Media24Media.com: Navratri 2026: अष्टमी-नवमी का संयुक्त व्रत आज, जानें कन्या पूजन, हवन और पारण का शुभ मुहूर्त

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Navratri 2026: अष्टमी-नवमी का संयुक्त व्रत आज, जानें कन्या पूजन, हवन और पारण का शुभ मुहूर्त

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 Navratri 2026 Ashtami Navami Vrat: शारदीय नवरात्र के दौरान इस बार अष्टमी और नवमी व्रत की तिथियों को लेकर श्रद्धालुओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को महाअष्टमी और महानवमी से जुड़े अनुष्ठान किए जा रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अष्टमी पर मां महागौरी और नवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। ऐसे में संयुक्त व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए कन्या पूजन, हवन और व्रत पारण का सही समय जानना जरूरी है।


पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, तिथियों में घटत-बढ़त के कारण इस बार अष्टमी और नवमी के व्रत से जुड़े अनुष्ठानों के समय पर विशेष ध्यान देना चाहिए। आइए जानते हैं अष्टमी और नवमी व्रत करने वाले भक्तों के लिए पूजा, हवन, कन्या पूजन और पारण से जुड़ी जरूरी जानकारी।

अष्टमी-नवमी व्रत 2026: तिथियों को लेकर क्यों है असमंजस?

हिंदू पंचांग में तिथि की गणना के आधार पर व्रत और त्योहारों की तारीख निर्धारित होती है। इस बार तिथियों के संयोग के कारण महाअष्टमी और महानवमी के अनुष्ठानों को लेकर अलग-अलग मान्यताएं सामने आ रही हैं।

अष्टमी तिथि मां महागौरी को समर्पित है, जबकि नवमी तिथि पर मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवरात्र के इन अंतिम दिनों में कन्या पूजन, हवन और दुर्गा पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक मां दुर्गा की आराधना करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है। हालांकि, पूजा और व्रत पारण का समय निर्धारित करने के लिए स्थानीय पंचांग और अपनी पारिवारिक परंपरा का ध्यान रखना चाहिए।

अष्टमी व्रत करने वाले कब करें कन्या पूजन और पारण?

पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, अष्टमी तिथि 19 अक्टूबर 2026 को सुबह 10 बजकर 52 मिनट तक रहने की जानकारी दी गई है। ऐसे में अष्टमी के अनुसार व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को कन्या पूजन और हवन के समय का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

बताई गई गणना के अनुसार, अष्टमी तिथि में ही पूजा-अनुष्ठान संपन्न करने की परंपरा मानने वाले भक्त तिथि समाप्त होने से पहले अपने अनुष्ठान कर सकते हैं।

अष्टमी व्रत का पारण: अष्टमी का व्रत रखने वाले श्रद्धालु 20 अक्टूबर को सूर्योदय के बाद पारण कर सकते हैं, यदि उनके स्थानीय पंचांग और व्रत परंपरा में यही समय मान्य हो। पारण से पहले तिथि और नियमों की पुष्टि करना जरूरी है।

नवमी व्रत करने वाले कब करें हवन और कन्या पूजन?

जो श्रद्धालु 19 अक्टूबर को नवमी का व्रत कर रहे हैं, उनके लिए 20 अक्टूबर को भी नवमी से जुड़े अनुष्ठान करने का अवसर बताया गया है। पंचांग के अनुसार, नवमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहने की जानकारी दी गई है। इसके बाद दशमी तिथि प्रारंभ होगी।

इस गणना के अनुसार, नवमी व्रत रखने वाले श्रद्धालु नवमी तिथि के दौरान हवन और कन्या पूजन कर सकते हैं। व्रत पारण के लिए दशमी तिथि को मानने वाले भक्त 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 बजे के बाद पारण कर सकते हैं। हालांकि, यह समय स्थानीय पंचांग और व्रत की परंपरा से सत्यापित करना चाहिए।

19 अक्टूबर को हवन और कन्या पूजन के शुभ मुहूर्त

उपलब्ध विवरण के अनुसार, 19 अक्टूबर को पूजा-अनुष्ठान के लिए अमृत काल का समय इस प्रकार बताया गया है:

  • अमृत काल: सुबह 8:29 बजे से 10:16 बजे तक।

श्रद्धालु अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि करके कन्या पूजन और हवन की तैयारी करें।

20 अक्टूबर को हवन और कन्या पूजन का मुहूर्त

20 अक्टूबर को नवमी तिथि के दौरान पूजा-अनुष्ठान करने वाले श्रद्धालुओं के लिए ये मुहूर्त बताए गए हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:44 बजे से 5:32 बजे तक।

  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:43 बजे से दोपहर 12:28 बजे तक।

मुहूर्त की गणना स्थान के अनुसार बदल सकती है। इसलिए पूजा शुरू करने से पहले स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि अवश्य करें।

राहुकाल में पूजा और हवन करने से बचें

ज्योतिषीय मान्यताओं में राहुकाल को शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। इस दौरान कई लोग नए या मांगलिक कार्य शुरू करने से बचते हैं।

19 अक्टूबर के लिए दिए गए विवरण के अनुसार, राहुकाल का समय सुबह 7:50 बजे से 9:16 बजे तक बताया गया है। श्रद्धालु इस अवधि को ध्यान में रखकर अपनी पूजा की योजना बना सकते हैं।

हालांकि, राहुकाल और अन्य मुहूर्तों का समय स्थान के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

अष्टमी-नवमी पर इन बातों का रखें ध्यान

  • व्रत रखने से पहले अष्टमी और नवमी की तिथि की पुष्टि करें।

  • कन्या पूजन और हवन का समय स्थानीय पंचांग के अनुसार तय करें।

  • व्रत पारण अपनी धार्मिक परंपरा और मान्य तिथि के अनुसार करें।

  • पूजा स्थल को स्वच्छ रखें और कन्याओं का सम्मानपूर्वक पूजन करें।

  • घर में हवन करते समय अग्नि सुरक्षा का ध्यान रखें।

नवरात्र के अंतिम दिनों में मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा के साथ कन्या पूजन और हवन को विशेष महत्व दिया जाता है। श्रद्धालुओं को तिथि और मुहूर्त की सही जानकारी लेकर ही धार्मिक अनुष्ठान करने चाहिए।

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