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प्रेस क्लब में राजेश शर्मा को भावभीनी शब्दांजलि और स्वरांजलि

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 महासमुंद । प्रेस क्लब महासमुंद में वरिष्ठ पत्रकार और प्रेस क्लब के भूतपूर्व अध्यक्ष राजेश शर्मा को श्रद्धासुमन अर्पित किया गया। यह आयोजन भावुक करने वाला और ऐतिहासिक रहा। प्रेस क्लब में पहली बार शब्दांजलि के साथ स्वरांजलि भी गूंजी। अंत में दो मिनट का मौन रखकर शोक सभा संपन्न हुई। उल्लेखनीय है कि राजेश शर्मा (82) का 6 फरवरी की सुबह एम्स रायपुर में निधन हो गया। मुक्तिधाम महासमुंद में उनका अंतिम संस्कार किया गया। 7 फरवरी को प्रेस क्लब में शोक सभा आयोजित हुई।


प्रेस क्लब अध्यक्ष रत्नेश सोनी ने शब्दांजलि की शुरुआत की। उन्होंने श्री शर्मा से अपने आत्मीय संबंधों का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि कुछ नीतिगत मामलों में मतभेद के बावजूद उनका स्वभाव स्नेहिल था। वे रिश्तों को जीवन भर निभाते रहे। उनका जाना अपूरणीय क्षति है। वे पत्रकारिता के वटवृक्ष थे। उनकी कलम में सरस्वती का वास था। वे विचारों में हमेशा जीवित रहेंगे।



भूतपूर्व अध्यक्ष आनंदराम पत्रकारश्री ने कहा कि कर्मयोगी कलमकार से बिछुड़ना अत्यंत पीड़ादायक है। उन्होंने श्री शर्मा की अंतिम पंक्तियां याद कीं—
“कौन कहता है कि जाऊंगा, तो गुजर जाऊंगा।
मैं तो खुशबू हूं, हवाओं में बिखर जाऊंगा।”
उन्होंने कहा कि उनकी जीवटता और कर्मठता हम सबके लिए प्रेरणा है। उन्होंने समाज के कमजोर वर्ग के लिए लिखा।
उनके दिखाए जनसेवा के मार्ग पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने ‘राष्ट्रीय अभियोजक’ को मिलकर आगे बढ़ाने का आग्रह किया।

भूतपूर्व अध्यक्ष बाबूलाल साहू ने संघर्ष के दिनों को याद किया।
उन्होंने कहा कि कोरियर सेवा से लेकर किराए के एक कमरे में पत्रकारिता की 21 वर्षों की यात्रा अद्भुत है। यह उनकी कलम साधना और समर्पण का प्रमाण है। कोविड काल में भी अखबार निर्बाध निकला। बीमारी में भी उन्होंने संपादन किया। अस्पताल में भर्ती होने तक वे अखबार निकालते रहे।

पूर्व अध्यक्ष श्रीमती उत्तरा विदानी ने भावुक शब्दों में श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि राजेश काका ने उन्हें सबसे बड़ी बेटी जैसा स्नेह दिया। उनके जाने से पिता का साया उठने का अहसास हो रहा है। वे पढ़ने के शौकीन थे। उनकी एक पुस्तक उन्होंने धरोहर के रूप में सहेज कर रखी है। प्रेस क्लब के भूतपूर्व अध्यक्ष व संरक्षक सदस्य श्रीरामकुमार तिवारी ‘सुमन’ ने कहा कि 26 वर्षों का साथ अविस्मरणीय है।
उन्होंने एक सच्चा मित्र खो दिया है। उनकी पत्रकारिता और प्रेस क्लब को लेकर चिंताएं हमेशा याद आएंगी। मन कहता है कि वे आज भी हमारे आसपास हैं।

वरिष्ठ पत्रकार के. पी. साहू ने कहा कि उनका मार्गदर्शन अमूल्य था। हर खबर पर उनकी पैनी नजर काबिले तारीफ थी।
किसी को विश्वास नहीं हो रहा कि वे इस बार मौत से जंग हार गए।

विक्रम साहू, राकेश झाबक, विजय चौहान, अनिल चौधरी, संजय यादव, प्रज्ञा चौहान सहित अनेक पत्रकारों ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
युवा पत्रकार व कलाकार अमित हिषीकर ने भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया—
“चोला माटी के हे राम, एकर का भरोसा…” गा कर स्वरांजलि दी। इससे पूरा सभागार भाव-विभोर हो उठा।
इस तरह शब्दांजलि, स्वरांजलि और दो मिनट के मौन के साथ शोक सभा संपन्न हुई।

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