Media24Media.com: छत्तीसगढ़ में ​सरकारी विज्ञापन के लिए अब नए प्रारूप में ही करना होगा आवेदन, नियमों का उल्लंघन पड़ेगा भारी

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छत्तीसगढ़ में ​सरकारी विज्ञापन के लिए अब नए प्रारूप में ही करना होगा आवेदन, नियमों का उल्लंघन पड़ेगा भारी

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 नवा रायपुर। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क संचालनालय ने पाक्षिक, मासिक, द्विवार्षिक, वार्षिक समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं को सरकारी प्रदर्शन विज्ञापन जारी करने के संबंध में नए और कड़े निर्देश जारी किए हैं। अब विज्ञापन पाने के लिए प्रकाशकों को निर्धारित प्रारूप में और लेटर पैड पर ही आवेदन करना होगा। किसी भी अन्य प्रारूप या अधूरी जानकारी वाले आवेदन को सीधे तौर पर खारिज कर दिया जाएगा।


सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सब्जी बेचने वाले और कबाड़ी और ट्रांसपोर्ट से जुड़े व्यवसायी भी खुद को पत्रकार बताकर लंबे अर्से से सरकार को चूना लगा रहे थे, जिसे रोकने और व्यवस्था में अधिक पारदर्शिता लाने के लिए सरकार और जनसंपर्क विभाग की ओर से सख्त कदम उठाया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि जनसंपर्क विभाग के विभागीय मंत्री मुख्यमंत्री विष्णु देव साय हैं।

​ एक परिवार, एक ही विज्ञापन

​नए नियमों के मुताबिक, एक आवेदक या उसके परिवार के किसी सदस्य के केवल एक ही प्रकाशन को सरकारी विज्ञापन का लाभ मिल सकेगा। यदि किसी ने गलत जानकारी देकर एक से अधिक प्रकाशनों के लिए विज्ञापन लिया, तो दी गई राशि वापस वसूल की जा सकेगी। साथ ही, उस प्रकाशन को भविष्य में हमेशा के लिए विज्ञापनों से वंचित (ब्लैकलिस्ट) किया जा सकता है।

​ सोशल मीडिया और RNI/PRGI की जानकारी देना अनिवार्य

​पारदर्शिता बढ़ाने और सुदृढ़ व्यवस्था के लिए विभाग ने अब प्रकाशन के डिजिटल मौजूदगी को भी अनिवार्य किया है। आवेदकों को अपने फेसबुक, ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम अकाउंट के नाम के साथ फॉलोअर्स की सही संख्या बतानी होगी। इसके अलावा, यह लिखित में देना होगा कि पत्रिका का टाइटल RNI/PRGI (रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया) की 'डिफन्क्ट' (निष्क्रिय) सूची में शामिल नहीं है। आर.एन.आई. द्वारा केवल शीर्षक सत्यापन के आधार पर विज्ञापन नहीं मिलेगा। अर्थात पंजीकरण का पुख्ता प्रमाण पत्र संलग्न करना अनिवार्य है।

​ मूल हस्ताक्षर, प्रमाणीकरण और दस्तावेज जरूरी

​आवेदन पत्र के साथ सभी जरूरी दस्तावेज संलग्न करने होंगे। ध्यान रहे कि आवेदन पर सभी पदमुद्रा (सील) और हस्ताक्षर मूल (ओरिजनल) होने चाहिए; फोटोकॉपी बिल्कुल मान्य नहीं होगी। अन्य प्रान्तों के प्रकाशन द्वारा ईमेल आदि पर भेजे जाने वाले आवेदन स्वीकार्य नहीं किया जाएगा।

​ आवेदन के साथ ये 5 दस्तावेज लगाना जरूरी है:-

विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए आवेदन के प्रारूप के साथ ही निम्नलिखित दस्तावेज संलग्न किया जाना अनिवार्य कर दिया गया है।
1. ​स्व-हस्ताक्षरित RNI/PRGI पंजीयन प्रमाण-पत्र
2. ​जिला जनसंपर्क कार्यालय द्वारा जारी नियमित प्रकाशन का प्रमाण-पत्र
3. ​DAVP, ABC या CA द्वारा जारी प्रसार संख्या (सर्कुलेशन) का प्रमाण-पत्र
4. ​यदि DAVP दर लागू हो, तो उसकी छायाप्रति
5. ​पत्रिका के नवीनतम अंक की मूल प्रति

​कॉपीराइट और प्रिंटिंग को लेकर सख्त हिदायत

​संपादक और मुद्रक (प्रिंटर) को आवेदन के साथ स्व-प्रमाण पत्र देना होगा, जिसमें इन बातों की कड़ाई से पुष्टि करनी होगी कि-

​ सामग्री मौलिक हो: प्रकाशित समाचार और लेख स्वयं के स्रोत से होने चाहिए और उन पर 'बायलाइन' होनी चाहिए।
​ क्रेडिट लाइन जरूरी: अन्य स्रोतों से ली गई खबरों पर संबंधित स्रोत को क्रेडिट देना अनिवार्य है। भारतीय कॉपीराइट एक्ट 1957 की धारा 51 का किसी भी हाल में उल्लंघन न हो।
​नो अल्टर/डिजिटल प्रिंट: पत्रिका में किसी भी तरह के 'अल्टर मुद्रण' या 'डिजिटल प्रिंट' का उपयोग नहीं होना चाहिए। मुद्रक को प्रतियों की सटीक संख्या की घोषणा करनी होगी।
​नियमों का पालन न करने वाले प्रकाशकों के आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।

सख्ती से मचा हड़कंप

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नए और सख्त नियमों से ऐसे प्रकाशन की छटनी हो जाएगी, जो फर्जीवाड़ा करके विज्ञापन ले रहे हैं। बताया गया है कि कुछ लोग इसके लिए रैकेट चला रहे हैं। अपने करीबी लोगों, रिश्तेदारों के नाम पर पंजीयन कराकर विज्ञापन ले रहे हैं, जिनका पत्रकारिता से दूर-दूर तक नाता नहीं है।
विभाग की इस सख्ती से ऐसे लोगों में हड़कंप मच गया है, जो कथित प्रकाशन के नाम पर विभाग को लंबे अर्से से चूना लगाते आ रहे हैं।

देखिये- आवेदन पत्र का प्रारूप



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