Media24Media.com: छत्तीसगढ़ की संस्कृति में रचे-बसे हैं श्रीराम

Responsive Ad Slot

Latest

latest


 

छत्तीसगढ़ की संस्कृति में रचे-बसे हैं श्रीराम

Document Thumbnail

रामनवमी पर्व पर विशेष


छत्तीसगढ़ की धरती पर राम बसते हैं। यहां की संस्कृति में राम रचे-बसे हैं। यहां दिन की शुरुआत 'राम-राम' से होती है। और जीवन यात्रा का अंत होता है 'राम नाम सत्य है' से।

सुबह लोग उठते ही कहते हैं — हे राम। रात को सोने से पहले भी कहते हैं — 'हे राम, हे भगवान'। राम का नाम यहां के लोगों के मन में बसा है।

श्रीराम और भांचा राम

माता कौशल्या दक्षिण कोशल की बेटी थीं। दक्षिण कोशल आज का छत्तीसगढ़ है। इसी कारण छत्तीसगढ़ को भगवान श्रीराम का ननिहाल माना जाता है। 

छत्तीसगढ़ के लोग श्रीराम को अपना भांजा मानते हैं। भांजे को श्रीराम का रूप माना जाता है छत्तीसगढ़ में भांजे को बहुत सम्मान मिलता है। लोग भांजे को श्रीराम का स्वरूप मानते हैं। उसे प्रणाम करते हैं। यहाँ पर भांजे के पांव पखारने की परंपरा है। उसकी पूजा-आरती की जाती है। भांजे को दान भी दिया जाता है। इसे भांचा दान कहा जाता है। कई परिवार भांजे का पालन-पोषण भी करते हैं। उसे अच्छे संस्कार और शिक्षा देते हैं।भांजे से कोई गलती हो जाए, तो भी उसे डांटा नहीं जाता। मामा-मामी की मृत्यु के बाद दफनाते समय भांजे से मिट्टी दबवाई जाती है। विवाह संस्कार के बाद मामा-मामी भांजे से आशीर्वाद लेते हैं। वे कहते हैं —
हमें मिट्टी देकर कृतार्थ करना।

'राम-राम' से होता है अभिवादन

छत्तीसगढ़ में लोग एक-दूसरे को 'राम-राम' कहकर नमस्कार करते हैं। कहीं-कहीं पर लोग जय श्रीराम भी कहते हैं। भाइयों की जोड़ी को राम-लक्ष्मण कहा जाता है। पति-पत्नी की जोड़ी को राम-सीता का उदाहरण दिया जाता है। धान नापते समय किसान पहली गिनती 'राम' बोलकर करते हैं।

लोकजीवन में भी राम

छत्तीसगढ़ के गांव-गांव में राम मंदिर मिल जाते हैं। साल भर रामकथा और रामचरितमानस का पाठ होता है। जन्म हो या मृत्यु —
दोनों अवसरों पर रामकथा होती है। यहां की लोक परंपराओं में भी राम हैं। ददरिया में राम हैं। विवाह गीतों में राम हैं। कर्मा और सुआ गीतों में भी राम हैं।

नामों में भी राम की महिमा

छत्तीसगढ़ में लोग अपने बच्चों के नाम के आगे अथवा पीछे 'राम' जोड़ते हैं। जिससे उनके बच्चे राम की तरह ही संस्कारवान हों। जैसे- रामकुमार,रामलाल,रामदयाल, रामप्रसाद, रामगोपाल। इसी तरह कई लोग नाम के अंत में भी राम जोड़ते हैं। जैसे-जयराम, दयाराम, गंगाराम,राजाराम, आनंदराम।

राम को समर्पित रामनामी समुदाय

छत्तीसगढ़ में रामनामी संप्रदाय भी है। इस संप्रदाय के लोग अपने पूरे शरीर पर 'राम-राम' गोदना से लिखवाते हैं। वे जीवन भर राम की भक्ति करते हैं। राम के आदर्शों का प्रचार करते हैं। छत्तीसगढ़ में जीवन के हर पड़ाव पर राम हैं। जन्म पर राम नाम का संकीर्तन होता है। मृत्यु के बाद जब अर्थी श्मशान जाती है। अंतिम यात्रा में लोग कहते हैं —
"राम नाम सत्य है
सबकी यही गति है।"
यानी जन्म से मृत्यु तक
राम ही राम।

छत्तीसगढ़ में वनवास काल

भगवान श्रीराम ने अपने वनवास के 14 वर्षों में से लगभग 12 वर्ष दण्डकारण्य में बिताए। इसी दण्डकारण्य का बड़ा हिस्सा
आज का छत्तीसगढ़ है छत्तीसगढ़ के पौराणिक स्थल छत्तीसगढ़ में कई स्थान रामायण से जुड़े हैं। तुरतुरिया में
लव-कुश के जन्म की कथा मिलती है। राजिम में भगवान कुलेश्वर नाथ का मंदिर है। सरगुजा के रामगढ़ में सीताकुंड है। रामपुर, सीतापुर और जनकपुर भी राम कथा से जुड़े स्थान हैं।

छत्तीसगढ़ में राम सिर्फ मंदिरों में नहीं हैं। राम यहां के लोकजीवन में हैं। संस्कारों में हैं।परंपराओं में हैं। इसलिए कहा जाता है — छत्तीसगढ़ की संस्कृति में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम बसे हैं।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.