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BIG NEWS : जग्गी हत्याकांड में बड़ा फैसला: अमित जोगी को उम्रकैद, हाईकोर्ट ने 2007 का फैसला पलटा

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बिलासपुर। Chhattisgarh High Court ने 2003 के चर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए पूर्व विधायक अमित जोगी को दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई और 2007 में ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए बरी करने के फैसले को पलट दिया।


खंडपीठ ने सुनाया फैसला

मुख्य न्यायाधीश Ramesh Sinha और न्यायमूर्ति Arvind Kumar Verma की खंडपीठ ने सीबीआई की अपील और शिकायतकर्ता की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय दिया। अदालत ने अमित जोगी को आईपीसी की धारा 120-बी, 302/34 और 427/34 के तहत दोषी ठहराया।

क्या था मामला

Ram Avtar Jaggi, जो Nationalist Congress Party (एनसीपी) के नेता थे, की 4 जून 2003 को रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। हमलावरों ने उनकी कार पर फायरिंग की थी, जिसके बाद अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

CBI जांच में साजिश का खुलासा

मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंपी गई थी। जांच में यह सामने आया कि राजनीतिक साजिश के तहत हत्या कराई गई, ताकि एनसीपी की प्रस्तावित रैली को रोका जा सके।

अमित जोगी को मुख्य साजिशकर्ता माना

सीबीआई के अनुसार, Amit Jogi ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर पूरी साजिश रची और शूटर को हत्या की जिम्मेदारी सौंपी। अदालत ने गवाहों के बयान, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, विजिटर्स रजिस्टर और कबूलनामे को अहम साक्ष्य मानते हुए साजिश को प्रमाणित माना।

ट्रायल कोर्ट ने किया था बरी

गौरतलब है कि 2007 में ट्रायल कोर्ट ने अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि अन्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इस फैसले को सीबीआई और मृतक के परिजनों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि ट्रायल कोर्ट का निर्णय “पक्षपाती और साक्ष्यों के विपरीत” था। अदालत ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध साक्ष्य अमित जोगी की भूमिका को मुख्य साजिशकर्ता के रूप में स्थापित करते हैं।

सुप्रीम कोर्ट जाएंगे अमित जोगी

फैसले के बाद Amit Jogi ने Supreme Court of India का रुख किया है। हाईकोर्ट ने उन्हें तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश भी दिया है।

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