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हिमालय में वर्टिकल एयर मोशन का अध्ययन: भारतीय वैज्ञानिकों ने मानसून और जलवायु भविष्यवाणी में नई अंतर्दृष्टि प्रदान की

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भारतीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने हिमालय में वायु के ऊर्ध्वाधर (वर्टिकल) गति के रहस्यों का पता लगाया है, जिससे भारतीय मानसून की समझ में महत्वपूर्ण योगदान मिला है। यह मानसून दक्षिण एशिया के लिए सदियों से जीवनरेखा रहा है और कृषि, जल प्रबंधन तथा आपदा तैयारी के लिए इसकी सटीक भविष्यवाणी अत्यंत आवश्यक है।

अध्ययन की प्रमुख विशेषताएँ:

  • संस्थान: Aryabhatta Research Institute of Observational Sciences (ARIES), नैनीताल और ISRO के Space Physics Laboratory (SPL), तिरुवनंतपुरम।

  • प्रयोग: भारतीय निर्मित Stratosphere-Troposphere (ST) रडार का उपयोग कर केंद्रीय हिमालय में एशियाई समर मॉनसून (ASM) महीनों के दौरान ऊर्ध्वाधर वायु गति का प्रत्यक्ष और उच्च-रिज़ॉल्यूशन मापन।

  • नवीन निष्कर्ष:

    • 10–11 किमी ऊँचाई पर लगातार नीचे की ओर गति।

    • 12 किमी से ऊपर वायु का स्थिर और धीमा उठाव।

    • ऊर्ध्वाधर सर्कुलेशन अधिक जटिल, जिसमें उठती और गिरती वायु के वैकल्पिक क्षेत्र मौजूद हैं।

  • महत्त्व:

    • मौसम की सटीक भविष्यवाणी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली में सुधार।

    • कृषि, जल संसाधन और मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा।

    • प्रदूषक और ग्रीनहाउस गैसों के परिवहन के मूल्यांकन में मदद।

    • जलवायु परिवर्तन को कम करने की रणनीतियों को मजबूत करना।

यह अध्ययन American Geophysical Union (AGU) की “Earth and Space Science” में प्रकाशित हुआ।


युवा तारों के प्रारंभिक जीवन की अस्थिरता का नया अध्ययन: बदलाव और अनपेक्षित चमकें उजागर

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एक नए अध्ययन ने युवा तारों (Young Stellar Objects - YSOs) के प्रारंभिक जीवन की अस्थिरता पर पर्दा उठाया है, जिससे पता चला कि तारों का शुरुआती जीवन पहले सोचे गए से कहीं अधिक उथल-पुथल और परिवर्तनशील होता है।

प्रोटोस्ट्रार के चार विकासात्मक चरणों का योजनात्मक चित्रण (एंड्रिया इसेला के 2006 के शोध प्रबंध से अनुकूलित):

  • क्लास 0: ये तारे घने आवरण (dense envelope) में पूरी तरह से ढके होते हैं, और इनके केंद्र में एक छोटा कोर (core) होता है।

  • क्लास I: कोर का आकार बढ़ता रहता है और एक सपाट परिक्रामी डिस्क (flattened circumstellar disk) बनने लगती है।

  • क्लास II: अधिकांश आसपास की सामग्री गैस और धूल की प्रमुख डिस्क में व्यवस्थित हो जाती है।

  • क्लास III: अंतिम चरण में डिस्क लगभग समाप्त हो जाती है, और तारे का स्पेक्ट्रल एनर्जी वितरण (spectral energy distribution) एक परिपक्व तारे (mature stellar photosphere) जैसा दिखता है।

इस अध्ययन में NASA के Wide-field Infrared Survey Explorer (WISE) और इसके विस्तारित मिशन NEOWISE से एक दशक से अधिक का डेटा शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने अब तक के सबसे बड़े और विस्तृत मध्य-इन्फ्रारेड परिवर्तनशीलता कैटलॉग में 22,000 से अधिक YSOs का विश्लेषण किया।

युवा तारों की विशेषताएँ:

  • YSOs वे तारे हैं जो अपने जीवन के प्रारंभिक चरण में होते हैं और जिनके केंद्र में स्थिर हाइड्रोजन संलयन नहीं होता।

  • ये तारें घने आणविक बादलों (molecular clouds) के संकुचन से बनते हैं।

  • संकुचन विभिन्न घटनाओं जैसे सुपरनोवा विस्फोट, पास के तारे से विकिरण, या अंतर-तारकीय माध्यम में उथल-पुथल से प्रेरित हो सकता है।

    विभिन्न प्रकार के परिवर्तनशील तारों के उदाहरण लाइट कर्व्स (बाएं से दाएं क्रम में) — लीनियर (Linear), वक्र (Curved), आवर्ती/पुनरावृत्त (Periodic), अचानक चमक (Burst), अचानक मंद होना (Drop), और अनियमित (Irregular)

शोध के प्रमुख निष्कर्ष:

  • YSOs के केंद्र में एक प्रोटोटार बनता है, जो चारों ओर घूर्णनशील डिस्क से घिरा होता है।

  • प्रोटोटार का प्रकाश संलयन से नहीं बल्कि गुरुत्वाकर्षण संकुचन और द्रव्यमान संचयन (accretion) से उत्पन्न होता है।

  • समय के साथ, डिस्क से सामग्री प्रोटोटार पर जमा होती रहती है, जिससे अचानक चमक बढ़ना या घटने जैसी घटनाएँ होती हैं।

  • युवा तारों की 36% Class I YSOs में परिवर्तनशीलता देखी गई, जबकि विकसित Class III YSOs में यह केवल 22% थी।

  • रंग परिवर्तन से पता चला कि अधिकांश तारों में चमक बढ़ने पर लालिमा बढ़ती है, जबकि कुछ में नीला होना देखा गया, जो आंतरिक डिस्क संरचना या बढ़ी हुई संचयन क्रियाओं को दर्शाता है।

महत्त्व:

यह कैटलॉग अब तक का सबसे पूर्ण मध्य-इन्फ्रारेड दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जो यह समझने में मदद करता है कि तारे कैसे बढ़ते हैं, भोजन लेते हैं और अपने धूल भरे परिवेश को छोड़ते हैं। इस कैटलॉग में 5,800 से अधिक परिवर्तनशील YSOs शामिल हैं।

जैसे-जैसे James Webb Space Telescope (JWST) और 3.6m Devasthal Optical Telescope (DOT) जैसी दूरबीनें इस अध्ययन का अनुसरण करेंगी, शोधकर्ता यह समझ पाएंगे कि हमारे जैसे सूर्य जैसे तारे अंधकार से कैसे उत्पन्न हुए।


खगोलीय रोमांच: पहली बार एक-दूसरे की परिक्रमा करते दो ब्लैक होल की तस्वीर कैद

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नई दिल्ली- खगोलविदों ने पहली बार एक-दूसरे की परिक्रमा करते हुए दो ब्लैक होल का प्रत्यक्ष अवलोकन किया है। ये ब्लैक होल हमारे ब्रह्मांड के अद्भुत और रहस्यमयी नृत्य में लिप्त हैं। सामान्यतया ब्लैक होल अदृश्य होते हैं, लेकिन उनके आस-पास का क्षेत्र चमकता है क्योंकि पदार्थ उसमें गिरता है। इससे पहले खगोलविद केवल दो सुपरमैसिव ब्लैक होल का प्रत्यक्ष अवलोकन कर पाए थे — गैलेक्सी मैसिएर 87 और संगीतार (सैजिटेरियस A)।

 एक-दूसरे की परिक्रमा करते दो ब्लैक होल, जिन्हें RadioAstron टेलीस्कोप सिस्टम से अवलोकित किया गया; दाईं ओर वास्तविक अवलोकन और बाईं ओर उसकी योजनात्मक व्याख्या।

हाल ही में, अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं की टीम ने क्वेज़र OJ287 का रेडियो इमेजिंग अध्ययन किया, जो एक दूरस्थ गैलेक्सी है और इसमें दो ब्लैक होल लगभग 12 साल के चक्र में एक-दूसरे की परिक्रमा करते हैं। इस जोड़ी की मौजूदगी का अनुमान पहले क्वेज़र के नियमित झिलमिलाहट पैटर्न के आधार पर लगाया गया था, जो 19वीं सदी की पुरानी तस्वीरों से भी पता चला।

इस खोज में आर्यभट्ट अनुसंधान संस्थान (ARIES), नैनीताल के शुबहम किशोर और आलोक सी. गुप्ता तथा TIFR, मुंबई के ए. गोपाकुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही। NASA के TESS उपग्रह और रेडियोधर्मी दूरबीनों की मदद से शोधकर्ताओं ने देखा कि OJ287 की चमक केवल 12 घंटों में अचानक बढ़ गई, जो सैकड़ों गैलेक्सियों के बराबर प्रकाश के बराबर थी।

RadioAstron नामक स्पेस टेलीस्कोप, जो पृथ्वी से बहुत दूर कक्षा में है, और ग्राउंड-बेस्ड ऑब्जर्वेटरीज़ के संयुक्त प्रयोग से OJ287 का उच्च-रिज़ॉल्यूशन रेडियो इमेज प्राप्त हुआ। इस इमेज में दोनों ब्लैक होल स्पष्ट रूप से दिखाई दिए, ठीक वहीं जहां उनके होने की भविष्यवाणी की गई थी।

विशेष रूप से, छोटे ब्लैक होल से उच्च-ऊर्जा कणों की जेट निकलती दिखाई दी, जो अपने बड़े साथी के चारों ओर घूमते हुए “झूलती पूँछ” या “घूमते बाग़ के पाइप” जैसी बनावट ले रही थी।

इस खोज का महत्व केवल अद्भुत इमेजिंग तक सीमित नहीं है। यह हमारे ब्रह्मांड के भविष्य की झलक भी है। जब ये ब्लैक होल अंततः आपस में टकराएंगे, तो वे ग्रेविटेशनल वेव्स पैदा करेंगे — वही तरंगें जिन्हें LIGO और Virgo जैसे उपकरणों ने पहले ही देखा है।

साथ ही, OJ287 ब्लैक होल प्रणाली को निरंतर देखना खगोलविदों को यह समझने में मदद करेगा कि ये विशाल ब्रह्मांडीय घटनाएँ कैसे घटित होती हैं और ब्लैक होल की गतिशीलता और जेट का विकास कैसे होता है।


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