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महासमुंद पुलिस का ‘महाप्रहार’: 10 घंटे में 5 छापे, 4.61 करोड़ की ड्रग्स जब्त, अंतरराज्यीय नेटवर्क ध्वस्त

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 महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ पुलिस ने अब तक की सबसे बड़ी और सख्त कार्रवाई करते हुए महज 10 घंटे के भीतर तस्करी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया। जिला पुलिस कप्तान के निर्देश पर चलाए गए इस मेगा ‘सर्च एंड सीज’ ऑपरेशन में 5 अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर अंतरराज्यीय सिंडिकेट को ध्वस्त किया गया।


कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 685 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाला गांजा और 700 प्रतिबंधित नशीली टैबलेट बरामद की। जब्त किए गए मादक पदार्थों और तस्करी में इस्तेमाल वाहनों की कुल कीमत 4 करोड़ 61 लाख रुपये से अधिक आंकी गई है।

10 घंटे में बड़ा ऑपरेशन

पुलिस को सटीक मुखबिर से सूचना मिली थी कि उड़ीसा की ओर से नशे की बड़ी खेप छत्तीसगढ़ समेत अन्य राज्यों में खपाने की तैयारी है। सूचना मिलते ही जिले की सीमाओं पर नाकेबंदी कर सघन जांच अभियान शुरू किया गया, जिसके तहत लगातार 10 घंटे तक कार्रवाई जारी रही।

5 जगह छापेमारी, बड़ी बरामदगी

जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में दबिश देकर पुलिस ने कुल 685 किलो गांजा जब्त किया, जिसकी बाजार कीमत करीब 3.42 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसके साथ ही 700 नशीली टैबलेट भी बरामद की गईं।

लग्जरी गाड़ियों से हो रही थी तस्करी

तस्कर नशे की खेप को सुरक्षित पहुंचाने के लिए हाई-स्पीड और लग्जरी वाहनों का इस्तेमाल कर रहे थे। पुलिस ने इन वाहनों को भी जब्त कर लिया है। वाहनों समेत कुल जब्ती का मूल्य 4.61 करोड़ रुपये आंका गया है।

अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा

गिरफ्तार आरोपी उड़ीसा, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, ये सभी एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क का हिस्सा हैं। आरोपियों के मोबाइल और दस्तावेजों के आधार पर उनके ‘बैकवर्ड’ और ‘फॉरवर्ड’ लिंक की जांच की जा रही है।

उड़ीसा बॉर्डर पर सख्ती

इस कार्रवाई के बाद उड़ीसा सीमा पर चौकसी और बढ़ा दी गई है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े सफेदपोश चेहरों पर भी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस का सख्त संदेश

पुलिस प्रशासन ने साफ कहा है कि नशे के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति जारी रहेगी। नशे का कारोबार करने वालों के लिए अब जिले में कोई जगह नहीं है—उनका अंजाम सिर्फ जेल होगा।

न्यायालयीन अवमानना के घेरे में फंसे महासमुंद एसपी को हाई कोर्ट ने जारी किया नोटिस

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 बिलासपुर। महासमुंद जिले के एसपी आशुतोष सिंह कानूनी विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं। हाई कोर्ट ने न्यायालयीन आदेश की अवहेलना करने के आरोप को लेकर दायर याचिका की सुनवाई के बाद कोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। रायपुर के गुढ़ियारी, पार्वती नगर निवासी नरेन्द्र यादव से जुड़ा है, जो पहले महासमुंद पुलिस में आरक्षक के पद पर कार्यरत थे। लेकिन विभागीय कार्रवाई के चलते उन्हें सेवा से पृथक कर दिया गया था। इस कार्रवाई के खिलाफ नरेन्द्र यादव ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए 21 फरवरी 2024 को हाई कोर्ट ने राज्य शासन के पृथक करने के आदेश को निरस्त कर दिया और यादव को दोबारा सेवा में बहाल करने का आदेश दिया।


लेकिन हाई कोर्ट द्वारा तय 90 दिनों की समय-सीमा बीत जाने के बाद भी एसपी महासमुंद ने नरेन्द्र यादव को पुनः पदस्थ नहीं किया। इसे न्यायालय के आदेश की अवहेलना मानते हुए यादव ने अपने अधिवक्ताओं अभिषेक पांडेय और स्वाति कुमारी के माध्यम से अवमानना याचिका दायर की।

इस मामले की सुनवाई जस्टिस रवींद्र अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई। याचिकाकर्ता केअधिवक्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि छत्तीसगढ़ में कई आइएएस और आइपीएस अधिकारी हाई कोर्ट के आदेशों की अनदेखी कर रहे हैं और पीड़ित पक्षों को बार-बार प्रताड़ित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता को नियुक्ति न देना अदालत की अवमानना है।

अधिवक्ता ने न्यायालयीन अवमान अधिनियम, 1971 की धारा 12 का हवाला देते हुए कहा कि न्यायालय के आदेश की अवहेलना करने पर दोषी अधिकारी को छह माह का कारावास, 2000 रुपये जुर्माना या दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं। उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि एसपी महासमुंद को इस प्रावधान के तहत दंडित किया जाए। हाई कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए एसपी आशुतोष सिंह को अवमानना नोटिस जारी जवाब पेश करने का निर्देश दिया है।

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