Media24Media.com: #राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

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बस्तर पंडुम 2026 का भव्य आगाज़, राष्ट्रपति बोलीं- छत्तीसगढ़ मेरा अपना घर

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 रायपुर/जगदलपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज जगदलपुर के लाल बाग मैदान में आयोजित बस्तर पंडुम 2026 का भव्य शुभारंभ किया। राष्ट्रपति सुबह करीब साढ़े 10 बजे जगदलपुर पहुंचीं और बस्तर अंचल के इस महापर्व का उद्घाटन किया।


जनजातीय कला, संस्कृति और परंपरा को समर्पित इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ आना उन्हें अपने घर आने जैसा महसूस होता है। उन्होंने बस्तर और छत्तीसगढ़ की संस्कृति, वीरता और प्राकृतिक सौंदर्य की सराहना करते हुए कहा कि यह क्षेत्र देश की सांस्कृतिक विरासत का अमूल्य हिस्सा है।


‘बस्तर पंडुम केवल आयोजन नहीं, एक जीवंत उत्सव’

अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि छत्तीसगढ़ वीरों की धरती है, जहां के लोगों ने देश की रक्षा में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया है।
उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति प्राचीन होने के साथ-साथ अत्यंत मधुर और समृद्ध है।

राष्ट्रपति ने बस्तर पंडुम को सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि बस्तर की जीवंत संस्कृति और परंपराओं का उत्सव बताते हुए कहा कि यह महोत्सव जनजातीय समाज की पहचान और गौरव का प्रतीक है।

नक्सलवाद पर बोलीं राष्ट्रपति—बस्तर तेजी से बदल रहा है

राष्ट्रपति ने नक्सलवाद के मुद्दे पर भी स्पष्ट रूप से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दशकों तक नक्सलवाद के कारण आदिवासी समाज को भारी नुकसान झेलना पड़ा, लेकिन अब बस्तर नक्सलमुक्त होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं, जो सकारात्मक बदलाव का संकेत है।
आज बस्तर के गांव-गांव तक स्कूल, सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं और विकास की नई तस्वीर उभर रही है।

जनसेवा करने वालों को दी बधाई

अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने पद्मश्री सम्मान से नवाजे गए चिकित्सक दंपती, डॉ. बुधरी ताती समेत जनसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले सभी लोगों को बधाई दी और उनके कार्यों की प्रशंसा की।

प्रदर्शनी स्टॉलों का किया निरीक्षण

राष्ट्रपति मुर्मू ने जगदलपुर पहुंचने के बाद महोत्सव स्थल पर लगाए गए प्रदर्शनी स्टॉलों का निरीक्षण भी किया। यहां बस्तर की पारंपरिक हस्तशिल्प कला, जनजातीय वेशभूषा, लोक संगीत, नृत्य और स्थानीय उत्पादों की आकर्षक झलक देखने को मिली।

आदिवासी संस्कृति की पहचान है बस्तर पंडुम

बस्तर पंडुम आदिवासी समाज की जीवंत परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को प्रस्तुत करने वाला महोत्सव है। इसमें लोक कला, पारंपरिक खान-पान, गीत-संगीत और नृत्य का समावेश होता है।
यह आयोजन पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही जनजातीय विरासत को संरक्षित रखने का एक प्रभावी माध्यम माना जा रहा है और इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास बताया जा रहा है।

तीन स्तरों पर हो रहा आयोजन

इस वर्ष बस्तर पंडुम का आयोजन तीन चरणों में किया जा रहा है—

  • ग्राम पंचायत स्तर
  • जिला स्तर
  • संभाग/राज्य स्तर

कार्यक्रम में 12 पारंपरिक विधाओं की प्रस्तुतियां शामिल हैं, जिनमें लोक नृत्य, लोकगीत, पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुनें और जनजातीय संस्कृति की विविध झलकियां देखने को मिल रही हैं।

Budget Session 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से शुरू हुआ संसद का बजट सत्र

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 Budget Session 2026 : संसद का बजट सत्र 2026 राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के साथ शुरू हो गया। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने सरकार की नीतियों, उपलब्धियों और आगामी वर्षों के विकास एजेंडे को सदन के सामने रखा। अभिभाषण के दौरान ‘जी राम जी’ (VB-G RAM G) कानून का उल्लेख होते ही विपक्षी दलों ने हंगामा किया, जिसके चलते सदन में कुछ समय के लिए व्यवधान की स्थिति बनी रही।


राष्ट्रपति ने कहा कि बीते 10–11 वर्षों में देश की बुनियाद मजबूत हुई है और वर्ष 2026 से भारत एक नए युग में प्रवेश कर रहा है। उन्होंने इसे ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए निर्णायक समय बताया।

अभिभाषण में राष्ट्रपति ने महिला सशक्तिकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में अब 2 करोड़ महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। वहीं ‘स्वस्थ नारी–सशक्त परिवार’ अभियान के तहत 7 करोड़ महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की गई है।

युवाओं के लिए भविष्य की तकनीकों पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि सरकार 10 लाख युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और 60 हजार युवाओं को सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रशिक्षण देने की दिशा में कार्य कर रही है।

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को लेकर उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 तक इन योजनाओं का लाभ 25 करोड़ लोगों तक सीमित था, जो अब बढ़कर 95 करोड़ लोगों तक पहुंच चुका है। इसमें दलित, पिछड़े और आदिवासी वर्गों को प्राथमिकता दी जा रही है।

राष्ट्रपति ने स्टार्टअप और मुद्रा योजना का जिक्र करते हुए कहा कि देश में 2 लाख से अधिक स्टार्टअप पंजीकृत हैं, जिनमें 20 लाख से ज्यादा लोग कार्यरत हैं। इन स्टार्टअप्स में लगभग 40 प्रतिशत में महिला निदेशक हैं।

खेलों के क्षेत्र में भारत की प्रगति का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि भारत वर्ष 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी करेगा और इसके लिए सभी राजनीतिक दलों से सहयोग की अपील की।

उन्होंने आदिवासी गौरव और राष्ट्रीय महापुरुषों को याद करते हुए भगवान बिरसा मुंडा, सरदार वल्लभभाई पटेल और गुरु तेग बहादुर जी का उल्लेख किया। राष्ट्रपति ने कहा कि अपनी विरासत को याद करना नई पीढ़ी को प्रेरित करता है।

नक्सलवाद पर बोलते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर और बीजापुर जैसे क्षेत्रों में माओवादियों के आत्मसमर्पण से शांति का माहौल बन रहा है और कई गांवों में वर्षों बाद विकास पहुंचा है।

अंत में राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई कर रही है और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

अभिभाषण के दौरान ‘जी राम जी’ कानून को लेकर विपक्ष ने विरोध दर्ज कराया, हालांकि सरकार का कहना है कि यह कानून संसद से पारित हो चुका है। राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ ही संसद का बजट सत्र औपचारिक रूप से शुरू हो गया।

छत्तीसगढ़ का जनजातीय गौरव- मातृशक्ति के कौशल से बदलती तस्वीर

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 रायपुर : भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुमला (झारखंड) में आयोजित अंतर्राज्यीय जन-सांस्कृतिक समागम ‘कार्तिक जतरा’ कार्यक्रम में जशपुर जिले की स्व-सहायता समूहों से जुड़ी जनजातीय महिलाओं के कार्यों, कौशल और आत्मनिर्भरता की प्रशंसा की। उन्होंने विशेष रूप से ‘जशक्राफ्ट’ से जुड़ी बहनों के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके द्वारा तैयार किए जा रहे आभूषण एवं पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद महिला सशक्तिकरण के सशक्त उदाहरण हैं।


राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जशपुर वनमंडल अंतर्गत वन प्रबंधन समिति शब्दमुंडा, ग्राम कोटानपानी के स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों को जनजातीय सृजनशीलता, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक संरक्षण का प्रेरक प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयास न केवल आजीविका के साधन बढ़ाते हैं, बल्कि परंपरागत कला और हस्तशिल्प को नई पहचान भी दिलाते हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि जशपुर की जनजातीय मातृशक्ति, विशेषकर ‘जशक्राफ्ट’ से जुड़ी बहनों के कौशल और स्वावलंबन की प्रशंसा पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम कोटानपानी की स्व-सहायता समूह की बहनों द्वारा तैयार आभूषण एवं पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और महिलाओं की मेहनत व सृजनात्मकता के जीवंत प्रतीक हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति का यह स्नेहपूर्ण आशीर्वाद और प्रोत्साहन जनजातीय मातृशक्ति के आत्मविश्वास, आत्मनिर्भर भारत के संकल्प तथा “वोकल फॉर लोकल” की भावना को और अधिक सशक्त करेगा। उन्होंने जशपुर की समस्त जनजातीय बहनों की ओर से राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम के दौरान जनजातीय हस्तशिल्प, पारंपरिक लोककला तथा स्व-सहायता समूहों के उत्पादों की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही। छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि दल ने जशपुर जिले की विशिष्ट शिल्प परंपरा और स्थानीय उत्पादों का प्रदर्शन कर जनजातीय सशक्तिकरण का सशक्त संदेश दिया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को जनजातीय समुदायों की परंपराओं से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है। अपनी जनजातीय विरासत और पहचान को सुरक्षित रखते हुए हमारे युवाओं को आधुनिक विकास के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनजातीय समुदाय के सभी सदस्य अपनी धरोहर को संजोए रखते हुए प्रगति के पथ पर निरंतर आगे बढ़ते रहेंगे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह अत्यंत सौभाग्य की बात है कि मांझाटोली (झारखंड) में अंतरराज्यीय जन सांस्कृतिक समागम - कार्तिक यात्रा का आयोजन हुआ है। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक विरासत का सम्मान है, बल्कि जनजातीय समाज को जोड़ने वाला सेतु भी है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में शामिल होना उनके लिए गर्व और आस्था दोनों का विषय है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में संपूर्ण देश भगवान बिरसा मुंडा की जयंती 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाता है।भगवान बिरसा मुंडा केवल एक महान स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं, बल्कि जंगल, जल और जमीन की रक्षा के प्रतीक हैं। उनकी प्रेरणा ने आदिवासी समाज में आत्मगौरव की भावना को सशक्त किया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पंकजराज साहेब कार्तिक उरांव जैसे जननायकों ने भी शिक्षा, सामाजिक एकता और जनजातीय पहचान के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में कहा कि एक समय था जब बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद ने विकास के रास्ते रोक रखे थे। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं वहां तक नहीं पहुंच पाती थीं लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मजबूत नेतृत्व और स्पष्ट नीति के कारण अब स्थितियाँ बदल रही हैं। बस्तर में तेजी से विकास कार्य हो रहे हैं, सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ हुई है और शासन व्यवस्था गांव-गांव तक पहुंच रही है।

उन्होंने कहा कि नक्सलवाद अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। 400 से अधिक गांव नक्सली प्रभाव से मुक्त हो चुके हैं और लोगों के जीवन में नई उम्मीद जगी है। आज उन इलाकों में सड़क, बिजली, पानी, राशन, चिकित्सा सुविधाएं और शिक्षा के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। बस्तर के लोग लंबे समय से शांति और विकास चाहते थे, और अब उनका यह सपना धरातल पर उतरता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में भी राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह भी हर्ष का विषय है कि पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में ही झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों का गठन संभव हो पाया। उन्होंने कहा कि आज इन राज्यों की जनता अपने अलग पहचान और तेज़ी से प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि तीनों राज्यों का यह सांस्कृतिक संगम आगे भी शांति, प्रगति और समृद्धि का संदेश देता रहेगा तथा नक्सलवाद पर निर्णायक विजय का अध्याय आने वाले समय में पूरा होगा।

53rd CJI Oath Ceremony : भारत को मिला नया CJI: जस्टिस सूर्यकांत ने ली शपथ

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 53rd CJI Oath Ceremony : रविवार शाम देश की न्याय व्यवस्था में बड़ा बदलाव हुआ। जस्टिस सूर्यकांत ने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। जस्टिस बी.आर. गवई के सेवानिवृत्त होते ही सर्वोच्च न्यायालय की जिम्मेदारी अब जस्टिस सूर्यकांत के हाथों में आ गई है।


शपथ कार्यक्रम में देश–विदेश की मौजूदगी

नई दिल्ली में आयोजित समारोह में कई प्रतिष्ठित हस्तियाँ उपस्थित रहीं। खास बात यह रही कि सात देशों के चीफ जस्टिस भी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बने। कानूनी जगत में इस नियुक्ति को लेकर उत्साह देखा गया और इसे सुप्रीम कोर्ट में “नए दौर की शुरुआत” के रूप में देखा जा रहा है।

  • 370, पेगासस, बिहार वोटर लिस्ट—महत्वपूर्ण मामलों में निभाई भूमिका
  • जस्टिस सूर्यकांत सुप्रीम कोर्ट के कई बड़े और संवैधानिक महत्व के मामलों का हिस्सा रहे हैं, जिनमें शामिल हैं—
  • अनुच्छेद 370 हटाने से जुड़े फैसले
  • पेगासस स्पाइवेयर जांच मामला
  • बिहार की वोटर लिस्ट से जुड़े सवाल
  • इन मामलों में उनकी भूमिका ने उन्हें देश की न्याय व्यवस्था में विशेष पहचान दी है।

15 महीने का कार्यकाल

30 अक्टूबर को CJI-डिज़िग्नेट बनाए गए जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल लगभग 15 महीने का होगा। वे 9 फरवरी 2027 को 65 वर्ष की आयु पूरी होने पर सेवानिवृत्त होंगे।

कौन हैं जस्टिस सूर्यकांत? — साधारण परिवार से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर

  • 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार में जन्मे जस्टिस सूर्यकांत का सफर प्रेरणादायक माना जाता है।
  • कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से लॉ में मास्टर डिग्री (फर्स्ट क्लास फर्स्ट)
  • पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में उल्लेखनीय फैसले
  • हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस
  • 2019 में सुप्रीम कोर्ट के जज नियुक्त

उनके कुछ महत्वपूर्ण फैसले

  • सुप्रीम कोर्ट में रहते हुए वे कई अहम बेंचों का हिस्सा रहे—
  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े फैसले
  • नागरिकता और संवैधानिक दिशानिर्देश
  • राज्यपाल और राष्ट्रपति की शक्तियों की व्याख्या करने वाली बेंच
  • बिहार में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 65 लाख गायब वोटरों पर चुनाव आयोग से रिपोर्ट तलब करना

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज छत्तीसगढ़ दौरे पर, बिरसा मुंडा जयंती कार्यक्रम में होंगी शामिल

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अंबिकापुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज छत्तीसगढ़ प्रवास पर पहुंचेंगी। वे अंबिकापुर में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में शामिल होंगी। राष्ट्रपति की उपस्थिति को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और आयोजन की तैयारियाँ पूरी कर ली हैं।


सूत्रों के अनुसार, अपने इस प्रवास के दौरान राष्ट्रपति दो महत्वपूर्ण योजनाओं का उद्घाटन भी कर सकती हैं, जो प्रदेश के वैद्यों और देवस्थलों से जुड़ी हैं।

“मुख्यमंत्री वैद्यराज सम्मान निधि” योजना का शुभारंभ संभव

राष्ट्रपति राज्य में पहली बार शुरू की जा रही ‘मुख्यमंत्री वैद्यराज सम्मान निधि’ योजना का शुभारंभ कर सकती हैं।
इस योजना के तहत—

परंपरागत उपचार विधियों का अनुसरण करने वाले वैद्यों को

हर साल 5000 रुपए की सम्मान निधि

डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से प्रदान की जाएगी।

इन वैद्यों का चयन तीन स्तर पर किया जाएगा। कार्यक्रम में प्रदेश भर से चुने गए 50 वैद्यों को आमंत्रित किया गया है, जिनमें से 5–10 वैद्यों को राष्ट्रपति मंच पर सम्मानित करेंगी।

पहला उत्तर क्षेत्र जनजातीय लोकनृत्य महोत्सव—आज राज्य स्तरीय मुकाबला

प्रदेश में पहली बार उत्तर क्षेत्र जनजातीय लोक नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसकी शुरुआत ग्राम स्तर से हुई थी।
इसके बाद जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में—

  • प्रथम विजेता को ₹50,000,
  • द्वितीय को ₹25,000,
  • और तृतीय को ₹15,000 की पुरस्कार राशि दी गई।

अब 19 नवंबर को प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी।
राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में—

  • प्रथम विजेता को ₹2 लाख रुपए,
  • द्वितीय को ₹1 लाख,

और तृतीय को ₹50,000
की पुरस्कार राशि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों से प्रदान की जाएगी।

बालोद जिले को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा 'स्क्रीन फेलिसिटेशन अवार्ड' से सम्मानित

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 बालोद : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत बालोद जिले में हुए उल्लेखनीय कार्यों के लिए बालोद जिले को स्क्रीन फेलिसिटेशन अवार्ड से सम्मानित किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत 17 अक्टूबर को विज्ञान भवन नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में बालोद जिले में आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत बालोद जिले में हुए उल्लेखनीय कार्यों के लिए आदिम जाति कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा को स्क्रीन फेलिसिटेशन अवार्ड प्रदान किया।


उल्लेखनीय है कि 17 सितंबर से 02 अक्टूबर तक आयोजित आदि कर्मयोगी अभियान के अंतर्गत बालोद जिले के चयनित 186 जनजातीय बहुल ग्रामों में निवासरत जनजातीय परिवार के लोगों से डोर टू डोर संपर्क कर एवं इन ग्रामों में विभिन्न गतिविधियों के आयोजन के माध्यम से शासकीय योजनाओं को प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के अलावा जमीनी स्तर पर नेतृत्व को सशक्त बनाने तथा जनजातीय लोगों को मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराने का सराहनीय प्रयास किया गया है। इसके अलावा इस दौरान जिले के चयनित सभी 186 गांवों में ट्राईबल विलेज एक्शन प्लान एवं ट्राईबल विलेज विजन 2030 तैयार किया गया।

जिसके फलस्वरूप भारत सरकार के द्वारा बालोद जिले को स्क्रीन फेलिसिटेशन अवार्ड प्रदान किया गया है। बालोद जिले को प्राप्त इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए आज बालोद जिला प्रशासन द्वारा सयुंक्त जिला कार्यालय सभाकक्ष में कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा एवं अन्य अधिकारियों ने सहायक आयुक्त आदिवासी विकास श्री विजय सिंह कंवर सहित एसडीएम सुरेश साहू एवं जनपद पंचायत डौण्डी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री डीडी मण्डले सहित इस कार्य में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने वाले अधिकारियों का सम्मान किया गया।

कलेक्टर मिश्रा ने जिले को प्राप्त इस महत्वपूर्ण उपलब्धि की भूरी-भूरी सराहना करते हुए इसके प्रमुख सूत्रधार सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विजय सिंह कंवर सहित अन्य अधिकारियों के कार्यों की भूरी-भूरी सराहना की। इसके लिए उन्होंने सहायक आयुक्त आदिवासी विकास सहित इस कार्य में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने वाले सभी अधिकारी-कर्मचारियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी।

 

राष्ट्रपति मुर्मू ने कोरिया जिले के ‘धरती आबा’ अभियान को दिया राष्ट्रीय स्तर का सम्मान

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 रायपुर : देश की राजधानी नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित ‘राष्ट्रीय कॉन्क्लेव ऑन आदि कर्मयोगी अभियान’ में छत्तीगसढ के कोरिया जिले ने एक बार फिर अपनी विकास यात्रा से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित इस भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान में उत्कृष्ट कार्यों के लिए कोरिया जिले की कलेक्टर चंदन त्रिपाठी को सम्मानित किया। इस अवसर पर केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम एवं राज्यमंत्री दुर्गा दास उइके भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ शासन के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा को भी राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रपति के हाथों सम्मान प्राप्त हुआ।


154 जनजातीय ग्रामों में विकास की नई मिसाल

‘धरती आबा जनजाति ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के अंतर्गत कोरिया जिले के 154 जनजाति बहुल ग्रामों, बैकुंठपुर ब्लॉक के 138 और सोनहत ब्लॉक के 16 ग्रामों में लगभग 38 हजार जनजातीय परिवारों को शासन की 17 विभागों की 25 योजनाओं का लाभ दिलाया गया है। शिविरों और डोर टू डोर अभियानों के माध्यम से लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड, पीएम जन धन योजना, पीएम किसान सम्मान निधि, पीएम उज्जवला, जाति-निवास प्रमाण पत्र, वनाधिकार पट्टा, राशन कार्ड, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम आवास योजना, सिकल सेल टेस्टिंग, सुकन्या समृद्धि योजना तथा पीएम विमान बीमा योजना जैसे योजनाओं से जोड़ा गया। समयबद्ध क्रियान्वयन और मैदानी स्तर पर नवाचारों के चलते यह पहल जनसहभागिता का प्रतीक बनी है।

राष्ट्रीय स्तर पर नवाचारों की सराहना

छत्तीसगढ के कोरिया जिले के जनजातीय अंचलों में किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलना जिले के लिए गर्व की बात है। यह सम्मान नवाचार, जनसहभागिता और सतत विकास की दिशा में कोरिया की उपलब्धियों का प्रतीक है।

बस्तर से सरगुजा तक हर जनजातीय परिवार को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए- साय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा श्यह सम्मान हमारे उन कर्मयोगियों की पहचान है जिन्होंने जनजातीय सशक्तीकरण को धरातल पर साकार किया है। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि बस्तर से सरगुजा तक हर जनजातीय परिवार को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए और उन्हें हर स्तर पर सशक्त किया जाए।

योजनाओं की रोशनी को जन-जन तक पहुंचाना ही सुशासन

छत्तीसगढ़ शासन में आदिम जाति विकास मंत्री एवं कोरिया जिले के प्रभारी मंत्री रामविचार नेताम ने कहा यह उपलब्धि हमारे अधिकारियों, फील्ड स्टाफ और जनप्रतिनिधियों की मेहनत का परिणाम है, जिन्होंने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद योजनाओं की रोशनी को जन-जन तक पहुँचाया है, उन्होंने कहा कि जन-जन तक योजनाओं को पहुंचाना व लाभ मिलना ही सुशासन है।

Online Gaming Bill : लोकसभा-राज्यसभा से पास बिल पर राष्ट्रपति की मंजूरी, ऑनलाइन सट्टेबाजी पर रोक

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Online Gaming Bill : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज शुक्रवार को ऑनलाइन गेमिंग संवर्धन एवं विनियमन विधेयक, 2025 को मंजूरी दे दी है। इससे पहले यह विधेयक लोकसभा और राज्यसभा से पास हो चुका था। अब यह कानून पूरे देश में लागू हो जाएगा।


नए कानून के तहत सभी तरह की ऑनलाइन मनी गेमिंग सेवाओं और उनके विज्ञापनों पर प्रतिबंध रहेगा। नियम तोड़ने पर तीन साल तक की जेल और एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। वहीं, ऐसे प्लेटफॉर्म का विज्ञापन करने वालों को दो साल तक की कैद और 50 लाख रुपये जुर्माना देने का प्रावधान है।

लोकसभा ने इस विधेयक को विपक्ष के विरोध के बीच महज सात मिनट की चर्चा में पारित किया था, जबकि राज्यसभा ने इसे 26 मिनट में पास किया।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सदन में कहा कि लोग ऑनलाइन मनी गेमिंग में अपनी पूरी जमा-पूंजी गंवा रहे हैं। सरकार का मानना है कि यह समाज के लिए बड़ी बुराई बन चुकी है।

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा समाज और मध्यम वर्गीय परिवारों के हित को प्राथमिकता देते हैं। इसी सोच के तहत यह कानून लाया गया है ताकि युवाओं और परिवारों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।

इस कानून के तहत पोकर, रमी जैसे सभी ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुए से जुड़े गेम प्रतिबंधित रहेंगे।

देश को चौंकाते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने दिया इस्तीफा, स्वास्थ्य कारणों का हवाला

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भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अफने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोमवार शाम स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना त्यागपत्र भी भेजा। अब जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद इस बात पर चर्चा लगातार जारी है कि भारत का अगला उपराष्ट्रपति कौन होगा और संविधान के मुताबिक, उन्हें चुने जाने की पूरी प्रक्रिया क्या होगी। इसके साथ ही जब तक उपराष्ट्रपति का चुनाव नहीं हो जाता तब तक जगदीप धनखड़ अनुपस्थिति में राज्यसभा कौन संभालेगा? आइए जानते हैं इन सभी सवालों के जवाब हमारे इस एक्सप्लेनर में।


जगदीप धनखड़ ने क्यों इस्तीफा दिया?

भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों के कारण अपने पद से इस्तीफा दिया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे अपने त्यागपत्र में उपराष्ट्रपति धनखड़ ने लिखा- "स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने और चिकित्सीय सलाह का पालन करने के लिए, मैं संविधान के अनुच्छेद 67 (ए) के अनुसार, तत्काल प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे रहा हूं।" आपको बता दें कि जगदीप धनखड़ अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति बने थे और उनका कार्यकाल 2027 तक था। हाल ही में उपराष्ट्रपति धनखड़ की दिल्ली एम्स में एंजियोप्लास्टी हुई थी और इस वर्ष मार्च में उन्हें कुछ दिनों के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

कब होगा नए उपराष्ट्रपति का चुनाव?

जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव को जल्द से जल्द आयोजित कराना होगा। भारत के संविधान के अनुच्छेद 68 के खंड दो में कहा गया है कि उपराष्ट्रपति की मृत्यु, इस्तीफे या उन्हें पद से हटाए जाने या अन्य किसी कारण से होने वाली रिक्ति को भरने के लिए चुनाव का आयोजन यथाशीघ्र किया जाएगा। चुनाव में निर्वाचित व्यक्ति अपने पदभार ग्रहण करने की तिथि से पांच साल की अवधि तक पद धारण करने का हकदार होगा। ऐसे में माना जा रहा है कि नए उपराष्ट्रपति का चुनाव वर्तमान में जारी संसद के मॉनसून सत्र में आयोजित कराया जा सकता है।

किसान परिवार में हुआ था जगदीप धनखड़ का जन्म

जगदीप धनखड़ का जन्म राजस्थान के झुंझुनू जिले के किठाना गांव में एक किसान परिवार में हुआ था. उन्होंने चित्तौड़गढ़ के सैनिक स्कूल और राजस्थान विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की. वे राजस्थान हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में वकील रहे. यहीं से उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत हुई.

राजनीतिक सफर: कांग्रेस से बीजेपी तक

धनखड़ ने राजनीति की शुरुआत कांग्रेस से की थी और पीवी नरसिम्हा राव सरकार में सांसद रहे. बाद में राजस्थान में अशोक गहलोत के उभार के समय उन्होंने कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया. वे चंद्रशेखर सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे. वे ओबीसी समुदाय, विशेषकर राजस्थान के जाट समुदाय को ओबीसी आरक्षण दिलाने के मुद्दे को लेकर हमेशा एक्टिव रहे.

बंगाल के राज्यपाल के रूप में सख्त रवैया

2019 में उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया. अपने कार्यकाल में उन्होंने ममता बनर्जी सरकार पर कानून व्यवस्था, विश्वविद्यालयों की नियुक्तियों और संघीय ढांचे को लेकर कई बार तीखी टिप्पणियां कीं. इससे वे लगातार राजनीतिक चर्चाओं में बने रहे.

उपराष्ट्रपति के रूप में विपक्ष से टकराव

2022 में वे 528 वोटों से उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए थे. यह 1992 के बाद किसी उपराष्ट्रपति पद के लिए सबसे बड़ी जीत मानी गई, लेकिन राज्यसभा में विपक्ष के साथ उनका तीखा रवैया कई बार सुर्खियों में रहा. विपक्ष ने उन्हें पद से हटाने की कोशिश भी की थी, जिसे धनखड़ ने तंज कसते हुए कहा था, "यह ऐसा है जैसे जंग लगे सब्जी काटने वाले चाकू से बायपास सर्जरी की जाए."

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