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PM मोदी ने स्कूली बच्चों के साथ मनाया रक्षाबंधन, बच्चियों ने बांधी राखी; पूछा- बचपन का सपना क्या था?

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 नई दिल्ली। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास पर स्कूली बच्चों के साथ त्योहार मनाया। इस दौरान बच्चियों ने प्रधानमंत्री की कलाई पर राखी बांधी। पीएम मोदी ने बच्चों से बातचीत की और उनके साथ हंसी-मजाक भी किया।


प्रधानमंत्री ने रक्षाबंधन के मौके पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व भाई-बहन के बीच प्रेम, स्नेह और अटूट विश्वास का प्रतीक है।

बच्चियों ने पीएम मोदी की कलाई पर बांधी राखी

रक्षाबंधन के अवसर पर कई स्कूली बच्चियां प्रधानमंत्री आवास पहुंचीं। बच्चियों ने पीएम मोदी की कलाई पर रक्षासूत्र बांधा और उनका आशीर्वाद लिया। प्रधानमंत्री ने भी बच्चों के साथ सहज अंदाज में बातचीत की, उनसे हाथ मिलाया और मुस्कुराते हुए ‘हाई-फाइव’ किया।

प्रधानमंत्री ने इस मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा कीं। उन्होंने पोस्ट में लिखा कि 7, लोक कल्याण मार्ग पर रक्षाबंधन समारोह की कुछ यादगार झलकियां।

बच्ची ने पूछा- बचपन का सपना क्या था?

कार्यक्रम के दौरान बच्चों और प्रधानमंत्री के बीच दिलचस्प बातचीत भी हुई। एक बच्ची ने पीएम मोदी से पूछा कि बचपन में उनका सपना क्या था?

इस पर प्रधानमंत्री ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “आप लोगों से मिलने का।” प्रधानमंत्री का यह जवाब सुनकर बच्चों के चेहरे पर खुशी नजर आई और माहौल खुशनुमा हो गया।

बच्चों के साथ पीएम का सहज अंदाज

पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री बच्चों के साथ बेहद सहज नजर आए। उन्होंने बच्चों से बातचीत की और उनके सवालों का जवाब दिया। रक्षाबंधन के मौके पर प्रधानमंत्री और स्कूली बच्चों की यह मुलाकात खास रही।

बहनों ने बांधी स्नेह की डोर, ‘विष्णु भैया’ ने दिया सुरक्षा और सम्मान का भरोसा

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 रायपुर : रक्षाबंधन के पावन पर्व से पहले राजधानी रायपुर में आज भाई-बहन के स्नेह और राष्ट्ररक्षा के संकल्प का भावपूर्ण संगम देखने को मिला। बलवीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में आयोजित ‘स्नेह की डोर’ कार्यक्रम में केंद्रीय सुरक्षा बलों, सेना और पुलिस के जवानों की कलाइयों पर जब स्कूली बेटियों, दिव्यांग बेटियों और महिला स्व-सहायता समूहों की दीदियों ने रक्षा सूत्र बांधे तो पूरा वातावरण आत्मीयता, सम्मान और कृतज्ञता के भाव से भर उठा।


कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब वर्ष 2017 में रक्षाबंधन के ठीक एक दिन पूर्व नक्सली मुठभेड़ में वीरगति को प्राप्त हुए शहीद उपनिरीक्षक  युगल किशोर वर्मा की धर्मपत्नी माधुरी वर्मा ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की कलाई पर राखी बांधी। मुख्यमंत्री इस अवसर पर भावुक हो उठे। उन्होंने शहीद  वर्मा के सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हुए शहीद जवानों के परिवारों के साथ सदैव खड़े रहने का संकल्प दोहराया।


मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि राखी का यह धागा केवल भाई-बहन के स्नेह का बंधन नहीं, बल्कि एक शहीद परिवार के विश्वास और अपनत्व का प्रतीक है। हमारे वीर जवानों का बलिदान और उनके परिवारों का त्याग छत्तीसगढ़ कभी नहीं भूल सकता। शहीदों के परिवार हमारे अपने परिवार हैं और उनके सम्मान, स्वाभिमान तथा हर सुख-दुःख में उनके साथ खड़े रहने का यह रिश्ता सदैव अटूट रहेगा।

नक्सलवाद के अंत से बहनों को मिला सुरक्षा और विश्वास का सबसे बड़ा उपहार

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि देश और छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद के आतंक से मुक्त कराने के लिए हमारे सुरक्षा बलों ने अदम्य साहस का परिचय दिया है और अनेक जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया है। नक्सलवाद के अंत की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़ हमारी बहनों के लिए सुरक्षा और विश्वास का सबसे बड़ा उपहार है। अब वह समय आ रहा है जब नक्सल हिंसा के कारण किसी बहन का सुहाग नहीं उजड़ेगा, किसी मां को अपना बेटा नहीं खोना पड़ेगा और किसी बहन को अपने भाई के सकुशल घर लौटने की चिंता नहीं सताएगी।

उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के दृढ़ संकल्प तथा सुरक्षा बलों के साहस और पराक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक सफलता ने बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में शांति और विकास के नए युग का मार्ग प्रशस्त किया है। इस परिवर्तन में बस्तर की जनता का विश्वास और सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बस्तर की पहचान हिंसा से नहीं, बल्कि शांति, विकास, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, पर्यटन और नई संभावनाओं से होगी। लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण विकास से वंचित रहे क्षेत्रों तक सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार और रोजगार के अवसर तेजी से पहुंचाए जा रहे हैं। सरकार का संकल्प बस्तर को देश के श्रेष्ठ और विकसित आदिवासी अंचलों में शामिल करना है।

जवानों की कलाइयों पर सजी बहनों की राखी

‘स्नेह की डोर’ कार्यक्रम में सीआईएसएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, सीआरपीएफ, सेना और पुलिस के लगभग 800 जवान शामिल हुए। स्कूली छात्राओं, दिव्यांग बेटियों, स्वच्छता दीदियों, ड्रोन दीदियों, लखपति दीदियों और महिला स्व-सहायता समूहों की बहनों ने जवानों की कलाइयों पर राखी बांधी और राष्ट्र तथा समाज की सुरक्षा में उनके योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में ऐसा आत्मीय और अद्भुत दृश्य पहली बार देखा है। देश और प्रदेश की सुरक्षा के लिए घर-परिवार से दूर रहकर कठिन परिस्थितियों में अपने कर्तव्य का निर्वहन करने वाले जवानों को जब इतनी बड़ी संख्या में बहनों ने राखी बांधी तो रक्षाबंधन का पर्व अपने व्यापक अर्थ में साकार होता दिखाई दिया। हमारे जवान केवल सीमाओं और समाज के सुरक्षा प्रहरी नहीं, बल्कि प्रदेश की बहनों के भाई भी हैं।

इस अवसर पर सुरक्षा बलों के जवानों ने भी बहनों की रक्षा, सम्मान और सुरक्षा का संकल्प लिया। मुख्यमंत्री ने सुरक्षा बलों के जवानों के शौर्य और समर्पण को नमन करते हुए नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई में उल्लेखनीय योगदान देने वाले जवानों का सम्मान किया।

बहनों का स्नेह मेरी सबसे बड़ी शक्ति : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में उन्हें छत्तीसगढ़ की लाखों-करोड़ों बहनों का अपार स्नेह और आशीर्वाद मिला है। बहनों का यही विश्वास और अपनापन जनसेवा के लिए नई ऊर्जा देता है। राज्य सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के साथ उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में महिला सशक्तिकरण आज शासन की नीतियों के केंद्र में है। छत्तीसगढ़ में 2 लाख 42 हजार से अधिक महिला स्व-सहायता समूहों से करीब 30 लाख महिलाएं जुड़ी हुई हैं। लखपति दीदी अभियान ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है और प्रदेश की 13 लाख 85 हजार बहनें लखपति दीदी बन चुकी हैं। महिलाएं अब परिवार की आर्थिक शक्ति बनने के साथ गांव और समाज के विकास का नेतृत्व भी कर रही हैं।

रक्षाबंधन से पहले लगभग 68 लाख बहनों को 631 करोड़ रुपये

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महतारी वंदन योजना प्रदेश की माताओं-बहनों के आर्थिक स्वावलंबन और आत्मसम्मान का मजबूत आधार बनी है। योजना के माध्यम से पात्र महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दी जा रही है।

उन्होंने बताया कि रक्षाबंधन के पावन पर्व को ध्यान में रखते हुए महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त के रूप में लगभग 68 लाख बहनों के बैंक खातों में करीब 631 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा है कि प्रदेश की माताएं-बहनें आर्थिक रूप से मजबूत बनें, अपने छोटे-बड़े निर्णय स्वयं ले सकें और अपने त्योहार पूरे उत्साह एवं सम्मान के साथ मना सकें।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने मुख्यमंत्री श्री साय को भी रक्षा सूत्र बांधा। मुख्यमंत्री ने बहनों का आशीर्वाद प्राप्त करते हुए उनके सुख, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

देश की एकता और जवानों के सम्मान का दिलाया संकल्प

मुख्यमंत्री श्री साय ने कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों को देश की एकता, अखंडता और सम्मान की रक्षा के लिए जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने तथा देश के वीर जवानों के प्रति सदैव सम्मान का भाव रखने का संकल्प दिलाया।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा केवल वर्दीधारी जवानों का दायित्व नहीं है। प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह देश की एकता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करे तथा राष्ट्रविरोधी शक्तियों के विरुद्ध सजग रहे। जवानों के प्रति सम्मान की भावना समाज और नई पीढ़ी में और मजबूत हो, ‘स्नेह की डोर’ जैसे आयोजन इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं।

वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई में केंद्रीय सुरक्षा बलों और पैरामिलिट्री फोर्स का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की दृढ़ इच्छाशक्ति, केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह के संकल्प और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने साहस के साथ नक्सलवाद के विरुद्ध लड़ाई लड़ी है।

उन्होंने कहा कि एक समय नक्सल हिंसा के कारण अनेक परिवारों ने अपने बेटे, भाई और जीवनसाथी खोए, लेकिन अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। वह दिन दूर नहीं जब किसी बहन को यह नहीं कहना पड़ेगा कि उसका भाई ड्यूटी पर गया था और लौटकर नहीं आया। उन्होंने समाज से वैचारिक रूप से भी सजग रहने और देश की एकता-अखंडता को कमजोर करने वाली प्रवृत्तियों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया।

रायपुर जिले को मिले पांच अभिनव प्रोजेक्ट्स

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रायपुर जिला प्रशासन एवं विभिन्न विभागों द्वारा तैयार पांच अभिनव प्रोजेक्ट्स—‘हरित पोषणम्’, ‘प्रोजेक्ट निरामय’, ‘तिरंगा शक्ति फेस्ट’, ‘प्रोजेक्ट अहिगुण्डिकः’ और ‘रायपुर अनफिल्टर्ड’ का शुभारंभ किया।

‘हरित पोषणम्’ के माध्यम से आंगनबाड़ियों और महिला समूहों को फलदार पौधे तथा सब्जियों के उन्नत बीज उपलब्ध कराकर पोषण वाटिकाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर पौष्टिक आहार की उपलब्धता बढ़ाने के साथ महिलाओं और समुदाय को पोषण अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ना है।

‘प्रोजेक्ट निरामय’ के अंतर्गत रायपुर जिले के 215 उच्च एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के 65 हजार 920 छात्र-छात्राओं की स्वास्थ्य एवं रक्त जांच की जाएगी। जांच में स्वास्थ्य संबंधी समस्या पाए जाने पर आवश्यकतानुसार निःशुल्क उपचार की व्यवस्था भी की जाएगी।

‘तिरंगा शक्ति फेस्ट’ के माध्यम से रायपुर में प्रत्येक माह सामाजिक समरसता, संस्कृति, सुशासन, युवा नेतृत्व और राष्ट्रभावना से जुड़े विभिन्न आयोजन किए जाएंगे। इसका उद्देश्य विशेष रूप से युवाओं को सामाजिक सरोकारों और राष्ट्र निर्माण की भावना से जोड़ना है।

‘रायपुर अनफिल्टर्ड’ के अंतर्गत छत्तीसगढ़ की प्रतिष्ठित हस्तियों, कलाकारों और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों के जीवन, अनुभव और विचारों को पॉडकास्ट के माध्यम से सामने लाया जाएगा।

‘प्रोजेक्ट अहिगुण्डिकः’ के माध्यम से जिले के सौंरा (सपेरा) समुदाय के परिवारों को शासन की मुख्यधारा और जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके अंतर्गत आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना, जॉब कार्ड सहित विभिन्न योजनाओं और आवश्यक दस्तावेजों का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने की पहल की जाएगी।

इस अवसर पर राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक श्री सुनील सोनी, विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष डॉ. रामप्रताप सिंह, छत्तीसगढ़ राज्य तेलघानी विकास बोर्ड के अध्यक्ष श्री जितेन्द्र कुमार साहू, छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष श्री लोकेश कांवड़िया, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन अग्रवाल, कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह सहित जनप्रतिनिधि, सुरक्षा बलों के अधिकारी-जवान, स्कूली विद्यार्थी, महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्य और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

 

बीज राखियों से सजेगा रक्षाबंधन, स्नेह के साथ मिलेगा हरियाली का संदेश

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 रायपुर : रायगढ़ जिले में इस बार रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के स्नेह के साथ पर्यावरण संरक्षण और हरियाली का संदेश भी देगा। बिहान से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाएं धान, मक्का, बरबट्टी, लौकी, करेला, सेमी, कुम्हड़ा, भिंडी, उड़द, मसूर और मूंगफली सहित स्थानीय बीजों से आकर्षक बीज राखियां तैयार कर रही हैं। यह नवाचार महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय और स्वरोजगार का नया अवसर भी बन रहा है।


बीज राखी निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए जिले के सातों विकासखंडों में प्रतियोगिता आयोजित कर उत्कृष्ट राखियां तैयार करने वाली महिलाओं का चयन किया गया। चयनित महिलाओं ने जिला कलेक्टोरेट पहुंचकर कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी सहित अधिकारियों को अपने हाथों से बनाई बीज राखियां पहनाईं। कलेक्टर ने महिलाओं को प्रशस्ति पत्र एवं उपहार देकर सम्मानित किया।

कलेक्टर ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप स्व-सहायता समूह की महिलाओं को नवाचार, सशक्तिकरण और आजीविका से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। स्थानीय संसाधनों और हुनर से महिलाएं आय के नए साधन विकसित कर रही हैं।

बीज राखियों की विशेषता यह है कि उपयोग के बाद इन्हें मिट्टी में दबाने पर इनमें मौजूद बीज अंकुरित होकर पौधे का रूप ले सकते हैं। कम लागत, आकर्षक डिजाइन और पर्यावरण हितैषी स्वरूप के कारण इनकी मांग बढ़ रही है। इस तरह बीज राखी भाई-बहन के अटूट प्रेम के साथ प्रकृति संरक्षण और हरियाली का सुंदर संदेश भी जन-जन तक पहुंचाएगी।

रक्षाबंधन से पहले बहनों को विष्णु भैया का महतारी वंदन उपहार

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 रायपुर : रक्षाबंधन के पावन पर्व से पहले छत्तीसगढ़ की बहनों को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महतारी वंदन योजना की 30वीं किस्त के रूप में विशेष उपहार दिया है। 7 अगस्त 2026 को जारी 30वीं किस्त के साथ प्रदेश की पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 19,444 करोड़ 33 लाख रुपये से अधिक की राशि अंतरित की जा चुकी है। रक्षाबंधन से पहले खाते में पहुंची यह राशि महिलाओं के लिए आर्थिक संबल के साथ पर्व की खुशियों को और बढ़ाने वाली सौगात बन गई है।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में संचालित महतारी वंदन योजना अब महिलाओं के सम्मान, स्वाभिमान, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन चुकी है। योजना के तहत प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता सीधे डीबीटी के माध्यम से महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचाई जा रही है।

रक्षाबंधन से पहले खाते में पहुंची राशि, बहनों के चेहरे पर खुशी

रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह और विश्वास का पर्व है। इस बार पर्व से पहले महतारी वंदन की राशि मिलने से महिलाओं में विशेष उत्साह है। महिलाएं इस राशि से भाई के लिए राखी, मिठाई और उपहार खरीदने के साथ-साथ घर-परिवार की जरूरतों को पूरा करते हुए रक्षाबंधन का पर्व धूमधाम से मनाने की तैयारी कर रही हैं।

महिलाओं का कहना है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रक्षाबंधन से पहले महतारी वंदन की राशि देकर बहनों की खुशियों को दोगुना कर दिया है। उनके लिए यह केवल एक हजार रुपये की मासिक सहायता नहीं, बल्कि अपने छोटे-बड़े फैसले स्वयं लेने का भरोसा और सम्मान का अहसास है।

हर महीने की सहायता बनी परिवारों का सहारा

सूरजपुर जिले की तेज कुमारी, मंजू रजवाड़े, पुनिया प्रजापति, शहनाज बेगम, श्रीमती गणेश्वरी प्रजापति, मेनका रजवाड़े और लता केंवट जैसी महिलाओं ने बताया कि महतारी वंदन की राशि से वे बच्चों की पढ़ाई, कॉपी-किताब, पौष्टिक भोजन और दैनिक जरूरतों को पूरा कर पा रही हैं। रक्षाबंधन के अवसर पर भी यह राशि उनके लिए उपयोगी साबित हो रही है।

बचत से स्वरोजगार तक की नई राह

महतारी वंदन योजना का सकारात्मक प्रभाव केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है। अनेक महिलाओं ने नियमित मिलने वाली राशि को बचाकर स्वरोजगार की नींव रखी है।
मुंगेली विकासखंड के ग्राम घुठेरा की अनीता गंधर्व ने महतारी वंदन से मिली राशि को बचाकर मुंगेली के पुराना बस स्टैंड क्षेत्र में मनिहारी एवं सिलाई दुकान शुरू की। आज वे प्रतिदिन 500 से 1,000 रुपये तक की आय अर्जित कर रही हैं और बच्चों की पढ़ाई तथा घरेलू खर्च में सहयोग कर रही हैं।

जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम सरखों की श्रीमती शबीना बेगम ने योजना की राशि से अपनी चूड़ी दुकान में नया सामान और चूडि़यों की विविधता बढ़ाई। इससे ग्राहकों की संख्या और आमदनी दोनों में वृद्धि हुई है।

मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की गायत्री श्रीवास्तव ने राशि बचाकर सेकेंड हैंड सिलाई-पिको मशीन खरीदी। अब वे सिलाई के साथ पिको का काम भी कर आय बढ़ा रही हैं। रायगढ़ की राशी कँवर ने भी महतारी वंदन की किस्तों से सिलाई मशीन खरीदी, जो उनके लिए आजीविका और आत्मनिर्भरता का साधन बन गई है।

भविष्य की सुरक्षा का भी भरोसा

कोरबा की शकुंतला कुर्रे महतारी वंदन की राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य के साथ अपनी बेटी ध्रीयांशी के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में बचत करने में कर रही हैं। सक्ती जिले की हेमंत बंजारे, मोहला जिले की देवकी निषाद और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर की अनीता गुप्ता भी योजना की राशि से घरेलू जरूरतों और छोटे व्यवसाय को मजबूती दे रही हैं।

30 किस्तों ने बनाया भरोसे का मजबूत आधार

1 मार्च 2024 से शुरू हुई महतारी वंदन योजना की 30 किस्तों की निरंतरता ने महिलाओं को नियमित आर्थिक संबल दिया है। इस भरोसे के कारण महिलाएं अपनी जरूरतों के अनुसार खर्च, बचत और निवेश की योजना बना पा रही हैं। कई महिलाएं सिलाई, मनिहारी, चूड़ी व्यवसाय और अन्य छोटे स्वरोजगार से जुड़कर अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रही हैं।

महतारी वंदन से खुशहाल परिवार, सशक्त मातृशक्ति

महतारी वंदन योजना ने महिलाओं की घरेलू निर्णयों में भागीदारी को मजबूत करने के साथ बच्चों की शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य पर खर्च को बढ़ावा दिया है। महिलाओं के हाथ में नियमित आर्थिक सहायता पहुंचने से परिवारों में आर्थिक स्थिरता और आत्मविश्वास बढ़ा है।

रक्षाबंधन से पहले मिली महतारी वंदन की 30वीं किस्त इस बदलाव की एक सुखद तस्वीर पेश कर रही है। प्रदेश की बहनें इस राशि से राखी और मिठाई खरीदने के साथ अपने परिवार की जरूरतें पूरी करते हुए भाई-बहन के स्नेह का पर्व पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाएंगी।

महतारी वंदन योजना की यह कहानी केवल आर्थिक सहायता की कहानी नहीं है। यह उस विश्वास की कहानी है, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति को सम्मान, स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता की नई ताकत मिल रही है। रक्षाबंधन से पहले बहनों के खातों में पहुंची राशि उनके लिए ’‘विष्णु भैया का उपहार’’ बनकर पर्व की खुशियों को और खास बना रही है।

छत्तीसगढ़ की बहनों की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री साय

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रायपुर। रक्षाबंधन के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले के गृहग्राम बगिया से जशपुर एक्सप्रेस का शुभारंभ किया और बिहान योजना से जुड़ी 12 दीदियों को ई-रिक्शा उपहार में दिए। उन्होंने स्वयं महिला संचालक गिलसोनिका पांडे के ई-रिक्शा में बैठकर बगिया निवास परिसर की यात्रा भी की।


मुख्यमंत्री ने कहा कि यह ई-रिक्शा पर्यावरण के अनुकूल और कम लागत वाला है, जो महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाते हुए परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करेगा। उन्होंने कहा, "हमारी सरकार छत्तीसगढ़ की बहनों की सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।"


साय ने बताया कि—

  • प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत 18 लाख आवास का कार्य तेजी से पूरा किया जा रहा है।

  • महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख बहनों को हर माह 1000 रुपये दिए जा रहे हैं।

  • तेंदूपत्ता का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 5500 रुपये प्रति मानक बोरा किया गया है।

  • गांवों में बैंकिंग सुविधा के लिए अटल डिजिटल सुविधा केंद्र पंचायत दिवस पर शुरू होंगे।

  • रजिस्ट्री प्रक्रिया को पारदर्शी व डिजिटल बनाया गया है।

  • मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना से दूरस्थ क्षेत्रों में बस सेवाएं शुरू हुई हैं।

  • जिले में मेडिकल कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज और फिजियोथेरेपी केंद्र खोले जाएंगे।

ई-रिक्शा का संचालन जिले के विभिन्न रूट्स पर महिला चालक करेंगी, जिनमें फरसाबहार, दुलदुला और कांसाबेल ब्लॉकों के गांव शामिल हैं।

कार्यक्रम में कमिश्नर नरेंद्र दुग्गा, आईजी दीपक कुमार झा, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार समेत कई अधिकारी उपस्थित रहे।

रक्षाबंधन पर पत्रकार बहनों ने मुख्यमंत्री साय को बांधी राखी, जनसेवा में नई ऊर्जा की कामना

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रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रक्षाबंधन के पावन पर्व पर प्रदेश की सभी बहनों को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और अटूट संबंध का प्रतीक है। यह पर्व हमें रिश्तों की पवित्रता और एक-दूसरे के प्रति सम्मान एवं सुरक्षा के संकल्प की याद दिलाता है।


इस अवसर पर पुलिस लाइन हेलीपैड में उपस्थित पत्रकारिता जगत से जुड़ी बहनों ने मुख्यमंत्री साय की कलाई पर राखी बाँधकर उनके दीर्घायु की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने सभी पत्रकार बहनों के स्नेह, आशीर्वाद और विश्वास के लिए आभार व्यक्त किया और उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएँ दीं।

मुख्यमंत्री साय ने सभी बहनों के सुखमय, स्वस्थ और समृद्ध जीवन की मंगलकामनाएँ व्यक्त करते हुए कहा कि यह पवित्र बंधन उन्हें अपनी जिम्मेदारियों को और अधिक निष्ठा एवं समर्पण के साथ निभाने की शक्ति प्रदान करेगा।

रक्षाबंधन 2025: जानें क्या करें और क्या न करें

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 Raksha Bandhan 2025 : रक्षाबंधन सिर्फ एक धागा बांधने की परंपरा नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने वाला पर्व है। यह प्रेम, भरोसे और हर परिस्थिति में साथ निभाने के संकल्प का प्रतीक है। इस साल रक्षाबंधन का पर्व 9 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करने से भाई की रक्षा का कवच मजबूत होता है, जबकि कुछ कार्यों से बचना शुभ माना जाता है।


क्या करें:

  • सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
  • शुभ मुहूर्त में राखी बांधें और भाई की रक्षा का संकल्प लें।
  • राखी को गंगाजल या गाय के घी से शुद्ध करें और यह मंत्र बोलें:
    "येन बद्धो बलि राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वां प्रतिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥"
  • पूजा की थाली में अक्षत, रोली, चंदन, दूर्वा, फूल, दीपक और मिठाई जरूर रखें।
  • अवसर पर गौसेवा, अन्नदान या ब्राह्मण भोजन कराना शुभ माना जाता है।

क्या न करें:

  • काले रंग के कपड़े न पहनें।
  • खट्टा या कड़वा भोजन न करें, विशेषकर राखी बांधने से पहले मिठाई खिलाना शुभ है।
  • भाई-बहन के बीच बहस या झगड़ा न हो।
  • बहन भाई के घर खाली हाथ न जाए और भाई भी बहन को खाली हाथ न लौटाए।

95 साल बाद रक्षाबंधन पर बन रहा दुर्लभ महासंयोग, इस शुभ मुहूर्त में बांधें राखी

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 रायपुर। रक्षाबंधन का पर्व इस साल बेहद खास होने वाला है। भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक यह त्योहार हर साल सावन पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनके लंबी उम्र व सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। बदले में भाई उन्हें उपहार देकर जीवनभर रक्षा करने का वचन देते हैं।


इस साल रक्षाबंधन 9 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा, और इस दिन एक ऐसा दुर्लभ महासंयोग बन रहा है जो 95 साल पहले 1930 में बना था। इस विशेष संयोग में पूर्णिमा तिथि, नक्षत्र और योग बिल्कुल उसी तरह से बन रहे हैं, जैसे 1930 में रक्षाबंधन के दिन थे।

रक्षाबंधन 2025: पंचांग और तिथि जानकारी

  • पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 8 अगस्त, दोपहर 2:12 बजे
  • पूर्णिमा तिथि समाप्त: 9 अगस्त, दोपहर 1:24 बजे
  • भद्रा काल: 8 अगस्त दोपहर 2:12 बजे से 9 अगस्त रात 1:52 बजे तक
  • भद्रा काल को अशुभ माना जाता है, इस कारण राखी 9 अगस्त को बांधी जाएगी।

शुभ योग और नक्षत्र का संयोग

  • सौभाग्य योग: 9 अगस्त सुबह से 10 अगस्त रात 2:15 बजे तक
  • सर्वार्थ सिद्धि योग: 9 अगस्त सुबह 5:47 बजे से दोपहर 2:23 बजे तक
  • श्रवण नक्षत्र: दोपहर 2:23 बजे तक
  • करण: बव और बालव करण का विशेष संयोग

इन शुभ योगों में अगर बहनें लक्ष्मी-नारायण की पूजा कर राखी बांधें तो दोगुना शुभ फल प्राप्त होता है।

1930 में भी ऐसा ही बना था संयोग

वैदिक पंचांग के अनुसार, 1930 में रक्षाबंधन 9 अगस्त को शनिवार के दिन मनाया गया था। उस दिन भी पूर्णिमा तिथि दोपहर 2:07 बजे से शुरू हुई थी और सौभाग्य योग, श्रवण नक्षत्र, बव और बालव करण का संयोग बना था। 2025 में इन सभी का दोबारा मिलना 95 साल बाद का दुर्लभ अवसर है।

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

9 अगस्त को सुबह 5:21 बजे से दोपहर 1:24 बजे तक

इसी अवधि में राखी बांधना अत्यंत शुभ और फलदायी रहेगा।

निष्कर्ष

रक्षाबंधन 2025 सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि एक अत्यंत दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग का अवसर है। इस शुभ मुहूर्त और योगों में बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधेंगी, तो न केवल पारिवारिक प्रेम और आशीर्वाद की ऊर्जा बढ़ेगी, बल्कि आध्यात्मिक रूप से भी यह समय अत्यंत लाभकारी रहेगा।

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