Media24Media.com: स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पूर्व-प्राथमिक विद्यालयों हेतु दिशा-निर्देश जारी

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स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा पूर्व-प्राथमिक विद्यालयों हेतु दिशा-निर्देश जारी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन, स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा राज्य में संचालित सभी गैर-अनुदान प्राप्त अशासकीय पूर्व-प्राथमिक विद्यालयों के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यह निर्देश माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर में लंबित पीआईएल तथा अन्य याचिकाओं में दिए गए आदेशों के अनुपालन तथा प्रस्तावित प्ले स्कूल एक्ट की रूपरेखा के तहत तैयार किए गए हैं। 


विभाग ने स्पष्ट किया है कि राज्य में संचालित सभी पूर्व-प्राथमिक विद्यालय, जो कक्षा एक से ऊपर की कक्षाएँ संचालित नहीं करते, उन्हें अपने संस्थान का पंजीयन तीन माह के भीतर संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी के समक्ष अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होगा। 

पंजीयन के लिए आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे

पंजीयन प्रक्रिया में संस्थान को अपने नाम से संबंधित विवरण, शिक्षकों की शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यता तथा अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। विद्यालयों के संचालन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए पूर्व-प्राथमिक विद्यालयों को अनुसूची-एक में निर्धारित सभी मानकों का पालन करना होगा। 

तीन वर्ष से कम आयु के बच्चों का पूर्व-प्राथमिक विद्यालय में प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित

प्रवेश प्रक्रिया के संबंध में विभाग ने स्पष्ट किया है कि नर्सरी, केजी-1 और केजी-2 में प्रवेश हेतु आयु सीमा राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार ही मान्य होगी। तीन वर्ष से कम आयु के किसी भी बालक या बालिका का पूर्व-प्राथमिक विद्यालय में प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। प्रवेश के लिए आयु सत्यापन केवल शासन द्वारा समय-समय पर निर्धारित वैध दस्तावेजों के आधार पर किया जाएगा।

बच्चों को शारीरिक दंड देना पूर्णतः निषिद्ध

शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी बच्चे पर शारीरिक दंड देना या मानसिक उत्पीड़न करना पूर्णतः निषिद्ध होगा। विद्यालयों में बच्चों के लिए सुरक्षित, स्वच्छ, स्वास्थ्यकर एवं खेल-आधारित सीखने का वातावरण सुनिश्चित किया जाना आवश्यक होगा, जिससे बच्चों का समग्र विकास सुचारू रूप से हो सके।

पालक-शिक्षक समिति का गठन अनिवार्य

पूर्व-प्राथमिक विद्यालयों के पारदर्शी तथा प्रभावी संचालन हेतु पालक-शिक्षक समिति का गठन अनिवार्य किया गया है। विद्यालय प्रारंभ होने के एक माह के भीतर यह समिति गठित की जाएगी, जिसमें 75 प्रतिशत पालक और 25 प्रतिशत शिक्षक सदस्य होंगे। समिति के अध्यक्ष का चयन पालकों के मध्य से किया जाएगा तथा इसमें 75 प्रतिशत महिलाएँ शामिल होंगी। प्रत्येक कक्षा से एक-एक पालक सदस्य लिया जाएगा। 

बैठक प्रत्येक तीन माह में एक बार अनिवार्य होगा

समिति का कार्यकाल एक वर्ष का होगा और इसकी बैठक प्रत्येक तीन माह में अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएगी। बैठकों से संबंधित समस्त विवरण रजिस्टर में संधारित किया जाना आवश्यक होगा। समिति विद्यालय में बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और खेल-खेल में शिक्षा की व्यवस्था पर निगरानी रखेगी।

पंजीयन तीन माह के भीतर कराना होगा

राज्य शासन ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने जिले में संचालित सभी पूर्व-प्राथमिक विद्यालयों का पंजीयन आदेश जारी होने की तिथि से तीन माह के भीतर सुनिश्चित करें। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि विद्यालयों में निर्धारित मानकों और नियमों का पालन नियमित रूप से हो।

यह दिशा-निर्देश राज्य में पूर्व-प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को सुव्यवस्थित, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।



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