Media24Media.com: रायपुर में AI की नई पहल: साधारण एक्स-रे से पता चलेगी हड्डियों की कमजोरी, शुरुआती परीक्षण में 97.7% सटीकता

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रायपुर में AI की नई पहल: साधारण एक्स-रे से पता चलेगी हड्डियों की कमजोरी, शुरुआती परीक्षण में 97.7% सटीकता

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छत्तीसगढ़ के रायपुर से स्वास्थ्य और तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। छह राष्ट्रीय संस्थान मिलकर ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सॉफ्टवेयर विकसित कर रहे हैं, जो सामान्य एक्स-रे की मदद से हड्डियों की कमजोरी का आकलन कर सकेगा। इस तकनीक के शुरुआती परीक्षण में 97.7% तक सटीकता की रिपोर्ट दी गई है। अगर आगे के परीक्षणों में भी इसके परिणाम भरोसेमंद साबित होते हैं, तो हड्डियों की बीमारी का समय रहते पता लगाने में मदद मिल सकती है।

क्या है यह नई AI तकनीक?

आमतौर पर हड्डियों में कैल्शियम और खनिजों की मात्रा कम होने, ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का पता लगाने के लिए विशेष जाँच की जरूरत पड़ती है। नई परियोजना का उद्देश्य सामान्य एक्स-रे में मौजूद जानकारी का AI के जरिए विश्लेषण करके हड्डियों की स्थिति के बारे में शुरुआती संकेत प्राप्त करना है।

इससे डॉक्टरों को ऐसे मरीजों की पहचान करने में सहायता मिल सकती है, जिन्हें आगे विस्तृत जाँच कराने की जरूरत है।

इस प्रोजेक्ट में कौन-कौन से संस्थान शामिल हैं?

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चार AIIMS संस्थान

  • AIIMS Raipur

  • AIIMS Deoghar

  • AIIMS Delhi

  • AIIMS Bhubaneswar

इन संस्थानों की भूमिका मरीजों के डेटा और चिकित्सकीय मूल्यांकन से जुड़ी है।

IIT ISM ICSDMP-2024 :: Home

दो तकनीकी संस्थान

  • IIT (ISM) Dhanbad

  • NIT Jamshedpur

इनकी भूमिका AI मॉडल और तकनीकी प्रणाली विकसित करने की है।

परियोजना का नेतृत्व AIIMS देवघर के प्रोफेसर डॉ. मनीष राज कर रहे हैं। AIIMS रायपुर में ऑर्थोपेडिक्स विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. आलोक सी. अग्रवाल ने भी इस पहल से होने वाले संभावित लाभों पर जानकारी दी है।

प्रोजेक्ट की लागत और समय-सीमा

₹1.47 करोड़-परियोजना की कुल स्वीकृत राशि

₹1.01 करोड़-ICMR की स्वीकृत सहायता

1 फरवरी 2025-परियोजना की शुरुआत

31 जनवरी 2028-निर्धारित परियोजना समाप्ति

ये आँकड़े 26 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार हैं।

अभी कौन-सी जाँच की जाती है और AI से क्या बदलेगा?
Bone Densitometry (DEXA) | United Radiology

DEXA स्कैन क्या है?

DEXA या DXA हड्डियों के खनिज घनत्व को मापने वाली विशेष जाँच है। इसका इस्तेमाल ऑस्टियोपोरोसिस और हड्डियों के कमजोर होने के जोखिम का आकलन करने में किया जाता है।

वर्तमान में DEXA मशीनों की उपलब्धता हर जगह समान नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, इस जाँच का खर्च कुछ स्थानों पर ₹8,000 तक हो सकता है। AI आधारित तकनीक सफल होने पर पहले से उपलब्ध एक्स-रे का विश्लेषण करके ऐसे मरीजों को चिन्हित करने में मदद कर सकती है, जिन्हें DEXA जाँच की जरूरत हो।

सामान्य प्रक्रिया

        प्रस्तावित AI आधारित प्रक्रिया

एक्स-रे की डॉक्टर द्वारा व्याख्या

        एक्स-रे का AI से अतिरिक्त विश्लेषण

जरूरत पड़ने पर DEXA की सलाह

        जोखिम के संकेत मिलने पर आगे की जाँच की सलाह देने         में मदद

विशेष जाँच के लिए अलग सुविधा की जरूरत

       मौजूदा एक्स-रे सुविधाओं का बेहतर उपयोग करने की संभावना

यह तुलना प्रस्तावित उपयोग को दर्शाती है, न कि सभी अस्पतालों में लागू हो चुकी व्यवस्था को।

97.7% सटीकता का वास्तव में क्या मतलब है?

यह इस खबर का सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी पहलू है।

  • शुरुआती परीक्षण में 97.7% तक सटीकता की रिपोर्ट दी गई है।

  • उपलब्ध समाचार रिपोर्ट में परीक्षण के नमूने का आकार, मरीजों की संख्या और इस सटीकता की गणना की पूरी तकनीकी जानकारी नहीं दी गई है।

  • इसलिए यह मानना सही नहीं होगा कि AI हर 100 मरीजों में 97 या 98 मरीजों की बीमारी निश्चित रूप से पहचान लेगा।

  • व्यापक और स्वतंत्र परीक्षणों के बाद ही पता चलेगा कि यह तकनीक अलग-अलग उम्र के मरीजों और विभिन्न अस्पतालों में कितनी भरोसेमंद है।


छत्तीसगढ़ और ग्रामीण मरीजों को क्या फायदा हो सकता है?

समय रहते जोखिम की पहचान

सामान्य एक्स-रे कराते समय ही हड्डियों की कमजोरी के संभावित संकेत मिलने से आगे की जाँच में मदद मिल सकती है।

दूरदराज के क्षेत्रों में संभावित लाभ

यदि भविष्य में यह तकनीक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुँचती है, तो बड़े शहरों से दूर रहने वाले मरीजों को भी शुरुआती स्क्रीनिंग की सुविधा मिल सकती है।

जाँच के खर्च में कमी की संभावना

मौजूदा एक्स-रे का अतिरिक्त उपयोग कुछ मरीजों के लिए अलग जाँच की जरूरत पहचानने में मदद कर सकता है। वास्तविक बचत का पता तकनीक लागू होने के बाद ही चलेगा।

ये संभावित फायदे हैं। इनके लिए तकनीक का चिकित्सकीय सत्यापन, आवश्यक मंजूरी और स्वास्थ्य सेवाओं में सफल क्रियान्वयन जरूरी होगा।

निष्कर्ष

रायपुर के AIIMS सहित छह राष्ट्रीय संस्थानों की यह संयुक्त परियोजना भारत में सुलभ और किफायती स्वास्थ्य जाँच की दिशा में एक संभावनाशील पहल है। साधारण एक्स-रे से हड्डियों की कमजोरी के संकेत पहचानने की तकनीक सफल रहती है, तो ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का जोखिम समय रहते पहचानने में मदद मिल सकती है।

हालाँकि, फिलहाल 97.7% का आँकड़ा शुरुआती परीक्षण से जुड़ा है। इसे प्रमाणित नियमित जाँच समझने से पहले विस्तृत परीक्षण और चिकित्सकीय सत्यापन आवश्यक हैं।

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