Media24Media.com: छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर बड़ी कामयाबी, टॉप कमांडर पापाराव ने किया सरेंडर

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छत्तीसगढ़ में नक्सल मोर्चे पर बड़ी कामयाबी, टॉप कमांडर पापाराव ने किया सरेंडर

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 जगदलपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ में नक्सल उन्मूलन अभियान को बड़ी सफलता मिलती दिख रही है। तय डेडलाइन 31 मार्च 2026 से पहले कुख्यात नक्सली पापाराव ने मंगलवार को पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। वह एके-47 जैसे आधुनिक हथियार के साथ सरेंडर करने पहुंचा। हालांकि इस संबंध में पुलिस की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।


बुधवार 25 मार्च को जगदलपुर में बस्तर आईजी सुंदरराज पी के समक्ष कुल 18 नक्सलियों के आत्मसमर्पण की औपचारिक घोषणा की जाएगी। इनमें 11 पुरुष और 7 महिला नक्सली शामिल हैं। ये नक्सली अपने साथ 8 एके-47 सहित अन्य हथियार भी लेकर पहुंचे हैं।


सूत्रों के अनुसार, इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और गृहमंत्री विजय शर्मा की उपस्थिति भी संभव है।

जंगल से पैदल निकलकर पहुंचे नक्सली

जानकारी के मुताबिक, नक्सली कई किलोमीटर तक जंगल के रास्ते पैदल चलकर बीजापुर पहुंचे, जहां से उन्हें बस के जरिए जगदलपुर लाया गया।

डीकेएसजेडसी सदस्य और रणनीतिकार रहा पापाराव

पापाराव, जिसका असली नाम मंगू दादा उर्फ चंद्रन्ना बताया जाता है, दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) का सदस्य और वेस्ट बस्तर डिवीजन का सचिव रहा है। वह लंबे समय से नक्सल गतिविधियों का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता रहा है। कुटरू-बेदरे रोड पर हुए आईईडी ब्लास्ट समेत कई बड़ी घटनाओं में उसकी संलिप्तता बताई जाती है, जिसमें आठ जवान शहीद हुए थे।

उस पर राज्य सरकार द्वारा 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। उसकी पत्नी उर्मिला भी पीएलजीए बटालियन की सदस्य थी, जो एक मुठभेड़ में मारी गई थी।

1990 के दशक से जुड़ा रहा नक्सल आंदोलन से

सुकमा जिले के निमलगुड़ा गांव निवासी पापाराव 1990 के दशक से माओवादी आंदोलन से जुड़ा हुआ था और उसकी उम्र 56 वर्ष से अधिक बताई जाती है।

सरकार का दावा—नक्सलवाद अंत की ओर

गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि पापाराव के आत्मसमर्पण के साथ छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में बड़ी उपलब्धि मिली है। उन्होंने दावा किया कि अब राज्य में बड़े कैडर का कोई नक्सली सक्रिय नहीं बचा है।

बताया जा रहा है कि अब तक 500 से अधिक नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं और बस्तर क्षेत्र में सक्रिय नक्सलियों की संख्या घटकर लगभग 100-125 रह गई है। ऐसे में इसे राज्य और केंद्र सरकार के संयुक्त अभियान की बड़ी सफलता माना जा रहा है।

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