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मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना: पालघर, महाराष्ट्र में दूसरी पर्वतीय सुरंग का ब्रेकथ्रू

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केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत महाराष्ट्र के पालघर में दूसरी पर्वतीय सुरंग (Mountain Tunnel) के ब्रेकथ्रू की महत्वपूर्ण उपलब्धि की घोषणा की।

यह सुरंग MT-6 कुल 454 मीटर लंबी और 14.4 मीटर चौड़ी है, जिसमें दोनों दिशाओं के ट्रैक (अप और डाउन) बनाए जाएंगे। यह पालघर जिले में पिछले एक महीने में दूसरी पर्वतीय सुरंग का ब्रेकथ्रू है, पहली MT-5 सफ़पले के पास 2 जनवरी 2026 को प्राप्त हुआ था।

इस सुरंग का उत्खनन New Austrian Tunnelling Method (NATM) द्वारा दोनों सिरों से किया गया। NATM एक अत्याधुनिक ड्रिल और नियंत्रित विस्फोट विधि है। सुरंग का उत्खनन 12 महीनों में पूरा किया गया। पर्वतीय सुरंग का ब्रेकथ्रू तब मानी जाती है जब सुरंग के विपरीत सिरों से उत्खनन कर रहे दल अंततः बीच में मिलते हैं, जिससे पहाड़ के भीतर सतत मार्ग बन जाता है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उच्च गति रेल टीम को उनके अद्वितीय प्रगति के लिए बधाई दी और कहा कि जिस गति से टीम काम कर रही है, उसने देश में नई उम्मीद और विश्वास पैदा किया है। उन्होंने कहा कि परियोजना में प्रयुक्त कई उन्नत निर्माण तकनीक और बड़ी मशीनें भारत में निर्मित की जा रही हैं।

मंत्री ने बताया कि बुलेट ट्रेन परियोजना का गुजरात सेक्शन अगले साल व्यावसायिक संचालन शुरू करने की संभावना है, जबकि हाई-स्पीड रेल संचालन 2028 तक ठाणे और 2029 तक मुंबई तक पहुंचने की उम्मीद है।

इस अवसर पर लोकसभा सदस्य डॉ. हेमंत विष्णु सवारा (पालघर निर्वाचन क्षेत्र) भी उपस्थित थे। उन्होंने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का धन्यवाद किया और जिले में उच्च गति रेल कॉरिडोर, समर्पित माल ढुलाई कॉरिडोर (DFC) और आगामी वाधवन पोर्ट जैसे प्रमुख रेलवे परियोजनाओं के माध्यम से विकास को उजागर किया। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद महाराष्ट्र में रेलवे निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे परियोजनाओं की तेजी से पूर्णता और बेहतर सेवाएँ सुनिश्चित हुई हैं।

NATM विधि जटिल भौगोलिक परिस्थितियों और असमान सुरंग आकार के लिए अनुकूल है, जहाँ पारंपरिक सुरंग खोदने वाली मशीनें (TBM) उपयुक्त नहीं होतीं। इस प्रक्रिया में बहुत भारी मशीनरी की आवश्यकता नहीं होती और यह रीयल-टाइम अनुकूलन की अनुमति देती है, जैसे कि शॉटक्रीटिंग, रॉक बोल्ट और लैटिस गार्डर का उपयोग।

सुरंग के भीतर श्रमिकों की सुरक्षा भू-तकनीकी उपकरणों, रीयल-टाइम मॉनिटरिंग, प्रभावी अग्नि सुरक्षा, उचित वेंटिलेशन और नियंत्रित प्रवेश व्यवस्था के माध्यम से सुनिश्चित की गई।

महाराष्ट्र में निर्माण कार्य कई मोर्चों पर तेजी से प्रगति कर रहा है। वैतरना नदी पर परियोजना का सबसे लंबा पुल पियर स्तर तक पहुँच चुका है, जबकि उल्हास और जगनी जैसी अन्य प्रमुख नदियों पर नींव कार्य जारी है। सभी चार स्टेशनों, राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों के बड़े क्रॉसिंग, लंबे स्पैन वाले स्टील ब्रिज और बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स से शिलफाटा तक 21 किमी लंबी सुरंग पर काम तेजी से चल रहा है। पालघर जिले में कुल 7 पर्वतीय सुरंगों का निर्माण कार्य प्रगति पर है।

सर्वेक्षण तालिका – पालघर पर्वतीय सुरंगें (Palghar Mountain Tunnels – MAHSR Project)

  • Sr. No.
  • Mountain Tunnel no.
  • Length (km)
  • % Completion
  • Remarks
  • 1
  • MT-1
  • 0.820
  • 16%
  • 2
  • MT-2
  • 0.228
  • तैयारी कार्य प्रगति में
  • 3
  • MT-3
  • 1.403
  • 41%
  • 4
  • MT-4
  • 1.260
  • 32%
  • 5
  • MT-5
  • 1.480
  • 57%
  • ब्रेकथ्रू 02 जनवरी 2026
  • 6
  • MT-6
  • 0.454
  • 47%
  • ब्रेकथ्रू आज प्राप्त
  • 7
  • MT-7
  • 0.417
  • 29%

MAHSR परियोजना लगभग 508 किलोमीटर लंबी है, जिसमें 352 किमी गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली, और 156 किमी महाराष्ट्र में फैली हुई है। यह परियोजना आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित, ज्ञान हस्तांतरण को बढ़ावा और नए औद्योगिक व आईटी हब के विकास में योगदान करेगी। इस कॉरिडोर से प्रमुख शहर जैसे सबरमती, अहमदाबाद, आनंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी, बोईसर, विरार, ठाणे और मुंबई जुड़ेंगे, जो भारत के परिवहन बुनियादी ढांचे में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन दर्शाता है।

27 जनवरी 2026 तक, लगभग 334 किमी वायडकट, 17 नदी पुल और 12 प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग/रेलवे क्रॉसिंग पूरे हो चुके हैं। गुजरात सेक्शन में ट्रैक बिछाने और विद्युतकरण का काम तेजी से जारी है।


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