Media24Media.com: मानव–वन्यजीव संघर्ष पर उत्कृष्टता केंद्र (CoE) का उद्घाटन, मानव–वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन को मिलेगा नया आयाम

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मानव–वन्यजीव संघर्ष पर उत्कृष्टता केंद्र (CoE) का उद्घाटन, मानव–वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन को मिलेगा नया आयाम

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केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज कोयंबटूर में मानव–वन्यजीव संघर्ष पर उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence - CoE) का उद्घाटन किया। उद्घाटन के पश्चात राष्ट्रीय मानव–वन्यजीव संघर्ष कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर के वरिष्ठ नीति-निर्माता, वन प्रबंधक, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, तकनीकी विशेषज्ञ और संरक्षण क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह भी उपस्थित रहे।

अपने मुख्य संबोधन में भूपेंद्र यादव ने कहा कि आवास क्षेत्रों के विखंडन, भूमि उपयोग में बदलाव और मानव गतिविधियों के विस्तार के कारण मानव और वन्यजीवों के बीच संपर्क बढ़ रहा है, जिससे मानव–वन्यजीव संघर्ष भारत की प्रमुख संरक्षण और विकास संबंधी चुनौतियों में से एक बन गया है। उन्होंने कहा, "हमें समस्या-केंद्रित नहीं, बल्कि समाधान-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और आधुनिक तकनीकी प्रगति का उपयोग करना चाहिए।"

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की सातवीं बैठक में की गई घोषणा के अनुरूप स्थापित यह उत्कृष्टता केंद्र मानव–वन्यजीव संघर्ष के वैज्ञानिक एवं साक्ष्य-आधारित प्रबंधन को सुदृढ़ करने के लिए अनुसंधान, नवाचार, नीति समर्थन, क्षमता निर्माण तथा सर्वोत्तम प्रथाओं के प्रसार का राष्ट्रीय केंद्र बनेगा।

यादव ने कहा कि संस्थान को टाइगर रिजर्व के बाहर बाघों, तेंदुओं और हाथियों से जुड़े मानव–वन्यजीव संघर्षों के प्रबंधन हेतु नीति निर्माण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मानव–वन्यजीव मुठभेड़ों से निपटने के लिए मिशन मोड में जनजागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए। क्षेत्र-विशिष्ट और प्रजाति-विशिष्ट उपाय अपनाकर ऐसे संघर्षों का समाधान किया जा सकता है, जिससे समाज में फैलने वाली घबराहट को कम करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने देशभर के वन विभागों से भी अपील की कि वे मानव बस्तियों और फसलों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए सक्रिय एवं निवारक उपाय अपनाएं। इसके लिए स्थानीय समुदायों के साथ समन्वित और बहु-हितधारक परामर्श आधारित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण में नवीनतम तकनीकों का उपयोग कर नवाचारी सर्वोत्तम प्रथाओं को विकसित और व्यापक रूप से लागू किया जाना चाहिए। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा, "पारिस्थितिकीय स्थिरता के लिए संघर्ष नहीं, बल्कि सह-अस्तित्व और सामंजस्य हमारा मंत्र होना चाहिए।"

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण की सफलता के कारण मानव–वन्यजीव संपर्क बढ़ा है, जो अब संरक्षण के साथ-साथ एक बड़ा सामाजिक-आर्थिक मुद्दा भी बन गया है और आजीविका पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल रहा है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण और देश की सामाजिक-आर्थिक प्रगति के बीच संतुलन स्थापित करते हुए दीर्घकालिक समाधान खोजने की आवश्यकता है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्कृष्टता केंद्र अधिकारियों और समुदायों के क्षमता निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साथ ही यह उन्नत तकनीकों के माध्यम से डेटा दस्तावेजीकरण तथा वन्यजीव संरक्षण में पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण को बढ़ावा देगा, जिससे मानव और वन्यजीवों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को मजबूती मिलेगी।

उद्घाटन सत्र के दौरान मंत्री ने राष्ट्रीय मानव–वन्यजीव संघर्ष पोर्टल का भी शुभारंभ किया। यह डिजिटल मंच देशभर में संघर्ष प्रबंधन के लिए डेटा प्रबंधन, ज्ञान साझाकरण और निर्णय समर्थन प्रदान करेगा। इसके साथ ही "भारत में मानव–वन्यजीव संघर्ष की वर्तमान स्थिति: एक अवलोकन" शीर्षक प्रकाशन श्रृंखला के प्रथम संस्करण का भी विमोचन किया गया, जिसमें देश में मानव–वन्यजीव संघर्ष की वर्तमान स्थिति, रुझानों और उभरती चुनौतियों का व्यापक आकलन प्रस्तुत किया गया है।

कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में मानव–वन्यजीव संघर्ष पोर्टल का लाइव प्रदर्शन किया गया तथा विशेषज्ञ प्रस्तुतियों और पैनल चर्चाओं का आयोजन हुआ। चर्चा के प्रमुख विषय रहे:

  • मानव–हाथी संघर्ष

  • मानव–बड़ी बिल्ली (बाघ एवं तेंदुआ) संघर्ष

  • मानव–वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण में प्रौद्योगिकी और नवाचार

इन विचार-विमर्शों से राष्ट्रीय रणनीतियों को सुदृढ़ करने, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने, विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय बढ़ाने और मानव–वन्यजीव सह-अस्तित्व को मजबूत करने के लिए ठोस सुझाव प्राप्त होंगे।

मानव–वन्यजीव संघर्ष पर उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना जैव विविधता संरक्षण और मानव जीवन एवं आजीविका की सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए भारत सरकार की विज्ञान-आधारित, प्रौद्योगिकी-सक्षम और समुदाय-केंद्रित प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

कार्यक्रम में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव, वन महानिदेशक एवं विशेष सचिव, अतिरिक्त महानिदेशक (वन्यजीव), भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक, मंत्रालय एवं राज्य वन विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, शैक्षणिक संस्थानों और सहयोगी संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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