Media24Media.com: नवरात्रि का तीसरा दिन आज: मां चंद्रघंटा की पूजा से मिलती है साहस और सुख-समृद्धि की कामना, जानें विधि, मंत्र, भोग और आरती

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नवरात्रि का तीसरा दिन आज: मां चंद्रघंटा की पूजा से मिलती है साहस और सुख-समृद्धि की कामना, जानें विधि, मंत्र, भोग और आरती

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Navratri Day 3 2026: शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा का विधान है। माता को लाल-पीले फूल, केसर वाली खीर और मिठाइयों का भोग अर्पित किया जाता है। जानिए मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, शक्तिशाली मंत्र, धार्मिक महत्व और आरती।


नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना

शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन 13 अक्टूबर, मंगलवार को मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की जा रही है। धार्मिक मान्यताओं में मां चंद्रघंटा को साहस, शक्ति, शांति और पराक्रम का प्रतीक माना गया है। मान्यता है कि विधि-विधान से माता की आराधना करने से जीवन में सकारात्मकता आती है और भक्तों को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा मिलती है।

मां चंद्रघंटा का स्वरूप दिव्य, तेजस्वी और कल्याणकारी माना जाता है। नवरात्रि के इस पावन दिन श्रद्धालु माता को फूल, फल, मिठाई और खीर का भोग अर्पित कर सुख-समृद्धि, परिवार की खुशहाली और जीवन में सफलता की कामना करते हैं। पूजा के दौरान माता के मंत्रों का जाप और आरती करने का भी विशेष महत्व है।

मां चंद्रघंटा का स्वरूप और धार्मिक महत्व

मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप का नाम चंद्रघंटा उनके मस्तक पर सुशोभित घंटे के आकार के अर्धचंद्र के कारण पड़ा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता का वाहन सिंह है। उनका स्वरूप शक्ति, निर्भीकता और धर्म की रक्षा का प्रतीक माना जाता है।

मां चंद्रघंटा को करुणा और शक्ति का अद्भुत संगम माना जाता है। मान्यता है कि उनकी आराधना से मन में साहस और आत्मविश्वास बढ़ता है। भक्त माता से जीवन में शांति, सम्मान, सुख और समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को लाल और पीले फूल अर्पित करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार माता की पूजा कर सकते हैं।

मां चंद्रघंटा की पूजा विधि

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा के लिए सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके श्रद्धापूर्वक माता की आराधना करें।

  1. पूजा स्थल की सफाई करें: मंदिर को स्वच्छ करके गंगाजल का छिड़काव करें।

  2. चौकी स्थापित करें: लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर मां चंद्रघंटा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।

  3. पूजन सामग्री अर्पित करें: माता को कुमकुम, अक्षत, चुनरी, माला और लाल या पीले फूल चढ़ाएं।

  4. दीपक जलाएं: घी का दीपक जलाकर धूप-अगरबत्ती अर्पित करें।

  5. मंत्रों का जाप करें: मां चंद्रघंटा के मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें।

  6. भोग लगाएं: माता को खीर, दूध से बनी मिठाइयां, मिश्री या पेड़े अर्पित करें।

  7. पाठ करें: अपनी परंपरा के अनुसार दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या माता की कथा का पाठ करें।

  8. आरती करें: पूजा के अंत में मां चंद्रघंटा की आरती उतारें और परिवार की सुख-शांति की कामना करें।

मां चंद्रघंटा को क्या चढ़ाएं? जानें प्रिय भोग

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को दूध से बनी मिठाइयां और खीर अर्पित करने की परंपरा है। भक्त माता को केसर वाली खीर का भोग लगा सकते हैं। इसके अलावा अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार निम्न सामग्री भी अर्पित की जा सकती है।

  • केसर वाली खीर: दूध, चावल और केसर से तैयार खीर का भोग।

  • दूध से बनी मिठाइयां: पेड़ा और अन्य सात्विक मिठाइयां।

  • मिश्री: माता को मिश्री अर्पित करने की भी परंपरा है।

  • पंचमेवा: श्रद्धानुसार मेवे का भोग लगाया जा सकता है।

  • लाल और पीले फूल: माता को गुलाब, गेंदे सहित अन्य ताजे फूल अर्पित किए जा सकते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा में स्वच्छता, श्रद्धा और भक्ति का विशेष महत्व है।

मां चंद्रघंटा के मंत्र

नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की उपासना के दौरान इन मंत्रों का जाप किया जा सकता है।

1. मां चंद्रघंटा का ध्यान मंत्र

पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।

प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

2. मां चंद्रघंटा का प्रार्थना मंत्र

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।

सिंहारूढा चन्द्रघण्टा यशस्विनीम्॥

3. मां चंद्रघंटा का सरल मंत्र

ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥

भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार इन मंत्रों का जाप कर माता का ध्यान कर सकते हैं।

मां चंद्रघंटा की आरती

नवरात्रि के तीसरे दिन पूजा के बाद मां चंद्रघंटा की आरती करने की परंपरा है। आरती के माध्यम से भक्त माता के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं।

जय मां चंद्रघंटा सुख धाम,

पूर्ण कीजो मेरे सभी काम।

चंद्र समान तुम शीतल दाती,

चंद्र तेज किरणों में समाती।

क्रोध को शांत करने वाली,

मीठे बोल सिखाने वाली।

मन की मालक मन भाती हो,

चंद्र घंटा तुम वरदाती हो।

सुंदर भाव को लाने वाली,

हर संकट में बचाने वाली।

हर बुधवार जो तुझे ध्याये,

श्रद्धा सहित जो विनय सुनाएं।

मूर्ति चंद्र आकार बनाएं,

सम्मुख घी की ज्योत जलाएं।

शीश झुका कहे मन की बाता,

पूर्ण आस करो जगदाता।

कांची पुर स्थान तुम्हारा,

करनाटिका में मान तुम्हारा।

नाम तेरा रटूं महारानी,

भक्त की रक्षा करो भवानी।

मां चंद्रघंटा की पूजा से जुड़ी मान्यताएं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा साहस, आत्मबल और मानसिक शांति की कामना से की जाती है। माता का स्वरूप भक्तों को निडर होकर चुनौतियों का सामना करने तथा धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा, मंत्र जाप और आरती कर माता का आशीर्वाद मांगते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई आराधना से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की कामना पूरी होती है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा विधि और मंत्रों के पाठ में अंतर हो सकता है। पूजा से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए योग्य पुरोहित या पंचांग विशेषज्ञ से परामर्श लें।

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