Media24Media.com: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का ‘पब्लिक महाभियोग’: INDIA गठबंधन ने दिल्ली में किया प्रतीकात्मक विरोध, SIR और वोटर लिस्ट को लेकर उठाए सवाल

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष का ‘पब्लिक महाभियोग’: INDIA गठबंधन ने दिल्ली में किया प्रतीकात्मक विरोध, SIR और वोटर लिस्ट को लेकर उठाए सवाल

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नई दिल्ली- मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर विपक्षी INDIA गठबंधन ने 31 अक्टूबर 2026 को राजधानी दिल्ली में प्रतीकात्मक ‘पब्लिक महाभियोग’ कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार सहित विपक्षी दलों के कई नेता शामिल हुए।

विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) की प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और इससे मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज पर सवाल उठाते हुए उनके पद से हटाए जाने की मांग दोहराई है।

दिल्ली में आयोजित हुआ प्रतीकात्मक महाभियोग कार्यक्रम

INDIA गठबंधन ने दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर यह कार्यक्रम आयोजित किया। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने प्रतीकात्मक कार्यवाही की अध्यक्षता की। कार्यक्रम में विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूची में बदलाव और SIR प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाया।

मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्ष की ओर से प्रस्ताव और आरोपों को प्रस्तुत किया। राहुल गांधी ने भी कार्यक्रम में अपनी बात रखी। विपक्ष ने इस आयोजन के जरिए चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और चुनाव आयोग की निष्पक्षता का मुद्दा उठाया।

SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की आपत्ति

विपक्षी दलों का मुख्य विरोध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर है। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया में कई पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने या उनके मतदान अधिकार प्रभावित होने की आशंका है।

विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी पात्र नागरिक का नाम बिना उचित सत्यापन के नहीं हटाया जाना चाहिए। गठबंधन के नेताओं ने चुनाव आयोग से इस प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण देने और शिकायतों का समाधान करने की मांग की है।

हालांकि, विपक्ष के आरोपों को लेकर चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से अलग-अलग पक्ष रखे गए हैं। चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उस पर लगाए गए आरोपों का अंतिम आकलन संबंधित दस्तावेजों, जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।

संसद में पहले भी उठाया जा चुका है हटाने का मुद्दा

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए विपक्ष इससे पहले भी संसद में प्रस्ताव लाने की कोशिश कर चुका है। मार्च 2026 में विपक्षी सांसदों ने लोकसभा और राज्यसभा में इस संबंध में नोटिस दिए थे। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों ने उन नोटिसों को स्वीकार नहीं किया था।

इसके बाद विपक्षी दलों ने नए सिरे से रणनीति बनाई और विभिन्न दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश की। सितंबर में भी INDIA गठबंधन की बैठकों में इस मुद्दे पर संयुक्त कार्रवाई और कानूनी विकल्पों पर चर्चा हुई थी।

क्या होता है मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का संवैधानिक प्रावधान?

भारत के संविधान के अनुच्छेद 324(5) के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के समान है। इसका उद्देश्य चुनाव आयोग के प्रमुख को राजनीतिक दबाव से संवैधानिक सुरक्षा देना है।

मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए:

  1. संसद के किसी भी सदन में निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्ताव लाया जा सकता है।

  2. प्रस्ताव में सिद्ध कदाचार या अक्षमता के आधार होने चाहिए।

  3. लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में प्रस्ताव पारित होना आवश्यक है।

  4. प्रत्येक सदन में कुल सदस्य संख्या का बहुमत और उपस्थित तथा मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है।

  5. दोनों सदनों से प्रस्ताव पारित होने के बाद राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी करते हैं।

इसलिए किसी राजनीतिक दल या गठबंधन की मांग अथवा प्रतीकात्मक कार्यक्रम से मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल पद से नहीं हटाया जा सकता। इसके लिए संवैधानिक प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है।

1 नवंबर को रामलीला मैदान में रैली की तैयारी

INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान के तहत रैली आयोजित करने की भी योजना बनाई है। इस रैली के जरिए विपक्ष मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपना विरोध दर्ज कराने वाला है।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर राष्ट्रीय बहस

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर देश में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता, मतदाता सूची की विश्वसनीयता और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर बहस तेज कर दी है।

जहां विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है, वहीं इस मामले में संवैधानिक प्रक्रिया और संस्थागत जवाबदेही भी महत्वपूर्ण हैं। आने वाले दिनों में संसद, चुनाव आयोग और न्यायिक मंचों पर इस मुद्दे से जुड़े घटनाक्रम पर नजर रहेगी।

महत्वपूर्ण: 31 अक्टूबर का ‘पब्लिक महाभियोग’ एक प्रतीकात्मक राजनीतिक कार्यक्रम था। इसे संसद द्वारा पारित वास्तविक महाभियोग या ज्ञानेश कुमार को पद से हटाए जाने की कार्रवाई नहीं समझना चाहिए।

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