा रहा है।

भारतीय दल में 170 सैनिक शामिल हैं, जिनका नेतृत्व मुख्य रूप से राजपूत रेजिमेंट कर रही है। श्रीलंका की ओर से 135 सैनिक भाग ले रहे हैं, जिनमें प्रमुख रूप से गजाबा रेजिमेंट के सैनिक शामिल हैं। इसके अलावा भारतीय वायुसेना के 20 और श्रीलंकाई वायुसेना के 10 कर्मी भी इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं।

इस अभ्यास का उद्देश्य संयुक्त रूप से संयुक्त राष्ट्र के अध्याय VII के तहत उप-पारंपरिक अभियानों (Sub Conventional Operations) के संचालन का अभ्यास करना है। अभ्यास के दायरे में आतंकवाद-रोधी अभियानों के दौरान संयुक्त प्रतिक्रियाओं का समन्वय शामिल है। दोनों सेनाएं छापामार कार्रवाई, खोज एवं नष्ट करने के मिशन, हेलीबोर्न ऑपरेशन आदि जैसी सामरिक गतिविधियों का अभ्यास करेंगी। इसके अतिरिक्त, अभ्यास पाठ्यक्रम में आर्मी मार्शल आर्ट्स रूटीन (AMAR), कॉम्बैट रिफ्लेक्स शूटिंग और योग भी शामिल हैं।

मित्र शक्ति–2025 में ड्रोन, काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स (Counter-UAS) और हेलीकॉप्टरों का उपयोग भी किया जाएगा। अभ्यास के दौरान दोनों पक्ष मिलकर हेलिपैड की सुरक्षा और आतंकवाद-रोधी अभियानों में घायल सैनिकों की निकासी (casualty evacuation) जैसी प्रक्रियाओं का भी अभ्यास करेंगे। संयुक्त प्रयासों का लक्ष्य सैनिकों के बीच पारस्परिक संचालन क्षमता (interoperability) को बढ़ाना और संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों के दौरान जीवन एवं संपत्ति के नुकसान के जोखिम को कम करना है।

दोनों सेनाएं युद्धक कौशलों की विस्तृत श्रृंखला पर संयुक्त अभ्यासों के दौरान अपने अनुभव और सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करेंगी। इन साझा प्रयासों से भारतीय सेना और श्रीलंकाई सेना के बीच रक्षा सहयोग और अधिक मजबूत होगा। यह अभ्यास दोनों पड़ोसी देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को भी सुदृढ़ करेगा।

अंगोला की नेशनल असेंबली में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का संबोधन

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अंगोला की नेशनल असेंबली की अध्यक्ष महामहिम कैरोलिना सेरक्वेइरा ने राष्ट्रपति मुर्मु का गर्मजोशी से स्वागत किया और कहा कि अंगोला की स्वतंत्रता की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर राष्ट्रपति मुर्मु की ऐतिहासिक यात्रा भारत और अंगोला के द्विपक्षीय संबंधों में एक नया मील का पत्थर है। उन्होंने कहा कि भारत की परिवर्तनकारी विकास यात्रा अंगोला के लिए प्रेरणा है और भारत के अफ्रीका के प्रति निरंतर समर्थन और प्रतिबद्धता की गहरी सराहना की।

अंगोला की संसद को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि औपनिवेशिक विरोधी संघर्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों का इतिहास भारत और अंगोला को जोड़ता है। उन्होंने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और अंगोला अफ्रीका के सबसे सशक्त लोकतंत्रों में से एक है।

राष्ट्रपति ने दोनों देशों की संसदों के बीच आदान-प्रदान को बढ़ाने का आह्वान किया ताकि पारस्परिक समझ और सहयोग को प्रोत्साहित किया जा सके।

उन्होंने अंगोला की संसद में महिलाओं के उल्लेखनीय प्रतिनिधित्व की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि संसद में 39 प्रतिशत से अधिक महिला सदस्य होने के साथ, अंगोला समावेशी शासन का प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है। उन्होंने भारत में हाल ही में पारित किए गए उस कानून का भी उल्लेख किया जो विधायी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए लाया गया है।

द्विपक्षीय संबंधों पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि व्यापार और आर्थिक सहयोग हमारी साझेदारी का महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग ने आर्थिक संबंधों को और मजबूत किया है। उन्होंने डिजिटल तकनीक, रक्षा, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।

राष्ट्रपति ने अंगोला में बुनियादी ढांचे, सुशासन और कृषि, ऊर्जा तथा पर्यटन जैसे क्षेत्रों में हुई प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि अंगोला अफ्रीका की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण सहभागी के रूप में उभर रहा है। उन्होंने अफ्रीकी संघ के अध्यक्ष के रूप में अंगोला की अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व भूमिका की भी प्रशंसा की।

राष्ट्रपति ने कहा कि जब दुनिया संघर्षों और अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है, तब वैश्विक दक्षिण के देश विशेष रूप से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने अफ्रीका में शांति और विकास को बढ़ावा देने के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता दोहराई और अंगोला के सांसदों से भारत-अंगोला साझेदारी की पूरी क्षमता को साकार करने के लिए एक साथ काम करने का आग्रह किया।

इससे पहले राष्ट्रपति मुर्मु ने लुआंडा में डॉ. एंतोनियो आगोस्टिन्हो नेतो की स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। डॉ. नेतो, जो अंगोला के प्रथम राष्ट्रपति थे, देश की एकता, प्रतिरोध और राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक हैं और उन्होंने अंगोला की स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राष्ट्रपति ने साओ मिगेल किला भी देखा, जो 16वीं सदी का औपनिवेशिक युग का दुर्ग है और अब सशस्त्र बलों के संग्रहालय के रूप में कार्य करता है। यह संग्रहालय अंगोला के सैन्य इतिहास, औपनिवेशिक काल और स्वतंत्रता संघर्ष की कहानी प्रस्तुत करता है।



यूएई थलसेना प्रमुख मेजर जनरल यूसुफ मायौफ सईद अल हल्लामी भारत दौरे पर, दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मिलेगा नया आयाम

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संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) थलसेना के कमांडर मेजर जनरल यूसुफ मायौफ सईद अल हल्लामी 27 से 28 अक्टूबर 2025 तक भारत के आधिकारिक दौरे पर हैं। यह उच्चस्तरीय दौरा भारत और यूएई के बीच द्विपक्षीय सैन्य सहयोग को और सुदृढ़ करने तथा प्रशिक्षण एवं क्षमता संवर्धन के क्षेत्रों में नए सहयोग अवसरों को तलाशने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा साझेदारी को और गहरा करने की साझा प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।

दौरे के दौरान, मेजर जनरल अल हल्लामी को औपचारिक सैन्य सम्मान (ceremonial welcome) प्रदान किया गया और उन्हें ऑपरेशन सिंदूर के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। इसके साथ ही, सूचना प्रणाली महानिदेशक (DG Information System) और आर्मी डिज़ाइन ब्यूरो (Army Design Bureau) द्वारा उन्हें भारत की रक्षा क्षमताओं और भारतीय सेना के कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) रोडमैप पर भी प्रस्तुति दी गई।

28 अक्टूबर 2025 को मेजर जनरल अल हल्लामी राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (National War Memorial) पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इसके बाद वे डीआरडीओ (DRDO) का दौरा करेंगे, जहाँ उन्हें देश में विकसित विभिन्न स्वदेशी हथियारों और उपकरण प्लेटफार्मों के बारे में जानकारी दी जाएगी। इस अवसर पर वे डॉ. समीर वी. कामत, सचिव, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष से भी भेंट करेंगे। इसके अलावा वे भारतीय रक्षा उद्योग के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे और परस्पर हित के मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।

मेजर जनरल यूसुफ मायौफ सईद अल हल्लामी का यह दौरा भारत और यूएई के बीच रक्षा सहयोग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। यह न केवल दोनों देशों के बीच मजबूत रक्षा संबंधों को और दृढ़ करेगा, बल्कि सैन्य सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में एक भविष्य-तैयार (Future-Ready) साझेदारी की दिशा में मार्ग प्रशस्त करेगा।

मंगोलिया के राष्ट्रपति उखना खुरेलसुख भारत की चार दिवसीय राजकीय यात्रा पर आएंगे

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नई दिल्ली- मंगोलिया के राष्ट्रपति उखना खुरेलसुख सोमवार से भारत की चार दिवसीय राजकीय यात्रा पर आएंगे। यह उनकी भारत की पहली यात्रा है बतौर राष्ट्राध्यक्ष, जो राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के आमंत्रण पर हो रही है।

राष्ट्रपति खुरेलसुख के साथ एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी आएगा, जिसमें कैबिनेट मंत्री, सांसद, वरिष्ठ अधिकारी, उद्योगपति और सांस्कृतिक प्रतिनिधि शामिल होंगे।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु उनके सम्मान में एक राजकीय भोज (State Banquet) आयोजित करेंगी। राष्ट्रपति खुरेलसुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात कर भारत-मंगोलिया संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा करेंगे। इस दौरान उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर भी उनसे भेंट करेंगे।

मंत्रालय ने बताया कि यह यात्रा दोनों देशों को आपसी संबंधों की प्रगति की समीक्षा करने, रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करने का अवसर प्रदान करेगी।

भारत और मंगोलिया के बीच 1955 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। तब से दोनों देशों ने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों पर आधारित घनिष्ठ साझेदारी विकसित की है, जो रक्षा, ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य कई क्षेत्रों में फैली हुई है।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री से की द्विपक्षीय बैठक, रक्षा सहयोग को नई दिशा

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कैनबरा- भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी दो दिवसीय आधिकारिक ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान ऑस्ट्रेलिया के उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स के साथ कैनबरा में व्यापक द्विपक्षीय बैठक की। यह बैठक भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) के पांच वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित की गई। दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को और गहराई देने के अपने साझा संकल्प को दोहराया।

बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने सैन्य अभ्यास, समुद्री सुरक्षा, रक्षा उद्योग सहयोग और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में संयुक्त अनुसंधान जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत-ऑस्ट्रेलिया के गहरे सांस्कृतिक संबंधों और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी बीते वर्षों में रक्षा सहयोग के क्षेत्र में उल्लेखनीय रूप से विस्तारित हुई है।

बैठक के अंत में तीन महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए —

  1. सूचना साझा करने पर समझौता (Agreement on Information Sharing)

  2. पनडुब्बी खोज और बचाव सहयोग पर समझौता ज्ञापन (MoU on Submarine Search and Rescue Cooperation)

  3. संयुक्त स्टाफ वार्ता की स्थापना पर संदर्भ शर्तें (Terms of Reference on Joint Staff Talks)

राजनाथ सिंह ने बैठक के दौरान दोहराया कि भारत का आतंकवाद पर रुख स्पष्ट है —

“आतंक और वार्ता साथ नहीं चल सकते, आतंक और व्यापार साथ नहीं चल सकते, और पानी और खून साथ नहीं बह सकते।”

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सभी प्रकार के आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया।

बैठक के दौरान ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ भी संक्षिप्त रूप से शामिल हुए और राजनाथ सिंह का गर्मजोशी से स्वागत किया। रक्षा मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएँ दीं और अल्बनीज़ को मई 2025 के चुनावों में उनकी जीत पर बधाई दी।

अल्बनीज़ ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की तेज़ आर्थिक प्रगति, विशेषकर रक्षा, साइबर सुरक्षा और आईटी क्षेत्रों में उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने भारत द्वारा गरीबी उन्मूलन में किए गए प्रयासों की प्रशंसा की और द्विपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की।

बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान (Joint Statement) में भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा साझेदारी की बढ़ती गहराई और आपसी विश्वास को रेखांकित किया गया।

दिन की शुरुआत में राजनाथ सिंह का स्वागत ऑस्ट्रेलिया के सहायक रक्षा मंत्री पीटर खलील ने किया और उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। बाद में उन्होंने KC-30A मल्टीरोल टैंकर विमान से F-35 फाइटर जेट को हवा में ईंधन भरने का प्रत्यक्ष प्रदर्शन देखा, जो दोनों देशों की हवाई सहयोग क्षमता को दर्शाता है।

ऑस्ट्रेलियाई संसद भवन पहुंचने पर राजनाथ सिंह को पारंपरिक स्वागत समारोह दिया गया, जिसमें उप प्रधानमंत्री रिचर्ड मार्ल्स उपस्थित थे।

यह यात्रा भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा और रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


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