Media24Media.com: होर्मुज संकट के बीच भारत को राहत: ईरान बोला- भारतीय जहाजों से नहीं वसूला जाएगा टोल

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होर्मुज संकट के बीच भारत को राहत: ईरान बोला- भारतीय जहाजों से नहीं वसूला जाएगा टोल

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 नई दिल्ली/तेहरान: होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसके जलक्षेत्र से गुजरने वाले भारतीय जहाजों से किसी प्रकार का टोल नहीं वसूला जाएगा और उन्हें भविष्य में भी सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराया जाएगा।


यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों और होर्मुज जलमार्ग के आसपास सख्त नाकेबंदी की घोषणा की है, जिससे वैश्विक समुद्री व्यापार पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

क्या बोले ईरानी राजदूत

भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फताली ने दूतावास में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि अब तक भारतीय जहाजों से कोई शुल्क नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा, “आप भारत सरकार से पुष्टि कर सकते हैं कि हमने कोई टोल वसूला है या नहीं। कठिन परिस्थितियों में भी हमारे संबंध मजबूत बने हुए हैं।

फताली ने भरोसा दिलाया कि भारतीय जहाजों को होर्मुज से सुरक्षित गुजरने दिया जाएगा और जल्द ही एक औपचारिक व्यवस्था भी घोषित की जाएगी, जिससे जहाजों की आवाजाही और सुगम हो सके।

भारत को बताया भरोसेमंद साथी

ईरान ने भारत को एक “विश्वसनीय और समझदार साझेदार” बताया। राजदूत ने कहा कि दोनों देशों के बीच न केवल रणनीतिक बल्कि सांस्कृतिक संबंध भी गहरे हैं, जो कठिन समय में और मजबूत हुए हैं।

फंसे भारतीय पोतों को निकालने की कोशिश

इस बीच, भारत का पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल के अनुसार, होर्मुज क्षेत्र में मौजूद 15 भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षित वापस लाने के प्रयास जारी हैं। इसके लिए विदेश मंत्रालय के साथ समन्वय किया जा रहा है।

अमेरिकी नाकेबंदी पर वैश्विक प्रतिक्रिया

ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मतभेद नजर आ रहे हैं। ब्रिटेन ने इस कदम का समर्थन करने से इनकार कर दिया है, जबकि ऑस्ट्रेलिया ने कहा है कि उसे इस संबंध में अमेरिका की ओर से कोई औपचारिक सूचना नहीं मिली है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ईरान का यह कदम भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक रूप से अहम माना जा रहा है। इससे भारतीय समुद्री व्यापार को राहत मिलने की उम्मीद है।

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