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नक्सलियों की साजिश में 4 जवान शहीद, गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई

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 कांकेर छत्तीसगढ़ के कांकेर-नारायणपुर सीमा पर नक्सल विरोधी अभियान के दौरान बड़ा हादसा हो गया। ज़िला रिज़र्व गार्ड (DRG) के चार जवान IED विस्फोट में शहीद हो गए। रविवार को शहीदों को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।


जानकारी के अनुसार, 2 मई को छोटेबेठिया थाना क्षेत्र में DRG की टीम सर्चिंग अभियान पर निकली थी। इसी दौरान नक्सलियों द्वारा लगाए गए IED का पता चला, जिसे निष्क्रिय करने की कार्रवाई की जा रही थी।

IED निष्क्रिय करते समय हुआ धमाका

IED को सुरक्षित तरीके से हटाने के दौरान अचानक विस्फोट हो गया। इस घटना में इंस्पेक्टर सुखराम वट्टी, कांस्टेबल कृष्णा कोमरा और कांस्टेबल संजय गढपाले मौके पर ही शहीद हो गए। वहीं गंभीर रूप से घायल कांस्टेबल परमानंद कोर्राम को एयरलिफ्ट कर रायपुर लाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई

रविवार को शहीद जवानों के पार्थिव शरीर नारायणपुर पुलिस लाइन में लाए गए, जहां उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे और नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद पार्थिव शरीरों को उनके गृह ग्रामों के लिए रवाना किया गया।

इस घटना के बाद पूरे बस्तर क्षेत्र में शोक की लहर है। जवानों के बलिदान ने एक बार फिर सुरक्षा बलों की बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा को उजागर किया है।

 

कांकेर में एनकाउंटर: 5 लाख की इनामी महिला नक्सली एरिया कमांडर रूपी ढेर

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 रायपुर छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। छोटे बेटिया थाना क्षेत्र के जंगलों में हुई मुठभेड़ में 5 लाख रुपये की इनामी महिला नक्सली एरिया कमांडर रूपी को मार गिराया गया। मुठभेड़ के बाद मौके से उसका शव और हथियार बरामद कर लिए गए हैं।


पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मुखबिर से मिली पुख्ता सूचना के आधार पर सुरक्षाबलों ने सोमवार सुबह जंगल में सर्च ऑपरेशन शुरू किया था। इसी दौरान नक्सलियों से आमना-सामना हो गया, जिसके बाद दोनों ओर से फायरिंग शुरू हो गई। जवाबी कार्रवाई में एरिया कमांडर रूपी मारी गई।

मौके से हथियार और नक्सली सामग्री बरामद

मुठभेड़ के बाद चलाए गए सर्च ऑपरेशन में रूपी का शव बरामद किया गया। उसके पास से आधुनिक हथियारों के साथ नक्सली सामग्री भी मिली है। फिलहाल इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी है, ताकि अन्य नक्सलियों की मौजूदगी का पता लगाया जा सके।

सरेंडर से किया था इंकार

बताया जा रहा है कि राज्य में नक्सलवाद खत्म करने के लिए 31 मार्च 2026 तक की समयसीमा तय की गई थी। इस दौरान बस्तर क्षेत्र में कई नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में वापसी की, लेकिन रूपी ने सरेंडर करने से इंकार कर दिया था। इसके बाद से सुरक्षाबल उसकी तलाश में जुटे हुए थे।

अभियान को मिली बड़ी कामयाबी

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि रूपी के मारे जाने से क्षेत्र में सक्रिय नक्सली नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। इससे नक्सल विरोधी अभियान को और मजबूती मिलने के साथ ही सुरक्षाबलों का मनोबल भी बढ़ा है।

नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी सफलता: जंगल से हथियारों का जखीरा बरामद

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 मोहला-मानपुर। छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर जिले में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। डीआरजी और आईटीबीपी के जवानों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए जंगल से माओवादियों का हथियारों से भरा डंप बरामद किया है।


पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह के नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने सीमावर्ती क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन चलाया। विश्वसनीय सूचना के आधार पर कांकेर जिले के उयकाटोला और कोवाचीटोला तथा मानपुर ब्लॉक के कलवर गांव के बीच जंगल में छिपाकर रखा गया यह डंप बरामद किया गया।

बरामद हथियारों में एक AK-47 रायफल, एक इंसास रायफल, कारतूस और अन्य नक्सली सामग्री शामिल है। सुरक्षा बलों ने सभी सामान को अपने कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, माओवादी इस डंप का उपयोग बड़ी वारदातों को अंजाम देने के लिए कर सकते थे, लेकिन समय रहते इसे बरामद कर लिया गया।

गौरतलब है कि इसी उयकाटोला क्षेत्र में कुछ समय पहले आरकेबी डिवीजन के पांच माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। लगातार चल रहे अभियानों से नक्सलियों पर दबाव बढ़ रहा है और क्षेत्र में सुरक्षा बलों को लगातार सफलता मिल रही है।

नक्सल विरोधी अभियान में IED ब्लास्ट, कोबरा के दो जवान घायल

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सल विरोधी अभियान के दौरान आईईडी विस्फोट की घटना सामने आई है। थाना फरसेगढ़ क्षेत्र के पिल्लूर–कांडलापरती इलाके में हुए इस विस्फोट में कोबरा बटालियन के दो जवान मामूली रूप से घायल हो गए।


जानकारी के अनुसार, डीआरजी, एसटीएफ और कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम नक्सल विरोधी सर्च ऑपरेशन पर रवाना हुई थी। अभियान के दौरान जैसे ही टीम पिल्लूर–कांडलापरती क्षेत्र में पहुंची, नक्सलियों द्वारा पहले से लगाए गए आईईडी में विस्फोट हो गया।

विस्फोट की चपेट में आने से कोबरा बटालियन के दो जवान घायल हो गए। घटना के तुरंत बाद दोनों को प्राथमिक उपचार दिया गया और बेहतर इलाज के लिए रायपुर रेफर किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक दोनों जवान खतरे से बाहर हैं और उनकी हालत स्थिर बनी हुई है।

घटना के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया है। नक्सलियों की मौजूदगी और उनके मूवमेंट को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। सुरक्षा बल क्षेत्र में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं।

‘पूना मारगेम - पुनर्वास से पुनर्जीवन’: दण्डकारण्य के 210 माओवादी कैडर लौटे समाज की मुख्यधारा में

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 रायपुर : राज्य शासन की व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति और शांति, संवाद एवं विकास पर केंद्रित सतत प्रयासों के परिणामस्वरूप बस्तर संभाग में आज नक्सल विरोधी मुहिम को ऐतिहासिक सफलता मिली है। ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ कार्यक्रम के अंतर्गत दण्डकारण्य क्षेत्र के 210 माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।


यह आत्मसमर्पण विश्वास, सुरक्षा और विकास की दिशा में बस्तर की नई सुबह का संकेत है। लंबे समय से नक्सली गतिविधियों से प्रभावित अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर क्षेत्र में यह ऐतिहासिक घटनाक्रम नक्सल उन्मूलन अभियान के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में दर्ज होगा।


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य शासन द्वारा अपनाई गई व्यापक नक्सल उन्मूलन नीति ने क्षेत्र में स्थायी शांति की मजबूत नींव रखी है। पुलिस, सुरक्षा बलों, स्थानीय प्रशासन, सामाजिक संगठनों और सजग नागरिकों के समन्वित प्रयासों से हिंसा की संस्कृति को संवाद और विकास की संस्कृति में परिवर्तित किया जा सका है।


यह पहली बार है जब नक्सल विरोधी अभियान के इतिहास में इतनी बड़ी संख्या में वरिष्ठ माओवादी कैडरों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में एक सेंट्रल कमेटी सदस्य, चार डीकेएसजेडसी सदस्य, 21 डिविजनल कमेटी सदस्य सहित अनेक वरिष्ठ माओवादी नेता शामिल हैं। इन कैडरों ने कुल 153 अत्याधुनिक हथियार—जिनमें AK-47, SLR, INSAS रायफल और LMG शामिल हैं—समर्पित किए हैं। यह केवल हथियारों का समर्पण नहीं, बल्कि हिंसा और भय के युग का प्रतीकात्मक अंत है—एक ऐसी घोषणा, जो बस्तर में शांति और भरोसे के युग की शुरुआत का संकेत देती है।


मुख्यधारा में लौटने वाले प्रमुख माओवादी नेताओं में सीसीएम रूपेश उर्फ सतीश, डीकेएसजेडसी सदस्य भास्कर उर्फ राजमन मांडवी, रनीता, राजू सलाम, धन्नू वेत्ती उर्फ संतू, आरसीएम रतन एलम सहित कई वांछित और इनामी कैडर शामिल हैं। इन सभी ने संविधान पर आस्था व्यक्त करते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था में सम्मानजनक जीवन जीने का संकल्प लिया।

यह ऐतिहासिक आयोजन जगदलपुर पुलिस लाइन परिसर में हुआ, जहाँ आत्मसमर्पित कैडरों का स्वागत पारंपरिक मांझी-चालकी विधि से किया गया। उन्हें संविधान की प्रति और शांति, प्रेम एवं नए जीवन का प्रतीक लाल गुलाब भेंट कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) श्री अरुण देव गौतम ने कहा कि “पूना मारगेम केवल नक्सलवाद से दूरी बनाने का प्रयास नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा देने का अवसर है। जो आज लौटे हैं, वे बस्तर में शांति, विकास और विश्वास के दूत बनेंगे।” उन्होंने आत्मसमर्पित कैडरों से समाज निर्माण में अपनी ऊर्जा लगाने का आह्वान किया।

इस अवसर पर एडीजी (नक्सल ऑपरेशन्स) विवेकानंद सिन्हा, सीआरपीएफ बस्तर रेंज प्रभारी, कमिश्नर डोमन सिंह, बस्तर रेंज आईजी सुंदरराज पी., कलेक्टर हरिस एस., बस्तर संभाग के सभी पुलिस अधीक्षक, वरिष्ठ अधिकारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

कार्यक्रम के दौरान पुलिस विभाग द्वारा आत्मसमर्पित माओवादियों को पुनर्वास सहायता राशि, आवास और आजीविका योजनाओं की जानकारी दी गई। राज्य शासन इन युवाओं को स्वरोजगार, कौशल विकास और शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि वे आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन जी सकें।

मांझी-चालकी प्रतिनिधियों ने कहा कि बस्तर की परंपरा सदैव प्रेम, सहअस्तित्व और शांति का संदेश देती रही है। जो साथी अब लौटे हैं, वे इस परंपरा को नई शक्ति देंगे और समाज में विश्वास की नींव को और मजबूत करेंगे।

कार्यक्रम के अंत में सभी आत्मसमर्पित कैडरों ने संविधान की शपथ लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की। उन्होंने प्रतिज्ञा ली कि वे अब हिंसा के बजाय विकास और राष्ट्रनिर्माण की दिशा में योगदान देंगे।

‘वंदे मातरम्’ की गूंज के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह क्षण केवल 210 माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण का नहीं, बल्कि बस्तर में विश्वास, विकास और शांति के नए युग की शुरुआत का प्रतीक बन गया।

नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता, 5 महिला माओवादियों सहित 12 ने हथियार डाले

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नारायणपुर छत्तीसगढ़ में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान को एक और बड़ी सफलता मिली है। नारायणपुर जिले में 5 महिलाओं सहित कुल 12 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।


18 लाख का इनामी गिरोह किया गया सरेंडर

सरेंडर करने वाले इन माओवादियों पर कुल ₹18 लाख का इनाम घोषित था। अधिकारियों का कहना है कि अबूझमाड़ क्षेत्र में नए कैंपों की स्थापना और सुरक्षा बलों की लगातार दबिश ने संगठन को कमजोर कर दिया है। यही कारण है कि माओवादी आत्मसमर्पण के लिए मजबूर हो रहे हैं।

पुलिस-बलों की मौजूदगी में हुआ आत्मसमर्पण

आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ BSF और ITBP के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यह घटना नक्सल मोर्चे पर सुरक्षा बलों की बढ़त और माओवादी संगठन की कमजोरी का स्पष्ट संकेत है।

बीजापुर: नक्सली IED धमाका, DRG का 1 जवान शहीद, 3 घायल

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 बीजापुर। जिला बीजापुर के नेशनल पार्क क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियान पर निकली डीआरजी (DRG) टीम नक्सलियों के आईईडी (IED) विस्फोट की चपेट में आ गई।


यह हादसा आज 18 अगस्त 2025 की सुबह सर्चिंग के दौरान हुआ। विस्फोट में जवान दिनेश नाग शहीद हो गए, जबकि 3 अन्य जवान घायल हुए हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, घायलों की स्थिति खतरे से बाहर है। उन्हें प्राथमिक उपचार देने के बाद बेहतर इलाज के लिए एयरलिफ्ट कर अस्पताल भेजा गया है।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अभियान समाप्त होने के बाद पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी।

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