Media24Media.com: कामिका एकादशी 2026: आज रखा जा रहा है कामिका एकादशी का व्रत, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और खास मंत्र

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कामिका एकादशी 2026: आज रखा जा रहा है कामिका एकादशी का व्रत, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और खास मंत्र

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 Kamika Ekadashi 2026: सावन मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली पावन कामिका एकादशी आज, 9 अगस्त 2026 को पूरे श्रद्धा-भाव के साथ मनाई जा रही है। सनातन परंपरा में इस एकादशी का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा करने से जाने-अनजाने में हुए समस्त पापों का क्षय होता है और साधक को मोक्ष की प्राप्ति होती है।


पूजन सामग्री और आवश्यक तैयारी

पूजा शुरू करने से पहले लड्डू गोपाल जी या भगवान विष्णु की प्रतिमा, पीले वस्त्र, पीले फूल, केला, पेड़ा, रोली, चंदन, कपूर, धूप, दीप, पंचामृत और तांबे का कलश व्यवस्थित कर लें। ध्यान रखें कि पूजा के लिए केवल साबुत (बिना टूटे) चावल का ही प्रयोग करें। इसके अतिरिक्त, तुलसी के पत्ते एक दिन पूर्व (दशमी) के ही रखे होने चाहिए।

कामिका एकादशी की संपूर्ण पूजा विधि

प्रातः स्नान व संकल्प: एकादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और संभव हो तो पीले रंग के वस्त्र धारण करें। हाथ में जल, पुष्प और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें।

प्रतिमा स्थापना: पूजा स्थल को स्वच्छ करके लकड़ी की चौकी पर पीला कपड़ा बिछाएं और भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें।

अभिषेक व श्रृंगार: प्रभु को पंचामृत एवं गंगाजल से स्नान कराएं, वस्त्र पहनाएं और फिर पीले चंदन व रोली से तिलक लगाएं। तत्पश्चात पीले पुष्प, धूप, दीप और फल अर्पित करें।

भोग व आरती: भगवान को अर्पित किए जाने वाले पंचामृत और मिष्ठान में तुलसी पत्र अवश्य शामिल करें, क्योंकि इसके बिना श्री हरि भोग स्वीकार नहीं करते। अंत में घी का दीपक जलाकर कामिका एकादशी की कथा सुनें और आरती उतारें।

सिद्धिदायक मंत्र एवं तुलसी अर्पण नियम

पूजा के दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का निरंतर जाप करें। इसके साथ ही महाविष्णु ध्यान मंत्र का पाठ करें:

शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।

लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्॥

तुलसी पत्र अर्पित करते समय इस मंत्र का उच्चारण करें:

तुलसि श्रीर्महालक्ष्मीर्विद्याविद्या यशस्विनी। धर्म्या धर्मानना देवी देवीदेवमनःप्रिया॥

तुलसी पूजन का विशेष नियम: एकादशी तिथि के दिन तुलसी के पत्ते तोड़ना सख्त वर्जित होता है। इसलिए पूजा के लिए तुलसी दल एक दिन पूर्व यानी दशमी तिथि को ही तोड़कर सुरक्षित रख लेना चाहिए।

व्रत के नियम और पारण की सही विधि

आहार पर नियंत्रण: एकादशी के दिन चावल, लहसुन, प्याज और किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन का सेवन न करें। व्रती केवल दूध, फल और फलाहार पर ही रहें।

रात्रि जागरण: एकादशी की रात भगवान विष्णु के नाम का भजन-कीर्तन या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।

पारण विधि: व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को सूर्योदय के बाद शुभ मुहूर्त में करें। स्वयं पारण करने से पहले किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं अथवा दान-दक्षिणा दें।

 

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