Media24Media.com: कोल और लिग्नाइट खदानों के संचालन की अनुमति प्रक्रिया में सुधार: CCO से पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता समाप्त

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कोल और लिग्नाइट खदानों के संचालन की अनुमति प्रक्रिया में सुधार: CCO से पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता समाप्त

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कोल क्षेत्र को और अधिक व्यवसाय-मित्रवत बनाने तथा ‘ईज ऑफ डुइंग बिजनेस’ को बढ़ाने के लिए सरकार ने कोल और लिग्नाइट खदानें खोलने की स्वीकृति संबंधी प्रावधानों में संशोधन किया है। यह संशोधन कोलियरी कंट्रोल नियम, 2004 में किया गया है। इसके तहत प्रक्रियात्मक जटिलताओं को हटाकर खदानों के तेजी से संचालन की अनुमति दी गई है, जबकि नियामक निगरानी बनी रहती है।

पूर्व में नियम (9) के तहत किसी कोल/लिग्नाइट खदान के मालिक को खदान खोलने या किसी खदान की अलग-अलग सीम/सेक्शन खोलने के लिए कोल कंट्रोलर ऑर्गनाइजेशन (CCO) से पूर्व अनुमति प्राप्त करनी होती थी। यदि कोई खदान 180 दिनों या उससे अधिक समय तक संचालन में नहीं थी, तो उसे भी अनुमति प्राप्त करनी पड़ती थी।

प्रक्रियात्मक जटिलताओं को समाप्त करने, कोयला उत्पादन को बढ़ाने और स्वीकृति प्रक्रिया में दक्षता लाने के लिए अब CCO से पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता समाप्त कर दी गई है। इस संशोधन की अधिसूचना 23.12.2025 को जारी की गई। संशोधित नियमों की पूरी जानकारी यहां देखी जा सकती है। https://coal.nic.in/sites/default/files/2025-12/26-12-2025a-wn.pdf

संशोधित प्रावधानों के तहत अब खदान/सीम खोलने की स्वीकृति की शक्ति संबंधित कोल कंपनी के बोर्ड को सौंपी गई है। यह सुधार स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाते हुए कंपनी के उच्चतम निर्णय लेने वाले प्राधिकरण के जिम्मेदारी को सुनिश्चित करता है। अनुमान है कि इस सुधार से खदान संचालन की प्रक्रिया में लगभग 2 महीने की बचत होगी।

सुरक्षा के रूप में प्रावधान किया गया है कि:

  1. संबंधित कंपनी का बोर्ड खदान/सीम खोलने की अनुमति तब ही देगा जब केंद्रीय/राज्य सरकार और वैधानिक निकायों से आवश्यक अनुमतियाँ प्राप्त हो जाएँ।

  2. कंपनी को खदान खोलने की जानकारी CCO को प्रस्तुत करनी होगी।

  3. कंपनियों के अलावा अन्य संस्थाओं के लिए अनुमति प्रक्रिया पहले की तरह CCO के माध्यम से होगी।

यह सुधार एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाता है—जहाँ संचालन संबंधी निर्णय बोर्डों को सौंपे गए हैं, वहीं नियामक निगरानी और वैधानिक सुरक्षा बनाए रखी गई है। अनुमोदन समय में कमी, उच्चतम कॉर्पोरेट स्तर पर जिम्मेदारी और कुशल संचालन के माध्यम से यह संशोधन कोयला उत्पादन को बढ़ाने और भारत के कोयला नियामक ढांचे में विश्वास बढ़ाने में सहायक होगा।

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