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इंफ्रास्ट्रक्चर सुपर बूस्ट: नई लाइनों, हाईवे, सुरंग और मेट्रो विस्तार को हरी झंडी

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 केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रशासन, अवसंरचना, नगरीय विकास, नवाचार और संपर्क के मोर्चे पर कई दूरगामी फैसलों को मंजूरी दी है। इन निर्णयों का स्पष्ट संदेश है कि शासन की कार्यशैली को सेवा-भाव से जोड़ते हुए देश को तेज विकास पथ पर आगे बढ़ाया जाए।


सबसे प्रतीकात्मक निर्णय है ऐतिहासिक नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से सरकारी कार्यालयों का नए परिसरों—सेवातीर्थ और कर्तव्य भवन—में स्थानांतरण। करीब एक सदी से सत्ता संचालन के केंद्र रहे ये भवन अब “युगे-युगीन भारत” राष्ट्रीय संग्रहालय का हिस्सा बनेंगे। सरकार का कहना है कि औपनिवेशिक काल के इन भवनों को विरासत के रूप में संरक्षित रखते हुए प्रशासन को आधुनिक, तकनीक-समर्थ और पर्यावरण-अनुकूल परिसरों में ले जाना समय की मांग है। इससे कार्यकुशलता बढ़ेगी, डिजिटल शासन को गति मिलेगी और कर्मचारियों को बेहतर कार्य-परिवेश मिलेगा। संग्रहालय के रूप में विकसित होने पर ये परिसर भारत की सभ्यता, स्वतंत्रता संघर्ष और लोकतांत्रिक विकास की कहानी आने वाली पीढ़ियों को बताएंगे।

रेल क्षेत्र: 18,509 करोड़ की मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाएं

रेलवे में तीन बड़ी मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी मिली है—कसारा-मनमाड, दिल्ली-अंबाला और बल्लारी-होसापेट खंड। करीब 389 किमी अतिरिक्त नेटवर्क तैयार होगा और निर्माण के दौरान 265 लाख मानव-दिवस का रोजगार सृजित होगा। अतिरिक्त लाइनों से यात्री और मालगाड़ियों की आवाजाही सुगम होगी, समयपालन सुधरेगा और रसद लागत घटेगी। कोयला, इस्पात, अनाज और उर्वरक की ढुलाई तेज होने से उद्योग और कृषि दोनों को लाभ मिलेगा।

 सड़क अवसंरचना: कई राज्यों में मेगा प्रोजेक्ट

महाराष्ट्र में घोटी-त्र्यंबक-मोखाडा-जव्हार-मनोर-पालघर मार्ग (154 किमी+) के उन्नयन पर 3,320 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इससे औद्योगिक क्षेत्रों को द्रुतमार्गों और तटीय पट्टी से बेहतर संपर्क मिलेगा तथा आदिवासी क्षेत्रों में विकास को गति मिलेगी।

गुजरात में राष्ट्रीय राजमार्ग-56 के दो खंडों को चार लेन बनाने के लिए 4,583 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं, जिससे आदिवासी जिलों की पहुंच बढ़ेगी और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जैसे पर्यटन केंद्र तक आवागमन आसान होगा।

तेलंगाना में हैदराबाद-पणजी आर्थिक गलियारे पर राष्ट्रीय राजमार्ग-167 को चार लेन बनाने के लिए 3,175 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है, जिससे यातायात दबाव घटेगा और माल ढुलाई तेज होगी।

 ब्रह्मपुत्र के नीचे देश की पहली सड़क-रेल सुरंग

असम में ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे 33.7 किमी लंबी सड़क-सह-रेल सुरंग को स्वीकृति मिली है, जिसकी लागत 18,662 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह गोहपुर और नुमालीगढ़ को जोड़ेगी। पूर्वोत्तर के लिए यह परियोजना रणनीतिक और आर्थिक दोनों दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

 नोएडा मेट्रो विस्तार

दिल्ली-एनसीआर में नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की सेक्टर-142 से बोटैनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन तक 11.56 किमी विस्तार को मंजूरी मिली है। आठ नए स्टेशन बनेंगे और नोएडा-ग्रेटर नोएडा का सक्रिय मेट्रो नेटवर्क 61 किमी से अधिक हो जाएगा। इससे आईटी पार्क, शिक्षण संस्थान, अस्पताल और व्यावसायिक केंद्र सीधे जुड़ेंगे तथा जाम और प्रदूषण में कमी आएगी।

 स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा

स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 के लिए 10,000 करोड़ रुपये के कोष को मंजूरी दी गई है। इससे विशेष रूप से डीप-टेक और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में निवेश बढ़ेगा, शुरुआती चरण के उद्यमियों को सहायता मिलेगी और बड़े शहरों से बाहर भी स्टार्टअप पारिस्थितिकी मजबूत होगी।

 1 लाख करोड़ का नगरीय चुनौती कोष

नगरीय विकास के लिए 1 लाख करोड़ रुपये के “अर्बन चैलेंज फंड” की घोषणा भी अहम है। यह मॉडल नगर निकायों को बाजार से संसाधन जुटाने, सुधार लागू करने और परिणाम-आधारित परियोजनाओं पर जोर देने के लिए प्रोत्साहित करेगा। पानी, स्वच्छता, पुनर्विकास और जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। छोटे शहरों को पहली बार बाजार से ऋण लेने में मदद हेतु गारंटी व्यवस्था भी होगी।

 समग्र संकेत: ढांचा और सोच दोनों में बदला

इन फैसलों से स्पष्ट है कि विकास का अगला चरण केवल खर्च बढ़ाने से नहीं, बल्कि शासन की संरचना और कार्य-दृष्टि बदलने से आएगा। नए प्रशासनिक परिसरों की ओर कदम “सत्ता से सेवा” की अवधारणा को मजबूत करता है, जबकि रेल, सड़क और मेट्रो परियोजनाएं आधुनिक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा—संपर्क—को सुदृढ़ करती हैं। स्टार्टअप और शहरी कोष यह संकेत देते हैं कि सरकार निजी पूंजी और स्थानीय निकायों को विकास का साझेदार बनाना चाहती है।

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