Media24Media.com: मंगला गौरी व्रत और भौम प्रदोष आज एक साथ, बन रहा दुर्लभ संयोग! जानिए पूजा विधि और महत्व

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मंगला गौरी व्रत और भौम प्रदोष आज एक साथ, बन रहा दुर्लभ संयोग! जानिए पूजा विधि और महत्व

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 सावन का आखिरी मंगलवार इस बार धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। 25 अगस्त 2026 को मंगला गौरी व्रत के साथ भौम प्रदोष व्रत भी पड़ रहा है। मंगलवार के दिन प्रदोष व्रत पड़ने के कारण इसे भौम प्रदोष कहा जाता है। वहीं सावन के मंगलवार को रखा जाने वाला मंगला गौरी व्रत माता पार्वती को समर्पित होता है। ऐसे में एक ही दिन दोनों व्रत पड़ने से शिव और शक्ति की संयुक्त आराधना का विशेष अवसर बन रहा है।


क्यों खास है मंगला गौरी और भौम प्रदोष का संयोग?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। वहीं सावन के मंगलवार को माता गौरी की पूजा और व्रत करने की परंपरा है। जब मंगलवार के दिन प्रदोष तिथि पड़ती है, तो इसे भौम प्रदोष कहा जाता है।

इस वजह से 25 अगस्त का दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए विशेष माना जा रहा है। भक्त इस दिन अपनी श्रद्धा के अनुसार दोनों व्रत रखकर पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

शिव-पार्वती के साथ हनुमान जी की पूजा क्यों?

मंगलवार का संबंध भगवान हनुमान से भी माना जाता है। इसलिए इस दिन मंगला गौरी व्रत और भौम प्रदोष के साथ हनुमान जी की पूजा करना भी शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जी की आराधना से साहस, आत्मविश्वास और संकटों का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है। ऐसे में भक्त भगवान शिव, माता पार्वती और हनुमान जी का ध्यान कर सकते हैं।

शिव पूजा के दौरान शिवलिंग पर जल और दूध अर्पित कर बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा है। पूजा हमेशा अपनी पारिवारिक और धार्मिक परंपरा के अनुसार करनी चाहिए।

मंगला गौरी व्रत में क्या करें?

मंगला गौरी व्रत में माता पार्वती की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से यह व्रत रखती हैं।

पूजा में माता गौरी को रोली, अक्षत, फूल, फल और सुहाग सामग्री अर्पित करने की परंपरा है। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की एक साथ पूजा करना भी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे दांपत्य जीवन में प्रेम और आपसी सामंजस्य बढ़ता है।

एक दिन में तीन देव शक्तियों की आराधना

25 अगस्त का दिन इसलिए भी खास है क्योंकि इस दिन माता गौरी, भगवान शिव और मंगलवार के अधिष्ठाता माने जाने वाले हनुमान जी की पूजा का अवसर मिल रहा है। धार्मिक दृष्टि से इसे शिव-शक्ति और भक्ति के संगम के रूप में देखा जा रहा है।

पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

भौम प्रदोष व्रत में प्रदोष काल की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। शिव पूजा के दौरान बेलपत्र अर्पित करने की परंपरा है। वहीं भगवान शिव को तुलसी दल अर्पित नहीं किया जाता, इसलिए पूजा सामग्री का चयन करते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए।

ध्यान दें: व्रत, पूजा और धार्मिक मान्यताओं से जुड़े नियम अलग-अलग परंपराओं में भिन्न हो सकते हैं। इसलिए पूजा-विधि के लिए अपनी पारिवारिक परंपरा या स्थानीय विद्वान की सलाह को प्राथमिकता दें।

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