Media24Media.com: राजिम छत्तीसगढ़ की आस्था का प्रतीक - राज्यपाल डेका

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राजिम छत्तीसगढ़ की आस्था का प्रतीक - राज्यपाल डेका

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 राजिम। त्रिवेणी संगम राजिम के पावन तट पर नवीन मेला मैदान राजिम में आयोजित राजिम कुंभ कल्प मेला के शुभारंभ अवसर पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। शुभारंभ अवसर पर राज्यपाल  डेका, पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल सहित अतिथियों एवं संत-महात्माओं ने भगवान  राजीव लोचन की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।


शुभारंभ अवसर पर अपने उद्बोधन में राज्यपाल  रमेन डेका ने कहा कि राजिम की यह पावन भूमि, जहां महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों का संगम होता है, अत्यंत पुण्य और ऐतिहासिक महत्व रखती है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र स्थल पर आयोजित मेला, जिसे श्रद्धालु ‘कल्प कुंभ’ के नाम से जानते हैं, हमारी समृद्ध सांस्कृतिक एवं धार्मिक धरोहर का प्रतीक है।


महामहिम राज्यपाल ने कहा कि राजिम कुंभ कल्प के अवसर पर आप सभी के बीच उपस्थित होकर मुझे अत्यंत प्रसन्नता और गौरव का अनुभव हो रहा है। मुझे छत्तीसगढ़ की पवित्र नगरी राजिम के कुंभ मेला में आकर अत्यंत शांति महसूस होती है। धर्म, आस्था और संस्कृति के इस संगम राजिम कुंभ मेले में देश के विभिन्न प्रांतों से आए साधु-संतों, श्रद्धालुजनों का मैं हार्दिक अभिनंदन करता हूं। मैं कुलेश्वर महादेव तथा राजीव लोचन भगवान, राजिम भक्ति माता से प्रार्थना करता हूं कि हमारे देश और प्रदेश पर अपना आशीर्वाद बनाये रखें जिससे यहां हमेशा सुख-शांति और खुशहाली कायम रहे।

राजिम छत्तीसगढ़ की आस्था का प्रतीक

राज्यपाल ने आगे कहा कि राजिम माघी पुन्नी मेला छत्तीसगढ़ की आस्था का प्रतीक है। यह एक ऐसा पावन आयोजन है जिसमें छत्तीसगढ़ के लोगों के साथ-साथ देश भर के विभिन्न भागों से भी श्रद्धालुओं का आगमन होता है। राजिम प्राचीन समय से ही शैव और वैष्णव धर्म के केंद्र के रूप में विख्यात एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यहां राजीवलोचन मंदिर में भगवान विष्णु चतुर्भुज स्वरूप में विराजमान है। यहां भगवान शिव कुलेश्वर महादेव के रूप में विराजमान हैं।

पंचकोशी यात्रा विश्व प्रसिद्ध

राज्यपाल श्री डेका ने कहा कि कुलेश्वरनाथ महादेव, पटेश्वर नाथ महादेव, चंपेश्वर नाथ महादेव, ब्रम्ह्केश्वर नाथ, फनीकेश्वर नाथ महादेव, करपूरेश्वर महादेव की पंचकोशी यात्रा विश्व प्रसिद्ध है। प्राचीन मंदिरों की बहुलता राजिम को पुरातात्विक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता प्रदान करती हैं। इन मंदिरों में मूर्ति कला के गौरवशाली इतिहास के दर्शन होते हैं।

शास्त्रों में माघ के माह पुण्य माह माना गया है। माघ माह के इस पावन अवधि में सदियों से ही पवित्र नदियों एवं त्रिवेणी संगमों में पुण्य स्नान की परंपरा रही है। इस माह छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों में मेले का आयोजन की प्राचीन परंपरा रही है। मेलों का विशेष सामाजिक और सामुदायिक महत्व हैै। इनमें विभिन्न संस्कृतियों का मिलन होता है। इनके माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से परिचित होने का अवसर मिलता है।

आज यहां राजिम मेेले में पधारे समस्त संतों, विद्वानों और धर्मगुरूआंें को प्रणाम करता हूं। भारत साधु संतों की भूमि रही है। कहा जाता है जब किसी स्थान पर साधु संतों के चरण पड़ते हैं तो वह स्थान पवित्र हो जाता है। संतों के दिखाये मार्ग पर चलने से ज्ञान की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है। जहां संतों का सम्मान होता है वहां समृद्धि, शांति और खुशहाली रहती है। उनका जीवन सदैव परोपकार के लिए समर्पित रहता है। संतों का समागम से हम एक बेहतर मनुष्य बनते है।

राजिम कुंभ मेला जैसे अद्भुत आयोजनों से पर्यटकों को भी विशेष आनंद आता हैं। मेले में कलाकारों का संगम, श्रद्धालुओं की अनगिनत आस्था और संतों के आशीर्वाद से राजिम मेले ने देश में अपनी विशेष पहचान बनाई है। आधुनिक युग में हमे अपनी कला, साहित्य और संस्कृति को आरक्षित और उन्नत करने की आवश्यकता है। हमंे इस प्रकार के कला, संस्कृति और धार्मिक आयोजनों के लिए अपने प्रयासों को बढ़ाने की आवश्यकता है, जिससे छत्तीसगढ़ पर्यटन मानचित्र में और उभर कर सामने आ सके।

मुझे यह देखकर विशेष प्रसन्नता हो रही है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इस कुंभ को स्वच्छता, सुरक्षा और आधुनिक सुविधाओं के साथ भव्य रूप में आयोजित किया जाता है। यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक चेतना को जागृत करेगा, बल्कि पर्यटन, लोक संस्कृति और को भी नई दिशा देगा।

हमारे पूर्वजों ने नदियों, सरोवरों और वृक्षों की महत्ता और उनके संरक्षण पर विशेष बल दिया। आज आवश्यकता है कि हम अपने पूर्वजों द्वारा दिखाए राह पर चलें और अपने प्राकृतिक वातावरण को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाए रखें, नए पौधों का रोपण करें और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें। माइक्रो प्लास्टिक के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूक बनें तथा इसकी रोकथाम के उपाय करें।
मैं इस पवित्र मेले में पधारे सभी साधु-संतों, धार्मिक गुरूओं का पुनः स्वागत करता हूं और कामना करता हूं कि राजिम कुंभ कल्प 2026 का आयोजन छत्तीसगढ़ को आध्यात्मिक मानचित्र पर और अधिक सशक्त रूप से स्थापित करें।

राजिम कुंभ ने बनाई विश्व स्तर पर पहचान

संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने भगवान श्री राजीवलोचन एवं कुलेश्वर महादेव को श्रद्धापूर्वक प्रणाम किया और कहा कि राजिम कुंभ कल्प पर्व हमारी सांस्कृतिक उत्सव परंपरा और लोक संस्कृति का जीवंत उत्सव है, जो समाज के मूल्यों को और अधिक प्रगाढ़ बनाता है।

मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराएं आज विश्व स्तर पर अपनी पहचान बना रही हैं। अपने स्थानीय परंपरा का सम्मान करना अत्यंत जरूरी है। आप सबके सहयोग से कुंभ कल्प पर्व सफल होगा।

राजिम कुंभ आस्था, विश्वास और सनातन संस्कृति का प्रतीक

आयुक्त महादेव कावरे ने स्वागत भाषण में कहा कि त्रिवेणी संगम केवल नदियों की धाराओं का संगम नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और सनातन संस्कृति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राजिम कुंभ कल्प मेला मात्र एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह सामाजिक समरसता, एकता का संदेश देता है।

संत राजीव लोचन महाराज ने कहा कि वर्ष 2006 से छत्तीसगढ़ के प्रयाग के रूप में पहचान बना चुके राजिम कुंभ कल्प मेला की यह पावन श्रृंखला वर्ष 2026 में पहुंची चुकी है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आयोजित राजिम कुंभ कल्प मेला आज पूरे देश को जोड़ने का कार्य कर रहा है और यह आयोजन भव्यता एवं दिव्यता के साथ निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है।

पं. युवराज पांडेय ने कहा कि कुंभ पर्व नासिक, हरिद्वार, प्रयागराज एवं उज्जैन जैसे पावन तीर्थों पर आयोजित होता है। राजिम कुंभ कल्प आज सम्पूर्ण भारतवर्ष में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। महानदी त्रिवेणी संगम के पावन तट पर आयोजित यह कुंभ कल्प मेला छत्तीसगढ़ की पहचान बन गया है।

इस अवसर पर राज्य गृह भंडार निगम के अध्यक्ष चंदूलाल साहू, जिला पंचायत अध्यक्ष गौरीशंकर कश्यप, नगर पालिका राजिम अध्यक्ष महेश यादव, नगर पालिका गोबरा नवापारा की अध्यक्षा ओमकुमारी साहू, गरियाबंद कलेक्टर भगवान सिंह उईके, जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर सहित साधु-संत, जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ रही।

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