Media24Media.com: छत्तीसगढ़ में हिरासत में मौत का मामला: पति की मौत के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रही महिला को सुप्रीम कोर्ट से राहत, CBI करेगी जांच

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छत्तीसगढ़ में हिरासत में मौत का मामला: पति की मौत के लिए न्याय की लड़ाई लड़ रही महिला को सुप्रीम कोर्ट से राहत, CBI करेगी जांच

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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में पुलिस हिरासत के दौरान एक व्यक्ति की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने, मृतक की पत्नी और बच्चों को ₹25 लाख का अंतरिम मुआवजा देने तथा जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच करने के निर्देश दिए हैं।

यह मामला श्रवण सूर्यवंशी उर्फ सरवन तामरे की मौत से जुड़ा है। उनकी पत्नी लहराबाई तामरे ने पति की मौत के बाद न्याय के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी। सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद अब मामले की जांच CBI कर रही है। अदालत ने राज्य के अधिकारियों द्वारा मामले को संभालने के तरीके पर भी कड़ी टिप्पणी की है।

क्या है पूरा मामला?

मामला बिलासपुर जिले के सीपत थाना क्षेत्र का है। श्रवण सूर्यवंशी तामरे को 18 जनवरी 2024 को कथित तौर पर छह लीटर कच्ची महुआ शराब रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जब्त शराब की कीमत लगभग ₹1,200 बताई गई थी।

गिरफ्तारी के बाद उन्हें बिलासपुर केंद्रीय जेल भेजा गया। 21 जनवरी 2024 को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (CIMS) अस्पताल में भर्ती कराया गया। अगले दिन, 22 जनवरी की सुबह लगभग 6 बजे उनकी मौत हो गई।

परिवार को उनकी तबीयत बिगड़ने और अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी मिलने के बाद परिजन अस्पताल पहुंचे। वहां उन्हें श्रवण की मौत के बारे में पता चला।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया?

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर चोट, शरीर के अन्य हिस्सों में सूजन और कई जगह चोट के निशान दर्ज किए गए थे। रिपोर्ट में सिर पर किसी कठोर और कुंद वस्तु से लगी चोट की जटिलताओं के कारण हृदय और श्वसन क्रिया बंद होने को मौत का कारण बताया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, कुछ चोटें मौत से एक दिन पहले और कुछ चोटें लगभग दो से छह दिन पुरानी हो सकती थीं।

इसके बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मामले की जांच की। 22 जुलाई 2024 को प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में भी मौत का कारण सिर की चोट से उत्पन्न जटिलताओं को बताया गया।

हाईकोर्ट में क्या हुआ था?

मृतक की पत्नी और बच्चों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ₹50 लाख मुआवजे और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

3 अक्टूबर 2024 को हाईकोर्ट ने माना कि श्रवण की मौत हिरासत के दौरान हुई हिंसा के परिणामस्वरूप हुई थी। अदालत ने राज्य सरकार को परिवार को ₹1 लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया, लेकिन संबंधित अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक जांच शुरू कराने का आदेश नहीं दिया।

परिवार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या आदेश दिया?

12 अगस्त 2026 को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश इस प्रकार हैं:

  • CBI जांच: मामले में नियमित आपराधिक केस दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया गया।

  • ₹25 लाख अंतरिम मुआवजा: छत्तीसगढ़ सरकार को मृतक की पत्नी और बच्चों को अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया गया।

  • अधिकारियों की भूमिका की जांच: न्यायिक जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में रखने को कहा गया।

  • वरिष्ठ अधिकारी से जांच: CBI को जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया गया।

अदालत ने राज्य के अधिकारियों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि हिरासत में मौत जैसे गंभीर मामले में उचित कार्रवाई न होना चिंताजनक है।

लहराबाई तामरे की न्याय के लिए लड़ाई

इस मामले में श्रवण की पत्नी लहराबाई तामरे की कानूनी लड़ाई भी चर्चा में है। रिपोर्टों के अनुसार, वह पढ़ी-लिखी नहीं हैं और मजदूरी करके परिवार का गुजारा करती हैं। पति की मौत के बाद उन्होंने अपनी दो बेटियों के भविष्य और न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।

उनकी ओर से वकील राजीव कुमार दुबे ने निःशुल्क कानूनी सहायता दी। मामले में परिवार ने पुलिस और प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की थी।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद CBI को मामले में आपराधिक जांच करनी है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि श्रवण को चोटें कैसे लगीं, हिरासत के दौरान क्या हुआ और किन अधिकारियों की कोई भूमिका या लापरवाही थी।

13 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने CBI को जांच पूरी करने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया। मामले की अगली सुनवाई 2 फरवरी 2027 को निर्धारित की गई है।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हिरासत के दौरान श्रवण सूर्यवंशी तामरे की मौत का मामला अब CBI जांच के दायरे में है। सुप्रीम कोर्ट ने जांच के साथ मृतक के परिवार को ₹25 लाख अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह मामला हिरासत में लोगों की सुरक्षा, पुलिस की जवाबदेही और न्यायिक जांच के निष्कर्षों पर समय पर कार्रवाई के महत्व को सामने लाता है।

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