Media24Media.com: ट्रंप के सांसद को मिर्ची: भारत के FCRA संशोधन बिल पर भड़के अमेरिकी नेता, बताया 'ईसाइयों पर हमला'

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ट्रंप के सांसद को मिर्ची: भारत के FCRA संशोधन बिल पर भड़के अमेरिकी नेता, बताया 'ईसाइयों पर हमला'

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 नई दिल्ली: भारत में संसद के मानसून सत्र के दौरान प्रस्तावित फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) संशोधन बिल को लेकर अमेरिका में सियासत तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद राइली मूर ने इस प्रस्तावित संशोधन पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे भारत में ईसाई समुदाय पर सीधा हमला करार दिया है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि इस कदम से भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।


अमेरिकी सांसद राइली मूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि भारत में ईसाई समुदाय का इतिहास बेहद प्राचीन है, जो सेंट थॉमस द एपोस्टल के मालाबार तट पर आगमन के समय से चला आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस लंबे और समृद्ध इतिहास के बावजूद भारत की संसद FCRA कानून में ऐसे संशोधन पर विचार कर रही है, जिससे सरकार को चर्चों और धार्मिक चैरिटेबल संस्थाओं के कामकाज पर नियंत्रण पाने का सीधा अधिकार मिल जाएगा। मूर ने कहा कि यदि यह बिल पास होता है, तो भारत और अमेरिका के आपसी रिश्ते चिंताजनक स्थिति में पहुंच सकते हैं।

क्या है FCRA कानून और संशोधन?

फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA), 2010 भारत में गैर-सरकारी संगठनों (NGOs), धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों तथा चैरिटेबल ट्रस्टों द्वारा विदेशों से प्राप्त होने वाले चंदे को नियंत्रित और विनियमित करता है। वर्तमान व्यवस्था के तहत विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाली संस्थाओं के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय में पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है। सरकार का उद्देश्य इस कानून के माध्यम से विदेशी फंड के पारदर्शी और वैध उपयोग को सुनिश्चित करना है।

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