Media24Media.com: दुर्घटनाओं को रोकने ब्लैक-स्पॉट्स की वैज्ञानिक तरीके से पहचान और समयबद्ध सुधारात्मक उपाय लागू करना प्रभावी रणनीति

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दुर्घटनाओं को रोकने ब्लैक-स्पॉट्स की वैज्ञानिक तरीके से पहचान और समयबद्ध सुधारात्मक उपाय लागू करना प्रभावी रणनीति

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रायपुर। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के रायपुर क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर को सुगम एवं सुरक्षित बनाने के लिए आज 'सड़क सुरक्षा प्रबंधन' विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में सड़क सुरक्षा से कोई जुड़े विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर विशेषज्ञों ने विस्तृत जानकारी दी।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी प्रदीप कुमार लाल ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर यात्रियों के लिए सुरक्षित और सुगम आवागमन सुनिश्चित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए रोड इंजीनियरिंग में सुधार, नियमों का कड़ाई से पालन और जन-जागरूकता का समन्वय अनिवार्य है। उन्होंने सभी संबंधित एजेंसियों को आपसी तालमेल के साथ कार्य करने पर जोर दिया। 

कार्यशाला के तकनीकी सत्र में सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ विक्रम तुशिर ने जंक्शन सुधार, ब्लैक-स्पॉट की पहचान, ट्रैफिक साइन, रोड मार्किंग और सेफ्टी ऑडिट जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि केवल बेहतर इंजीनियरिंग और सही साइनेज के माध्यम से ही सड़क दुर्घटनाओं को 80 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। ब्लैक-स्पॉट्स की वैज्ञानिक तरीके से पहचान करना और वहां समयबद्ध सुधारात्मक उपाय लागू करना सबसे प्रभावी रणनीति है। उन्होंने बताया कि सड़क डिजाइन में छोटे-छोटे तकनीकी सुधार भी बड़े हादसों को रोकने में सक्षम हैं, जिससे राजमार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था को नया आयाम दिया जा सकता है।

कार्यशाला में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के ईई रणबीर यादव विशेष रूप से उपस्थित थे। एनएचएआई की विभिन्न परियोजना कार्यान्वयन इकाईयों के परियोजना निदेशक सर्वश्री डीडी पार्लावर (कोरबा), मुकेश कुमार (बिलासपुर), शमशेर सिंह (अभनपुर) और दिग्विजय सिंह (रायपुर) सहित अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी भी कार्यशाला में मौजूद थे।

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