Media24Media.com: निलंबित IPS रतन लाल डांगी के खिलाफ आरोप-पत्र जारी, पीड़िता की आपत्ति पर बदली गई अधिकारी की जिम्मेदारी

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निलंबित IPS रतन लाल डांगी के खिलाफ आरोप-पत्र जारी, पीड़िता की आपत्ति पर बदली गई अधिकारी की जिम्मेदारी

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छत्तीसगढ़ में निलंबित भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी रतन लाल डांगी के खिलाफ महिला की शिकायत से जुड़े विभागीय मामले में एक नया घटनाक्रम सामने आया है। प्रारंभिक जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने की जानकारी राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को दी है। वहीं, शिकायतकर्ता की आपत्ति के बाद विभागीय जांच में सरकार की ओर से पक्ष रखने वाले अधिकारी की जिम्मेदारी बदलकर महिला IPS अधिकारी पारुल माथुर को सौंपी गई है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला बिलासपुर निवासी एक महिला योग प्रशिक्षक की शिकायत से जुड़ा है, जो एक सब-इंस्पेक्टर (SI) की पत्नी हैं। महिला ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रतन लाल डांगी पर कथित तौर पर अनुचित व्यवहार, उत्पीड़न और अपने पद के प्रभाव का इस्तेमाल करने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वर्ष 2017 से 2025 के बीच उन्हें विभिन्न तरीकों से प्रताड़ित किया गया। उन्होंने इस संबंध में पुलिस महानिदेशक (DGP) के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की थी। इसके बाद पुलिस मुख्यालय ने मामले की विभागीय जांच शुरू की।

महत्वपूर्ण बात: ये शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं। इन्हें अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

20 अप्रैल 2026 को जारी हुआ आरोप-पत्र

दैनिक जागरण और नईदुनिया की रिपोर्टों के अनुसार, राज्य सरकार ने हाईकोर्ट को बताया कि प्रारंभिक जांच के बाद रतन लाल डांगी के खिलाफ 20 अप्रैल 2026 को औपचारिक विभागीय आरोप-पत्र जारी किया गया था।

प्रारंभिक जांच में आरोप प्रमाणित पाए जाने की जानकारी भी अदालत में दी गई। इसके आधार पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई आगे बढ़ाई गई है।

आरोप-पत्र जारी होने का अर्थ यह है कि संबंधित अधिकारी को विभागीय कार्यवाही में आरोपों का जवाब देने और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाता है। यह अपने आप में किसी आपराधिक मामले में दोषसिद्धि के बराबर नहीं है।

पीड़िता ने जांच की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

शिकायतकर्ता ने पहले की जांच प्रक्रिया पर असंतोष जताया था। उनका आरोप था कि जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं की जा रही और संबंधित अधिकारी को बचाने की कोशिश हो रही है।

इसी आधार पर उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए और महिला अधिकारी को जिम्मेदारी देने की मांग की। अदालत ने राज्य के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक से इस संबंध में जवाब मांगा था।

यहां ध्यान देना जरूरी है कि जांच में पक्षपात के आरोप भी शिकायतकर्ता के दावे हैं; उन्हें किसी स्वतंत्र न्यायिक निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।

पारुल माथुर को मिली प्रस्तुतकर्ता अधिकारी की जिम्मेदारी

मामले में पहले IPS अधिकारी प्रशांत कुमार अग्रवाल को प्रस्तुतकर्ता अधिकारी बनाया गया था। शिकायतकर्ता ने इस नियुक्ति पर आपत्ति जताई और संवेदनशील मामले में महिला अधिकारी की नियुक्ति की मांग की।

इसके बाद गृह विभाग ने 29 सितंबर 2026 को आदेश जारी कर IPS पारुल माथुर को नया प्रस्तुतकर्ता अधिकारी नियुक्त किया। वहीं, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) दीपांशु विजय काबरा को जांच अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई।

दोनों भूमिकाओं में अंतर समझना महत्वपूर्ण है:

  • जांच अधिकारी: विभागीय जांच की प्रक्रिया संचालित करता है और संबंधित साक्ष्यों व तथ्यों का परीक्षण करता है।

  • प्रस्तुतकर्ता अधिकारी: विभाग की ओर से आरोपों और संबंधित दस्तावेजों को विभागीय जांच के समक्ष प्रस्तुत करता है।

इस बदलाव का उद्देश्य विभागीय जांच की निर्धारित प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। केवल महिला अधिकारी की नियुक्ति से अपने आप आरोप सिद्ध नहीं हो जाते।

हाईकोर्ट ने याचिका का किया निराकरण

14 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित नईदुनिया की रिपोर्ट और 15 अक्टूबर को प्रकाशित अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने अदालत को आरोप-पत्र जारी होने और अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव की जानकारी दी।

सरकार के जवाब और की गई कार्रवाई पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता की याचिका का निराकरण कर दिया।

याचिका का निराकरण होने का अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने रतन लाल डांगी को आरोपों में दोषी ठहरा दिया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, इस सुनवाई में मुख्य विषय विभागीय जांच की प्रक्रिया और अधिकारियों की नियुक्ति था।

पहले भी निलंबित हो चुके हैं रतन लाल डांगी

रतन लाल डांगी को मार्च 2026 में विभागीय कार्रवाई के तहत निलंबित किया गया था। उस समय मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि उनके आचरण को लेकर प्रारंभिक जांच में प्रथमदृष्टया प्रतिकूल तथ्य सामने आए थे।

डांगी ने पहले इन आरोपों से इनकार किया था और शिकायतकर्ता पर उन्हें ब्लैकमेल करने के आरोप लगाए थे। इसलिए मामले में शिकायतकर्ता के आरोपों के साथ-साथ अधिकारी के पक्ष को भी ध्यान में रखना जरूरी है। इन पर अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच या न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निकाला जा सकता है।

आगे क्या होगा?

अब विभागीय जांच में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संबंधित दस्तावेजों, साक्ष्यों और पक्षों के जवाबों पर विचार किया जाना है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर सक्षम प्राधिकारी नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर सकता है।

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों से यह स्पष्ट नहीं होता कि विभागीय जांच का अंतिम निष्कर्ष कब आएगा या उसके आधार पर आगे क्या कार्रवाई की जाएगी।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ के निलंबित IPS अधिकारी रतन लाल डांगी के खिलाफ मामले में 20 अप्रैल 2026 को जारी विभागीय आरोप-पत्र और शिकायतकर्ता की आपत्ति के बाद प्रस्तुतकर्ता अधिकारी में किया गया बदलाव प्रमुख घटनाक्रम हैं। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से दी गई जानकारी के बाद याचिका का निराकरण किया है। अब मामले में आगे की स्थिति विभागीय जांच के निष्कर्षों और नियमानुसार की जाने वाली कार्रवाई पर निर्भर करेगी।

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