Media24Media.com: ​ खेती पर संकट: आरंग में फूटा किसानों का गुस्सा, खाद कटौती और डीजल किल्लत पर प्रदेशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूँका

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​ खेती पर संकट: आरंग में फूटा किसानों का गुस्सा, खाद कटौती और डीजल किल्लत पर प्रदेशव्यापी आंदोलन का बिगुल फूँका

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 ​आरंग (लखौली)। खेती-किसानी का नया सीजन शुरू होने से ठीक पहले किसानों के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। शासन द्वारा रासायनिक खाद की आपूर्ति में की गई भारी कटौती और ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार गहराते डीजल संकट ने आरंग क्षेत्र के अन्नदाताओं को सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। सरकार के इस फैसले के खिलाफ किसानों का आक्रोश अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है।


​खौली महापंचायत: आर-पार की लड़ाई का शंखनाद

​किसान नेता श्रवण चन्द्राकर ने बताया कि कृषि विश्वविद्यालय की एक बेहद विवादास्पद अनुशंसा को आधार बनाकर शासन ने खाद की मात्रा घटाने का फैसला किया है। इस आत्मघाती निर्णय के विरोध में बुधवार को ग्राम खौली में किसानों की एक विशाल महापंचायत आयोजित की गई। इस बैठक में आरंग क्षेत्र के सैकड़ों किसान एकजुट हुए और उन्होंने दो टूक शब्दों में शासन-प्रशासन को चेतावनी दी।


​किसानों का साफ कहना है कि यदि पूर्व में लागू खाद-बीज वितरण व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से बहाल नहीं किया गया, तो आगामी 20 मई को स्थानीय विधायक निवास का घेराव किया जाएगा। बात यहीं नहीं रुकेगी, इसके बाद इस आंदोलन की गूंज राजधानी रायपुर में मुख्यमंत्री निवास तक पहुंचेगी।

​ खेती को बर्बाद करने वाला फैसला

​महापंचायत में जुटे किसानों और किसान नेताओं ने सरकारी नीति पर तीखे सवाल उठाए। किसान नेता भूपेन्द्र शर्मा ने सरकार को घेरते हुए कहा:
​"एक तरफ सरकार खेती को लाभ का धंधा बनाने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर बिना कोई पर्याप्त जैविक विकल्प उपलब्ध कराए रासायनिक खाद की मात्रा में कटौती कर दी गई है। इस अव्यावहारिक फैसले से फसलों के उत्पादन में भारी गिरावट आएगी, जिससे किसान कर्ज के अंतहीन जाल में फंस जाएगा।"

​बैठक में इस बात पर भी गहरा रोष व्यक्त किया गया कि इस भीषण गर्मी के मौसम में किसान खेती की तैयारी करने के बजाय खाद और डीजल के लिए सोसायटियों और पेट्रोल पंपों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन हर जगह से उन्हें सिर्फ निराशा ही हाथ लग रही है।

​ दलगत राजनीति से ऊपर उठकर एकजुट हुए किसान

​आंदोलन की रूपरेखा तय करते हुए किसान नेताओं ने निर्णय लिया है कि पहले चरण में सोसायटियों के सामने शांतिपूर्ण धरना देकर ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस रणनीति को अमलीजामा पहनाने की जिम्मेदारी स्थानीय जागरूक युवाओं और पंचायत प्रतिनिधियों को सौंपी गई है। ​किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि समूचे किसान जगत के अस्तित्व की लड़ाई है। यही वजह है कि राजनीतिक भेदभाव को भुलाकर ग्राम खौली, टेकारी, कठिया, भानसोज सहित दर्जनों गांवों के प्रतिनिधि और ग्रामीण एक मंच पर आ चुके हैं।

​ एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, दी अंतिम मोहलत

​महापंचायत की समाप्ति के बाद, जिला पंचायत सदस्य वतन चन्द्राकर एवं किसान नेता पारस नाथ साहू के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) आरंग को मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहब के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन को व्यवस्था सुधारने की अंतिम मोहलत दी गई है।
​महापंचायत में ये रहे उपस्थित
​इस महत्वपूर्ण और निर्णायक बैठक में क्षेत्र के प्रमुख किसान नेता और ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित थे, जिनमें मुख्य रूप से:

​गोविंद चन्द्राकर
​श्रवण चन्द्राकर
​जनक राम आवड़े
​द्रोण चन्द्राकर
​मोनू चन्द्राकर
​चिंता राम वर्मा
​हिरेश चन्द्राकर
​कमल चन्द्राकर
​धनाजिक चन्द्राकर

​इनके साथ ही क्षेत्र के अनेक किसान, ग्रामीणजन एवं ऊर्जावान युवा कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने इस आंदोलन को हर स्तर पर सफल बनाने का संकल्प लिया।

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