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भारत की क्वांटम साइबर सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम

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क्वांटम कंप्यूटिंग से उत्पन्न होने वाले नए साइबर खतरों से निपटने के लिए भारत की साइबर सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। दूरसंचार विभाग (DoT) के तहत भारत सरकार की प्रमुख दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास संस्था सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) ने Synergy Quantum India Private Limited के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कंपनी हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों क्षेत्रों में पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी समाधान प्रदान करती है।

इस समझौते का उद्देश्य एक स्वचालित टूल विकसित करना है, जो उपकरणों में उपयोग होने वाले क्रिप्टोग्राफिक एल्गोरिदम की पहचान करेगा, उन्हें वर्गीकृत करेगा और क्वांटम-संवेदनशील एल्गोरिदम की रिपोर्ट तैयार करेगा। यह टूल किसी डिवाइस को स्कैन करके उसके सुरक्षा तंत्र और एल्गोरिदम का पता लगाएगा, क्वांटम-सुरक्षित और क्वांटम-संवेदनशील एल्गोरिदम के बीच अंतर करेगा और विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगा ताकि भविष्य में क्वांटम-सुरक्षित सुरक्षा प्रणाली में संक्रमण की योजना बनाई जा सके।

इस समाधान के तीन मुख्य मॉड्यूल होंगे:

  1. वेब एप्लिकेशन: नेटवर्क ट्रैफिक, कमजोरियों और क्वांटम जोखिमों का बाहरी स्कैनिंग।

  2. सिक्योरिटी स्कैनर एजेंट: डिवाइस के अंदर लाइब्रेरी और एंडपॉइंट सुरक्षा का आंतरिक स्कैन।

  3. कंट्रोल सॉफ्टवेयर: एजेंट इंस्टॉलेशन, स्कैन संचालन और सभी कमजोरियों की रिपोर्ट तैयार करना।

यह सहयोग रक्षा, दूरसंचार, बैंकिंग और सरकारी क्षेत्रों सहित महत्वपूर्ण नेटवर्क और उपकरणों में क्रिप्टोग्राफिक कमजोरियों का प्रारंभिक पता लगाने में मदद करेगा और संस्थानों को पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी की ओर संक्रमण में सहायता करेगा।

यह साझेदारी “आत्मनिर्भर भारत” पहल के अनुरूप स्वदेशी अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देगी और भारत को क्वांटम सुरक्षा तकनीक में वैश्विक अग्रणी बनाने में मदद करेगी।

C-DOT के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने कहा कि क्वांटम कंप्यूटिंग के विकास के साथ पारंपरिक क्रिप्टोग्राफी प्रणालियों को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और यह सहयोग भारत के डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए स्वदेशी समाधान विकसित करने की प्रतिबद्धता दर्शाता है।

Synergy Quantum के सह-संस्थापक और सीईओ जय ओबेरॉय ने कहा कि यह साझेदारी भारत की क्वांटम-सुरक्षित सुरक्षा यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और यह टूल सरकारी और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा क्षेत्रों को क्वांटम जोखिमों का आकलन करने और उन्हें कम करने में सक्षम बनाएगा।

समझौता हस्ताक्षर समारोह में C-DOT और Synergy Quantum के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि उपस्थित थे।

C-DOT के बारे में:

C-DOT भारत सरकार के संचार मंत्रालय के अंतर्गत एक प्रमुख दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास संस्था है, जिसने क्वांटम-सुरक्षित तकनीकों और क्वांटम की वितरण (QKD) प्रणालियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

Synergy Quantum के बारे में:

Synergy Quantum एक संप्रभु क्वांटम सुरक्षा कंपनी है, जो राष्ट्रों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा संचालकों को क्वांटम युग में सुरक्षित डिजिटल प्रणालियाँ बनाए रखने में सक्षम बनाती है।


AWS सर्वर डाउन: स्नैपचैट, फोर्टनाइट और कई ऐप्स घंटों तक बंद

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ग्लोबल टेक आउटेज: Amazon Web Services (AWS) ठप होने से दुनिया भर में हड़कंप

क्या हुआ?

20 अक्टूबर 2025 को अमेज़न वेब सर्विसेज (AWS) में बड़ा तकनीकी संकट आया, जिससे दुनियाभर की हजारों वेबसाइट्स और ऐप्स ठप पड़ गईं। AWS का US-EAST-1 रीजन (नॉर्दर्न वर्जीनिया) सबसे ज्यादा प्रभावित रहा — यही सर्वर दुनिया की कई बड़ी डिजिटल सेवाओं का केंद्र है।

किन सेवाओं पर असर पड़ा

  • Snapchat, Fortnite, Roblox, Ring, Alexa, Coinbase, Disney+ Hotstar, Paytm जैसी प्रमुख ऐप्स और वेबसाइट्स बंद हो गईं।

  • कई देशों में बैंकिंग, ई-कॉमर्स, सरकारी पोर्टल्स और क्लाउड-बेस्ड बिज़नेस सिस्टम्स भी प्रभावित रहे।

  • यूके और यूरोप में भी कई सरकारी वेबसाइट्स डाउन रहीं।

 कारण क्या था

AWS के मुताबिक, यह दिक्कत उनके DNS रिज़ॉल्यूशन सिस्टम और DynamoDB सर्विस में आई तकनीकी खराबी के कारण हुई।इस वजह से सर्वर कनेक्शन और डेटा एक्सेस ठप पड़ गए।
कंपनी ने स्थिति संभालने के लिए लोड कम किया, सर्वर शिफ्ट किए और रिकवरी प्रोटोकॉल शुरू किया।

 कितने घंटे रही दिक्कत

  • सुबह से शुरू हुई यह समस्या शाम तक जारी रही।

  • देर रात तक AWS ने बयान जारी कर कहा कि अधिकांश सेवाएँ अब सामान्य हो चुकी हैं।

 क्यों है यह घटना बड़ी

  • इस घटना ने दिखा दिया कि दुनिया की डिजिटल व्यवस्था कुछ गिने-चुने क्लाउड प्रदाताओं पर निर्भर है।

  • एक छोटे से तकनीकी फेल्योर ने ग्लोबल इंटरनेट इकोसिस्टम को हिला दिया।

  • विशेषज्ञों का कहना है कि यह "सेंट्रलाइजेशन" का खतरा है — जब बहुत सारी कंपनियाँ एक ही सर्वर पर निर्भर रहती हैं।

  • यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या क्लाउड कंपनियों को "क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर" माना जाना चाहिए।

निष्कर्ष

यह घटना याद दिलाती है कि कोई भी सिस्टम 100% सुरक्षित नहीं होता। डिजिटल युग में कंपनियों को चाहिए कि वे

  • अपने डेटा का बैकअप अलग-अलग सर्वरों पर रखें,

  • क्लाउड पर निर्भरता घटाएँ,

  • और डिज़ास्टर रिकवरी प्लान तैयार रखें।

भारत ने अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा 5G मार्केट बनने का कीर्तिमान स्थापित किया

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नई दिल्ली- भारत ने एक महत्वपूर्ण डिजिटल मील का पत्थर हासिल करते हुए अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा 5G बाजार बनने का गौरव प्राप्त किया है। यह उपलब्धि देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था और स्मार्ट कनेक्टिविटी के क्षेत्र में तेजी से प्रगति को दर्शाती है।

हाल के आंकड़ों के अनुसार, भारत में इस समय लगभग 5 करोड़ से अधिक 5G उपयोगकर्ता हैं, और आने वाले वर्षो में यह संख्या और भी बढ़ने की संभावना है। 5G नेटवर्क के तेजी से विस्तार और मोबाइल इंटरनेट की उच्च गति वाली सेवाओं के साथ, भारत में औद्योगिक, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में डिजिटल रूपांतरण की गति बढ़ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह उपलब्धि न केवल उपभोक्ताओं के लिए बेहतर इंटरनेट अनुभव सुनिश्चित करेगी, बल्कि देश के आईटी और स्टार्टअप क्षेत्र के लिए नए अवसर भी उत्पन्न करेगी। इससे एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी, स्मार्ट सिटीज, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), और 5G आधारित नवाचारों में निवेश बढ़ने की संभावना है।

साथ ही, यह कदम भारत के “डिजिटल इंडिया” मिशन और वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा में देश की स्थिति को मजबूत करेगा। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, भारत आने वाले 3–5 वर्षों में दुनिया के टॉप 3 5G मार्केट्स में अपनी जगह और मजबूती से बनाएगा।

भारत की यह उपलब्धि वैश्विक निवेशकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकती है, जिससे देश में 5G तकनीक और बुनियादी ढांचे के विकास में और तेजी आएगी।


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