Media24Media.com: पटवारी आंदोलन पर सरकार की सख्ती: 150 से अधिक निलंबन की खबर, 1,000 से ज्यादा को ब्रेक-इन-सर्विस नोटिस; धमतरी में भी दो पटवारी निलंबित

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पटवारी आंदोलन पर सरकार की सख्ती: 150 से अधिक निलंबन की खबर, 1,000 से ज्यादा को ब्रेक-इन-सर्विस नोटिस; धमतरी में भी दो पटवारी निलंबित

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रायपुर- छत्तीसगढ़ में राजस्व पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को लेकर सरकार और पटवारी संघ के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 13 अक्टूबर 2026 से प्रदेशभर के पटवारी आंदोलन कर रहे हैं। हड़ताल के कारण राजस्व विभाग के कई महत्वपूर्ण काम प्रभावित हो रहे हैं। वहीं, प्रशासन ने आंदोलन में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ नोटिस, निलंबन और अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है।

5 नवंबर को प्रकाशित द रूरल प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में 150 से अधिक पटवारियों को निलंबित किया गया है, जबकि 1,000 से अधिक पटवारियों को ब्रेक-इन-सर्विस का नोटिस जारी किया गया है। हालांकि, उसी दिन विस्तारित न्यूज की रिपोर्ट में अब तक 123 पटवारियों पर निलंबन और तबादले की कार्रवाई का आंकड़ा दिया गया है। इसलिए कार्रवाई की कुल संख्या को अलग-अलग रिपोर्टों के अनुसार समझना जरूरी है।

13 अक्टूबर से जारी है अनिश्चितकालीन हड़ताल

राजस्व पटवारी संघ के बैनर तले प्रदेश के पटवारी 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। पटवारियों का कहना है कि लंबे समय से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा है। इसी वजह से उन्होंने आंदोलन का रास्ता अपनाया है।

हड़ताल के चलते किसानों और आम नागरिकों को राजस्व कार्यालयों से जुड़े कई कामों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धान खरीदी का सीजन नजदीक होने के कारण यह आंदोलन और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

सरकार ने दिखाई सख्ती, नोटिस और निलंबन की कार्रवाई

द रूरल प्रेस की 5 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, बिलासपुर संभाग के 259 और सरगुजा संभाग के 819 पटवारियों सहित प्रदेशभर में 1,000 से अधिक कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए हैं।

नोटिस में निर्धारित समय के भीतर काम पर लौटने और अनुपस्थिति को लेकर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसा नहीं करने पर अनुपस्थिति को सेवा में व्यवधान मानते हुए एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

धमतरी में दो पटवारी निलंबित, 148 कर्मचारी हड़ताल पर

धमतरी जिले में भी पटवारियों का आंदोलन लगातार जारी है। 2 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में कुल 168 पटवारी कार्यरत हैं, जिनमें से लगभग 148 पटवारी हड़ताल में शामिल हैं। शेष 20 प्रशिक्षु पटवारी आंदोलन में शामिल नहीं बताए गए हैं।

प्रशासन ने जिले में दो पटवारियों को निलंबित किया है:

  1. चिम्मन लाल ध्रुव – हल्का पांवद्वार, नगरी क्षेत्र।

  2. चैतन्य नेताम – मुख्यालय बेलोरा, मगरलोड क्षेत्र।

रिपोर्ट के अनुसार, चिम्मन लाल ध्रुव को समीक्षा बैठक में अनुपस्थित रहने पर पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। जवाब नहीं मिलने के बाद निलंबन की कार्रवाई की गई। वहीं, चैतन्य नेताम के निलंबन का आदेश मगरलोड तहसीलदार की ओर से जारी किया गया।

इसके अलावा धमतरी, नगरी, मगरलोड, भखारा और कुरुद क्षेत्र के पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर 48 घंटे के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए गए थे। 4 नवंबर को अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, धमतरी के गांधी मैदान में आंदोलन कर रहे पटवारियों ने प्रशासनिक नोटिस की प्रतियां जलाकर विरोध जताया।

आखिर क्यों नाराज हैं पटवारी?

पटवारी संघ की नाराजगी के पीछे कई प्रमुख मांगें हैं। इनमें सबसे प्रमुख है PV ऐप यानी Physical Verification App से जुड़ी तकनीकी और व्यावहारिक समस्याएं।

पटवारियों की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • PV ऐप में सुधार: ऐप की तकनीकी खामियां दूर की जाएं और इसकी व्यावहारिक समस्याओं का समाधान किया जाए।

  • वेतन विसंगति दूर करना: लंबे समय से लंबित वेतन संबंधी विसंगतियों का निराकरण किया जाए।

  • पदोन्नति का लाभ: राजस्व निरीक्षक (RI) पद पर पदोन्नति सहित लंबित पदोन्नति प्रक्रिया पूरी की जाए।

  • अतिरिक्त कार्यभार में राहत: डिजिटल सर्वे और अन्य ऑनलाइन कार्यों के दबाव को कम किया जाए।

  • कार्रवाई वापस लेना: आंदोलन के दौरान जारी निलंबन, नोटिस और तबादले के आदेश वापस लिए जाएं।

PV ऐप को लेकर क्या है विवाद?

पटवारियों का आरोप है कि गांवों और खेतों में नेटवर्क की समस्या के कारण PV ऐप ठीक से काम नहीं करता। कई बार सर्वर डाउन होने से डेटा अपलोड करने में काफी समय लगता है।

उनका यह भी कहना है कि बिना पर्याप्त प्रशिक्षण के पॉलीगॉन मैपिंग जैसे तकनीकी काम की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा डिजिटल क्रॉप सर्वे, एग्रीस्टैक, किसान पंजीयन और स्वामित्व योजना जैसे कार्यों का अतिरिक्त बोझ भी पटवारियों पर है।

पटवारियों का कहना है कि वे काम करने के विरोध में नहीं हैं, लेकिन तकनीकी सुविधाएं और पर्याप्त प्रशिक्षण उपलब्ध कराए बिना काम का दबाव बढ़ाना व्यावहारिक नहीं है। ये समस्याएं पटवारी संघ की ओर से उठाई गई हैं।

हड़ताल से किसानों को हो रही परेशानी

पटवारियों की हड़ताल का असर अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है। राजस्व विभाग से जुड़े कई काम प्रभावित होने की खबर है।

प्रमुख रूप से प्रभावित कार्य:

  1. डिजिटल क्रॉप सर्वे और गिरदावरी।

  2. धान खरीदी से पहले फसल संबंधी सत्यापन।

  3. किसान पंजीयन और किसान अभिलेख सत्यापन।

  4. भूमि नामांतरण और बंटवारा।

  5. सीमांकन और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े कार्य।

  6. विभिन्न प्रमाणपत्रों के लिए आवश्यक सत्यापन।

खासकर धान खरीदी से पहले फसल का डिजिटल सर्वे पूरा होना जरूरी है। ऐसे में सर्वे में देरी होने पर किसानों के पंजीयन और धान खरीदी की तैयारियों पर असर पड़ने की आशंका है।

कर्मचारी फेडरेशन ने भी किया हस्तक्षेप

छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के प्रदेश संयोजक कमल वर्मा ने सरकार की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।

फेडरेशन की मांग है कि पटवारियों के खिलाफ जारी निलंबन, नोटिस और तबादले की कार्रवाई पर रोक लगाकर बातचीत के माध्यम से समाधान निकाला जाए। साथ ही PV ऐप की तकनीकी समस्याओं को दूर करने और वेतन विसंगति तथा पदोन्नति से जुड़े मुद्दों का निराकरण किया जाए।

अब आगे क्या होगा?

एक तरफ प्रशासन पटवारियों को काम पर लौटने के निर्देश दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ पटवारी संघ अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहा है।

इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा परेशानी किसानों और ग्रामीण नागरिकों को हो रही है। धान खरीदी का समय नजदीक है और राजस्व संबंधी काम प्रभावित होने से किसानों की चिंता बढ़ रही है।

अब देखना होगा कि राज्य सरकार और पटवारी संघ के बीच बातचीत से कोई समाधान निकलता है या आंदोलन आगे भी जारी रहता है।


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