Media24Media.com: जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र आंदोलन: चुनाव के ऐलान के बाद भी क्यों जारी है विरोध?

Responsive Ad Slot

Latest

latest


 

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र आंदोलन: चुनाव के ऐलान के बाद भी क्यों जारी है विरोध?

Document Thumbnail

दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की माँग को लेकर चल रहा आंदोलन आज फिर चर्चा में है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने लगभग 20 साल बाद चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया है, लेकिन छात्र चुनाव की निश्चित समय-सीमा और अपनी अन्य माँगों को लेकर असंतुष्ट हैं। सोमवार को परिसर में फिर विरोध प्रदर्शन हुए और कुछ प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया।

पूरा मामला क्या है?

जामिया में छात्र संघ के चुनाव वर्ष 2006 से नहीं हुए हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि निर्वाचित छात्र संघ न होने के कारण विद्यार्थियों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुँचाने के लिए प्रभावी प्रतिनिधित्व नहीं है।

छात्रों ने छात्र संघ की बहाली, चुनाव की तारीख तय करने और विरोध प्रदर्शन के दौरान की गई अनुशासनात्मक कार्रवाइयों को वापस लेने की माँग के साथ आंदोलन शुरू किया। अक्टूबर के मध्य से जारी इस आंदोलन में भूख हड़ताल भी शामिल रही।

आज 26 अक्टूबर को क्या हुआ?

सुबह, विश्वविद्यालय ने लिखित आदेश जारी किया

प्रशासन ने कहा कि छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। विरोध के दौरान जारी निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लेने तथा सुरक्षा कर्मचारियों के आचरण की जाँच के लिए समिति बनाने की बात भी कही गई।

दोपहर, फिर प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई

चुनाव प्रक्रिया को तेज करने और मुख्य चुनाव अधिकारी नियुक्त करने की माँग को लेकर छात्र दोबारा जुटे। कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबर आई। परिसर के कुछ प्रवेश द्वारों पर भी तनाव की स्थिति बनी।

मुख्य विवाद- छात्रों ने समझौते की शर्तों पर सवाल उठाए

प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने कहा कि चुनाव की निश्चित तारीख और अन्य माँगों पर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। प्रशासन के आदेश में सार्वजनिक माफी और सोशल मीडिया पोस्ट हटाने की शर्त भी दर्ज है, जिस पर कुछ छात्रों ने आपत्ति जताई।

छात्रों की मुख्य माँगें क्या हैं?

ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार, छात्रों की प्रमुख माँगें ये हैं:

1. छात्र संघ चुनाव की निश्चित तारीख

छात्र चाहते हैं कि चुनाव प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय हो और मुख्य चुनाव अधिकारी नियुक्त किया जाए।

2. छात्र संघ के संविधान को मंजूरी

छात्रों की माँग है कि 20 दिसंबर 2026 तक छात्र संघ का संविधान तैयार करके मंजूर किया जाए। इसके बाद चुनाव की प्रक्रिया में देरी न हो।

3. निलंबन और नोटिस वापस लेना

प्रदर्शन से जुड़े निलंबन और कारण बताओ नोटिस वापस लेने की माँग की गई थी। विश्वविद्यालय ने अपने 26 अक्टूबर के आदेश में इन्हें वापस लेने की बात कही है।

4. सुरक्षा कर्मचारियों की कार्रवाई की जाँच

प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कर्मचारियों के व्यवहार और कार्रवाई की जाँच के लिए समिति बनाने की बात कही गई है।

5. माफी की शर्त और अन्य माँगें

कुछ प्रदर्शनकारी सार्वजनिक माफी देने की शर्त से असहमत हैं। उन्होंने मुख्य सुरक्षा सलाहकार के इस्तीफे, परिसर में सामान्य गतिविधियाँ बहाल करने और अन्य लंबित मुद्दों पर भी कार्रवाई की माँग की है।

4. विश्वविद्यालय प्रशासन ने क्या फैसला लिया?

मुद्दा

                26 अक्टूबर के आदेश की स्थिति

छात्र संघ चुनाव

        संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव

चुनाव की निश्चित तारीख

                            अभी घोषित नहीं

छात्रों के निलंबन और नोटिस            

                           वापस लेने का आदेश

सुरक्षा कर्मचारियों की जाँच

                 समिति गठित करने का आश्वासन

सार्वजनिक माफी

   आदेश में शर्त दर्ज; कुछ छात्र इसका विरोध कर रहे हैं


सबसे महत्वपूर्ण बात: चुनाव कराने पर सहमति बनी है, लेकिन संविधान को मंजूरी कब मिलेगी, यह स्पष्ट नहीं है। इसी कारण छात्र चुनाव की तारीख और पूरी प्रक्रिया की समय-सीमा पर सवाल उठा रहे हैं।

क्या कक्षाएँ बंद हैं?

विश्वविद्यालय ने 24 अक्टूबर को जारी निर्देश के तहत कक्षाओं को अगले आदेश तक ऑनलाइन मोड में चलाने का फैसला किया था। पुस्तकालयों और परिसर की गतिविधियों पर भी प्रतिबंधों की खबर आई थी। नवीनतम उपलब्ध रिपोर्टों में इन व्यवस्थाओं की बहाली की पुष्टि नहीं है, इसलिए छात्रों को विश्वविद्यालय के आधिकारिक नोटिस देखने चाहिए।

अब आगे क्या होगा?

  • छात्र संघ के संविधान को मंजूरी देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

  • मंजूरी के बाद 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने का प्रशासन का आदेश लागू होगा।

  • छात्रों और प्रशासन के बीच माफी की शर्त तथा अन्य लंबित माँगों को लेकर विवाद बना रह सकता है।

  • प्रदर्शन और भूख हड़ताल की स्थिति में अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर है। कुछ रिपोर्टों में समझौते के बाद हड़ताल खत्म होने की बात है, जबकि अन्य में कुछ छात्रों के विरोध जारी रखने की जानकारी है।

पूरी खबर का निष्कर्ष

जामिया का विवाद अब केवल छात्र संघ चुनाव कराने तक सीमित नहीं है। चुनाव की समय-सीमा, छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई, सुरक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक माफी की शर्त भी विवाद के प्रमुख मुद्दे हैं। प्रशासन ने चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाने के कदम उठाए हैं, लेकिन आंदोलन से जुड़े सभी मतभेद समाप्त हुए हैं या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है।


Advertisement Sushasan Divas Advertisement Mohan Chandrakar Chhattisgarh Tourism Chhattisgarh Tourism
Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.