Media24Media.com: #AccessAndBenefitSharing

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label #AccessAndBenefitSharing. Show all posts
Showing posts with label #AccessAndBenefitSharing. Show all posts

एनबीए ने लाभ-साझेदारी ढांचे के तहत 45 दिनों में ₹2.40 करोड़ की राशि प्राप्त की

No comments Document Thumbnail

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने जैविक संसाधनों के संरक्षण और उनके उपयोग से उत्पन्न लाभों के निष्पक्ष और समान वितरण को सुनिश्चित करने के अपने दायित्व को आगे बढ़ाते हुए, पिछले 45 दिनों में एक्सेस एंड बेनिफिट-शेयरिंग (ABS) ढांचे के तहत ₹2.40 करोड़ की राशि प्राप्त की है। यह राशि बीज तथा पशु आहार/कॉस्मेटिक क्षेत्रों से संबंधित संस्थाओं द्वारा जैविक संसाधनों के अनुसंधान और वाणिज्यिक उपयोग हेतु प्राप्त दस आवेदनों से प्राप्त हुई है।

लाभ-साझेदारी योगदान विभिन्न कृषि जैविक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त हुआ है, जिनमें धान, प्याज, करेला, सरसों, कपास, लौकी, बैंगन, मिर्च, खीरा, भिंडी, तोरई, टमाटर और समुद्री शैवाल की किस्में/हाइब्रिड शामिल हैं। ₹2.30 करोड़ की एक बड़ी राशि एम/एस पायनियर ओवरसीज कॉर्पोरेशन से सरसों और धान के हाइब्रिड के वाणिज्यिक उपयोग के लिए प्राप्त हुई है। शेष राशि एम/एस ईस्ट वेस्ट सीड्स इंडिया प्रा. लि., एम/एस एडवांटा एंटरप्राइजेज लि., एम/एस टोकिता सीड इंडिया प्रा. लि., एम/एस एवेलो इंक और एम/एस सी6 एनर्जी प्रा. लि. से प्राप्त हुई है। इन जैविक संसाधनों का उपयोग उन्नत और हाइब्रिड बीज किस्मों सहित कृषि आधारित उत्पादों के विकास के लिए किया गया, जिससे कृषि अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला है।

ABS तंत्र के तहत, लाभ संबंधित संस्थानों, स्थानीय समुदायों, किसानों, जैव विविधता प्रबंधन समितियों आदि के साथ साझा किया जाएगा, जिन्होंने बीजों की मूल किस्में प्रदान की थीं। यह प्रणाली आजीविका संवर्धन को समर्थन देती है और जमीनी स्तर पर जैव विविधता के संरक्षण और सतत उपयोग को प्रोत्साहित करती है।

हाल के वर्षों में, NBA ने अनुपालन को आसान बनाने और व्यवसाय करने में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए सरल और पारदर्शी प्रक्रियाएं शुरू की हैं, साथ ही यह सुनिश्चित किया है कि जमीनी स्तर के समुदायों के हित सुरक्षित रहें। बीज क्षेत्र ABS ढांचे के तहत अग्रणी योगदानकर्ता के रूप में उभरा है। प्राधिकरण सभी हितधारकों, विशेषकर विभिन्न क्षेत्रों की कंपनियों को जैव विविधता अधिनियम, 2002 के प्रावधानों का अनुपालन करने और जैव विविधता संरक्षण तथा लाभ-साझेदारी में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करता है।

उल्लेखनीय है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में वर्तमान तक NBA ने बीज क्षेत्र से ₹3.42 करोड़ की राशि प्राप्त की है। नवीनतम प्राप्ति के साथ, NBA द्वारा अब तक प्राप्त कुल ABS राशि ₹266 करोड़ (लगभग 29 मिलियन अमेरिकी डॉलर) को पार कर चुकी है। इसमें से ₹83 करोड़ केवल बीज क्षेत्र से प्राप्त हुए हैं, जिससे यह रेड सैंडर्स के बाद दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता बन गया है।

NBA जैव विविधता पर कन्वेंशन (CBD) और नागोया प्रोटोकॉल के तहत भारत की प्रतिबद्धताओं को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है तथा राष्ट्रीय जैव विविधता लक्ष्यों और कुनमिंग–मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे के लक्ष्य-13 को प्राप्त करने में योगदान दे रहा है, जो ABS तंत्र के लिए विधायी उपायों पर जोर देता है।


कृषित औषधीय पौधों के लिए सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन जारी करने हेतु एनबीए ने शुरू किया डिजिटल पोर्टल

No comments Document Thumbnail

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए), जो पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत एक वैधानिक निकाय है, ने औषधीय पौधों की खेती से जुड़े हितधारकों के लिए सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन (Certificate of Origin) के इलेक्ट्रॉनिक निर्गमन हेतु एक डिजिटल पोर्टल विकसित कर उसे क्रियान्वित कर दिया है। यह पोर्टल उन हितधारकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) से छूट के लिए आवेदन करना चाहते हैं।

यह पोर्टल एक सिंगल-विंडो, एंड-टू-एंड ऑनलाइन प्रणाली के रूप में कार्य करता है, जिसके माध्यम से आवेदन की प्रक्रिया से लेकर प्रमाण पत्र जारी करने तक की सभी सेवाएं डिजिटल रूप से उपलब्ध कराई गई हैं। हितधारक इस पोर्टल को https://absefiling.nbaindia.in/ पर एक्सेस कर सकते हैं।

उल्लेखनीय है कि जैव विविधता (संशोधन) अधिनियम, 2023 को संसद द्वारा पारित किया गया था, जिसे लोकसभा ने 25 जुलाई 2023 और राज्यसभा ने 1 अगस्त 2023 को मंजूरी दी थी। इसके बाद पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वर्ष 2024 और 2025 में जैव विविधता नियमों को अधिसूचित किया।

संशोधित अधिनियम के प्रावधानों को प्रभावी रूप से लागू करने और आयुष क्षेत्र, बीज क्षेत्र तथा अनुसंधान संस्थानों सहित विभिन्न हितधारकों की प्रक्रियागत आवश्यकताओं को सरल बनाने के उद्देश्य से ये नियम बनाए गए हैं। संशोधित नियमों में अब कृषित औषधीय पौधों के लिए सर्टिफिकेट ऑफ ओरिजिन का इलेक्ट्रॉनिक रूप से सृजन एक निर्दिष्ट डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किए जाने का प्रावधान किया गया है।

यह पहल न केवल पारदर्शिता और सुगमता को बढ़ावा देगी, बल्कि औषधीय पौधों से जुड़े व्यवसाय और अनुसंधान को भी नई गति प्रदान करेगी।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा रेड सैंडर्स संरक्षण हेतु ₹14.88 करोड़ की एबीएस राशि जारी

No comments Document Thumbnail

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) के अंतर्गत आंध्र प्रदेश वन विभाग को ₹14.88 करोड़ (USD 1.65 मिलियन) की राशि जारी की है। यह राशि रेड सैंडर्स (Pterocarpus santalinus) के संरक्षण, सुरक्षा, पुनर्जनन, अनुसंधान एवं विकास, जागरूकता सृजन तथा क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के लिए निर्धारित की गई है। यह लाभ-साझेदारी योगदान 29 फॉर्म-I आवेदनों से प्राप्त हुआ है।

इस नवीनतम निर्गम के साथ, भारत में अब तक की कुल एबीएस राशि ₹143 करोड़ (USD 15.8 मिलियन) से अधिक हो गई है। अब तक एनबीए द्वारा रेड सैंडर्स संरक्षण और लाभ दावेदारों के लिए आंध्र प्रदेश को ₹104 करोड़ (USD 12.5 मिलियन) से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओडिशा और तेलंगाना जैसे राज्यों को भी ₹15 करोड़ (USD 1.8 मिलियन) से अधिक की एबीएस राशि प्रदान की गई है।

रेड सैंडर्स, अपने विशिष्ट गहरे लाल रंग की लकड़ी के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है और यह पूर्वी घाटों के सीमित क्षेत्रों—विशेष रूप से अनंतपुर, चित्तूर, कडप्पा, प्रकाशम और कर्नूल जिलों (आंध्र प्रदेश) में स्थानिक (एंडेमिक) रूप से पाया जाता है। यह लाभ-साझेदारी राशि 1,115 टन रेड सैंडर्स लकड़ी की नीलामी से प्राप्त हुई है, जिसे राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) द्वारा जब्त किया गया था और बाद में स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, एमएमटीसी लिमिटेड और पीईसी लिमिटेड जैसी केंद्रीय सरकारी एजेंसियों द्वारा नीलाम किया गया।

उल्लेखनीय है कि रेड सैंडर्स की एबीएस राशि के माध्यम से एनबीए ने संरक्षण, सतत उपयोग, आनुवंशिक सुधार और मूल्य संवर्धन से जुड़े अनुसंधान परियोजनाओं को समर्थन दिया है। ये परियोजनाएं आईसीएफआरई–आईएफजीटीबी, आईसीएफआरई–आईडब्ल्यूएसटी और सीएसआईआर–आईआईसीबी जैसे प्रतिष्ठित सरकारी अनुसंधान संस्थानों द्वारा संचालित की गईं।

आंध्र प्रदेश के विभिन्न वन प्रभागों में किए गए फील्ड सर्वेक्षणों के दौरान 1,513 आनुवंशिक संसाधनों का जियो-रेफरेंस्ड लक्षणों सहित दस्तावेजीकरण किया गया तथा 15,000 से अधिक खड़े पेड़ों में विविधता और प्रजनन व्यवहार का आकलन किया गया। उत्कृष्ट संसाधनों से बीज एकत्र कर एक्स-सीटू संरक्षण किया गया तथा राष्ट्रीय रेड सैंडर्स फील्ड जीन बैंक की स्थापना के प्रयास जारी हैं। ऊतक संवर्धन (टिशू कल्चर), उन्नत अंकुरण तथा उच्च सफलता वाली वनस्पतिक प्रवर्धन तकनीकों को मानकीकृत कर सुदृढ़ किया गया। दीर्घकालिक स्थिरता के लिए सीड प्रोडक्शन एरिया के प्रारंभिक दिशा-निर्देश भी विकसित किए गए।

रेड सैंडर्स की छाल और हार्टवुड से साबुन, क्रीम, लिप केयर उत्पाद और वुड कोटिंग्स जैसे मूल्य संवर्धित उत्पाद सफलतापूर्वक विकसित किए गए। विशेष रूप से Royalseema RS Soap® का ट्रेडमार्क (ट्रेडमार्क नं. 5870030) पंजीकृत किया गया तथा Royal Red लिपस्टिक ने भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के मानकों को पूरा किया। यह शोध को व्यावहारिक अनुप्रयोगों में बदलने का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसे आईसीएफआरई–वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयंबटूर द्वारा विकसित किया गया।

यह पहल न्यायसंगत और समान लाभ-साझेदारी, अवैध व्यापार की रोकथाम तथा जैव विविधता शासन में सामूहिक कार्रवाई को सुदृढ़ करने के प्रति एनबीए की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। एबीएस से प्राप्त धनराशि को संरक्षण, वैज्ञानिक नवाचार और समुदाय-आधारित विकास में पुनर्निवेश कर एनबीए रेड सैंडर्स के पारिस्थितिक, आनुवंशिक और सामाजिक-आर्थिक मूल्यों की दीर्घकालिक सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है। ये प्रयास इस स्थानिक प्रजाति को वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखते हुए जैव विविधता शासन में भारत के नेतृत्व को और मजबूत करते हैं।

रेड सैंडर्स संरक्षण के लिए NBA ने 6.2 करोड़ रुपये जारी किए

No comments Document Thumbnail

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के अंतर्गत प्रवेश और लाभ साझा करने (ABS) तंत्र के तहत 11.12.2025 को लाभार्थियों को 6.2 करोड़ रुपये जारी किए। यह धनराशि लुप्तप्राय रेड सैंडर्स (Pterocarpus santalinus) के संरक्षण का समर्थन करेगी और पाँच राज्यों में किसानों तथा वन-निर्भर समुदायों की आजीविका को सशक्त बनाएगी।

ABS निधि राज्य वन विभागों, राज्य जैव विविधता बोर्डों तथा रेड सैंडर्स उगाने वाले किसानों को जारी की गई है, जो इस स्थानिक और वैश्विक रूप से महत्वपूर्ण प्रजाति की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह नवीनतम वितरण रेड सैंडर्स के सतत संरक्षण और जिम्मेदार उपयोग को आगे बढ़ाएगा।

जारी किए गए 6.2 करोड़ रुपये में से:

  • तेलंगाना के किसानों को 17.8 लाख रुपये

  • आंध्र प्रदेश के किसानों को 1.1 करोड़ रुपये

  • तमिलनाडु वन विभाग को 2.98 करोड़ रुपये

  • कर्नाटक वन विभाग को 1.05 करोड़ रुपये

  • महाराष्ट्र वन विभाग को 69.2 लाख रुपये

  • तेलंगाना वन विभाग को 5.8 लाख रुपये
    इसके अतिरिक्त, संबंधित राज्य जैव विविधता बोर्डों के बीच 16 लाख रुपये साझा किए गए हैं।

इस नई किश्त के साथ, रेड सैंडर्स संरक्षण के लिए ABS के तहत कुल वितरण 101 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। अब तक, 216 किसान— जिनमें 198 आंध्र प्रदेश और 18 तमिलनाडु के हैं— रेड सैंडर्स ABS तंत्र से लाभान्वित हुए हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और ओडिशा के वन विभाग और राज्य जैव विविधता बोर्ड भी लाभान्वित हुए हैं।

यह धनराशि निम्न कार्यों के लिए उपयोग की जाएगी:

  • अग्रिम पंक्ति संरक्षण

  • गश्त और निगरानी अवसंरचना सुदृढ़ीकरण

  • शोध-आधारित वानिकी पद्धतियाँ

  • समुदाय-आधारित आजीविका कार्यक्रमों का विस्तार

  • रेड सैंडर्स उत्पादकों की सामाजिक-आर्थिक क्षमता में सुधार

इस रिलीज़ के साथ, NBA की कुल ABS वितरण राशि 127 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है, जो जैव संसाधनों से जुड़े न्यायपूर्ण और समान लाभ-साझाकरण के क्रियान्वयन में भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना 2024–2030 तथा कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचा के तहत लक्ष्य-13 तथा लक्ष्य-19 प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देती है।

यह वितरण इस बात का प्रमाण है कि जैविक विविधता अधिनियम के ABS प्रावधान संरक्षण को एक सतत आजीविका अवसर में कैसे बदल सकते हैं। ये प्रयास भारत की इस नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित करते हैं कि वह ABS सिद्धांतों को व्यावहारिक और परिणामोन्मुखी तरीके से लागू कर रहा है—जो पर्यावरणीय सुरक्षा और सतत आजीविका दोनों को सुदृढ़ करता है।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने रेड सैंडर्स किसानों और आंध्र विश्वविद्यालय को ₹3 करोड़ की एबीएस राशि वितरित की

No comments Document Thumbnail

भारत की जैव विविधता संसाधनों के सतत उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (National Biodiversity Authority - NBA) ने आंध्र प्रदेश के 198 किसानों और रेड सैंडर्स (लाल चंदन) की खेती करने वालों सहित कुल 199 लाभार्थियों को ₹3.00 करोड़ की राशि वितरित की है। लाभार्थियों में एक शैक्षणिक संस्था — आंध्र विश्वविद्यालय — भी शामिल है। यह वितरण आंध्र प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड के माध्यम से किया गया है और यह जैव विविधता अधिनियम के तहत एक्सेस एंड बेनिफिट-शेयरिंग (Access and Benefit Sharing – ABS) तंत्र का हिस्सा है।

यह पहल, जैव विविधता संरक्षण में समावेशी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए एनबीए द्वारा किए गए लाभ-साझाकरण उपायों की श्रृंखला का हिस्सा है। इससे पहले, एनबीए ने आंध्र प्रदेश वन विभाग, कर्नाटक वन विभाग और आंध्र प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड को रेड सैंडर्स के संरक्षण के लिए ₹48.00 करोड़ तथा तमिलनाडु के किसानों को ₹55.00 लाख जारी किए थे।

वर्तमान वितरण के तहत, प्रत्येक किसान को ₹33,000 से लेकर ₹22.00 लाख तक की राशि प्राप्त होगी, जो इस बात पर निर्भर करेगी कि उन्होंने उपयोगकर्ताओं को कितनी मात्रा में रेड सैंडर्स की लकड़ी आपूर्ति की है। यह भी उल्लेखनीय है कि किसानों को उनकी लकड़ी की बिक्री कीमत की तुलना में अधिक लाभ प्राप्त हुआ है।

लाभार्थी आंध्र प्रदेश के चार जिलों — चित्तूर, नेल्लोर, तिरुपति और कडप्पा — के 48 गांवों से हैं, जो इस मूल्यवान स्थानीय प्रजाति की खेती और संरक्षण में संलग्न ग्रामीण समुदायों की व्यापक भागीदारी को दर्शाता है।

इस पहल की शुरुआत एनबीए द्वारा 2015 में गठित रेड सैंडर्स पर विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों से हुई थी। समिति ने “रेड सैंडर्स के उपयोग से उत्पन्न संरक्षण, सतत उपयोग और निष्पक्ष एवं समान लाभ-साझाकरण के लिए नीति” शीर्षक से एक व्यापक नीति तैयार की थी। समिति के कार्य का एक महत्वपूर्ण परिणाम 2019 में विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा की गई नीति शिथिलता थी, जिसके तहत खेती से प्राप्त रेड सैंडर्स के निर्यात की अनुमति दी गई — यह वैध और सतत व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम था।

यह पहल इस बात का प्रमाण है कि किस प्रकार ABS जैसे नीतिगत उपकरण जैव विविधता संरक्षण को एक व्यवहार्य आजीविका विकल्प बना सकते हैं। यह लाभ-साझाकरण पहल जैव विविधता संरक्षण को आजीविका सुधार से जोड़ने, सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने और जैव विविधता के संरक्षकों को उनका उचित अधिकार सुनिश्चित करने के लिए एनबीए की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है। यह भारत के सबसे मूल्यवान और प्रतीकात्मक वृक्ष — रेड सैंडर्स — के दीर्घकालिक संरक्षण और निष्पक्ष लाभ-साझाकरण के प्रयासों में एक और मील का पत्थर है।

जैव विविधता संरक्षण में ऐतिहासिक पहल: रेड सैंडर्स की खेती करने वाले किसानों को लाभांश वितरण

No comments Document Thumbnail

भारत की जैविक संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देने हेतु "एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS)" ढाँचे के अंतर्गत, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) ने तमिलनाडु राज्य जैव विविधता बोर्ड के माध्यम से रेड सैंडर्स (Pterocarpus santalinus) की खेती करने वाले 18 किसानों/कृषकों को ₹55 लाख की राशि जारी की है। ये किसान तिरुवल्लुर ज़िले के 8 गाँवों — कननभिरन नगर, कोथूर, वेम्बेडु, सिरुनियम, गुनीपलयम, अम्मंबक्कम, आलिकुझी और थिम्मबूपोलापुरम — से संबंधित हैं।

यह किसानों/कृषकों को लाभांश प्रदान करने की अपनी तरह की पहली पहल है, जो समावेशी जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह पहल एनबीए द्वारा पूर्व में आंध्र प्रदेश वन विभाग, कर्नाटक वन विभाग और आंध्र प्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड को रेड सैंडर्स के संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए ₹48 करोड़ के लाभांश वितरण पर आधारित है।

पृष्ठभूमि और नीति विकास

यह पहल राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा वर्ष 2015 में गठित “रेड सैंडर्स पर विशेषज्ञ समिति” की सिफारिशों से प्रेरित है। इस समिति ने एक व्यापक रिपोर्ट तैयार की थी —

“रेड सैंडर्स के उपयोग से उत्पन्न लाभों के संरक्षण, सतत उपयोग और न्यायसंगत व समान साझेदारी हेतु नीति”।

समिति की सिफारिशों के परिणामस्वरूप, विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने वर्ष 2019 में नीति में संशोधन करते हुए खेती से प्राप्त रेड सैंडर्स के निर्यात की अनुमति दी थी। यह कदम खेती-आधारित संरक्षण और व्यापार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुआ है।

रेड सैंडर्स का महत्व

रेड सैंडर्स, जो मुख्यतः पूर्वी घाटों में पाया जाने वाला एक स्थानिक (endemic) वृक्ष प्रजाति है, आंध्र प्रदेश में स्वाभाविक रूप से पाया जाता है तथा तमिलनाडु, कर्नाटक, ओडिशा और अन्य राज्यों में इसकी खेती की जाती है।

इस प्रजाति का पारिस्थितिक, आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत विशिष्ट है। खेती के माध्यम से रेड सैंडर्स के उत्पादन को प्रोत्साहित करने से न केवल किसानों की आजीविका को सशक्त समर्थन मिलता है, बल्कि कानूनी रूप से प्राप्त और सतत रूप से उत्पादित रेड सैंडर्स के माध्यम से बाज़ार की बढ़ती माँग को पूरा किया जा सकता है, जिससे वन्य आबादी पर दबाव कम होता है।

समुदाय आधारित संरक्षण का सशक्त मॉडल

यह लाभांश-साझेदारी मॉडल (Benefit Sharing Model) समुदाय की भागीदारी को प्रोत्साहित करता है और सुनिश्चित करता है कि जैव विविधता की रक्षा करने वाले व्यक्तियों और समुदायों को उचित आर्थिक लाभ प्राप्त हो।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) संरक्षण को आजीविका से जोड़ने, समुदाय-आधारित संरक्षण को सशक्त करने, और जैव विविधता के संरक्षकों को उनका उचित अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है — ताकि भारत की इस महत्त्वपूर्ण और स्थानिक वृक्ष प्रजाति (Red Sanders) को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखा जा सके।


उत्तर प्रदेश और सिक्किम की जैव विविधता प्रबंधन समितियों को राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा ₹18.3 लाख की राशि जारी

No comments Document Thumbnail

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने उत्तर प्रदेश और सिक्किम के जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी) को ₹18.3 लाख की राशि जारी की है। यह राशि जैव विविधता अधिनियम, 2002 के अंतर्गत प्रवेश और लाभ-साझेदारी (Access and Benefit Sharing) व्यवस्था के तहत प्रदान की गई है।

यह धनराशि संबंधित राज्य जैव विविधता बोर्डों के माध्यम से सीधे दो बीएमसी को हस्तांतरित की गई —

  1. नर्राऊ ग्राम जैव विविधता प्रबंधन समिति, आक्राबाद कौल तहसील, अलीगढ़ जिला, उत्तर प्रदेश, और

  2. लामपोखरी झील क्षेत्र जैव विविधता प्रबंधन समिति, अरितार, सिक्किम।

उत्तर प्रदेश में एक कंपनी ने नर्राऊ गांव से लिग्नोसेल्यूलोसिक बायोमास से किण्वनीय यौगिक (fermentable compounds) बनाने के लिए फसल सामग्री का उपयोग किया। वहीं सिक्किम में एक अन्य कंपनी ने लामपोखरी झील क्षेत्र की मिट्टी और जल नमूनों से सूक्ष्मजीवों (microorganisms) तक पहुंच प्राप्त की, जिन्हें अनुसंधान उद्देश्य के लिए प्रयोग किया गया।

इन निधियों के माध्यम से, एनबीए स्थानीय समुदायों को जैव विविधता संरक्षण और अपने प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए सशक्त बना रहा है।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.