Media24Media.com: परिवर्तिनी एकादशी पर करवट बदलेंगे भगवान विष्णु, जानें व्रत की सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

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परिवर्तिनी एकादशी पर करवट बदलेंगे भगवान विष्णु, जानें व्रत की सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

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 Parivartini Ekadashi 2026: परिवर्तिनी एकादशी के व्रत को लेकर इस बार लोगों के मन में तारीख को लेकर सवाल है। कोई 21 सितंबर को एकादशी बता रहा है तो कहीं 22 सितंबर की तारीख दी गई है। पंचांग के अनुसार, इस बार परिवर्तिनी एकादशी का व्रत 22 सितंबर 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। एकादशी तिथि 21 सितंबर की रात शुरू होगी और 22 सितंबर की रात तक रहेगी।


इसी वजह से दोनों तारीखों को लेकर भ्रम बना हुआ है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की इस एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी, पार्श्व एकादशी और वामन एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि चातुर्मास के दौरान भगवान विष्णु शयन करते हुए करवट बदलते हैं। इसी कारण इस एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है।

21 या 22 सितंबर, कब है परिवर्तिनी एकादशी?

पंचांग की गणना के अनुसार, परिवर्तिनी एकादशी की तिथि 21 सितंबर 2026 को रात करीब 8 बजे शुरू होगी। यह तिथि 22 सितंबर को रात करीब 9 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत 22 सितंबर को रखा जाएगा। इसलिए भक्तों को 22 सितंबर को एकादशी का व्रत रखना चाहिए।

परिवर्तिनी एकादशी का महत्व

परिवर्तिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इस दिन भक्त भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करते हैं। कई श्रद्धालु व्रत रखते हैं और दिनभर भगवान के नाम का जाप करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी का व्रत मन को संयमित रखने और भगवान की भक्ति में समय लगाने का अवसर देता है। इस दिन दान-पुण्य और जरूरतमंदों की मदद करने की परंपरा भी है। परिवर्तिनी एकादशी को भगवान विष्णु के वामन अवतार से भी जोड़ा जाता है। इसलिए कुछ स्थानों पर इस दिन वामन भगवान की विशेष पूजा की जाती है।

परिवर्तिनी एकादशी पर कैसे करें पूजा?

सुबह उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। भगवान को पीले फूल, फल, तुलसी दल और भोग अर्पित करें। पूजा के दौरान भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें। श्रद्धा के अनुसार विष्णु सहस्रनाम या विष्णु चालीसा का पाठ भी किया जा सकता है। शाम के समय दीपक जलाकर भगवान की आरती करें।
एकादशी पर क्या खाएं और क्या न खाएं?

एकादशी व्रत में आमतौर पर चावल, गेहूं और अन्य अनाज से बचने की परंपरा है। व्रत रखने वाले लोग फल, दूध, साबूदाना, कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन अपनी परंपरा के अनुसार खा सकते हैं। व्रत के नियम अलग-अलग परिवारों और संप्रदायों में अलग हो सकते हैं। इसलिए अपनी सुविधा और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर व्रत करें। जरूरत से ज्यादा तला-भुना भोजन करने से बचें और पर्याप्त पानी पिएं, यदि आपका व्रत इसकी अनुमति देता है।

कब होगा व्रत का पारण?

परिवर्तिनी एकादशी का पारण 23 सितंबर 2026, बुधवार को किया जाएगा। उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार, पारण का समय सुबह करीब 6 बजकर 10 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट के बीच बताया गया है।
परिवर्तिनी एकादशी पर कर सकते हैं ये उपाय

  • - भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें।
  • - जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन या आवश्यक वस्तुओं का दान करें।
  • - भगवान विष्णु के मंत्र का जाप करें।
  • - घर में साफ-सफाई रखें और शांत वातावरण में पूजा करें।
  • - अपनी क्षमता के अनुसार गरीबों और बुजुर्गों की मदद करें।

- पूजा के बाद परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करें।

परिवर्तिनी एकादशी व्रत कथा का महत्व

एकादशी के दिन भगवान विष्णु की व्रत कथा सुनने की परंपरा है। भक्त कथा के जरिए भगवान के वामन अवतार और राजा बलि से जुड़े प्रसंगों का स्मरण करते हैं। कई जगहों पर परिवर्तिनी एकादशी के दिन वामन भगवान की पूजा भी की जाती है। कथा सुनने के बाद भगवान विष्णु की आरती की जाती है। इसके बाद प्रसाद बांटा जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-पुण्य करते हैं।

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