Media24Media.com: छात्राओं से मोबाइल पर कथित अश्लील वार्तालाप, व्याख्याता पर विभागीय शिकंजा

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छात्राओं से मोबाइल पर कथित अश्लील वार्तालाप, व्याख्याता पर विभागीय शिकंजा

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 राजनांदगांव। छात्राओं के प्रति कथित अशोभनीय व्यवहार और मोबाइल फोन पर अनुचित वार्तालाप के आरोपों में घिरे शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सुरगी के व्याख्याता एलबी सुशील नारायण शर्मा के खिलाफ जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने सख्त कार्रवाई की अनुशंसा की है। डीईओ कार्यालय ने मामले से संबंधित निरीक्षण प्रतिवेदन, प्रारंभिक परीक्षण, समाचार पत्रों में प्रकाशित तथ्यों और पुलिस द्वारा दर्ज अपराध के आधार पर लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) को प्रस्ताव भेजते हुए शिक्षक के निलंबन एवं नियमित विभागीय जांच की मांग की है।


प्रस्ताव में उल्लेख किया गया है कि व्याख्याता सुशील नारायण शर्मा के खिलाफ छात्राओं से अनुचित एवं अशोभनीय व्यवहार करने तथा मोबाइल फोन के माध्यम से कथित अश्लील वार्तालाप किए जाने की शिकायत प्राप्त हुई थी। मामला 18 मई 2026 को समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के बाद और अधिक गंभीरता से सामने आया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने शिक्षक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 75 और 79 सहित पॉक्सो एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया है।

डीईओ कार्यालय द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित शिक्षक का आचरण पूर्व में भी विवादों में रहा है। संभागीय संयुक्त संचालक शिक्षा, दुर्ग द्वारा 20 जून 2025 को किए गए विद्यालय निरीक्षण के दौरान शालेय अभिलेखों में कई अनियमितताएं पाई गई थीं। निरीक्षण में यह सामने आया था कि कला संकाय के 11वीं उत्तीर्ण विद्यार्थियों के नाम अगली कक्षा की उपस्थिति पंजी में दर्ज नहीं किए गए थे तथा विद्यालयीन गतिविधियों के संचालन में भी लापरवाही बरती जा रही थी।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों द्वारा प्राचार्य से जानकारी ली जा रही थी, तभी व्याख्याता सुशील नारायण शर्मा ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए कथित रूप से विवाद और अशोभनीय व्यवहार किया था। इस मामले में संयुक्त संचालक शिक्षा कार्यालय दुर्ग द्वारा उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उनके जवाब को असंतोषजनक पाए जाने के बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत कार्रवाई करते हुए एक वार्षिक वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोक दी गई थी।

अब छात्राओं से जुड़े गंभीर आरोप सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले को अत्यंत गंभीर माना है। डीईओ द्वारा डीपीआई को भेजे गए प्रस्ताव में कहा गया है कि प्रथम दृष्टया संबंधित शिक्षक का आचरण शासकीय सेवक के लिए अपेक्षित मर्यादा, अनुशासन और शिक्षकीय गरिमा के अनुरूप नहीं पाया गया है। प्रस्ताव में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम 3(1), 3(1)(क) एवं 3(1)(ग) के विपरीत प्रतीत होता है।

शिक्षा विभाग का मानना है कि इस प्रकरण से न केवल विभागीय अनुशासन प्रभावित हुआ है, बल्कि छात्राओं के बीच शैक्षणिक वातावरण और शिक्षण संस्था की गरिमा पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। मामले की विस्तृत जांच, तथ्यों के परीक्षण और जवाबदेही तय करने के लिए नियमित विभागीय जांच आवश्यक बताई गई है।

इसी आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी ने संबंधित व्याख्याता के खिलाफ निलंबन आदेश जारी किए जाने और विभागीय जांच संस्थित करने की अनुशंसा करते हुए प्रस्ताव डीपीआई को भेज दिया है। अब इस मामले में डीपीआई स्तर पर आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।

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