Media24Media.com: US-Iran War: ईरान के केशम द्वीप पर अमेरिका का हमला, रडार और मिसाइल लॉन्चर बने निशाना; मिडटर्म चुनाव से पहले बढ़ा तनाव

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US-Iran War: ईरान के केशम द्वीप पर अमेरिका का हमला, रडार और मिसाइल लॉन्चर बने निशाना; मिडटर्म चुनाव से पहले बढ़ा तनाव

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 वॉशिंगटन/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष एक बार फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केशम द्वीप को निशाना बनाया है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में इस हमले की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी कार्रवाई में रडार सिस्टम और मिसाइल लॉन्चर जैसे सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।


यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव हो रहे हैं और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ बातचीत के जरिए समझौते की संभावनाएं भी तलाश रहा है। हमले की खबर ने पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है।

केशम द्वीप पर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई, क्या थे निशाने?

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना ने केशम द्वीप पर सीमित स्तर की सैन्य कार्रवाई की है। इस दौरान ईरान के रडार सिस्टम और मिसाइल लॉन्चरों को निशाना बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि अमेरिका पिछले कुछ सप्ताह से ईरान के खिलाफ छोटी-छोटी सैन्य कार्रवाइयां कर रहा था। इन अभियानों को सार्वजनिक रूप से बड़े सैन्य अभियान के तौर पर पेश नहीं किया गया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन कार्रवाइयों का उद्देश्य अमेरिकी सैन्य बलों और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को संभावित खतरों से सुरक्षित रखना था।

हालांकि, केशम द्वीप पर हुए ताजा हमले में कितना नुकसान हुआ है और कितने सैन्य ठिकाने प्रभावित हुए हैं, इसकी विस्तृत जानकारी अभी सामने नहीं आई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से भी तत्काल कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई थी।

मिडटर्म चुनाव के बीच ट्रंप का ईरान पर दबाव

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के बीच ईरान पर हुई सैन्य कार्रवाई को लेकर ट्रंप प्रशासन की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं। पिछले दिनों ऐसी खबरें आई थीं कि अमेरिका और इजरायल ईरान के खिलाफ नए सैन्य अभियान की तैयारी कर रहे हैं।

हालांकि, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 नवंबर को एक सवाल के जवाब में कहा था कि वह मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर दोबारा हमले शुरू करने की योजना नहीं बना रहे हैं। उन्होंने ईरान के साथ समझौते की संभावना भी जताई थी।

ऐसे में केशम द्वीप पर अमेरिकी हमले की खबर ने वॉशिंगटन की सैन्य और कूटनीतिक रणनीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

क्यों महत्वपूर्ण है केशम द्वीप?

ईरान का केशम द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित है। यह इलाका वैश्विक समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।

इसी रणनीतिक महत्व के कारण केशम द्वीप पर होने वाली किसी भी सैन्य गतिविधि को अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

सीजफायर और शांति वार्ता पर फिर संकट के बादल

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए कूटनीतिक प्रयास भी किए जा रहे हैं। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिशें हुई हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी ईरान के साथ बातचीत में सकारात्मक प्रगति की उम्मीद जताई है।

दूसरी ओर, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ओर से भी ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई करने का दबाव बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं।

ऐसे माहौल में केशम द्वीप पर अमेरिकी हमले की खबर से क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका है। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर किसी नए व्यापक सैन्य अभियान या औपचारिक सीजफायर टूटने की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी है। यदि दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव बढ़ता है, तो इसका असर केवल प

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