Media24Media.com: माँ शारदा को समर्पित अनवरत सृजन के लिए कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल सम्मानित

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माँ शारदा को समर्पित अनवरत सृजन के लिए कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल सम्मानित

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 रायपुर । साहित्य की साधना केवल शब्दों का खेल नहीं है, यह एक आँतरिक तपस्या है, जिसमें वाणी से लेकर विचार और भाव तक, सब कुछ ईश्वर को अर्पित हो जाता है। छत्तीसगढ़ की प्रख्यात कवयित्री श्रीमती सुषमा प्रेम पटेल इसी साधना की अनवरत यात्री रही हैं। अपनी सृजनशीलता को माँ शारदा की चरण-आराधना मानकर उन्होंने साहित्य को पूजा का रूप दिया है। उनके इस अद्वितीय संकल्प और सतत सृजनशीलता को सम्मानित करते हुए “वक्ता मंच रायपुर” ने उन्हें छत्तीसगढ़ महिला गौरव अवॉर्ड प्रदान किया।


निरंतर सृजन और श्रद्धाभाव

श्रीमती पटेल का यह साहित्यिक संकल्प अत्यंत अनूठा है। वे प्रतिदिन अपने मन की भावनाओं और विचारों को काव्य-पुष्प बनाकर माँ शारदा को अर्पित करती हैं। इसी अदम्य साधना से उपजा उनका संग्रह “सुषमा के स्नेहिल सृजन” साहित्यिक मंचों पर न केवल सराहा जाता है, बल्कि अन्य रचनाकारों के लिए भी प्रेरणा-स्रोत बनता है। इस भाव-समर्पण में जहाँ ईश्वरीय आस्था झलकती है, वहीं निरंतर लेखन की ऊर्जा और निष्ठा भी परिलक्षित होती है।

सम्मान का क्षण और कवयित्री की प्रतिक्रिया

जब “वक्ता मंच रायपुर” द्वारा उन्हें छत्तीसगढ़ महिला गौरव अवॉर्ड से सम्मानित किया गया, तो कवयित्री सुषमा प्रेम पटेल का हृदय उमंग और विनम्रता से भर उठा। सम्मान प्राप्ति के क्षणों को साझा करते हुए उन्होंने कहा—
“यह सम्मान मेरे लिए केवल गर्व का विषय नहीं है, बल्कि यह तो प्रेरणा का शाश्वत स्रोत है। माँ शारदा के आशीर्वाद से मेरी तूलिका अनवरत चलती रहे, यही मेरी कामना है। मैं समस्त साहित्य-प्रेमियों और अपने शुभचिंतकों की आभारी हूँ।”
उनके इस वक्तव्य ने वहाँ उपस्थित श्रोताओं को भावुक कर दिया और पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

साहित्य जगत की शुभेच्छाएँ

कार्यक्रम का आयोजन 6 सितंबर को राजधानी रायपुर स्थित सभागार वृन्दावन में बड़े उत्साह और गरिमा के साथ किया गया। इस अवसर पर साहित्य जगत के अनेक रचनाकार, विद्वान और शुभचिंतक उपस्थित थे, जिन्होंने कवयित्री को हार्दिक शुभकामनाएँ दीं। वातावरण में न केवल सम्मान की चमक थी, बल्कि साहित्यिक संस्कृति के प्रति गर्व का भाव भी झलक रहा था।

निरंतर उपलब्धियों का क्रम

श्रीमती पटेल की हाल की उपलब्धियाँ इस बात की पुष्टि करती हैं कि वे न केवल सतत लेखन कर रही हैं, बल्कि उनकी कृतियों का समाज पर गहरा प्रभाव भी पड़ रहा है। बीते अगस्त माह में ही उन्हें साहित्य सृजन संस्थान द्वारा प्रदत्त साहित्य सृजन काव्य रत्न सम्मान—2025 से अलंकृत किया गया। इसके अतिरिक्त, 7 सितंबर को रायपुर के वृन्दावन हॉल में वेंकटेश साहित्य मंच ने उन्हें उत्कृष्ट व्यंग्य रचना के लिए सम्मानित किया। यह निरंतर सम्मान पाना उनके लेखन की बहुआयामी शक्ति और मूल्यवान योगदान का प्रमाण है।

साहित्य की साधना का उदाहरण

आधुनिक साहित्यिक परिदृश्य में जहाँ सृजन अक्सर क्षणिक लोकप्रियता तक सीमित रह जाता है, वहाँ सुषमा प्रेम पटेल का रचनात्मक व्रत सच्चे समर्पण और सांस्कृतिक चेतना का उदाहरण है। उनके कार्यों में न केवल साहित्य की सुंदरता दिखाई देती है, बल्कि जीवन-दर्शन और सामाजिक संवेदनशीलता का गहन संदेश भी समाहित रहता है।

उन्हें प्राप्त हुआ यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह संपूर्ण साहित्यिक समाज के लिए भी गर्व और प्रेरणा का स्रोत है। सच कहा जाए तो कवयित्री पटेल आज की पीढ़ी के सामने इस भाव का साकार रूप हैं कि यदि शब्द आस्था के सहारे लिखे जाएँ तो वे केवल कविता नहीं, बल्कि पूज्य अर्पण बन जाते हैं।

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