Media24Media.com: छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर सख्त कानून! साय कैबिनेट ने धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को दी मंजूरी

Responsive Ad Slot

Latest

latest


 

छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर सख्त कानून! साय कैबिनेट ने धर्म स्वातंत्र्य विधेयक को दी मंजूरी

Document Thumbnail

 रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार ने धर्मांतरण को लेकर बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में Chhattisgarh Dharma Swatantrya Bill, 2026 के मसौदे को मंजूरी दी गई। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य अवैध धर्मांतरण रोकना और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना है।


क्या है विधेयक में प्रावधान

* साय सरकार ने अवैध धर्मांतरण रोकने और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 का प्रारूप तैयार किया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इसके मसौदे को मंजूरी दी गई है।

* प्रस्तावित कानून के अनुसार बल, प्रलोभन, दबाव, मिथ्या जानकारी या कपटपूर्ण तरीके से धर्म परिवर्तन कराना प्रतिबंधित होगा। सरकार का कहना है कि धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया को पारदर्शी और कानूनी बनाया जाएगा।

* यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट या सक्षम प्राधिकारी को पूर्व सूचना देनी होगी। प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का प्रावधान होगा।

* विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, दुर्व्यपदेशन, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा।

* कानून में अवैध धर्मांतरण के मामलों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 वर्ष तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माना हो सकता है।

* यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा 10 से 20 वर्ष तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपये जुर्माना हो सकता है।

* सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और कठोर होगी, जिसमें 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान किया गया है।

* विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे तथा मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं बल्कि अवैध तरीकों से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.