Media24Media.com: ओडिशा में चक्रवात का खतरा

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ओडिशा में चक्रवात का खतरा

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ओडिशा और पूर्वी भारत

इस खबर में दो अलग-अलग पहलुओं को समझना जरूरी है:

  1. पहले आए चक्रवात और उसके बाद हुई बाढ़ से नुकसान।

  2. संभावित नए चक्रवात को लेकर मौसम विभाग और प्रशासन की तैयारी।

पहले चक्रवात अर्नब से कितना नुकसान हुआ?

चक्रवात अर्नब ने 28 अक्टूबर 2026 को आंध्र प्रदेश के तट पर लैंडफॉल किया था। इसके बाद हुई भारी बारिश से दक्षिणी ओडिशा के कई इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बनी।

1 नवंबर तक ओडिशा सरकार के विशेष राहत आयुक्त के हवाले से जारी आंकड़े:

1,18,730- लोग प्रभावित

75,855- लोग सुरक्षित निकाले गए

75,388- हेक्टेयर फसल प्रभावित

1,672- मकान क्षतिग्रस्त

इसके अलावा:

  • 6 लोगों की मौत की सूचना दी गई।

  • 10 लोग लापता बताए गए।

  • कम से कम 10 भूस्खलन की घटनाएं सामने आईं।

  • लगभग 396 राहत शिविर स्थापित किए गए।

  • बिजली बहाली के लिए 6,400 से अधिक कर्मचारी लगाए गए।

सबसे ज्यादा प्रभावित जिले कौन से हैं?
गंजाम (Ganjam)

सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल। 398 गांवों और 22 ब्लॉकों में लगभग 1.5 लाख लोगों के प्रभावित होने की रिपोर्ट है। करीब 74 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि और लगभग 1,000 मकान प्रभावित बताए गए।

कंधमाल (Kandhamal)

भारी बारिश के कारण पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन हुआ। गिड़िपाबाली गांव में मलबे ने मकानों को नष्ट कर दिया। यहां राहत और बचाव अभियान चलाया गया।

गजपति (Gajapati)

प्रशासन ने भूस्खलन की आशंका वाले लगभग 150 स्थानों की पहचान की और वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की।

गांव पर पहाड़ का मलबा गिरा, पूरा गांव तबाह

कंधमाल और गंजाम जिले की सीमा पर स्थित गिड़िपाबाली गांव में चक्रवात के दौरान हुई लगातार बारिश से पहाड़ का भारी मलबा नीचे आ गया।

  • गांव में करीब 26 लोग रहते थे।

  • पहाड़ी से कीचड़ और पत्थरों का बड़ा हिस्सा नीचे आया।

  • कई मकान मलबे में दब गए।

  • बचाए गए कम से कम 13 लोगों को G. Udayagiri के पास राहत केंद्र में रखा गया।

  • प्रशासन के अनुसार, भूस्खलन से लापता लोगों की तलाश जारी थी।

यह घटना बताती है कि चक्रवात के दौरान केवल समुद्र तटीय क्षेत्रों में ही नहीं, बल्कि पहाड़ी इलाकों में भी जान का खतरा बढ़ जाता है।

मुख्यमंत्री ने राहत पैकेज की घोषणा की

मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी

मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और किसानों, मकान मालिकों तथा छोटे कारोबारियों के लिए विशेष आर्थिक सहायता पैकेज घोषित किया।

सरकार की घोषित सहायता:

प्रभावित वर्ग

    घोषित सहायता

प्रत्येक प्रभावित परिवार

    50 किलो चावल + ₹2,500

असिंचित खेत की फसल

      ₹8,500 प्रति हेक्टेयर

सिंचित खेत की फसल

    ₹17,000 प्रति हेक्टेयर

ग्रीष्मकालीन फसल

    ₹22,500 प्रति हेक्टेयर

मैदानी क्षेत्र में क्षतिग्रस्त मकान

    ₹1.20 लाख

पहाड़ी क्षेत्र में क्षतिग्रस्त मकान

    ₹1.30 लाख

छोटे दुकानदार/अस्थायी दुकान

       ₹10,000

बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान

        ₹25,000

सरकार ने कहा है कि अंतिम नुकसान का आकलन होने के बाद सहायता राशि में संशोधन किया जा सकता है।

इसके अलावा 2 से 4 नवंबर के बीच आठ सदस्यीय केंद्रीय अंतर-मंत्रालयी टीम ओडिशा पहुंचकर नुकसान का आकलन करने वाली है।

अब नया चक्रवात मुरासु (MURASU) कितना खतरनाक है?

IMD द्वारा चक्रवाती तूफान की पुष्टि

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 2 नवंबर सुबह 6:48 बजे जारी समुद्री बुलेटिन के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में चक्रवात मुरासु तेज होकर गंभीर चक्रवाती तूफान (Severe Cyclonic Storm) बन चुका था।

IMD की रिपोर्ट में दी गई स्थिति:

विवरण

    जानकारी

चक्रवात का नाम

    मुरासु (Murasu)

समुद्री क्षेत्र

    पश्चिम-मध्य और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी

अनुमानित हवा की गति

    100–110 किमी/घंटा

तेज झोंके

       120 किमी/घंटा तक

संभावित लैंडफॉल

    2 नवंबर की रात से 3 नवंबर की सुबह

संभावित क्षेत्र

    नेल्लोर से नरसापुर, आंध्र प्रदेश

संभावित समय

    रात 11:30 से सुबह 4 बजे के बीच

इसका नाम भारत ने दिया है। मुरासु का अर्थ युद्ध का नगाड़ा (War Drum) है।

चक्रवात का संभावित रास्ता

ध्यान दें: मुरासु का मुख्य लैंडफॉल ओडिशा में नहीं, बल्कि दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट पर होने का अनुमान था। हालांकि इसके प्रभाव से ओडिशा में भारी बारिश और तेज हवाओं की आशंका है।

ओडिशा में किन तारीखों को बारिश का अलर्ट?

IMD भुवनेश्वर की 2 नवंबर की चेतावनी:

तारीख

    मौसम चेतावनी

2 नवंबर

    भारी बारिश, गरज-चमक

3 नवंबर

    बहुत भारी बारिश

4 नवंबर

    बहुत भारी बारिश

5 नवंबर

    गरज-चमक और बिजली

6–8 नवंबर

कोई चेतावनी नहीं


इसका मतलब है कि 3 और 4 नवंबर ओडिशा के लिए विशेष सतर्कता वाले दिन हैं।

ओडिशा सरकार ने क्या तैयारियां की हैं?

राज्य सरकार ने पिछले चक्रवात से हुए नुकसान को देखते हुए नई आपदा प्रबंधन तैयारियां की हैं।

  • दक्षिणी ओडिशा के लिए हाई अलर्ट जारी किया गया।

  • गंजाम सहित संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए।

  • निचले इलाकों और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की निकासी की तैयारी की गई।

  • NDRF, ODRAF और अग्निशमन विभाग को अलर्ट पर रखा गया।

  • बिजली और संचार सेवाओं को बहाल करने के प्रयास जारी हैं।

  • मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई।

  • दक्षिणी ओडिशा के कुछ जिलों में 3 नवंबर तक स्कूल और कॉलेज बंद करने की घोषणा की गई।

क्या छत्तीसगढ़ और रायपुर पर भी असर पड़ेगा?

छत्तीसगढ़ के लिए भी इस मौसम प्रणाली पर नजर रखना जरूरी है।

  • ओडिशा में भारी बारिश होने पर सीमावर्ती इलाकों में मौसम प्रभावित हो सकता है।

  • बस्तर और दक्षिण छत्तीसगढ़ के मौसम पर विशेष निगरानी रखनी चाहिए।

  • भारी बारिश की स्थिति में नदी-नालों का जलस्तर बढ़ सकता है।

  • रायपुर में बारिश होगी या नहीं, इसकी पुष्टि अलग से IMD के जिला-वार पूर्वानुमान से करनी होगी।

अभी उपलब्ध ओडिशा IMD चेतावनी के आधार पर रायपुर में चक्रवात का सीधा असर घोषित नहीं किया गया है।

आम लोगों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?

  1. समुद्र, नदी और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहें।

  2. प्रशासन के निर्देश पर राहत शिविरों में जाएं।

  3. पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर मकानों से दूर रहें।

  4. मोबाइल फोन चार्ज रखें और जरूरी दवाइयां साथ रखें।

  5. किसानों को कटी हुई फसल सुरक्षित रखने की व्यवस्था करनी चाहिए।

  6. मछुआरे समुद्र में न जाएं।

इस खबर का निष्कर्ष

इस समय ओडिशा दोहरी चुनौती से गुजर रहा है।

  • पहली चुनौती: चक्रवात अर्नब के कारण 1.18 लाख से अधिक प्रभावित लोगों को राहत और पुनर्वास देना।

  • दूसरी चुनौती: चक्रवात मुरासु के कारण आने वाली भारी बारिश और संभावित बाढ़ से लोगों को सुरक्षित रखना।

सबसे अधिक चिंता गंजाम, कंधमाल और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की है। वहीं मुरासु का मुख्य लैंडफॉल दक्षिण आंध्र प्रदेश में अनुमानित था।

आधिकारिक अपडेट कहां देखें?

मेरी सलाह: इस खबर में सबसे महत्वपूर्ण अगले 48 घंटे हैं। विशेष रूप से 2 से 4 नवंबर के IMD अपडेट और प्रशासन की निकासी संबंधी घोषणाओं पर नजर रखें।


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