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पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव नरेश पाल गंगवार ने डुवासु, मथुरा का दौरा किया

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भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग (डीएएचडी) के सचिव नरेश पाल गंगवार ने 17 जून 2026 को उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान (डुवासु), मथुरा का दौरा किया।

दौरे के दौरान सचिव ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, अनुसंधान, नैदानिक तथा पशुधन विकास संबंधी गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने टीचिंग वेटरिनरी क्लीनिकल कॉम्प्लेक्स (टीवीसीसी), लाइवस्टॉक फार्म कॉम्प्लेक्स (एलएफसी), विभिन्न उन्नत प्रयोगशालाओं तथा शिक्षण सुविधाओं का निरीक्षण किया। गंगवार ने विश्वविद्यालय की विशेष बकरी इकाई (गोट यूनिट) का भी दौरा किया, जहां उन्होंने उन्नत प्रजनन एवं प्रजनन जैव-प्रौद्योगिकी कार्यक्रमों में विशेष रुचि दिखाई।

दौरे का प्रमुख आकर्षण भारत की अग्रणी बकरी वीर्य संरक्षण (गोट सीमेन फ्रीजिंग) सुविधा का निरीक्षण रहा, जो बकरी इकाई में स्थापित है। विश्वविद्यालय द्वारा बकरियों की आनुवंशिक गुणवत्ता सुधार, संरक्षण तथा श्रेष्ठ जर्मप्लाज्म के प्रसार के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए गंगवार ने चर्चा की कि ऐसी तकनीकें छोटे जुगाली करने वाले पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण आजीविकाओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

पर्यावरणीय स्थिरता के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए सचिव ने परिसर में राष्ट्रीय अभियान “एक पेड़ मां के नाम” के अंतर्गत वृक्षारोपण कार्यक्रम में भाग लिया। यह पहल कृषि विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक समर्पण का प्रतीक है।

गंगवार ने दीनदयाल उपाध्याय सभागार में संकाय सदस्यों, वैज्ञानिकों, छात्रों एवं शोधकर्ताओं के साथ एक संवादात्मक सत्र की अध्यक्षता भी की। इस दौरान पशु स्वास्थ्य, डेयरी विकास, उद्यमिता तथा क्षेत्र में भविष्य की विकास संभावनाओं पर व्यापक चर्चा हुई।

अपने संबोधन में गंगवार ने देशभर में पशु चिकित्सा अवसंरचना को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने विशेष रूप से आधुनिक क्लीनिकल सुविधाओं, नैदानिक प्रयोगशालाओं, उन्नत प्रजनन प्रणालियों तथा प्रौद्योगिकी-संचालित पशु स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि पशु चिकित्सा संस्थान पशुधन उत्पादकता बढ़ाने, रोग नियंत्रण, ग्रामीण समृद्धि तथा खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने छात्रों और शोध समुदाय से जमीनी स्तर के किसानों एवं पशुपालकों को सीधे लाभ पहुंचाने वाले व्यावहारिक और क्षेत्र-उन्मुख समाधान विकसित करने का आह्वान किया।

कुलपति डॉ. अभिजीत मित्रा ने अनुसंधान और कौशल विकास के क्षेत्र में डुवासु के योगदानों पर प्रकाश डाला। यह दौरा विश्वविद्यालय और पशुपालन एवं डेयरी विभाग के बीच सहयोग को और मजबूत करने में सफल रहा तथा संस्थागत अनुसंधान को राष्ट्रीय पशुधन विकास लक्ष्यों के साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

पशुपालन क्षेत्र सुधारों पर समीक्षा बैठक आयोजित, राज्यों को तेज़ी से अमल करने के निर्देश

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नई दिल्ली: पशुपालन एवं डेयरी विभाग (Department of Animal Husbandry and Dairying (DAHD) द्वारा 17 अप्रैल 2026 को कृषि भवन, नई दिल्ली में पशुपालन क्षेत्र से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर एक समीक्षा बैठक एवं कार्यशाला आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता विभाग के सचिव नरेश पाल गंगवार ने की, जिसमें सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पशुपालन विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।

बैठक में स्पेशल असिस्टेंस टू स्टेट्स फॉर कैपिटल इन्वेस्टमेंट (SASCI), टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान (AI) और भारत पशुधन पोर्टल (NDLM) से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

अध्यक्ष ने SASCI योजना के तहत प्रोत्साहन प्राप्त करने के लिए आवश्यक मानदंडों और प्रक्रियाओं की जानकारी दी तथा राज्यों को अपने पशुधन विकास योजनाओं के अनुरूप प्रस्ताव तैयार करने की सलाह दी।

अपने संबोधन में नरेश पाल गंगवार ने कहा कि अधिकांश राज्यों ने DAHD के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्य शुरू कर दिया है। उन्होंने राज्यों को योजना के क्रियान्वयन में तेजी लाने, समय पर बजट आवंटन सुनिश्चित करने और डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिक उपयोग करने पर जोर दिया।

कार्यशाला के दौरान अतिरिक्त सचिव वर्षा जोशी द्वारा विस्तृत प्रस्तुति दी गई। इसमें टीकाकरण और कृत्रिम गर्भाधान से संबंधित मानक संचालन प्रक्रियाओं (SoPs) पर चर्चा की गई। साथ ही, NDLM–भारत पशुधन पोर्टल के तहत डेटा इंटीग्रेशन और रियल-टाइम रिकॉर्ड अपलोडिंग को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।

बैठक में राष्ट्रीय पशुधन मिशन, पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम, पशुधन बीमा, चारा योजना, और रोग नियंत्रण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की भी समीक्षा की गई। राज्यों को FMD मुक्त क्षेत्र बनाने, जिला स्तर पर डायग्नोस्टिक लैब मजबूत करने और महामारी की तैयारी बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें राज्यों द्वारा उठाए गए सवालों के जवाब दिए गए। सभी प्रतिभागियों ने योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन और केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।


केंद्रीय बजट 2026 में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को बड़ी प्राथमिकता: ग्रामीण आजीविका और किसानों की आय बढ़ाने पर ज़ोर

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केंद्रीय बजट 2026 में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को विशेष महत्व दिया गया है, जिससे सरकार की ग्रामीण आजीविका को सशक्त करने, किसानों की आय बढ़ाने और पशुधन आधारित अर्थव्यवस्था के सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता स्पष्ट होती है। बजट के प्रावधानों का मुख्य फोकस उत्पादकता बढ़ाने, पशु स्वास्थ्य सुधारने और पूरे पशुधन मूल्य श्रृंखला में आधारभूत ढांचे को मज़बूत करने पर है।

उत्पादकता और पशु स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान

बजट में नस्ल सुधार कार्यक्रमों, पशु चिकित्सा सेवाओं के विस्तार और रोग रोकथाम पहलों के लिए अतिरिक्त समर्थन का प्रावधान किया गया है। इससे किसानों की अमूल्य पशुधन संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।

डेयरी क्षेत्र को मज़बूती

डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए दूध संग्रहण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) से जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास पर ज़ोर दिया गया है। साथ ही, डेयरी सहकारी संस्थाओं और पशुधन किसान उत्पादक संगठनों (LFPOs) को विशेष सहयोग देने की बात कही गई है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में कदम

“आत्मनिर्भर भारत” के विज़न के अनुरूप बजट में पशुपालन क्षेत्र में नवाचार, तकनीक के उपयोग और निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित किया गया है। चारा विकास, फीड सुरक्षा और जलवायु-सहिष्णु पशुपालन प्रथाओं पर केंद्रित पहलें इस क्षेत्र की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करेंगी।

रोजगार और पोषण सुरक्षा

बजट 2026 में पशुपालन और डेयरी पर बढ़ा हुआ फोकस रोजगार सृजन, पोषण सुरक्षा और ग्रामीण आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देगा। विभाग ने राज्यों और सभी हितधारकों के साथ मिलकर इन पहलों के प्रभावी क्रियान्वयन का संकल्प दोहराया है।

बजट की प्रमुख घोषणाएँ

1. प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण

पशुधन क्षेत्र कृषि आय में लगभग 16% योगदान देता है, जिसमें गरीब और सीमांत परिवारों की आय भी शामिल है। पशु चिकित्सकों की संख्या 20,000 से अधिक करने के लिए क्रेडिट-लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना शुरू करने का प्रस्ताव है। इसके तहत निजी क्षेत्र में पशु चिकित्सा व पैरा-वेटरनरी कॉलेज, पशु अस्पताल, डायग्नोस्टिक लैब और प्रजनन केंद्र स्थापित किए जाएंगे। भारतीय और विदेशी संस्थानों के बीच सहयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

2. पशुपालन उद्यमिता के लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी

बजट 2026-27 में पशुपालन उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी योजना प्रस्तावित है। इससे पशुपालक, डेयरी और पोल्ट्री उद्यम आधुनिक उपकरण अपनाकर उत्पादकता बढ़ा सकेंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में मज़बूत मूल्य श्रृंखलाएँ विकसित होंगी।

3. 20,000 पशु चिकित्सकों का प्रशिक्षण

देशभर में पशु चिकित्सा सेवाओं को मज़बूत करने के लिए 20,000 पशु चिकित्सकों को प्रशिक्षित करने की योजना बनाई गई है, जिससे डायग्नोस्टिक्स और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा।

4. ग्रामीण और संबद्ध कृषि पर व्यापक फोकस

  • पशुधन, डेयरी और पोल्ट्री मूल्य श्रृंखलाओं का आधुनिकीकरण और विस्तार

  • AI आधारित कृषि उपकरण, जैसे “भारत विस्तार” प्लेटफॉर्म, जिससे डेयरी और पशुपालकों को बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी

  • डेयरी और पशुपालन किसानों के लिए ऋण और उद्यमिता समर्थन, ताकि ग्रामीण आय में विविधता लाई जा सके

कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026 पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को विकास की नई ऊँचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक मजबूत और दूरदर्शी कदम साबित होगा।

“पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने डेयरी अवसंरचना और पशुधन सुधारों पर विस्तृत जानकारी दी”

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भारत सरकार का पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD), राज्यों के प्रयासों को पूरक बनाने और डेयरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए दो प्रमुख अवसंरचना विकास योजनाएँ लागू कर रहा है 

राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD) और पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF)।

NPDD के तहत प्रमुख सहायता

  • दूध संग्रह, प्रसंस्करण और चिलिंग सुविधाओं की स्थापना और सुदृढ़ीकरण।

  • गुणवत्ता आधारित दूध परीक्षण उपकरणों की स्थापना।

  • ग्राम-स्तरीय डेयरी सहकारी समितियों को Bulk Milk Coolers (BMCs) उपलब्ध कराना, जिनमें सोलर फोटोवोल्टिक (SPV) और थर्मल स्टोरेज सिस्टम (TSS) संचालित BMCs भी शामिल हैं।

  • अब तक 52 सौर ऊर्जा संचालित BMCs को मंजूरी दी गई है।

AHIDF के तहत सहायता

  • दूध प्रसंस्करण संयंत्रों और चिलिंग अवसंरचना की स्थापना/आधुनिकीकरण।

  • मूल्यवर्धित डेयरी इकाइयों की स्थापना।

  • नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता प्रणालियों के लिए सहायता।

  • इससे डेयरी सहकारी समितियाँ, FPOs, SHGs और निजी उद्यमी बिजली और प्रसंस्करण से जुड़ी कमियों को दूर कर सकते हैं।

बिहार के बरौनी, गुजरात के बनासकांठा और केरल के एर्नाकुलम की तीन दुग्ध संघों को सौर ऊर्जा आधारित डेयरी प्रसंस्करण इकाइयों के लिए सहायता प्रदान की गई है।

छोटे एवं सीमांत पशुपालकों में तकनीक अपनाने और उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास

DAHD द्वारा राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM) लागू किया जा रहा है, जिसके तहत नस्ल सुधार एवं वैज्ञानिक ढंग से पशुपालन को बढ़ावा दिया जाता है।

RGM के प्रमुख हस्तक्षेप

  • राष्ट्रव्यापी कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम:

    • 9.36 करोड़ पशु कवर

    • 14.56 करोड़ कृत्रिम गर्भाधान (AI)

    • 5.62 करोड़ किसानों को लाभ

  • Sex Sorted Semen:

    • 128 लाख खुराकें तैयार

    • स्वदेशी तकनीक से कीमत घटकर ₹800 से ₹250 प्रति खुराक

    • 40 लाख क्षमता स्थापित, 150 लाख खुराक क्षमता निर्माणाधीन

  • तेज़ नस्ल सुधार कार्यक्रम:

    • गारंटीड गर्भधारण पर Sex Sorted Semen लागत का 50% प्रोत्साहन

  • MAITRIs (ग्रामीण मल्टी-परपज़ AI तकनीशियन):

    • 39,810 प्रशिक्षित तकनीशियन

    • घर-घर AI सेवा

  • IVF तकनीक:

    • 24 IVF लैब स्थापित

    • प्रति गर्भधारण ₹5,000 का प्रोत्साहन

  • Progeny Testing & Pedigree Selection:

    • 4,288 उच्च आनुवंशिक गुण वाले सांड तैयार और सीमन स्टेशनों को उपलब्ध

  • सीमन स्टेशनों का सुदृढ़ीकरण:

    • 47 स्टेशन स्वीकृत

  • किसान जागरूकता गतिविधियाँ:

    • प्रजनन शिविर, बछड़ा रैलियाँ, प्रशिक्षण कार्यक्रम और कार्यशालाएँ देशभर में आयोजित

इन पहलों से आधुनिक प्रजनन तकनीकें ग्रामीण स्तर तक पहुँच रही हैं, उत्पादकता बढ़ रही है और छोटे एवं सीमांत पशुपालकों की आय में वृद्धि हो रही है।

यह उत्तर पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह द्वारा लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दिया गया।


राष्ट्रीय दुग्ध दिवस 2025: पशुपालन व डेयरी क्षेत्र में प्रगति, नवाचार और सम्मान का राष्ट्रीय उत्सव

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मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय, भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) ने 26 नवंबर, 2025 को नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में राष्ट्रीय दुग्ध दिवस 2025 का आयोजन किया।

कार्यक्रम में प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, माननीय राज्य मंत्री, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय; जॉर्ज कुरियन, माननीय राज्य मंत्री, मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय; तथा नरेश पाल गंगवार, सचिव, DAHD सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने शिरकत की। इस कार्यक्रम में देशभर के पशुपालकों, मिल्क फेडरेशनों, डेयरी सहकारी समितियों और विशेषज्ञों ने भी व्यापक भागीदारी की।

DAHD की अतिरिक्त सचिव, वर्षा जोशी ने स्वागत भाषण दिया और सभी विशिष्ट अतिथियों तथा प्रतिभागियों की उपस्थिति के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

DAHD के सचिव, नरेश पाल गंगवार ने राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के अवसर पर सभी प्रतिभागियों और पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और पशुधन क्षेत्र में दीर्घकालीन विकास के लिए आनुवंशिक सुधार और उन्नत प्रजनन तकनीकों जैसी वैज्ञानिक हस्तक्षेपों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने डेयरी किसानों को सेक्स-सॉर्टेड सीमेन, इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) जैसी उन्नत तकनीकों को अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया। उन्होंने डेयरी सहकारिताओं की किसानों के आर्थिक उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया।

समारोह के दौरान, प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, माननीय राज्य मंत्री, ने तीन श्रेणियों में राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार प्रदान किए—श्रेष्ठ दुग्ध किसान (देशी नस्ल की गाय/भैंस पालने वाले), श्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन, तथा श्रेष्ठ डेयरी सहकारी समिति/मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी/डेयरी किसान उत्पादक संगठन।

अपने संबोधन में माननीय राज्य मंत्री ने भारतीय अर्थव्यवस्था में डेयरी क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत सरकार के प्रयासों से देश में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो बढ़कर 485 ग्राम प्रति दिन हो गई है, जो वैश्विक औसत 329 ग्राम प्रति दिन से अधिक है। उन्होंने डेयरी किसानों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि राष्ट्र की शक्ति गांवों में है। उन्होंने राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार विजेताओं की सराहना की और डेयरी क्षेत्र की संभावनाओं को रेखांकित किया।

माननीय राज्य मंत्री ने “भारत में पशु चिकित्सा अवसंरचना के न्यूनतम मानकों के दिशानिर्देश” भी जारी किए। ये दिशानिर्देश पशु चिकित्सा सेवाओं के लिए एक समान चार-स्तरीय ढांचा प्रस्तुत करते हैं—प्राथमिक पशु चिकित्सा सेवा केंद्र (PVCCs), ब्लॉक-स्तरीय पशु चिकित्सा अस्पताल, जिला-स्तरीय पशु चिकित्सा अस्पताल, तथा राज्य-स्तरीय पॉलीक्लिनिक/रेफरल केंद्र। इससे राज्यों को पशु चिकित्सा सेवाओं को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।

माननीय राज्य मंत्री द्वारा बेसिक एनिमल हस्बेंड्री स्टैटिस्टिक्स (BAHS) 2025 का भी विमोचन किया गया, जो नीतिगत योजना के लिए अद्यतन और व्यापक आंकड़े प्रदान करता है।

इसके अलावा, प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने रोपड़ मिल्क यूनियन द्वारा राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD) के तहत, एवं JICA द्वारा समर्थित परियोजना—घटक B: डेयरिंग थ्रू कोऑपरेटिव्स के अंतर्गत कमीशन किए गए 20 आधुनिक इंसुलेटेड मिल्क टैंकरों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों में 9 ब्रीड मल्टीप्लिकेशन फार्म का उद्घाटन भी किया गया।

कार्यक्रम के दौरान, माननीय राज्य मंत्री ने सभी प्रतिभागियों के साथ भारत के संविधान की प्रस्तावना का वाचन किया और न्याय, स्वतंत्रता, समानता तथा बंधुत्व के मूल्यों को बनाए रखने का संकल्प लिया।

जॉर्ज कुरियन, माननीय राज्य मंत्री, ने भी राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार 2025 के सभी विजेताओं को बधाई दी और डेयरी उत्पादकता बढ़ाने के लिए कृत्रिम गर्भाधान और भ्रूण प्रत्यारोपण जैसी उन्नत तकनीकों के उपयोग की सराहना की। उन्होंने पशु चिकित्सा सेवाओं के और अधिक सुदृढ़ीकरण तथा नवीन वैज्ञानिक तकनीकों के व्यापक उपयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम के दौरान “पशु उत्पादकता में वृद्धि—तकनीकी विशेषज्ञों और प्रगतिशील किसानों के अनुभव साझा करने” विषय पर पैनल चर्चाएँ भी आयोजित की गईं, जिसमें विशेषज्ञों और प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव, नवाचारों, वैज्ञानिक तरीकों और जमीनी रणनीतियों को साझा किया, जिनसे पशु उत्पादन में मापनीय सुधार प्राप्त हुए हैं।

यह कार्यक्रम पशुपालन और डेयरी क्षेत्र से जुड़े किसानों की उपलब्धियों को सम्मानित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में सिद्ध हुआ।


बकरी शेड निर्माण से महेत्तर लाल की आजीविका को मिला नया संबल

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मनरेगा योजना बनी ग्रामीण आत्मनिर्भरता का आधार

रायपुर- मेहनत को जब उचित अवसर मिलता है, तो सपने हकीकत में बदल जाते हैं। जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम साजापाली के किसानम हेत्तर लाल बरेठ की जीवन यात्रा भी इसी प्रेरणादायक परिवर्तन की कहानी कहती है। मनरेगा योजना के तहत निर्मित बकरी शेड ने न सिर्फ उनकी आजीविका को सुरक्षित आधार दिया, बल्कि उनके आत्मविश्वास और भविष्य दोनों को नई दिशा प्रदान की है।

पहले बारिश और धूप में खुले में पशुओं की देखभाल करने वाले महेत्तर लाल आज एक मजबूत और सुरक्षित बकरी शेड के स्वामी हैं, जिसने उनके पशुपालन कार्य को नई गति और स्थिरता प्रदान की है। यह निर्माण कार्य सिर्फ एक संरचना नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत की ओर बढ़ता हुआ एक सशक्त कदम है।

मनरेगा योजना के तहत ग्राम पंचायत साजापाली में हितग्राही महेत्तर लाल के लिए आजीविका संवर्धन हेतु बकरी शेड निर्माण स्वीकृत किया गया। वित्तीय वर्ष 2023-24 में अनुमोदित इस कार्य की कुल राशि 0.88 लाख रुपये थी, जिसमें 0.11 लाख मजदूरी और 0.77 लाख सामग्री मद के रूप में स्वीकृत किए गए। जनवरी 2024 में शुरू हुए इस कार्य को नवंबर 2024 में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। इसके क्रियान्वयन से 42 मानव दिवस का सृजन हुआ, जिससे स्थानीय मजदूरों को भी रोजगार मिला।

ग्राम पंचायत साजापाली की जनसंख्या लगभग 940 है, जिसमें 567 परिवार जॉब कार्ड धारक हैं। यह पंचायत जनपद अकलतरा से लगभग 7 किलोमीटर दूरी पर स्थित है।

हितग्राही महेत्तर लाल बरेठ ने बताया कि शेड निर्माण से पहले पशुपालन में काफी कठिनाइयाँ थीं। बरसात और ठंड में बकरियों के लिए सुरक्षित आश्रय की कमी रहती थी, जिससे उत्पादन और आय दोनों प्रभावित होते थे। लेकिन अब पक्का शेड बन जाने से दूध और खाद उत्पादन में वृद्धि हुई है तथा उनकी आमदनी दोगुनी हो गई है।

उन्होंने कहा कि यह शेड उनके लिए स्थायी आजीविका का मजबूत साधन बन गया है और अन्य ग्रामीणों के लिए भी प्रेरणादायक उदाहरण है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में इस निर्माण कार्य ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मनरेगा के प्रभावी क्रियान्वयन, ग्राम पंचायत साजापाली की सक्रिय भागीदारी और प्रशासनिक सहयोग से यह कार्य समय पर पूर्ण हुआ, जो ग्रामीण विकास के उत्कृष्ट मॉडल के रूप में उभर रहा है। बकरी शेड निर्माण ने ग्रामीण परिवारों में आत्मनिर्भरता की नई रोशनी जलाई है और आजीविका सशक्तिकरण का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है।

राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार 2025 के विजेताओं की घोषणा

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मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के तहत पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार (NGRA) 2025 के विजेताओं की घोषणा कर दी है। यह पुरस्कार देश के पशुधन एवं डेयरी क्षेत्र में दिया जाने वाला सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान है।

पुरस्कार वितरण समारोह 26 नवंबर 2025 को राष्ट्रीय दुग्ध दिवस के अवसर पर आयोजित किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह इन पुरस्कारों को प्रदान करेंगे। राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल एवं जॉर्ज कुरियन भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे।

इस वर्ष कुल 2,081 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से विजेताओं का चयन विभिन्न श्रेणियों में किया गया।

विभागवार विजेताओं की सूची

1. स्वदेशी नस्लों की गाय/भैंस पालने वाले सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसान

गैर–पूर्वोत्तर क्षेत्र (Non-NER):

  • 1st: अरविंद यशवंत पाटील, कोल्हापुर, महाराष्ट्र

  • 2nd: डॉ. कंकनाला कृष्णा रेड्डी, हैदराबाद, तेलंगाना

  • 3rd: हर्षित झूरिया, सीकर, राजस्थान

  • 3rd: कुमारी श्रद्धा सत्यवान धवन, अहमदनगर, महाराष्ट्र

NER/हिमालयी क्षेत्र:

  • विजय लता, हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश

  • प्रदीप पांगड़िया, चंपावत, उत्तराखंड

2. सर्वश्रेष्ठ डेयरी सहकारी समिति/मिल्क प्रोड्यूसर कंपनी/डेयरी FPO

गैर–पूर्वोत्तर क्षेत्र (Non-NER):

  • 1st: मीनन गाड़ी क्षीरोल्पादक सहकारना संगम लिमिटेड, वायनाड, केरल

  • 2nd: कुनमकट्टुपथी क्षीरोल्पादक सहकारना संघम, पलक्कड़, केरल

  • 2nd: घिनोई दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति, जयपुर, राजस्थान

  • 3rd: TYSPL 37 सेंढुरई मिल्क प्रोड्यूसर्स कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड, अरियालूर, तमिलनाडु

NER/हिमालयी क्षेत्र:

  • कुल्हा दूध उत्पादक सहकारी समिति, ऊधम सिंह नगर, उत्तराखंड

3. सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन (AIT)

गैर–पूर्वोत्तर क्षेत्र (Non-NER):

  • 1st:दिलीप कुमार प्रधान, अनुगुल, ओडिशा

  • 2nd:विकास कुमार, हनुमानगढ़, राजस्थान

  • 3rd: अनुराधा चकाली, नांदयाल, आंध्र प्रदेश

NER/हिमालयी क्षेत्र:

  •  दिलुवार हसन, बारपेटा, असम

पुरस्कार राशि

(AIT कैटेगरी को छोड़कर):

  • 1st पुरस्कार: ₹5,00,000

  • 2nd पुरस्कार: ₹3,00,000

  • 3rd पुरस्कार: ₹2,00,000

  • NER/हिमालयी विशेष पुरस्कार: ₹2,00,000

AIT श्रेणी में पुरस्कार के रूप में प्रमाण पत्र व मोमेंटो दिया जाएगा, कोई नकद पुरस्कार नहीं।

पृष्ठभूमि

राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार वर्ष 2021 से प्रतिवर्ष दिए जा रहे हैं। यह पुरस्कार राष्ट्र्रीय गोकुल मिशन (RGM) के तहत प्रदान किए जाते हैं, जिसे दिसंबर 2014 में स्वदेशी गोवंश नस्लों के वैज्ञानिक संरक्षण और विकास के लिए शुरू किया गया था।


पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा ‘विशेष अभियान 5.0’ का सफल समापन, स्वच्छता और सतत विकास की दिशा में उल्लेखनीय उपलब्धियां

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पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD), मछली पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत, ने 2 से 31 अक्टूबर 2025 तक आयोजित ‘विशेष अभियान 5.0’ का सफल समापन किया। इस अभियान का उद्देश्य जन शिकायतों और अपीलों का निवारण, स्वच्छता अभियानों का संचालन, रिकॉर्ड प्रबंधन को सुदृढ़ बनाना और विभिन्न प्रमुख मानकों पर लक्ष्यों की प्राप्ति करना था।

इस अवधि में विभाग और इसके अधीनस्थ कार्यालयों द्वारा कई गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनकी समीक्षा केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल ने की और संचालन नरेश पाल गंगवार, सचिव (DAHD) द्वारा किया गया। अभियान के दौरान दीवार चित्रण द्वारा सौंदर्यीकरण, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य जांच शिविर, किसानों की संगोष्ठी, चित्रकला प्रतियोगिता, तथा “वेस्ट टू आर्ट” और “वेस्ट टू वेल्थ” जैसी पहलें आयोजित की गईं, जिससे कर्मचारियों में स्वच्छता और स्थिरता की भावना को संस्थागत रूप दिया जा सके।

विशेष अभियान 5.0 के प्रमुख उपलब्धियां :

क्रमांक      पैरामीटर                                             लक्ष्य                       उपलब्धि
1 जन शिकायतें                                        214 302
2 जन शिकायत अपील 35 43
3 संसदीय आश्वासन 5 5
4 राज्य सरकार संदर्भ 8 8
5 पीएमओ संदर्भ 3 3
6 नियमों/प्रक्रियाओं का सरलीकरण 1 1
7 भौतिक फाइलों की समीक्षा 24,645 30,020
8 भौतिक फाइलों का निष्पादन 22,648 22,648
9 ई-फाइलों की समीक्षा 680 680
10 ई-फाइलों का समापन 182 182
11 स्वच्छता स्थलों की संख्या 221 237
12 सांसदों से प्राप्त संदर्भ 15 11
13 कबाड़ की नीलामी से प्राप्त राजस्व ₹5,86,973
14 निष्पादन से मुक्त स्थान (वर्ग फुट में) 5,334

सर्वश्रेष्ठ पहल: कबाड़ लोहे से निर्मित गाय की प्रतिमा

सेंट्रल कैटल ब्रीडिंग फार्म (CCBF), चिपलिमा, संबलपुर (ओडिशा) — जो DAHD के अधीनस्थ कार्यालयों में से एक है — ने कबाड़ लोहे का उपयोग करते हुए गाय की एक आकर्षक प्रतिमा बनाई। यह प्रतिमा न केवल पशुधन के प्रति सम्मान का प्रतीक है, बल्कि “वेस्ट टू आर्ट” की भावना को भी दर्शाती है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण और संसाधन दक्षता को बढ़ावा देने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

देशभर में आयोजित प्रमुख गतिविधियों की झलकियाँ :

  • सेंट्रल कैटल ब्रीडिंग फार्म, चिपलिमा (ओडिशा) द्वारा सौरा चित्रकला (ओडिशा की पारंपरिक जनजातीय कला) के माध्यम से दीवार चित्रण।

  • सेंट्रल एनिमल ब्रीडिंग फार्म, सुनाबेड़ा द्वारा स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन मेडिकल कॉलेज, कोरापुट के सहयोग से।

  • रीजनल फॉडर स्टेशन, श्रीगंगानगर (राजस्थान) द्वारा जैविक अपशिष्ट और सूखे पत्तों से कम्पोस्ट खाद तैयार करने की पहल।

  • एनिमल क्वारंटाइन एंड सर्टिफिकेशन सर्विस, हैदराबाद द्वारा सरकारी प्राथमिक विद्यालय, थुक्कुगुड़ा में स्वच्छता पर चित्रकला प्रतियोगिता।

  • किसानों की संगोष्ठी “क्लीन मिल्क प्रोडक्शन” विषय पर तीन कृषि विज्ञान केंद्रों में आयोजित।

  • आरएफएस चेन्नई द्वारा “एक पेड़ माँ के नाम” वृक्षारोपण और कार्यालय स्वच्छता अभियान।

  • एनिमल हस्बेंड्री सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, हेसरघट्टा (बेंगलुरु) द्वारा स्वच्छ दूध उत्पादन पर जागरूकता शिविर।

  • सुनाबेड़ा (ओडिशा) के पाल्मा गाँव में टीकाकरण, पशु स्वच्छता और स्वच्छ पर्यावरण पर किसानों के लिए जनजागरूकता अभियान।

यह अभियान न केवल स्वच्छता और दक्षता की दिशा में एक सशक्त कदम है, बल्कि “स्वच्छता ही सेवा” के संकल्प को साकार करने का एक प्रेरक उदाहरण भी प्रस्तुत करता है।

पशुपालन और डेयरी विभाग द्वारा स्पेशल कैंपेन 5.0 के तहत नई दिल्ली स्थित AQCS में स्वच्छता अभियान आयोजित

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मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) ने 29 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली स्थित एनिमल क्वारंटाइन एंड सर्टिफिकेशन सर्विसेज (AQCS) में स्पेशल कैंपेन 5.0 के तहत एक स्वच्छता अभियान आयोजित किया। इस अवसर पर मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस मौके पर पशुपालन और डेयरी विभाग के सचिव  नरेश पाल गंगवार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

प्रो. बघेल ने AQCS परिसर का निरीक्षण किया और उसकी स्वच्छता, सुव्यवस्थित रखरखाव तथा बेहतर प्रबंधन की सराहना की। उन्होंने कहा कि AQCS भारत का "स्वास्थ्यद्वार" है, जो पशुओं के आयात के दौरान वैज्ञानिक क्वारंटाइन और स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित करता है।

स्वच्छता अभियान के दौरान AQCS के अधिकारियों और कर्मचारियों ने परिसर की सफाई की, पुराने और अनुपयोगी सामानों का निपटान किया और कार्यस्थलों को पुनः व्यवस्थित किया।
स्पेशल कैंपेन 5.0 के अंतर्गत विभाग ने लंबित मामलों के निपटान, फाइल समीक्षा और स्वच्छता गतिविधियों में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। पुराने और बेकार सामग्रियों की नीलामी से विभाग ने ₹5,54,753 का राजस्व अर्जित किया है।

नीचे विभिन्न मानकों पर विभाग की उपलब्धियां दी गई हैं:

  • पैरामीटर
  •   लक्ष्य                 
  • उपलब्धि
  • सांसद संदर्भ
  •    15
  • 11
  • संसदीय आश्वासन
  •     5
  • 3
  • राज्य सरकार संदर्भ
  •     8
  • 8
  • जन शिकायतें
  •   214
  • 214
  • पीएमओ संदर्भ
  •     3
  • 3
  • जन शिकायत अपीलें
  •    35
  • 27
  • नियम / प्रक्रियाओं में सरलीकरण
  •    1
  • 1
  • भौतिक फाइल समीक्षा
  • 24,645
  • 24,645
  • ई-फाइल समीक्षा
  •  680
  • 562
  • स्वच्छता स्थल
  •  221
  • 221

अभियान के दौरान #एक_पेड़_माँ_के_नाम पहल के तहत वृक्षारोपण अभियान भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रकृति और मातृत्व के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए एक पौधा लगाया गया।

अपने संबोधन में प्रो. एस. पी. सिंह बघेल ने वैश्विक तापमान वृद्धि की चुनौती और पर्यावरण संरक्षण की सामूहिक जिम्मेदारी पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहलें न केवल स्वच्छता को बढ़ावा देती हैं, बल्कि पर्यावरणीय जागरूकता को भी सुदृढ़ करती हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के पशुपालन और दुग्ध क्षेत्र को दी बड़ी बढ़त, ₹947 करोड़ के प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन और ₹219 करोड़ के नए प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी

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नई दिल्ली में 11 अक्टूबर, 2025 को भारत के पशुपालन और दुग्ध क्षेत्र को मजबूत करने के लिए ₹947 करोड़ के परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया और ₹219 करोड़ के अतिरिक्त प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी गई। ये पहल कृषि और सहायक क्षेत्र में बड़े निवेश पैकेज का हिस्सा हैं और इन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किया।

साथ ही दो बड़े कृषि योजनाओं — प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PM-DDKY) और पल्सेस में आत्मनिर्भरता मिशन — का शुभारंभ भी किया गया, जो ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने और भारत को कृषि-सहायक क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पशुपालन, मत्स्य पालन और सहायक गतिविधियाँ ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा,

"PM Dhan-Dhanya Krishi Yojana हमारे पशुपालन पर भी केंद्रित है। 125 करोड़ से अधिक टीके मुफ्त दिए जा चुके हैं, जिनसे जानवरों को रोगों जैसे फ़ुट एंड माउथ डिज़ीज़ से बचाया गया है। इससे जानवर स्वस्थ हुए हैं और किसानों की चिंताएँ भी कम हुई हैं। इस योजना के तहत पशु स्वास्थ्य से जुड़ी अभियानों का स्थानीय स्तर पर आयोजन किया जाएगा।"

प्रधानमंत्री ने ग्रामीण समृद्धि के लिए विविधीकरण पर जोर देते हुए कहा,

"जहाँ खेती संभव नहीं है, वहां पशुपालन और मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। किसानों की आय बढ़ाने के लिए पारंपरिक खेती के अलावा विकल्प दिए जा रहे हैं। इसलिए पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे छोटे किसानों और भूमि रहित परिवारों को भी सशक्त बनाया जा रहा है।"

उल्लेखनीय परियोजनाएँ और निवेश

  • राष्ट्रीय गोपाल मिशन (RGM) के तहत गुवाहाटी, असम में पहला IVF लैब: ₹28.93 करोड़ की निवेश राशि के साथ, यह अत्याधुनिक सुविधा पूर्वोत्तर राज्यों में दुग्ध विकास और नस्ल सुधार को बढ़ावा देगी।

  • राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD) के तहत प्रमुख डेयरी परियोजनाएँ:

    • मेहसाणा मिल्क यूनियन: 120 MT/दिन मिल्क पाउडर प्लांट और 3.5 लाख लीटर/दिन UHT प्लांट, ₹460 करोड़

    • इंदौर मिल्क यूनियन: 30 MT/दिन मिल्क पाउडर प्लांट, ₹76.50 करोड़

    • भिलवाड़ा मिल्क यूनियन: 25,000 लीटर/दिन UHT प्लांट, ₹46.82 करोड़

    • नुसुलापुर, करीमनगर, तेलंगाना: ग्रीनफील्ड डेयरी प्लांट, ₹25.45 करोड़

    • आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले के कप्पम मंडल में एक इंटीग्रेटेड डेयरी प्लांट और 200 TPD कैटल फीड प्लांट की आधारशिला, ₹219 करोड़

  • Animal Husbandry Infrastructure Development Fund (AHIDF) के तहत 10 परियोजनाएँ: ₹303.81 करोड़ में विभिन्न राज्यों में इन्वेस्टमेंट, जिससे फीड, दूध और पशु उत्पाद प्रसंस्करण क्षमता मजबूत होगी।

  • MAITRI (Multipurpose Artificial Insemination Technicians in Rural India) प्रशिक्षण: उत्तर प्रदेश के सभी जिलों से 2,000 प्रशिक्षित MAITRIs को प्रमाणपत्र दिए गए। भारत में अब कुल 38,000+ MAITRIs शामिल किए गए हैं, जो कृत्रिम प्रजनन कवरेज और पशुपालन नस्ल सुधार में मील का पत्थर हैं।

ये पहलों से यह स्पष्ट होता है कि सरकार कृषि-सहायक क्षेत्रों के एकीकृत और सतत विकास के माध्यम से किसानों के लिए अवसर बढ़ाने, आर्थिक सुरक्षा और पोषण संबंधी कल्याण सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना (PM-DDKY) और दालों में आत्मनिर्भरता मिशन की शुरुआत की

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली में कृषि और उससे संबंधित क्षेत्रों में सतत एवं समावेशी विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना (PM-DDKY) और दालों में आत्मनिर्भरता मिशन (Mission for Aatmanirbharta in Pulses) का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए मछली पालन, पशुपालन, डेयरी और पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने कहा कि यह पहलें अभिसरण, नवाचार और समावेशी विकास के माध्यम से देश के कृषि प्रधान जिलों में परिवर्तन लाएंगी।

इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पशुपालन क्षेत्र में ₹947 करोड़ की 16 प्रमुख परियोजनाओं का उद्घाटन किया तथा ₹219 करोड़ की एक परियोजना की आधारशिला रखी। इसके साथ ही मत्स्य क्षेत्र में ₹572 करोड़ की 7 नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी और ₹121 करोड़ की 9 परियोजनाओं का उद्घाटन किया।

ललन सिंह ने कहा कि 2019 में मछली पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय की स्थापना के बाद इन क्षेत्रों को समर्पित नीति समर्थन मिला जिससे विकास में तीव्र गति आई। आज ये क्षेत्र 10 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका का स्रोत हैं, जिनमें 70% से अधिक महिलाएं डेयरी क्षेत्र से जुड़ी हैं, जो महिलाओं के सशक्तिकरण और ग्रामीण समृद्धि का सच्चा प्रतीक है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) और फिशरीज इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (FIDF) जैसी योजनाओं के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र में आधुनिक ढांचे — जैसे फिशिंग हार्बर, हैचरी, फीड मिल, और कोल्ड चेन — के निर्माण को बढ़ावा मिला है। भारत अब मछली उत्पादन में विश्व में दूसरे स्थान पर है, जिसमें 2013–14 के 96 लाख टन से बढ़कर 2024–25 में 195 लाख टन तक की 104% वृद्धि हुई है।

उन्होंने यह भी बताया कि इस अवसर पर ₹693 करोड़ से अधिक की 16 प्रमुख मत्स्य परियोजनाओं का उद्घाटन किया गया है जो उत्पादन, निर्यात और रोजगार को और बढ़ावा देंगी।

डेयरी और पशुपालन क्षेत्रों की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए ललन  सिंह ने कहा कि दूध उत्पादन में 63% की वृद्धि (2014–15 में 146 मिलियन टन से बढ़कर 2024–25 में 239 मिलियन टन) हुई है, और भारत दुनिया में दूध उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। पशुधन की उत्पादकता में 25% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है, जो विश्व में सबसे तेज दर है।

उन्होंने कहा कि देशभर में 125 करोड़ से अधिक टीके मुफ्त लगाए गए हैं — जैसे मुंह-खुर रोग (FMD), ब्रुसेलोसिस, PPR आदि के खिलाफ। 9 राज्य अब FMD-मुक्त दर्जे की ओर तेजी से अग्रसर हैं, जिससे भारत के दूध निर्यात को और मजबूती मिलेगी।

ललन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री धन धान्य कृषि योजना (PM-DDKY) प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण को साकार करती है जिसके तहत किसानों की आय में वृद्धि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना, और मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी क्षेत्रों को आत्मनिर्भर भारत के प्रमुख स्तंभ के रूप में स्थापित करना शामिल है।

अंत में, उन्होंने “ग्रामीण समृद्धि से राष्ट्रीय समृद्धि” के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि तकनीकी आधारित विकास, बेहतर आजीविका, और सभी के लिए पोषण सुरक्षा इस दिशा में प्रमुख लक्ष्य होंगे।

वर्ल्ड फ़ूड इंडिया 2025 में पशुपालन एवं डेयरी विभाग की सक्रिय भागीदारी

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पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD), मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत, वर्ल्ड फ़ूड इंडिया 2025 में सक्रिय रूप से शामिल हुआ, जो 25 से 28 सितम्बर तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित हुआ। विभाग का मंडप 25 सितम्बर को राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल की उपस्थिति में उद्घाटित किया गया। इस मंडप में क्षेत्र से जुड़े 15 स्टार्टअप्स ने भाग लिया, जिन्होंने पशुधन-आधारित डेयरी उत्पादों से लेकर अत्याधुनिक तकनीकी नवाचारों तक अपने उत्पाद और समाधान प्रदर्शित किए। विशेष आकर्षणों में स्टार्टअप्स द्वारा लाइव डेमो और विशेष रूप से तैयार किया गया "सेल्फी प्वॉइंट" शामिल था, जिसने आम जनता की बड़ी भागीदारी को आकर्षित किया। मंडप में सरकार की प्रमुख योजनाएँ, नई पहलें और तकनीकी प्रगति प्रदर्शित की गईं, जो पशुधन और डेयरी क्षेत्र में सतत विकास के प्रति विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं।

उद्घाटन दिवस पर भारत मंडपम में आयोजित सीईओ राउंडटेबल में भी विभाग ने भाग लिया और उद्योग जगत के नेताओं के साथ क्षेत्रीय अवसरों और नीतिगत सहयोग पर चर्चा की। इसके साथ ही, विभाग ने 25 सितम्बर को “सतत पशुधन उत्पादन : गैर-बोवाइन क्षेत्र में उभरते अवसर” विषय पर एक ज्ञान सत्र (Knowledge Session) का भी आयोजन किया, जिसमें गैर-बोवाइन क्षेत्र की संभावनाओं को पहचानने और सतत प्रथाओं को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

मंडप में उद्यमियों, नवाचारकर्ताओं, नीतिनिर्माताओं और विदेशी प्रतिनिधियों की उत्साही भागीदारी रही। यह मंच सरकारी योजनाओं, निवेश की संभावनाओं और भविष्य के सहयोग पर संवाद का सशक्त माध्यम बना, जिससे भारत के पशुधन और डेयरी पारिस्थितिकी तंत्र को आगे बढ़ाने के अवसरों को प्रोत्साहन मिला।

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