Media24Media.com: होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान की सख्त चेतावनी, तेल टैंकरों पर हमलों से बढ़ा वैश्विक तनाव

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होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान की सख्त चेतावनी, तेल टैंकरों पर हमलों से बढ़ा वैश्विक तनाव

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वॉशिंगटन- पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक, होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर स्थिति गंभीर बनी हुई है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने चेतावनी दी है कि उसके निर्धारित नियमों या अनुमति के बिना इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इस बीच, क्षेत्र में तेल टैंकरों पर हमलों की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

ईरान ने क्या चेतावनी दी?

9 अक्टूबर की रिपोर्टों के अनुसार, IRGC की नौसेना ने कहा है कि वह उन जहाजों के खिलाफ कार्रवाई करेगी जिन्हें ईरान अपने नियमों का उल्लंघन करने वाला मानता है। ईरानी पक्ष ने यह भी संकेत दिया कि कार्रवाई केवल होर्मुज़ जलडमरूमध्य तक सीमित नहीं रह सकती, बल्कि क्षेत्र के अन्य समुद्री हिस्सों तक भी इसका विस्तार हो सकता है।

यह चेतावनी ऐसे समय आई है, जब खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा को लेकर पहले से ही चिंता बनी हुई है। हाल के दिनों में कई टैंकरों पर हमले या हमले की कोशिशों की खबरें सामने आई हैं।

LPG टैंकर पर हमले का दावा

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने LPG ले जाने वाले टैंकर NV Sunshine पर हमला करने का दावा किया है। जहाज में आग लगने की खबर भी प्रकाशित हुई है। इस घटना के विवरण और जिम्मेदारी से जुड़े दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना जरूरी है।

इसके अलावा, क्षेत्र में अन्य व्यावसायिक जहाजों पर हमलों की खबरों ने शिपिंग कंपनियों, जहाज संचालकों और ऊर्जा व्यापार से जुड़ी कंपनियों के लिए जोखिम बढ़ा दिया है। जहाजों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ सकते हैं, जिससे माल ढुलाई की लागत भी बढ़ सकती है।

दुनिया के लिए होर्मुज़ इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

होर्मुज़ जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे ऊर्जा उत्पादक देशों के लिए यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार का अहम समुद्री रास्ता है।

युद्ध से पहले दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की समुद्री आवाजाही इस मार्ग से होती थी। इसलिए यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होने पर कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। 

यदि जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक प्रभावित रहती है, तो तेल आयात पर निर्भर देशों को वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों और भंडारों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। इससे परिवहन, बीमा और ऊर्जा की लागत पर दबाव बढ़ सकता है।

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