Media24Media.com: महापुरुषों की जयंतियों और पुण्यतिथियों पर अवकाश नहीं, प्रेरणा का पाठ पढ़ाया जाए—शिक्षक गेंदलाल कोकडिया

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महापुरुषों की जयंतियों और पुण्यतिथियों पर अवकाश नहीं, प्रेरणा का पाठ पढ़ाया जाए—शिक्षक गेंदलाल कोकडिया

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महासमुंद- वर्तमान समय में महापुरुषों का अभाव क्यों दिखाई दे रहा है? समाज में अपराध, भ्रष्टाचार, आतंक, हिंसा और विभिन्न प्रकार के संघर्ष समाप्त क्यों नहीं हो पा रहे हैं? क्या हमारी नई पीढ़ी महापुरुषों और शहीदों के जीवन, संघर्ष, त्याग और विचारों से पर्याप्त रूप से परिचित हो पा रही है? इन्हीं महत्वपूर्ण और जनसरोकार से जुड़े प्रश्नों को लेकर चेतना विकास एवं मूल्य शिक्षा कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला में शिक्षक गेंदलाल कोकडिया ने महापुरुषों एवं शहीदों की जयंतियों और पुण्यतिथियों पर दिए जाने वाले शासकीय अवकाश के उद्देश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि इन महान व्यक्तित्वों को याद करने का वास्तविक उद्देश्य केवल छुट्टी मनाना नहीं, बल्कि उनके जीवन और विचारों से नई पीढ़ी को प्रेरणा देना होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि महापुरुषों और शहीदों की जयंतियों एवं पुण्यतिथियों पर विद्यालय और महाविद्यालय बंद रखने के बजाय उस दिन विशेष कक्षाएं, परिचर्चा, भाषण, वाद-विवाद, जीवनी-पाठ और मूल्य शिक्षा से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएं, तो विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम, सामाजिक जिम्मेदारी, त्याग, अनुशासन और नैतिक मूल्यों का विकास अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।

कोकडिया ने कहा कि आज की जेन-जी पीढ़ी आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया से तो तेजी से जुड़ रही है, लेकिन अनेक महापुरुषों के जीवन-संघर्ष और उनके विचारों से उसका जुड़ाव अपेक्षाकृत कम होता जा रहा है। ऐसे में महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि को केवल अवकाश तक सीमित करने के बजाय उसे ‘प्रेरणा दिवस’ के रूप में मनाने की आवश्यकता है।

कार्यशाला में उपस्थित बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों ने भी अपने विचार रखे। प्रतिभागियों ने कहा कि अवकाश के दिन विद्यार्थी अक्सर अपना समय मनोरंजन, घूमने-फिरने और अन्य गतिविधियों में व्यतीत कर देते हैं। यदि इन्हीं अवसरों का उपयोग महापुरुषों और शहीदों के जीवन तथा उनके आदर्शों को समझाने में किया जाए, तो विद्यार्थियों में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

कार्यशाला में उपस्थित सभी लोगों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि महापुरुषों की जयंतियों और पुण्यतिथियों का महत्व केवल उन्हें याद करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उनके विचारों को वर्तमान पीढ़ी के जीवन में उतारने का प्रयास होना चाहिए।

सभा ने सरकार से मांग की कि महापुरुषों एवं शहीदों की जयंतियों और पुण्यतिथियों पर विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में अवकाश देने के स्थान पर विशेष शिक्षण एवं प्रेरणात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। विद्यार्थियों को उस दिन संबंधित महापुरुष के जीवन, संघर्ष, विचार, त्याग और योगदान के बारे में विस्तार से पढ़ाया और बताया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ी उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपनी सकारात्मक भूमिका निभा सके।

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