Responsive Ad Slot

Latest

latest


 

भारत की एयरोस्पेस उड़ान: सीएसआईआर–एनएएल में स्वदेशी विमान और हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म का शुभारंभ

Document Thumbnail

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि भारत का एयरोस्पेस और एविएशन पारिस्थितिकी तंत्र अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। यह परिवर्तन स्वदेशी तकनीक, उद्योग साझेदारी और पूरे सरकारी तंत्र के सामूहिक प्रयास से संभव हुआ है।

बेंगलुरु स्थित सीएसआईआर–नेशनल एयरोस्पेस लेबोरेटरीज़ (NAL) में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आज हासिल की गई उपलब्धियाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संकल्प — “हवाई चप्पल वाला भी हवाई जहाज में बैठेगा” — को साकार कर रही हैं और भारत को वैश्विक एविएशन हब एवं आत्मनिर्भर एयरोस्पेस निर्माण राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ा रही हैं।

हंसा-3(NG) ट्रेनर विमान का उत्पादन संस्करण लॉन्च

मंत्री ने स्वदेशी Hansa-3(NG) ट्रेनर एयरक्राफ्ट के उत्पादन संस्करण का शुभारंभ किया—
यह भारत का पहला ऑल-कॉम्पोज़िट एयरफ्रेम वाला दो-सीटर विमान है, जिसे PPL और CPL ट्रेनिंग की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए विकसित किया गया है।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष आयोजित ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी के कुछ महीनों के भीतर ही उद्योग साझेदार Pioneer Clean Amps ने न केवल उत्पादन की तैयारी शुरू कर दी है बल्कि आंध्र प्रदेश के कुप्पम में ₹150 करोड़ की सुविधा स्थापित कर रहा है, जहाँ हर साल 100 विमान तक बनाए जाएंगे।

डॉ. सिंह ने कहा कि भारत को अगल 15–20 वर्षों में लगभग 30,000 पायलटों की आवश्यकता होगी और Hansa-3(NG) स्वदेशी ट्रेनिंग प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराकर इस जरूरत को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम है।

भारत शीर्ष 3 एविएशन बाजार बनने की दिशा में

उन्होंने कहा कि मजबूत मध्यम वर्ग और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के चलते भारत घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्री यातायात में जल्द ही शीर्ष तीन देशों में शामिल होने की राह पर है।

प्रधानमंत्री की पहल उड़ान (UDAN) योजना ने हवाई यात्रा को जन-जन तक पहुंचाया है और सस्ती एवं क्षेत्रीय हवाई सेवाओं का विस्तार रिकॉर्ड गति से बढ़ा है।

इस बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए CSIR-NAL SARAS Mk-2—19-सीटर लाइट ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट—का विकास कर रहा है, जो सिविल और मिलिट्री दोनों उपयोगों के लिए सक्षम होगा। इसमें डिजिटल एवियोनिक्स, ग्लास कॉकपिट, ऑटोपायलट और कम वजन का डिजाइन शामिल है।

SARAS Mk-2 के लिए Iron Bird Facility का उद्घाटन

मंत्री ने Iron Bird Facility का उद्घाटन किया। यह विमान के सभी प्रमुख सबसिस्टम के इंटीग्रेशन, ग्राउंड टेस्टिंग और वैलिडेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे उड़ान परीक्षण के जोखिम कम होंगे और विकास प्रक्रिया तेज होगी।

हाई–एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म (HAPs) के लिए नई उत्पादन इकाई

उन्होंने HAPs Manufacturing Facility का भी उद्घाटन किया।
भारत अब उन चुनिंदा देशों में शामिल हो रहा है जो सौर ऊर्जा संचालित, 20 किमी से अधिक ऊँचाई पर उड़ने वाले, लंबी अवधि तक उड़ान भरने वाले मानवरहित विमान विकसित कर रहे हैं।

NAL के सबस्केल वाहन ने पहले ही 7.5 किमी ऊँचाई और 10 घंटे से अधिक उड़ान का रिकॉर्ड बनाया है। पूर्ण-स्केल उड़ान का लक्ष्य 2027 है।

HAPs उपग्रहों का कम-लागत विकल्प प्रदान करते हैं और निगरानी, संचार और पर्यावरणीय मॉनिटरिंग में उपयोगी होंगे।

NAviMet सिस्टम और रक्षा सहयोग

HAL एयरपोर्ट पर NAviMet सिस्टम का उद्घाटन करते हुए मंत्री ने कहा कि DRISHTI, AWOS और NAviMet जैसे सिस्टम भारत के नागरिक और रक्षा हवाई अड्डों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण हैं। ऐसे 175 से अधिक सिस्टम पहले ही कार्यरत हैं।

उन्होंने CSIR-NAL और Solar Defence & Aerospace Ltd. के बीच 150 किलोग्राम श्रेणी के Loitering Munition UAV के विकास समझौते का भी अवलोकन किया।
NAL द्वारा विकसित वांकेल इंजन से संचालित यह UAV 900 किमी की रेंज, 6–9 घंटे की एंड्यूरंस और AI आधारित लक्ष्य पहचान क्षमताओं से लैस होगा।

प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ दृष्टिकोण का साकार रूप

डॉ. सिंह ने कहा कि CSIR-NAL ने दिखाया है कि कैसे सरकारी संस्थान और निजी उद्योग मिलकर स्वदेशी उत्पादों को व्यावहारिक, प्रतिस्पर्धी और वैश्विक स्तर पर योग्य बना सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि संस्थान निवेशकों, स्टार्टअप्स और आम जनता से जुड़ाव और बढ़ाए ताकि भारत की वैज्ञानिक प्रगति की जानकारी व्यापक रूप से पहुंच सके।

भारत का 2035 तक वैश्विक एविएशन हब और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य

मंत्री ने कहा कि आज प्रदर्शित की गई उपलब्धियाँ—
• ट्रेनर एयरक्राफ्ट
• रीजनल पैसेंजर एयरक्राफ्ट
• हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म
• मानवरहित रक्षा प्रणालियाँ
• एविएशन मौसम प्रणाली

—ये सभी मिलकर भारत के 2035 तक वैश्विक एविएशन हब और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प का हिस्सा हैं।

उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में CSIR-NAL और बड़ी उपलब्धियाँ हासिल करेगा और उद्योग की भूमिका और गहरी होगी।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.