Media24Media.com: ब्रेकिंग न्यूज़: अमेरिका के ग्रीन कार्ड और वीजा नियमों में बदलाव से भारतीय IT सेक्टर की चिंता बढ

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ब्रेकिंग न्यूज़: अमेरिका के ग्रीन कार्ड और वीजा नियमों में बदलाव से भारतीय IT सेक्टर की चिंता बढ

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अमेरिका की इमिग्रेशन नीतियों में बदलाव की खबरों के बीच भारतीय IT पेशेवरों और अमेरिकी कंपनियों में काम करने की योजना बना रहे भारतीय युवाओं के बीच चिंता बढ़ी है। खास तौर पर ग्रीन कार्ड, H-1B वर्क वीजा और रोजगार-आधारित स्थायी निवास की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

भारत की कई IT कंपनियां अमेरिकी बाजार में सेवाएं देती हैं और भारतीय इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर तथा तकनीकी विशेषज्ञ अमेरिकी कंपनियों में भी बड़ी संख्या में काम करते हैं। इसलिए वीजा या इमिग्रेशन प्रक्रिया में बदलाव का असर कर्मचारियों की नियुक्ति, विदेश में तैनाती और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है।

महत्वपूर्ण बात: ग्रीन कार्ड और H-1B वीजा अलग-अलग इमिग्रेशन व्यवस्थाएं हैं। किसी एक कार्यक्रम पर लगी रोक का अर्थ यह नहीं है कि अमेरिका में सभी भारतीय IT कर्मचारियों का काम या हर प्रकार का वीजा अपने-आप बंद हो गया है।

अमेरिका ने किन कंपनियों पर कार्रवाई की

8 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ने आठ टेक्नोलॉजी कंपनियों को रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण चरण PERM (Permanent Labor Certification) में भाग लेने से निलंबित किया है। नई अर्जियां स्वीकार करने और लंबित अर्जियों की प्रक्रिया रोकने की जानकारी दी गई है।

प्रभावित कंपनियों में शामिल हैं:

  • Tata Consultancy Services (TCS)

  • Infosys

  • Wipro

  • HCLTech

  • Cognizant

  • Microsoft

  • Adobe

  • Capgemini

अमेरिकी अधिकारियों ने रोजगार-आधारित इमिग्रेशन कार्यक्रमों के कथित दुरुपयोग और अमेरिकी कर्मचारियों के हितों से जुड़े सवाल उठाए हैं। ये प्रशासन के आरोप और कार्रवाई के पीछे बताए गए कारण हैं; इन्हें सभी प्रभावित कंपनियों के विरुद्ध सिद्ध अपराध नहीं समझना चाहिए।

 PERM क्या है और ग्रीन कार्ड से इसका क्या संबंध है?

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PERM अमेरिका में रोजगार के आधार पर ग्रीन कार्ड पाने की कुछ श्रेणियों में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसमें नियोक्ता को यह प्रमाणित करना होता है कि संबंधित नौकरी के लिए आवश्यक अमेरिकी श्रमिक उपलब्धता और श्रम बाजार संबंधी शर्तें पूरी की गई हैं।

सरल शब्दों में:

  • H-1B वीजा: योग्य विदेशी पेशेवरों को अमेरिका में विशेष प्रकार की नौकरी करने की अनुमति देता है।

  • PERM: रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड की कुछ अर्जियों के लिए श्रम प्रमाणन का चरण है।

  • ग्रीन कार्ड: अमेरिका में स्थायी निवासी का दर्जा देता है।

इसलिए PERM प्रक्रिया पर रोक का मतलब सभी ग्रीन कार्ड या सभी H-1B वीजा पर प्रतिबंध नहीं है।

भारतीय IT कर्मचारियों पर क्या असर पड़ सकता है?

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ग्रीन कार्ड का इंतजार बढ़ सकता है

प्रभावित कंपनियों के माध्यम से रोजगार-आधारित स्थायी निवास की प्रक्रिया में शामिल कर्मचारियों को देरी और अनिश्चितता का सामना करना पड़ सकता है।

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H-1B कर्मचारियों की स्थिति अलग है

भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि PERM और H-1B अलग प्रक्रियाएं हैं। इस कार्रवाई से मौजूदा H-1B वीजा धारकों का वैध दर्जा अपने-आप रद्द नहीं होता।

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नियुक्ति और कर्मचारियों की तैनाती पर असर संभव

कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों की भर्ती, स्थानीय टीमों के विस्तार और कर्मचारियों की विदेश में तैनाती की योजनाओं की समीक्षा कर सकती हैं। हालांकि, तत्काल बड़े पैमाने पर छंटनी होने की पुष्टि नहीं है।

TCS ने क्या कहा?

भारत की प्रमुख IT कंपनी TCS ने कहा है कि अमेरिकी PERM कार्यक्रम से जुड़ी कार्रवाई का उसकी कार्यबल रणनीति या ग्राहकों को दी जाने वाली सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।

कंपनी ने यह भी बताया कि उसने पिछले दो वर्षों में PERM आवेदन बहुत कम संख्या में किए थे। TCS अमेरिका में स्थानीय भर्ती जारी रखने की योजना बना रही है और अगले पांच वर्षों में वहां 15,000 कर्मचारियों की भर्ती करने का लक्ष्य बताया गया है।

भारतीय शेयर बाजार पर क्या असर पड़ा?

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अमेरिकी फैसले के बाद भारतीय IT कंपनियों के कारोबार और निवेशकों की चिंताओं पर चर्चा हुई। 8 अक्टूबर को अमेरिकी बाजार में Infosys और Wipro के ADR में लगभग 3% की गिरावट की रिपोर्ट आई। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी भारतीय IT शेयरों में समान गिरावट आई।

विश्लेषकों के अनुसार, भारतीय IT कंपनियां पहले की तुलना में अमेरिकी बाजार में स्थानीय भर्ती पर अधिक ध्यान दे रही हैं। इससे PERM कार्यक्रम पर निर्भरता कम हुई है, लेकिन लंबी अवधि में कुशल कर्मचारियों को बनाए रखने और भर्ती की लागत पर असर पड़ सकता है।

भारत सरकार की क्या प्रतिक्रिया है?

भारत के विदेश मंत्रालय ने 9 अक्टूबर को इस कदम पर चिंता जताई और कुशल भारतीय पेशेवरों की आवाजाही तथा भारत-अमेरिका के साझा आर्थिक हितों के महत्व को रेखांकित किया।

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि PERM प्रक्रिया और H-1B वीजा अलग हैं। इसलिए मौजूदा H-1B वीजा धारकों और उनके आश्रितों की वैध स्थिति पर इस फैसले का सीधा स्वचालित प्रभाव नहीं पड़ता।

अब भारतीय IT पेशेवर क्या करें?

यदि कोई कर्मचारी प्रभावित कंपनियों में काम करता है और ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया में है, तो उसे:

  1. अपने PERM आवेदन की मौजूदा स्थिति नियोक्ता या इमिग्रेशन वकील से पता करनी चाहिए।

  2. H-1B वीजा की वैधता और विस्तार की समय-सीमा अलग से जांचनी चाहिए।

  3. यह पुष्टि करनी चाहिए कि उसका मामला PERM पर निर्भर है या किसी अन्य रोजगार-आधारित श्रेणी में आता है।

  4. बिना व्यक्तिगत कानूनी सलाह के नौकरी छोड़ने या वीजा संबंधी बड़ा फैसला लेने से बचना चाहिए।

निष्कर्ष: अमेरिका की यह कार्रवाई भारतीय IT कर्मचारियों के लिए मुख्य रूप से रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को लेकर चिंता पैदा करती है। लेकिन इसे सभी भारतीय कर्मचारियों के वीजा रद्द होने या IT कंपनियों का अमेरिकी कारोबार बंद होने के रूप में पेश करना गलत होगा।


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